अपना शहर चुनें

States

भोजपुरी विशेष – राष्ट्रपति राजेंदर बाबू सुख-दुख के बारे में अपना पत्नी के का लिखले बाने पढ़ीं

धर्मपत्नी श्रीमती राजवंशी देवी के साथ राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद.
धर्मपत्नी श्रीमती राजवंशी देवी के साथ राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद.

राजेंदर बाबू गांधी जी से संपर्क में आइला के बाद राजनीति में अइले. ओकरा पहिले उ बहुत मेधावी छात्र रहले. आगे बहुत कुछ बने के संभावना रहे. फेर भी सुख दुख के बारे में उनकर नजरिया बहुत साफ रहे. इ बात उनकर ये चिट्ठी में साफ दिखेला. खास बात इ रहे कि उनकर भोजपुरी में लिखल चिट्ठी से ये भाषा के प्रति उनकर लगाव भी साफ होता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 4:14 PM IST
  • Share this:


तीन दिसंबर के राजेंदर बाबू के जयंती रहे. उहां के जयंती प उहां के अनेक तरीका से इयाद कइल जाला. हर साल. एह साल भी कइल गइल. मोटा तौर पर उहां के राजनीतिक योगदान, सादगी, ईमानदारी, भारतीय राजनीति में उहां के जोगदान प बात होला. एह कुल से परे राजेंदर बाबू के एगो पहचान आपन माईभाषा भोजपुरी से बेपनाह प्यार करेवाला भाषाप्रेमी के भी रहे. उहां के भोजपुरी से जुड़ल अनेक कहानी बा. भोजपुरी के पहिलका सिनेमा बनवावे में उहां के भूमिका सभे केहू जानेला. उहें के प्रयास से विश्वनाथ शाहाबादीजी हे गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो फिलिम में पइसा लगावे के तइयार भइल रहीं आ भोजपुरी के पहिलका सिनेमा बन सकल रहे.

एह तरह से अनेक किस्सा उहां के जीवन से जुड़ल बा, जे बतावेला कि उहां के भोजपुरी से केतना लगाव रहे. कहल भी जाला कि उहां के आधिकारिक बातचीत छोड़ के, अधिकतर भोजपुरी ही बोलत रहीं. केहू के बारे में अगर जान जात रहीं कि भोजपुरी भाषी हवें त फेरू भोजपुरी के अलावा दोसर भाषा में ना बतियावत रहीं. उहां के भोजपुरी प्रेम के एगो बड़ झलक उहां के चिट्ठियन में दिखेला. उहां के अपना घरे जेतना चिट्ठी लिखत रहीं, सब भोजपुरी में ही रहत रहे. उहां के जयंती के बहाने जब लगातार उहां के बारे में बात चल रहल बा त नमूना रूप में एगो चिट्ठी पढ़ल जा सकत बा, जे उहां के आपन धर्मपत्नी राजवंशी देवी के नावें लिखले रहीं. ई पत्र उहां के कलकत्ता से लिखले रहीं. जब वकालत छोड़ के राष्ट्रसेवा में आवे के मन बनवलीं त आपन पत्नी के नावें चिट्ठी लिखलीं. ई उहे चिट्ठी ह. एह चिट्ठी के उहां के लईका मृत्युंजय बाबू, जे बाद में राज्यसभा सदस्य बनुवीं, आपन किताब में छपले बानीं. उहवें से साभार लेबल जा रहल बा.



भोजपुरी में ये भी पढें :  मकइया रे तोर गुन गवलो ना जाला
राजेंदर बाबू के चिट्ठी

आशीरबाद
आज कल हमनी का अच्छी तरह से बानीं. उहां के खैर सलाह चाहीं, जे खुसी रहे. आगे एह तरह के हाल ना मिलल, एह से तबिअत अंदेसा में बाटे. आगे पहिले-पहिल कुछ अपना मन के हाल खुल कर के लिखे के चाहत बानी. चाहीं की तु मन दे के पढि के एह पर खूब विचार करिह अउर हमरा पास जवाब लिखिह. सब केहु जानेला कि हम बहुत पढनी, बहुत नाम भइल, एह से हम बहुत रोपेया कमाईब, से केहु के इहे उम्मेद रहेला कि हमार पढल-लिखल, सब रोपेया कमावे वास्ते बाटे. तोहार का मन हवे से लिखिह. तू हमरा के सिरिफ रोपेया कमावे वास्ते चाहेलू कि कउनो काम वास्ते? लडकपन से हमार मन रोपेया कमाये से फिर गइल बाटे अउर जब हमार पढे में नाम भइल त कबहीं इ उमेद ना कइलीं कि इ सब रोपेया कमावे वास्ते होत बाटे.एही से हम अब अइसन बात तोहरा से पूछत बानी कि जे हम रोपेया ना कमाईं त तूं गरीबी से हमरा साथ गुजर कर लेबू कि ना? हमार तोहार संबंध जनम भर के खातिर बाटे. जे हम रोपेया कमाईं तबो तू हमरे साथ रहबू? ना कमाई तब्बो हमरे साथे रहबू. बाकि हमरा इ पूछे के हवे कि जो ना हम रोपेया कमाईं त तोहरा कवनो तरह के तकलीफ होई कि नाही. हमार तबियत रोपेया कमाये से फिर गइल बाटे. हम रोपेया कमाये के नइखी चाहत. तोहरा से एह बात के पूछत बानीं कि इ बात तोहरा कईसन लागी. जो हम ना कमाइब त हमरा साथ गरीब लेखा रहेके होई. गरीबी खाना, गरीबी पहिनना, गरीब मन कर के रहे के होई. हम अपना मन में सोचले बानीं कि हमरा कउनो तकलीफ ना होई बाकि तोहरा मन के हाल जान लेबे के चाहीं. हमरा पूरा बिषवास बाटे कि हमरा स्त्री सीता जी लेखा जइसे हम रहब ओइसहीं रहिहें. दूख में, सुख में हमरा साथे रहला के आपन धरम आपन सुख आपन खुसी जनिह. एह दुनिया में रोपेया के लालच से लोग मरल जात बाटै, जे गरीब बाटे सेहू मरत बाटे. जे धनी बाटै सेहू मरत बाटै. फिर काहे के तकलीफ उठावे.जेकरा सबुर बाटे, सेही सुख से दिन काटत बाटे. सुख—दुख केहू के रोपेया कमइले आ ना कमइले ना होला. करम में जे लिखल होला सेही सब होला.
अब हम लिखे के चाहत बानी कि हम जे रोपेया ना कमाईब त का करब. पहिले त हम वकालत करेके खेयाल छोड देब. इम्तेहान ना देब. वकालत ना करब. हम देस के काम करे में कुल समय लगाइब. देस वास्ते रहना, देस वास्ते सोचना, देस वास्ते काम करना, इहे हमार काम रहि. अपना वास्ते ना सोचना, ना काम करना, पूरा साधू अइसन रहेके. तोहरा से चाहे महतारी से चाहे अउर केहू से हम फरक ना रहब. घरहीं रहब बाकिर रोपेया ना कमाईब. संन्यासी ना होखब. बाकि घरे रहि के जे तरह से हो सकी, देस के सेवा करब. हम थोडे दिन में घरे आइब त सब बात कहब. इ चिठी अउर केहू से मत देखइह. बाकि बिचार के जवाब जहां तक जलदी हो सके, लिखिह.हम जवाब वास्ते बहुत फिकिर में रहब.

अधिक एह समय ना लिखब.

राजेंद्र

आगे इ चीठी दस बारह दिन से लिखले रहली हवें. बाकि भेजत ना रहली हवें. आज भेज देत बानी. हम जलदिये घरे आइब. हो सके तो जवाब लिखिह. नाही त अइले पर बात होई. चिठी केहू से देखइह मत.

राजेंद्र
राजेंद्र प्रसाद
18 मिरजापुर स्ट्रीट
कलकता
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज