भोजपुरी में पढ़ें: सुंदर पोपो से मनोज बाजपेयी तक वाया कंचन- बाबला आ रागा मेन्नो

मनोज बाजपेयी के नवका भोजपुरिया रैप गाना' बंबई में का बा...’ के धूम बा. भोजपुरी में ई ए एगो नवका सुरुआत मानल जा रहल बा. एह गीत के बहाने भोजपुरिया संगीत में रॉक- पॉप- रैप कल्चर के इतिहास-भूगोल आ स्टार परंपरा के पड़ताल करत आ भोजपुरी संगीत जगत में बॉलीवुड से जुड़ल भा नामी-गिरामी लोगन के जुड़ाव के इतिहास के पन्ना के पलटत एगो लेख...

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  • Last Updated: October 5, 2020, 12:06 PM IST
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नोज बाजपेयी के आवाज में भोजपुरी के रैप आईल. बंबई में का बा... अभिनय आ आवाज, दुनो मनोज बाजपेयी के. निर्माता-निर्देशक अनुभव सिन्हा एकरा के बनवले बानीं. एह रैप में सबसे जादा चरचा गीत के बोल के हो रहल बा. ई कमाल के गीत के लिखनिहार हवें जे जेएनयू में पढ़ल-लिखल आ बलिया के रहनिहार आ सधन गीतकार डॉ सागर. पिछलका एक पखवाड़ा से बेसी समय से ई रैप गीत धूम मचवले बा. ई गीत के कई गो वर्सन आ चुकल बा, एह गीत के तर्ज प गीत आवे के सिलसिला जारी बा. ई गीत बिहार में जन-जन ले पहुंच चुकल बा. बिहार में चुनावी माहौल बा, त राजनीतिक नारा लेखा भी बन चुकल बा ई गीत.

एतना चरचा होखे भा धूम मचे के वजह भी बा. कई दसक के बाद एह फ्रेम-फार्मेट में भोजपुरी के उसर पड़ल जमीन प पानी पड़ल बा. बीज बोवाईल बा. अनुभव सिन्हा, प्रकाश झा, अनुराग कश्यप जईसन निर्माता-निर्देसक भा मनोज बाजपेयी, पंकज त्रिपाठी जईसन अभिनेता, जे भोजपुरिया इलाका के रहेवाला लोग ह, उ लोग भी कुछ भोजपुरी में करो, एकर आस बहुत दिन से सजग भोजपुरिया लोग लगवले रहे. ई बिस्वास रहल बा कि अगर ई लोग भोजपुरी में कुछ करी त भोजपुरी ओह नवका पीढ़ी में भी आपन जगह बनाई, नवका पीढ़ी खातिर भी गर्व के बिसय बनी, जवन पीढ़ी देस-दुनिया के कोना में जा के आपन माईभासा से अपना के कनेक्ट करे में संकोच करेला.

उमेद इहो कइल जाला कि अगर अईसनका सधल-सफल निर्माता-निर्देसक भा अभिनेता लोग भोजपुरी में पहल करी त फेरू भोजपुरी खातिर एगो नवका रास्ता खुली. भोजपुरी सिनेमा आज ले मल्टीप्लेक्स में नईखे पहुंच पावल, ई लोग पहुंचा सकत बा. ​इलिट तबका फेरू से एह भासा से जुड़ सकत बा. एकरा में कवनो संदेह भी नइखे.



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खैर! ई त एगो बात बड़ले बा. हमनी के इहवां दोसर बिसय प बात कईल जाई. एकर दोसर पक्ष पर. ई काम सोझा आईल त कुछ लोग एकरा के एहू तरीका से बतावल भा बता रहल बा कि हिंदी जगत में सफल भा कवनो चर्चित नांव पहिलका बेर अपना माईभाषा मने भोजपुरी प नजरे इनायत कईले बा. आगे बात होखो,ओकरा पहिलहीं हमनी के एह बिसय प कुछ चीज साफ-साफ जान लेबे के चाहीं. ई बात सांच बा कि मनोज बाजपेयी भा अनुभव सिन्हा जईसन लोग भोजपुरी में कुछ करे के सुरू कईले बा, जे एगो लंबा अंतराल के बाद खुसी के अलगा तरीका से खुसी के भाव भर रहल बा. ई नया राह बनाई बाकि ई पहिलका बेर नईखे भइल कि कवनो बड़ आ स्थापित नांव भोजपुरी खातिर कुछ करे के पहल कईले बा.

भोजपुरी भा आपन माईभासा खातिर एक से बढ़ी के एक बड़—बड़ नांव वाला लोग आपन समर्पन के संगे काम करत रहल बा. भोजपुरी के त पहिलका सिनेमा ही बनल रहे नजीर हुसैन के प्रयास से. नजीर हुसैन जी त हिंदी सिनेमा में सफल,स्थापित आ चर्चित चरित्र अभिनेता रहनी. भोजपुरी खातिर संगीत त दु—दु गो भारत रत्न प्राप्त भोजपुरिया रत्न लोग देलस. सितारवादक पंडित रविशंकर आ शहनाई के उस्ताद बिस्मिला खान. संगीतकार चित्रगुप्त त हिंदी सिनेमा संगीत में बड़का नांव हो गईल रहनी, तबो जब ले रहनी, आपन माई भासा भोजपुरी में नया संगीत रचत रहनी.गीतकार शैलेंद्र के भी जुड़ाव रहल, उहां के भोजपुरी गीत लिखनी. मजरूह सुल्तानपुरी भी गीत लिखनी. अईसन अनेक उदाहरण, अनेक नांव भरल परल बा.

हं, बाकि ई कुल नाम इतिहास के पन्ना में बा, अभी के सच्चाई एही रहल ह कि कवनो स्थापित नांव आपन प्रोफाइल गड़बड़ाये के वजह से भा कवनो अउर कारन से भोजपुरी खातिर कुछ करे के साहस ना जुटा पावत रहल ह. अईसनका समय में एगो उमेद जगावे खातिर अनुभव सिन्हा आ मनोज बाजपेयी के प्रयोग के खूब स्वागत त होईबे करी, होइयो रहल बा.

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अब दोसरका बात. ढेर लोग इहो कहलस कि ई भोजपुरी के पहिलका रैप ह. एह गलती के सुधार लेबे के चाहीं. भारत के ही पुरखा के संतान रागा मेन्नो सुरिनाम के रहेवाला हवें आ नीदरलैंड में रहेले. भोजपुरिया गायक हवे. उनकर गुरू हवे मशहूर गायक राजमोहन. रागा मेन्नो तो पिछिलका दु दसक से भोजपुरी रैप गा रहल बाड़े, अलबम ला रहल बाड़े.खूब चर्चित भी भइल. राजमोहन के रैप के दुनिया के काम अलग बा. जब रैप के बात निकलल बा त पॉप के भी बात हो जाव. एगो सुनहरा जुग के ईयाद करे के अवसर भी बनत बा एही बहाने. ओह नायकन के भी ईयाद करल जरूरी हो जात बा, जेकर एक जमाना में पूरा दुनिया में जोर,सोर आ धाक रहे.

जे भी भोजपुरी संगीत सुने के सौकीन रहल होखी उ कुछ गाना जरूर सुनले होखी. फुलौरी बिना चटनी कईसे बनी... रात सपना दिखाई दिया हमको... चंदनिया चादर बिछाव बलमा.. हम ना जईबे ससुर घर में बाबा जईसन गीत. अईसनका गीत के इयाद करते कई गो गीत लोग के इयाद आ जाई, जेकर एक समय में धूम रहे. अईसनका गीत के चरचा अवते जवन कलाकार जोड़ी के लोग इयाद करेला, उ जोड़ी कंचन-बावला के रहे. बावला रहले गुजरात के. पूरा नांव रहे लक्ष्मीचंद बावला. संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के छोट भाई, जे हिंदी सिनेमा में खइके पान बनारस वाला जईसन गीत के संगीत देले रहले. आ कंचन रहनी मराठी. क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो भा लैला ओ लैला... जईसन हिंदी गीतन के गायकी कर के छा गईल रहली बॉलीवुड भा हिंदी गीत-संगीत के दुनिया में.

बाकी कंचन-बावला के पहचान एकरा से नइखे. ई लोग के दुनिया में पहचान बनल भोजपरी चटनी संगीत से. 40 साल तक ई जोड़ी भोजपुरी चटनी संगीत के प्रस्तुति दुनिया के कोना-कोना में देलस आ नाम-काम-दाम तीनों खूब कमईलस. बाकि कंचन-बावला के जोड़ी त बहुत बाद में आईल भोजपुरी संगीत के वैश्विक पहचानवाला, रॉक-पॉप-रैप कल्चर से मिश्रण से निकलल चटनी संगीत के दुनिया में. एकर असल नायक,सूत्रधार भा पहिलका सुपर स्टार त रहले सुंदर पोपो आ महिला कलाकार में द्रोपती. 70 के दसक में सुंदर पोपो के पहिलका अलबम आईल-नाना एंड नानी. दुनिया में धूम मचवलस. ओकरा में पॉप स्टाइल में गावल एगो गारी गीत सबकेहू के जुबान पर चढ़ल, जेकर बोल रहे- दुलहा के माई. सुंदर पोपो के किंग आफ चटनी कहे जाये लागल.

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ओही समय में द्रोपती के भी आगमन भइल एह संगीत में. उ भोजपुरी के पारंपरिक गीतन के संगे प्रयोग कईली. मटकोड़, गौरीपूजा आदि के गीत के नवका संगीत में ले के अईली. उनकर अलबम आईल-लेट्स सिंग एंड डांस. पूरा दुनिया में फैलल भोजपुरिया आ पुरबिया लोग दिवाना हो गईल. उनका के मदर आफ चटनी म्यूजिक कहे जाये लागल. फेरू त एह परंपरा में एक से एक स्टार कलाकार निकलले, जेकर दिवाना  ना खाली भोजपुरी जानेवाला लोग भइल, बलुक दुनिया भर में धूम मचे लागल. एही कड़ी में शार्लिन बुदराम के नांव आईल. 90 के दसक में इहां के अलबम कलकत्ता वोमेन के धूम दुनिया में मचल.निशा बेंजामिन, बैजयंती जईसन स्टार कलाकार लोग एह परंपरा में जुड़ल, दुनिया में धूम मचवलस. एक आउर कलाकार के आगमन भइल,जिनकर नांव रहे द्रुपती रामगोनाई.

ई इंडो कैरेबियन फ्यूजन सुरू कईली आ इनकर संगीत त फॉक्स फ्यूजन जईसन म्यूजिक कंपनी से आईल, जेकरा के दुनिया के टॉप म्यूजिक कंपनी में मानल जाला. पहिलका द्रोपती रहली, त उहां के मदर आफ चटनी म्यूजिक कहल गईल, ई दोसरका द्रुपती अईली, त ईहां के क्वीन आफ चटनी म्यूजिक कहल गईल. आ एह कुल नांव में आरंभिक दौर में ही एगो सुपरस्टार नांव भइल रामदेव चैती के. रामदेव सुरीनाम के रहेवाला रहनी, आ उहां के एगो गीत 50-60 के दसक में ही धूम मचवलस-रोज देखिना तोहके सपनवां में.

अबही अनेक नांव छुटल बा. नांव बतावे-गिनावे मकसद नइखे. मकसद बा एह बात के चरचा करल कि जब भोजपुरिया रॉक-पॉप-रैप के बात निकलल बा त एकर परंपरा आ इतिहास आ ओकरा संगे वर्तमान नायकन के भी जानल जाव. ओह लोगन के भी जे सात समंदर पार, आपने भासा आ ओकर संगीत के जीयत बा. आखिरी में एगो अउरी बात. अब एतना बेर चटनी संगीत के नांव आ गईल बा त एतना जान लेबल जरूरी बा कि रॉक-पॉप-रैप परंपरा के ई भोजपुरिया चटनी संगीत ह का? असल में जब भोजपुरिया लोग पलायन कर के त्रिनिदाद-टोबैगो, गुयाना, फिजी, मारिसस, जमैका भा अफ्रीका के देसन में गईल गिरमिटिया मजदूर बनी के त उहां आपन गीत-गवनई करे लागल. धीरे-धीरे ओह लोग पर उहां के स्थानीय संगीत के प्रभाव पड़ल. आ फेर दुनों के जोग-संजोग से जवन गीत-संगीत निकलल, बने लागल, उहे चटनी संगीत हो गईल.
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