Bhojpuri Special: भोजपुरी के प्रचलित लोकगीत, कथा आ कहाउत, पढ़ब तss बस पढ़ते रह जाइब!

भोजपुरी लोकगीत, कहाउत और कहानी के परंपरा काफी समृद्ध रहल बा.

भोजपुरी लोकगीत, कहाउत और कहानी के परंपरा काफी समृद्ध रहल बा.

भोजपुरी लोकसंस्कृति काफी समृद्ध रहला बा. हर परंपरा से जुड़ल इहवां लोकगीत, कहाउत अउर कथा बा... बचपन में रउआ भी माई-दादी से सुनले होखब.. त पढ़ीं अउर घर के लोग के भी सुनाईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2021, 12:26 PM IST
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आईं आजु प्रचलित लोकगीत के रस पीहीं. कथा आ कहाउत के आनंद लीं. बियाह से लेके परब- तिहवार आ होली ले गीत के बिना सून लागेला. त कवन- कवन गीत खूब प्रचलित बाड़े सन. आईं देखल जाउ. लोकगीतन के विशेषता आ ताकत ई होला कि ओकर अर्थ बतावे के जरूरते ना परे. अब जइसे चइती बा. जानते बानी कि चइत (चैत्र) महीना में एकरा के गावल जाला. त मेहरारुन के प्रिय गीत ह-
चइत मास चुनरी रंगइबो हो रामा, पिया घर अइहें.
त एगो अउरी गीत बा, जवना के मरद आ मेहरारू दूनों गावेला-
आइल चइत के महीनवा हो रामा, बोले बैरन कोयलिया.
अब कोयल के कूक में मरद, मेहरारू, बाल, वृद्ध सभे आपन- आपन संदेश सुनि लेला. एही से कोयल हमनी के साहित्य में, गीत में आ संगीत में गहिर बइठल बिया. अब निरस आदमी कहत रहो कि चइत के महीना बड़ा उरठ होला. बाकिर प्रकृति प्रेमी आ प्रेम के तत्व हर जगह खोजे वाला कवि, पाठक, श्रोता आ गुनी एह महीना के भावरस से ओतप्रोत रहेला लोग. अब बियाह- सादी के बात आई त गीत- संगीत के रस बदलि जाई. हालांकि- अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया रे ए ननदी, पिया के बोला द, गीत में प्रेम- विरह के गहिरावत बेचैनी आ लालसा छलकता. बाकिर ई भाव बियाह के बाद आई. त आईं पहिले बियाह के गीत पर ध्यान दीं जा. बियाह में सबसे पहिले स्वागत- सत्कार के परंपरा बा-
आपन खोरिया बहार ए कवन बाबा.
आइल बाड़े दुलहा दामाद..


बइठे के मांगेले लाल गलइचा.
खाए के मांगेले पूरी जलेबी.
लड़े के मांगेले मयदान हे.
अब एमें ई नइखे बुझात कि बियाह करे आइल दामाद लड़े के मैदान काहें मांगता. बाकिर सरकार गीत त गीत ह. गीत अझुराए के चीज ना ह, आनंद लेबे के चीज ह. अब बियाह होता त समधी के सत्कार नेचुरल बा. समधियो जानेले कि आजु उनुकर विशेष भाव बा. एह सत्कार में विनम्रता के झलक देखीं--
पेन्ह ना कवन बाबा धोतिया
हाथे पान के बीरा.
कर ना समधिया से मिलनी.
सिर माथा नवाई..

ओने मेहरारू फेर गीत कढ़ावेला लोग-

मिले हैं राजा राम, बाराती आए अंगना.
सोने के थारी में जेवना परोसो.
मिले हैं राजा राम, बाराती आए अंगना..

बाकिर मेहरारू लोगन के शिकाइतो बा. घरे आवे वाली गली बड़ा पातर बिया. हाथी कइसे आई? आखिर धूम- धाम से बियाह होखे के बा-
सांकरी गलिया राउर हवे ए कवन बाबा.
हथियो ना लेले पइसार हे ..

एही कुल पवित्र गीतन से बियाह संस्कार संपन्न होला. तमाम जद्दोजहद के बीच भोजपुरिया लोगन में एगो जीवंतता लउकिए जाला. पता चली कि सांझि खान गवनई होखता. ओमें ढोलक आ झाल पर लोकगीत गवाला त अमृत रस जइसन तत्व झरे लागेला. भोजपुरी लोकगीतन के जोरे- बटोरे के दिसा में कई लोग काम कइले बा. कर्नल जेम्स टाड 1829 में भोजपुरी लोकगीतन पर एतना मुग्ध हो गइल रहले कि आपन किताब “एनल्स एंड एक्टिविटी आफ राजस्थान” लिखला का बाद भोजपुरी गीतन पर लंबा शोध कइले. ओकरा बाद कई गो अंग्रेज भाषा विज्ञानी भोजपुरी पर काम कइले. प्रसिद्ध भाषा बिज्ञानी आ भारत के भाषाई सर्वे करे वाला जार्ज ग्रियर्सन कुछ भोजपुरी लोकगीतन के बटोरि के ओकनी के अंगरेजी में अनुवाद कइले आ सन 1886 में रॉयल एशियाटिक सोसायटी के जर्नल में छपववलें. देवेंद्र सत्यार्थी कुछ अहिरऊ गीत "बिरहा" के संकलन क के छपववलें. भोजपुरी लोकगीतन के साहित्यिक दृष्टि से अध्ययन कई गो लोग कइले बाटे जेवना में कृष्णदेव उपाध्याय के काम बहुत महत्व वाला बाटे. एकरा अलावा श्रीधर मिश्र आ विद्यानिवास मिश्र के लोकगीतन पर लिखल दस्तावेज हमनी खातिर थाती बा. उत्तर प्रदेस, हिंदी संस्थान त “भोजपुरी के संस्कार गीत” नाव के एगो किताबिए छापि देले बा. बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना भी भोजपुरी संस्कार गीत पर एगो किताब छपले बा.

भोजपुरी लोकगीतन के कृष्ण देव उपधिया चार गो प्रकार में बंटले बाड़े.
(1) संस्कार आ रीति-रेवाज से जुडल, (2) बरत-त्योहार से संबंधित, (3) मौसम आ सीजन के अनुसार गावल जाए वाला, (4) कौनों जाति-समुदाय के गीत, आ (5) दैनिक जीवन के बिबिध कामकाज आ पेशा से जुड़ल गीत.

रउवां सभ जानते होखब कि हमनी के जीवन में 16 गो संस्कार होला-
1.गर्भाधान 2.पुंसवन (गर्भाधान के तीसरा महीना लइका के पुष्ट होखे खातिर) 3. सीमंतोन्नयन (गर्भस्थ शिशु आ माता के रक्षा खातिर) 4.जातकर्म (गर्भस्थ शिशु के नार काटे के समय) 5.नामकरण 6.निष्क्रमण (शिशु कमरा से बाहर निकालि के सूर्य आ चंद्रमा के ज्योति देखावल जाला) 7.अन्नप्राशन 8.चूड़ाकर्म (मुंडन) 9.विद्यारंभ 10. कर्णवेध (कान छेदाला) 11.यज्ञोपवीत (जनेव) 12. वेदारंभ 13.केशांत (गुरुकुल में शिक्षा खतम भइला पर बिदाई) 14. समावर्तन (ब्रह्मचर्य जीवन के समाप्ति के अनुष्ठान) 15. विवाह 16. अंत्येष्टि.

अंत्येष्ठि में त दुख- तकलीफ आ शोक रहेला. बाकिर बाकी संस्कारन में गीत के प्रधानता रहबे करेला. हालांकि अब खांटी लोकगीत लुप्त हो रहल बाड़े सन.

तिलक चढ़े के बेरा जवन गीत गवाला ओकर त कवनो जबाबे नइखे. रउवों देखीं-
1- हथिया, हथिया सोर कइले, गदहो ना ले अइले रे.
तोरा बहिन के चोट्टा मारो, मड़वा में हंसवले रे..
2- तिलक जे गनेले कवन बाबा, झनकि- झनकि उठि जाले हे,
मोर बाबू पढ़ले पंडितवा, तिलक बड़ा थोर भइले हे..

बियाहे में दुआरपूजा पर एगो बड़ा नीमन गीत गावल जाला-
धनि धनि भाग हमार जागल कि
पाहुन उतरले दुआरे.
गीत त गीत ह. बेटी के बियाह में त भाव बिह्वल करे वाला गीत भी रहेले सन. जइसे-
1- सुंदर धियवा बियहल हो बाबूजी, सून कइल आपन अंगनवां.
2- बेटी तोहार हम कइसे करीं बिदाई.
कइसे छोड़ीं अंचरा के कोर हो..

आ खाली बियाहे सादी में ना, रोग- ब्याधि के निराकरण खातिर भी लोकजीवन में गीत बाड़े सन. जब माता दाई निकलेली, जवना के डॉक्टर साहेब लोग स्माल पाक्स, चिकेन पाक्स कहेला ओमें माता दाई के पूजा होला आ गीत गवाला-
निमिया के डार मइया लावेली हिलोरवा कि झूमि- झूमि ना. मइया गावेली गीति कि झूमि- झूमि ना..

अब होली के समय के जोगीरा के याद करीं. लोग कहेला कि जोगीरा खाली अश्लीले होला. बाकिर अइसन बात नइखे. असली जोगीरा के दू लाइन देखीं-
1- तन जीवन धन सुंदरता के, बिरथा कबो ना कर.
आवे काम सदा औरन के, अइसन करम कर.. जोगीरा सरररर...
2- धन जीवन अनमोल रतन बा, गोरी फेर ना पइबू.
जहिया गलि पचि जाई जवानी, सोचि सोचि पछतइबू.. जोगीरा सरररर...
एकरा अलावा सोहर, सावनी गीत त बड़ले बा. अब आईं कथा पर. कथा माने लोककथा. त दू गो बड़ा मसहूर कथा बाड़ी सन.

पहिली कथा-
एगो राजा रहे. ओकरा तीन गो रानी रहली सन. त राजा सबसे छोटकी रानी के बड़ा मानसु. बड़ा प्यार करसु. अउरी केहू त ना, बाकिर मझली रानी के छोटकी से बड़ा जलन होखे. छोटकी रानी एगो सुग्गा (तोता) पोसले रहली. उनुकर परान ओही में बसे. त मझली रानी सोचली कि काहें ना सुगवा के मारि दिहल जाउ, बस छोटकी रानी के काम तमाम हो जाई. बाकिर सुगवा त बड़ा पहरा में रहे. ओकरा ले पहुंचल बड़ा मुसकिल रहे. आखिर तक सुगा नाहिंए माराइल आ छोटकी रानी के प्यार अमर हो गइल.

दोसरकी कथा-

ऋषि च्यवन कठोर तपस्या करत रहले. कई बरिस बीति गइल. उनुका चारो ओर देंवका (दीमक) लागि गइल. देंवका त लागल बाकिर आंखि का सामने देंवका में दू गो छेद हो गइल. हालांकि ऋषि के आंख बंद रहे. एक बेर एगो राजकुमारी अपना नोकर- चाकर संगे घूमत च्यवन ऋषि के तपस्या वाली जगह पर पहुंचि गइली. देखली कि आदमी के आकृति वाला देंवका मे दू गो छेद रहे. ऊ लकड़ी से ओकरा के छेदि के जांच कइली कि ई कथी के छेद ह. आहि दादा! ओइजा से धाराधार खून बहे लागल. ऋषि च्यवन के आंखि में जखम हो गइल. उनुकर तपस्या भंग हो गइल. ऋषि उठि गइले. देंवका के माटी भरभरा के गिरि गइल. माटी देह से झारि के ऋषि जब राजकुमारी के देखले त उनुका कुल ज्ञान हो गइल. जरूर ई राजकुमारी ईश्वर के कौनो इच्छा के पूरा करे आइल बाड़ी. राजकुमारी के पिता माने राजा के पता चलल. तुरंते ऊ ऋषि से क्षमा मांगे आ गइले. ऋषि कहले कि एकरा प्रायश्चित एह तरे होई कि एह राजकुमारी के बियाह हमरा से क द. हमनी के संतान संसार के उद्धार करे खातिर हमरा तपस्या के आगे बढ़इहें सन. राजा तैयार हो गइले. ऋषि च्यवन बूढ़ रहले. त शादी का पहिले ऊ एगो आयुर्वेदिक औषधि तइयार कइले, जवना के नांव अपना नांव पर धइले- च्यवनप्राश. ओकरा के खाके ऊ फेर जवान हो गइले. ओही के नकल कइके कइगो कंपनी च्यवनप्राश बनावेली सन. केहू जवान होखे भा मति होखे, कंपनी के प्राडक्ट बेचाता.

कहाउति-
अब आईं कहाउति पर. त कहाउति के विशेषता रउरा सभे जानते बानी. ओकर ना अर्थ समुझावे के जरूरत परेला ना केहू माने पूछेला. कहाउति अपना अर्थ के संगे लेले चलेली सन. जइसे-
1- सतुआ के पेट सोहारी से ना भरी 2- सब चाही त काम आंटी (सब चाही आ सक्रिय साथ दी तबे काम हो पाई), 3 - सेतिहा के साग गलपुरना के भाजी 4- नेबुआ त लेगइल सागे में मति डाले (गलत प्रयोग के आशंका) 5- छिया-छिया गप-गप (ना ना कहतानी बाकिर छोड़तो नइखीं) 6- बाबा के धियवा लुगरी अउरी भइया के धियवा चुनरी 7- सबकुछ खइनी दुगो भुजा ना चबइनी 3- हाथी अइली हाथी अइली पदलसि भड़ाक दे 9- जवन रोगिया के भावे तवन बैदा फुरमावे 10-आन के धन पर कनवा राजा 11- बड़ के लइका पादे त बाबू के हवा खुलल आ छोट के पादे त मार सारे पदले बा 12- बुढ़वा भतार पर पांच गो टिकुली. 13- :- जीअत पर छूंछ भात, मरले पर दूध-भात 14- खेत खा गदहा अउरी मार खा जोलहा. 15- बकरी के माई कबले खर जिउतिया मनाई. (लेखक विनय बिहारी सिंह प्रसिद्ध स्तंभकार हईं)
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