भोजपुरी विशेष –उमिर कबो बाधा नइखे, 64 के उमिर में मेडिकल के पढ़ाई

रिटायरमेंट के बाद नीट परीक्षा में सफल होके जवन साहस जय किशोर जी देखवले बाने उ सलाम करे लायक बा.

रिटायरमेंट के बाद नीट परीक्षा में सफल होके जवन साहस जय किशोर जी देखवले बाने उ सलाम करे लायक बा.

भोजपुरी में कहल जाला कि साठा तब पाठा, एकरा के बहुत पॉजिटिव तरीका से साबित कई के देखा देले बाने उड़ीसा के जय किशोर प्रधान. उनकर कहल बा कि उ पइसा कमाए खातिर डॉक्टर नइखनबत बल्कि उनकर मकसद सेवा बा.

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  • Last Updated: December 28, 2020, 11:40 AM IST
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हाड़-मांस के देह में बहुत बूता बा. जे ई ताकत के समझ लिही ऊ असंभव के भी संभव बना सकेला. जब मन में कुछ करे के ललसा जाग जाई तs उमिर कवनो बाधा ना होई. मन में अपार शक्ति बा. कवनो उमिर में ऊ मोसकिल से मोसकिल काम कर सकेला. ओडिशा के रहे वला जयकिशोर प्रधान जी 64 साल के उमिर में नीट के परीक्षा देले. मेरिट लिस्ट में जगह बनवले. अब ऊ सरकारी मेडिकल कॉलेज में नांव लिखा के डाक्टरी के पढ़ाई कर रहल बाड़े. सबसे खूबी के बात ई कि ऊ बैंक के नौकरी से रिटायर भइला के बाद अइसन कामयाही हासिल कइले. 64 साल के उमिर में मेडिकल स्टूडेंट बन के जयकिशोर जी देश में नया इतिहास रचले वारपबाड़े. उनकर कामयाबी के कहानी हमनी खातिर प्रेरणा के स्रोत बा.

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जयकिशोर के जयकारा

नांव- जयकिशोर प्रधान. गांव-अताबीरा. जिला- बरगढ़. राज्य- ओडीशा. अताबीरा गांव के माटी निहाल हो गइल. जयकिशोर जी जवन उपलब्धि हासिल कइले ऊ आज ले भारत में केकरो नसीब ना भइल. भोजपुरी में कहावत हs साठा से पाठा. 64 साल के जयकिशोर जी तs पाठा के भी फेल कर देले. 2016 में ऊ बैंक के नौकरी से रिटायर भइल रहन. रिटारमेंट के बाद ऊ अपना जऊंवा बेटी लोग के डाक्टर बनावे के ठनले. जयकिशोर जी अपने फिजिक्स आनर्स रहन. अपना दूनो बेटी के मेडिकल के तइयारी करावे लगले. उनकर मेहनत सफल भइल. दूनो बेटी के डेंटल कालेज में सलेक्शन हो गइल. बेटी लोग के तइयारी करावत-करावत जयकिशोर जी के भी पुरान पढ़ाई ताजा हो गइल. बेटी लोग अपना रिटायर पिता के गेयान देख के चकित रहे. इहे बीच 2019 में नीट परीक्षा में उमिर के बिबाद सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गइल. सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला में अधिकतम उमिर के सीमा खतम कर देलस. ई खबर सुन के जयकिशोर जी के बेटी लोग उनका के परीक्षा में बइठे से सलाह देलस लोग. दूनो बेटी के निहोरा से जयकिशोर जी के मन में उथल-पुथल होखे लागल.
हार के बाद जीत

जयकिशोर जी पढ़े में तेज रहन. 1974-75 में इंटर पास कइला के बाद उहो मेडिकल में एडमिशन खातिर परीक्षा देले रहन. लेकिन पास ना कइले. अगिला साल परीक्षा देवे के खातिर एक साल बरबाद कइल ऊ निक ना समझले. फिजिक्स आनर्स में नांव लिखा के पढ़ाई जारी रखले. बीएससी कइला के बाद बैंक में बहाली के परीक्षा देले जवना में कामयाबी मिल गइल. स्टेट बैंक में नौकरी मिलल. लेकिन उनका मन के कोना ई बात दबल रहे कि ऊ मेडिकल के कम्पटिशन में फेल हो गइल रहन. बेटी लोग के रोज रोज कहला से उनकर पुरान घाव हरियर हो गइल. संजोग से 63 साल के उमिर में उनका परीक्षा देवे के मौका भी मिल गइल रहे. उमिर सीमा खतम होखे से उहो परीक्षा में बइठ सकत रहन. एक अउर वजह से उन कर राह आसान हो गइल. जब ऊ बैंक में नौकरी करत रहन तs 2003 में एगो दुरघटना में उनकर एक गोड़ नाकामिल हो गइल रहे. ऊ बिकलांग हो गइले. नीट के परीक्षा में ऊ बिकलांग कोट से फारम भर सकत रहन. उनकर फारम भरा गइल.

63 के उमिर में नीट के परीक्षा



2019 के नीट परीक्षा में जयकिशोर बइठले. 63 साल के उमिर में जतना तइयारी हो सकत रहे, कइले. लेकिन किस्मत फेन दागा दे देलस. लेकिन जयकिशोर जी अबकी निराश ना भइले. उनका परीक्षा के ढर्रा अउर सिलेबस समझ में आ गइल रहे. एही बीच दांत के डाक्टरी पढ़ रहल उन कर बड़ बेटी के दुरघटना में मौत हो गइल. ई सदमा से जयकिशोर जी के मन गिर गइल. उहे लइकी मेडिकल परीक्षा खातिर उनकर हौसला बढ़ावत रहे. एकरा बाद छोटकी लइकी उनका से कहस, बाबू जी अब रउआ के दीदी खातिर मेडिकल परीक्षा पास करहीं के पड़ी. जयकिशोर जी के मन में ई बात समा गइल. 2020 में फेर फारम भराइल. जीव-जान से परीक्षा के तइयारी करे लगले. जब नीट के रिजल्ट निकलल तs इतिहास बन चुकल रहे. 64 साल के जयकिशोर जी के मेडिकल में पढ़े खातिर सलेक्शन हो गइल. एकरा बाद उनका घरहीं भिरी बुर्ला के सरकारी मेडिकल कालेज में एडमिशन भी मिल गइल. बुर्ला के वीर सुरेन्द्र साई इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च में जब ऊ पहुंचले तs उनका के देख लोग अचरज में पड़ गइले. बेटा के उमिर के लइकन के साथे जब 64 साल के अदिमी पढ़े खातिर जाई तs केहू चिहा जाई.

64 के उमिर में काहे बनले डाक्टर ?

जयकिशोर जी जब एमबीबीएस के पढ़ाई करे खातिर नांव लिखलवे तs सभे आदिमी एक्के सवाल पूछे कि एह उमिर में डाक्टर बने के कइसे सौख जागल ? एह सवाल पs उनकर जबाब रहे, हमरा पइसा कमाये के कवनो लोभ नइखे. बैंक से रिटारमेंट के बाद जतना पेंशन मिल रहल बा, ओतना गुजारा खातिर बहुत बा. डाक्टर बने के हमार इहे खाहिस बा कि गरीब अउर लाचार लोग के सेवा कर सकीं. गांव- देहात में दवाखाना खोल के अइसन लोग के सेवा करब जेकरा भी इलाज के पइस नइखे. डाक्टर बनत-बनत हमार उमिर 70 साल को जाई. एह उमिर में गरीब-गुरबा के इलाज के मौका मिली तs समझब कि जिनगी सफल हो गइल. जयकिशोर जी सोच, बिचार अउर गेयान बेमिसाल बा. ऊ अनहोनी के होनी कइले बाड़े. उनकर कहानी हारल मन के हरियर करे वाला बा.

( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं )

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