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भोजपुरी विशेष - जब लालू जादव के यशवंत सिन्हा खेलवले, ओका बोका तीन तड़ोका

भोजपुरी विशेष - जब लालू जादव के यशवंत सिन्हा खेलवले, ओका बोका तीन तड़ोका

लालू के सीएम रहत यशवंत सिंहा नेता प्रतिपक्ष रहि चुकल बानीं.

लालू के सीएम रहत यशवंत सिंहा नेता प्रतिपक्ष रहि चुकल बानीं.

यशवंत सिंहा आइएएस के नौकरी छोड़ि के राजनीति में उतरल रहेने. अर्थ व्यवस्था पर उनकर एगो आपन धारणा विचार बा. लालू प्रसाद यादव के राजनीति के आपन शैली रहे. सिंहा जी अपना किताब रिलेंटलेस : एन ऑटोबायग्राफी में बहुत से कहानी के जिक्र कइले बाने.लेकिन पुरान लोग के इ दूनो नेता लोगन के कई गो कथा कहानी याद होई.

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एमए के परीक्षा देके गांवे आइल रहीं. बाबू जी कहले कि धान के बोझा अगोरे खातिर जाके खरिहानी में सूत जा. खा-पी के राती खा ललटेन अउर किताब लेके खरिहान पहुंचनी. बाबूजी खटउर लगा के पुआरा पs सुजनी बिछा देले रहन. पुअरा के देसी गरम गाद्दा डनलप पिल्लो के फेल कइले रहे. बनारस से आवत घरी दू-तीन गो किताब ले ले आइल रहीं. आज दिनहीं से यशवंत सिन्हा के लिखल किताब, रिलेंटलेस : एन ऑटोबायग्राफी पढ़त रहीं. आधा से अधिका ओरिया गइल रहे. अंजोरिया रात अउर खरिहान के देसी बिछोना पs ललटेन में किताब पढ़े के आनंदे दोसर रहे. कब किताब खतम हो गइल बुझइबे ना कइल. घड़ी देखनी तs रात के पौने एक बज गइल रहे. ललटेन बोता के किताब सिरहाना तs दबवनी अउर कम्मर तान देनी. नींद आ गइल तs सपना में किताबे के बात घूमे लागल.

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सपना में लालू जादव-यशवंत सिन्हा के कहानी
यशवंत सिन्हा के किताब में लालू जादव से उनकर लड़ाई के कहानी विस्तार से लिखल गइल बा. लालू जादव के जमानत पs सुनावई 11 दिसम्बर के होखे वला बा. एह से लालू जादव-यशवंत सिन्हा के कहानी सपना में सिनेमा के माफिक घूमे लागल. अफसरी छोड़ के यशवंत सिन्हा जब जनता दल में अइले तs उनकर चंद्रशेखर से बहुत नजदीकी हो गइल. चंद्रशेखर 1990 में जब प्रधानमंत्री बनले तs यशवंत सिन्हा के वित्त मंतरी बनवले. लेकिन 1991 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर के समाजवादी जनता पार्टी के कुल्लम पांचे गो सीट मिलल. यशवंत सिन्हा पटना से खड़ा रहना. एह चुनाव में जम के बूथ कैपचरिंग भइल रहे. लालू जादव के समर्थकन पs बूथ लूटे के आरोप लागल. एकर शिकायत चुनाव आयोग में पहुंचल. टीएन शेषन के जमाना रहे. ओही दिन शेषन पटना के चुनाव रद्द कर देले. यशवंत सिन्हा सांसद ना बन पइले.

हार के बाद पुनरबिचार
चंद्रेशेखर के पार्टी के हालत खराब रहे. यशवंत सिन्हा आइएएस के नौकरी छोड़े के राजनीति में आइल रहन. उनकर आगा के सफर मोसकिल हो गइल. तब उ सोचे लगले कि अब का करीं. कांग्रेस नीति के विरोधे में उ नौकरी छोड़ले रहन. एह से कांगेरेस में जाये के सवाले ना रहे. दिमाग सोच बिचार के बबंडर घूमे लागल. 1993 के बात हs. एक दिन यशवंत सिन्हा अपना मेहरारु साथे हवाई जहाज में पटना से दिल्ली अवत रहन. ओही जहाज में लालू जादव भी रहन. लालू जादव मुखमंतरी रहन तs यशवंत सिन्हा पूर्व वित्त मंतरी रहन. लालू जादव जब 1989 में सांसद रहन तs यशवंत सिन्हा ओह घरी राज्यसभा सांसद रहन. जनमोर्चा के बड़ नेता रहन. दूनो अदिमी एक दोसरा के खूब बढ़िया से जानत रहे. लेकिन जब जहाज में यशवंत सिन्हा मिलले तs लालू जादव उनके देने देखबो ना कइले. ई बेइज्जती से यशवंत सिन्हा तिलमिला गइले. ओही घरी उ सोच ले ले कि अब आगा का करे के बा. यशवंत सिन्हा जब दिल्ली पहुंचले तs सीधे लालकृष्ण आडवाणी के फोन कइले. मिले खातिर समय मंगले.

लालू के चलते अइले भाजपा में
यशवंत सिन्हा सोचले कि अगर ऊ जनता दल में आवतs बाड़े तs हरमेसा लालू जादव के अइसने बेवहार झेले के परी. अब एक्के रास्ता बा कि भाजपा में जाये के कोशिश कइल जाव. यशवंत सिन्हा लालकृष्ण आडवाणी के घरे पहुंचले. भाजापा में शामिल हेखे के इच्छा जाहिर कइले. बात मंजूर हो गइल. लालू के चलते यशवंत सिन्हा भाजपा के झंडा उठा लेले. लालकृष्ण आडवाणी से यशवंत सिन्हा के बहुच पटे लागल. 1995 के बिहार बिधानसभा चुनाव से पहिले भाजपा के एगो भितरिया सर्वे भइल रहे. ई सर्वे में कहल गइल रहे कि चुनाव में भाजपा के बहुमत मिले के आसा बा. ई सर्वे के आधार पs लालकृष्ण आडवाणी पार्टी में सलाह दिहले कि अगर लालू जादव के काट में यशवंत सिन्हा के बिहार भेजल जाव तs भाजपा के कामयाबी मिल सकेला. यशवंत सिन्हा देश के वित्त मंतरी रह चुकल रहन. उनकर बिधानसभा चुनाव लड़े पs भाजपा नेता एकमत ना रहन. लेकिन आडवाणी जी के जिद के आंगा केहू का न चलल. यशवंत सिन्हा बिधानसबा चुनाल लड़े बिहार अइले.

यशवंत सिन्हा बिहार में बनले नेता प्रतिपक्ष
1995 के बिधानसभा चुनाव में यशवंत सिन्हा के रांची से चुनाव लड़े के आदेश भइल. ओह घरी रांची से भाजपा के गुलशन लाल आजमानी बिधायक चुनात रहन. उनकर टिकट काट के यशवंत सिन्हा के लड़ावल गइल. यशवंत सिन्हा तs जीत गइले लेकिन भाजपा के बरियार झटका लागल. भाजपा के 41 सीट मिलल जब कि लालू जादव के जनता दल के 167 सीट. भाजपा के सर्वे फेल हो गइल. लालू जादव के फेन सरकार बनल. यशवंत सिन्हा के भाजपा बिधायक दल के नेता चुनल गइल अउर नेता प्रतिपक्ष बनले. बिधानसभा में लालू जादव अउर यशवंत सिन्हा में खूब नोकझोंक होखे लागल. एगो इंटरभ्यू में यशवंत सिन्हा एगो कहनी सुनवले रहन. सरकार बनला के बाद लालू जादव बजट पेश कइले. एकरा पs चरचा शुरू भइल. विपक्ष के नेता के हैसियत से यशवंत सिन्हा बजट के कुछ प्रावधान पs सवाल पूछले.

ओका बोका तीन तड़ोका...
एकर जवाब में मुखमंतरी लालू जादव बोले खातिर खाड़ा भइले. उ करीब एक- डेढ़ घंटा भाषण देले. कथा-कहानी में तरह तरह के बात कहले लेकिन यशवंत सिन्हा के एक्को सवाल के जबाब ना देले. तब यशवंत सिन्हा स्पीकर से कहले- महोदय, बजट पs चर्चा से कवन फैदा जब सरकार प्रतिपक्ष के एक्को सवाल के जबाब ना देलस. एकरा बाद यशवंत सिन्हा लालू जादव से कहले, बजट पs ई चर्चा से अच्छा बा कि हमनी के ‘ओका बोका तीन तड़ोका’ खेल लिहीं जा. यशवंत सिन्हा खांटी भोजपुरिया रहन तs लालूओ जादव ओही माटी के रहन. यशवंत सिन्हा के अतना कहत भइल कि लालू जादव ई भोजपुरिया खेल कवित्त के पूरा पढ़ दिहले- ओका बोका तीन तड़ोका, लउआ लाठी चंदन काठी, इजयी बिजयी पनवा फुलवा पुचूक... गंभीर सवाल के भी लालू जादव हंसी-खेल में उड़ा दिहले. दिमाग में ई कहानी चलते रहे कि बाबूजी के भजन से नींद खुल गइल. देखनी तs भोर हो गइल रहे.

Tags: Article in Bhojpuri, Lalu Prasad Yadav, Yashwant sinha

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