• Home
  • »
  • News
  • »
  • bhojpuri-news
  • »
  • भोजपुरी विशेष- खरबिरवा से सेहत: सेहत में खरबिरवा

भोजपुरी विशेष- खरबिरवा से सेहत: सेहत में खरबिरवा

जइसे-जइसे आयुर्वेद का प्रति जनता में फेरु से रुचि बढ़त लउकत बा, एलोपैथिक चिकित्सकन में घबराहट बढ़े लागत बा. ओइसे, आयुर्वेदिक आ प्राकृतिक चिकित्सा पुरातन काल से एह देश के जीवनरेखा में दूध-पानी नियर घुलल-मिलल रहल बा.

  • Share this:


कोविड-19 महामारी के दौरान जब कवनो अलम ना लउकत रहे, त लोग आयुर्वेद आ कुदरत का ओरि उमेदि से भरिके निहारे लागल. एने आयुर्वेदिक चिकित्सको के सर्जरी के हक मिलला के खबर आवत कहीं कि हड़कंप मचि गइल आ एलोपैथी से जुड़ल डॉक्टर साहेब खिलाफत प उतरि अइलन. जइसे-जइसे आयुर्वेद का प्रति जनता में फेरु से रुचि बढ़त लउकत बा, एलोपैथिक चिकित्सकन में घबराहट बढ़े लागत बा. ओइसे, आयुर्वेदिक आ प्राकृतिक चिकित्सा पुरातन काल से एह देश के जीवनरेखा में दूध-पानी नियर घुलल-मिलल रहल बा. ओह में खरबिरवे से सेहत बनावे आ सुधारे के गुर बतावल जात रहे. तब खानपान आउर जीवनशैली पर खास धियान दिहल जात रहे. जइसन अन्न,ओइसन मन के कहनाम सांचो के चरितार्थ होत रहे.

मिशनरी भाव से सेवा
ओह घरी चिकित्सक में आपरूपी भगवान के दर्शन होत रहे, काहें कि डॉक्टर मिशनरी भाव से सेवा करत रहलन आ उन्हुका बेवहार में तनिको व्यवसायी नजरिया नजर ना आवत रहे. बलिया जिला के भाखर गांव में हम एगो अइसने वैद जी के देखले रहलीं. उहां के नांव रहे पंडित जगदेव पाठक. उहां के होत फजीरे एगो बैग आ छाता लेके पैदले घर से निकलि जाईं आ गांवें-गांवें जाके पूछीं कि उहां केहू बेमार त नइखे नू? रोगी का घरे वैदजी बेबोलवले पहुंचि जाईं आ मरीज के नटिका देखिके खुदे बतावल शुरू कऽ दीं कि रोगी के का तकलीफ़ बा आ कवना कारन से ऊ बेमारी दबोचले बिया. अद्भुत नाड़ी-विशेषज्ञ रहनीं उहां के. उहां के सोरहो आना सांच बात सुनिके बेमार-हेमार अदिमी अचरज में परि जात रहे कि इहां के ओकरा तन-मन के गुपुत तथ कइसे जानि गइनीं!

वैदजी खानपान का बारे में किछु सलाह दीं आ दवाई के पुड़िया बनावत ई समुझा दीं कि कइसे ओकर सेवन करे के बा, का खाएके बा आ का नइखे खाए के. जब परिवार के लोग फीस का बिसे में पूछे, त उहां के कहीं कि पहिले रोगी के ठीक हो जाए दीं, फेरु अपना मरजी से,जवन उचित बुझाय, दे देबि. फेरु उहां के हाथ जोड़त दोसरा रोगी के देखे चलि दीं. आस्ते-आस्ते उहां के नांव-जश अइसन फइलल-पसरल कि दू दिन बनारस,दू दिन छपरा,दू दिन बलिया आ एक दिन गांव पर वैदजी हर हफ्ता बइठीं. जहवां जाईं, हरेक जगहा रोगी के भीड़ ठकचल रहे,बाकिर सभ केहू उहां से संतुष्ट होके लवटे. खरबिरवे से उहां के चूरन,आसव आउर अरिष्ट बनाईं आ जनसेवा में लीन रहीं. उहां के हरदम खानपान आ दिनचर्या सुधारे के सबक दीं.

खानपान से सेहत
सचहूं, सात्विक खानपान में सेहतमंद रहे के राज छिपल बा. जवना घरी बिहार विधानसभा के चुनाव होत रहे, ओमें 108साल के एगो सेहतमंद माताजी शामिल भइल रहली. जब एगो जज साहेब उन्हुका नीमन तंदुरुस्ती के राज पुछलन, त ऊ कहली कि मोटअनजा में सेहतमंद जिनिगी के राज छिपल बा. जनेरा, बजड़ा,  जोन्हरी, सांवा, टांगुन, कोदो, जौ, लेतरी वगैरह के मोट अनाज मानल जाला आ इहे मोटअनजा खाके पुरनकी पीढ़ी चुस्ती-तंदुरुस्ती का संगें सइ साल के जिनिगी जीयत रहे,बाकिर अब त ऊ कुल्हि अनाज दुलभ हो गइल बा आ गहूं-चाउर नियर मेंही अन्न खाके लोग किसिम-किसिम के लाइलाज मर्ज के शिकार हो रहल बा.

खरबिरवा में जिनिगी के सत
खरबिरवा के इस्तेमाल कऽके पहिले जनता जनार्दन सुख-भोग करत रहे. ओह खरबिरवा के खोज अइसहीं ना भइल रहे. ऊ ज्ञान डिग्री हासिल कऽके ना, पीढ़ी दर पीढ़ी के तजुर्बा से मिलल रहे आ एही से ओकर रामबाण असर होत रहे. तब खेती-किसानी सर्वोत्तम पेशा रहे आ निषिध चाकरी के भीख मतिन मानल जात रहे. ओह घरी के कृषि वैज्ञानिक आउर मौसम विज्ञानी रहलन-घाघ आ भड्डरी. ओह लोग के कहल कबो बांव ना जात रहे. वजह ई रहे कि कुदरत का संगें सहजीवन के भाव रहे. प्रकृति जीव-जगत के हिफाजत करत रहे आ मनई प्रकृति के. आजु हमनीं के कुदरती दोहन के खामियाज़ा भुगतत बानीं जा.

लोकोक्तियन का जरिए साफ-साफ ढंग से आपन जीवनशैली सुधारे के नसीहत दिहल गइल बा. सीमित संसाधनो में कइसे हंसी-खुशी से जीयल जा सकेला, कहाउते में एकर मरम बतावल गइल बा. आजुकाल्ह त बहुत किछु बेमौसमे हो रहल बा, बाकिर मौसम-महीना के हिसाब से खाए-पीए आ खुशहाल जिनिगी जीए के सलाह दीहल गइल बा. हरेक महीना में किछु खास खाए प जोर देत कहल गइल बा-
सावन हर्रे, भादो चित्रकवा

क्वार मास गुर खा लऽ मितवा

कातिक मुरई, अगहन तेल

पूस में दूध से राखऽ मेल

माघ माह घीव-खिचड़ी खा

फागुन उठिके रोज नहा

चइत महीना नीम के पतई

बइसाखे चाउर बसमती--



घाघ-भड्डरी इहो बतवले रहलन कि कवना महीना में का-का ना खाए के चाहीं-


चैते गुर,बैशाखे तेल

जेठे महुआ,असाढ़े बेर

सावन साग न भादो दही

क्वार करैला,कातिक मही

घाघ-भड्डरी सांची कही

मरिहें ना त खटपर रही.



बेमारी-हेमारी में घर में मौजूद खाए-पीए के चीजु-बतुस रोगियाह अदिमी खातिर कवना हद ले उपयोगी हो सकेला, एक झलक एह लोकोक्तियन में देखल जा सकेला. यजुर्वेदो में एकर चरचा आइल बा. आजुकाल्ह ठंढा के एह सीजन में अदरक,नीबू आ मधु कतना सेहत खातिर जरूरी बा ,एकर एगो चित्र देखीं ठंढा लगला पर-


ठंढा जब लागे बहुत

सरदी से बेहाल,

नींबू, मधु के साथ में

आदी पिहीं उबाल.

अगर नींबू नाहिओं मिले, त आदी के रस आउर शहद के सेवन से सरदी भगावे के

नुस्खा बतावल गइल बा-


आदी कूटीं, रस बना

मधु लीहीं समभाग,

नियमित सेवन जे करी

सरदी जाई भाग.



एही तरी, जेवाइन के बाफ लिहला से जकड़ल कफ बहरिआए लागी आ खांसी से आस्ते-आस्ते छुटकारा मिल जाई-


कफ पीरा पहुंचा रहल

खांसी बहुत सताय,

अजवाइन के बाफ लीं

कफ तब बाहर आय.



जेवाइन के महातम के सेहत खातिर बेरि-बेरि बखान कइल गइल बा. एकरा के पीसि

के जदी नींबू का रस में गाढ़ लेप बनाके लगावल जाउ, त कइसनो चमड़ी के रोग से निजात मिलि सकेला-


अजवाइन के पीसि लीं

नींबू संग मिलाय,

फोड़ा-फुंसी दूर हो

चर्मरोग मिटि जाय.



गुर का संगें जेवाइन के मेल पित्तरोगो में असरकारी सिद्ध होला-


अजवाइन-गुर खाइ लीं

बनी तुरंते काम,

पित्तरोग से ग्रस्त जे

पावे झट आराम.



गहूं के ब्राण्डेड आटा के इस्तेमाल करेवाला एह जुग में अगर लीवर आ टीबी नियर रोग से मुकुती पावल चाहीं, त मकई के रोटी खाईं आ सेहतमंद रहीं. आजु काल्ह ई मोट अनाजे घर के वैद साबित हो सकेला-


मकई के रोटी मिले

खा लीहीं भरपूर,

लीवर ठीक रही सदा

टीबी भागी दूर.



आजु ब्लडप्रेशर,हार्ट आ शुगर के रोग से ग्रस्त मरीजन के तादाद बहुत बा, बाकिर इन्हनियों के इलाज खरबिरवे से बतावल गइल बा. गजरा के रस आ आंवरा के एह बेमारी में अजमावल जा सकेला-


गाजर रस संग आंवरा

बीस-चालीस गराम,

रक्तचाप, हिरदय सही

करीं बेफिकर काम.



मधुमेह में टमाटर, खीरा, करइला के रस के उपयोगी करार दिहल गइल बा. अइसहीं, नीम के पतई के रामबाण भूमिका हो सकेला-
लाल टमाटर काटि लीं

खीरा संग सनेह,

सरस करइला का संगें

दूर रही मधुमेह.


सात पतइया नीम के

खाली पेट चबाय,

भागी चिनिया रोग सब

मन चंगा हो जाय.



करू तेल में लहसुन, जेवाइन आउर हींग के पकाके जोड़न पर मालिश कऽके असह दरद प काबू पावल आम बात बा. ई कुल्हि चीजु घरे में सुलभ बा आ आजमावलो ओतने आसान बा-


अजवाइन आ हींग लीं

लहसुन तेल पकाय,

जोड़न में मालिश करीं

दरद दूर हो जाय.



तुलसी के महातम आदिकाल से बतावल गइल बा. होत सवेरे एकरा सेवन से देह आ मन-परान में खुशहाली के हरियरी भरल जा सकेला-


तुलसी दल दस गो चिखीं

उठते प्रात:काल,

सेहतमंद रहीं सदा

तन-मन मालामाल!



एही तरी, मट्ठा, काला निमक, जीरा, हींग के पेय में निरोगी काया के गुर छिपल बा. जरूरत बा एकरा के अंगीकार करे के-


छाछ, हींग, सेंधा नमक

दूर करी सब रोग,

जीरा ओमें डालिके

पिहीं, रहीं निरोग.



हजारन साल से वाचिक परिपाटी में चलल आ रहल ई आ एह किसिम के अनगिनत सेहत से जुड़ल लोकोक्ति ना खाली जनमानस के जागरूक करत आइल बाड़ी स,बलुक लोकजिनिगी के सेहतमंद आउर दीर्घजीवी बनावे के दिसाईं अगहर भूमिको निबाहत आ रहल बाड़ी स. इन्हनीं में जिनिगी जीए के सलीका आ आपन हाथ जगरनाथ के भाव समाहित बा.जरूरत एह बात के बा कि तथाकथित आधुनिकता के भंवरजाल में अझुराइल नवकी पीढ़ी पूर्वाग्रहमुक्त होके इन्हनीं के अपना अस्तित्व के हिस्सा बनावे आ जिनिगी के खुशनुमा,सेहतमंद आ तनावमुक्त बनवला का संगहीं सुघर विज्ञानसम्मत गौरवशाली परंपरा का प्रति सम्मान जाहिर करे. बेकार समुझल जाए वाली चीजुओ सेहत खातिर कतना बेशकीमती आ जियतार हो सकेली स, इहो सबक देत बाड़ी स ई अनमोल लोकोक्ति. (यह लेख लेखक के निजी विचार है.)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज