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भोजपुरी विशेष: काशी में देश क अनोखा थाना, जहां थानेदार के कुर्सी पर बइठयलन काल भैरव

भोजपुरी विशेष: काशी में देश क अनोखा थाना, जहां थानेदार के कुर्सी पर बइठयलन काल भैरव

जब काशी क कोतवाल स्वयं बाबा काल भैरव हयन, कुल आला अधिकारी नियुक्ति के बाद पहिले इहां आइके मत्था टेकयलन, त भला ओनके थाने क निरीक्षण के करी.

जब काशी क कोतवाल स्वयं बाबा काल भैरव हयन, कुल आला अधिकारी नियुक्ति के बाद पहिले इहां आइके मत्था टेकयलन, त भला ओनके थाने क निरीक्षण के करी.

मान्यता हौ कि बाबा विश्वनाथ अपने नगर क लेखा-जोखा क जिम्मा काल भैरव के सौंपले हउअन. शहर के सुरक्षा क जिम्मेदारी काल भैरव पर हौ. ओन्हय काशी क कोतवाल कहल जाला.

काशी नगरी क महिमा अपरंपार हौ. काशी में आइके सब पार होइ जाला, लेकिन एह नगरी के आज तक केव नाही पार पाइले हौ. काशी भगवान शिव क बसावल नगर हौ, अउर काल भैरव ओनकर रूद्र रूप हयन. बिना काल भैरव के अनुमति के काशी में केव प्रवेश नाही कइ सकत. भैरव के दर्शन बिना बाबा विश्वनाथ क दर्शन पूरा नाही होत. मान्यता हौ कि बाबा विश्वनाथ अपने नगर क लेखा-जोखा क जिम्मा काल भैरव के सौंपले हउअन. शहर के सुरक्षा क जिम्मेदारी काल भैरव पर हौ. ओन्हय काशी क कोतवाल कहल जाला. कोतवाली थाने क प्रभारी भी बाबा काल भैरव हयन. जवने के नाते थाना प्रभारी के कुर्सी पर कवनों पुलिस अधिकारी नाही बइठतन.



बनारस के विश्वेश्वरगंज महल्ला में मौजूद हौ कोतवाली थाना. इहां थाना प्रभारी क कुर्सी हमेशा खाली रहयला. प्रभारी के कुर्सी पर बाबा काल भैरव क चित्र रखल रहयला. थाने में जवने भी अधिकारी क नियुक्ति होला, उ कोतवाल कार्यालय में मुख्य कुर्सी के बगल में एक दूसर कुर्सी लगाइके बइठयला, अउर आपन रोज क कामकाज निपटावयला. सबेरे कार्यालय अइले के बाद प्रभारी निरीक्षक पहिले मुख्य कुर्सी पर विराजल बाबा काल भैरव क पूजा करयलन, फिर कामकाज शुरू करयलन. थाने में हर रोज सुबह-शाम बाबा काल भैरव क पूजा होला. कोतवाली थाने में इ परंपरा कब से शुरू हौ, एकर सही जानकारी केहूं के नाही हौ. मौजूदा प्रभारी निरीक्षक प्रमोद पांडे के अनुसार, इ परंपरा अंगरेजन के जमाने से हौ, जब से इ थाना शुरू भयल हौ, तब से.



चूंकि शहर क सबसे बड़ा अधिकारी यानी कोतवाल स्वयं बाबा काल भैरव हयन, एह के नाते शहर में जवन भी अधिकारी नियुक्त होइके आवयलन, चाहे उ आईएएस होय या आईपीएस, सब पहिले काशी के कोतवाल के दरबार में मत्था टेकयलन, बाबा से अनुमति लेलन, फिर आपन कामकाज शुरू करयलन.



खास बात इ भी हौ कि कोतवाली थाने क आजतक निरीक्षण नाही भयल हौ. कवनो भी डीएम या एसपी थाने क निरीक्षण, या जांच-पड़ताल करय नाही अउतन. अतीत में अगर जे भी थाने के निरीक्षण के बारे में सोचलस, ओकर ओही दिना बनारस से छुट्टी होइ गयल. एक-दुइ घटना अइसन घटल, जवने के बाद फिर कवनों अधिकारी निरीक्षण के बारे में नाही सोचलन.



एसएचओ प्रमोद पांडेय क कहना हौ, ’’जब काशी क कोतवाल स्वयं बाबा काल भैरव हयन, कुल आला अधिकारी नियुक्ति के बाद पहिले इहां आइके मत्था टेकयलन, त भला ओनके थाने क निरीक्षण के करी. निरीक्षण क सीधा मतलब होला बाबा के कामकाज पर अंगुरी उठाइब. शहर क कुल अधिकारी बाबा के अधीन काम करयलन, ओनके अनुमति से काम करयलन. जवने के नाते इहां केव निरीक्षण करय नाही आवत. कोतवाली थाने के ओर केव देखत तक नाही.’’



बाबा काल भैरव क मंदिर कोतवाली थाने के पीछे स्थित हौ. मंदिर के मौजूदा ढांचा क निर्माण 1715 में बाजीराव पेशवा करउले रहलन. मंदिर क निर्माण वास्तुशास्त्र क पूरा ध्यान रखिके कयल गयल हौ. आजतक ढाचा में कवनों बदलाव नाही भयल हौ. मंदिर में हर दिन चार बार बाबा क आरती होला. रात क शयन आरती सबसे खास हौ. आरती से पहिले बाबा के नहवावल जाला, ओनकर साज-श्रृंगार कयल जाला. एह दौरान मंदिर में पुजारी के अलावा दूसर केहूं के अंदर जाए क अनुमति नाही रहत. बाबा के सरसों क तेल चढ़ावल जाला अउर एक ठे अखंड दीया हमेशा जरल करयला.



काल भैरव काशी कइसे अइलन, एकरे पीछे एक ठे पौराणिक कथा हौ. देवता लोग एक दइया ब्रह्मा अउर विष्णु से पूछलन कि ब्रह्मांड में सबसे श्रेष्ठ के हौ. जवाब में दूनों अपुना के श्रेष्ठ बतउलन. देवता लोग जब इहय सवाल वेद अउर शास्त्र से पूछलन त उ भगवान रूद्र यानी शिव के श्रेष्ठ बतउलन. शिव क इ बखान ब्रह्मा के अच्छा नाही लगल अउर उ अपने पंचवें मुंहे से शिव के काफी भला-बुरा कहि देलन. वेद-शास्त्र के ब्रह्मा के मुहे से भगवान शिव क बुराई सुनि के बहुत दुख भयल. एही समय भगवान रूद्र दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट भइलन. ब्रह्मा कहलन कि हे रूद्र तू हमरे सिर से ही पैदा भयल हय. एह के नाते तू हमरे सेवा में आइ जा. ब्रह्मा के व्यवहार पर शिव के बहुत गुस्सा आयल अउर उ भैरव के उत्पन्न कइलन अउर ओन्हय ब्रह्मा पर शासन करय क निर्देश देइ देहलन. भैरव अपने बाए हाथे के सबसे छोटकी अंगुरी के नाखूने से ब्रह्मा क पंचवां मुंह काटि देहलन. भैरव के ब्रह्म हत्या क दोष लगि गयल.



भगवान शिव एकरे बाद भैरव के काशी प्रस्थान करय क आदेश देहलन. भैरव काशी पहुंचलन अउर उहां तपस्या कइलन. एकरे बाद उ ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्त होइ गइलन. जवने स्थान पर भैरव तपस्या कइले रहलन आज ओही ठिअन ओनकर काल भैरव मंदिर हौ. भगवान शिव ओकरे बाद काल भैरव के काशी क सुरक्षा क जिम्मेदारी सौंपि देहलन, कोतवाल नियुक्त कइ देहलन. भैरव के काशी एतना प्रिय लगल कि उ एही स्थापित होइ गइलन. कहल जाला कि काल भैरव के दर्शन से हर बाधा दूर होइ जाला. मान्यता हौ कि काशी में काल भैरव के अनुमति के बिना जमराज भी केहूं क प्राण नाही लेइ सकतन.



काल भैरव क शक्ति क अंदाजा एही बात से लगावल जाइ सकयला कि मुगल बादशाह औरंगजेब ओनके मंदिर के तोड़ि नाही पइलस. विश्वनाथ मंदिर तोड़ले के बाद औरंगजेब काल भैरव मंदिर तोड़य क अपने सैनिकन के आदेश देहलस. मुगल सैनिक मंदिर के तरफ बढ़लन तबय अचानक पागल कुत्तन क एक ठे झुंड सैनिकन के काटय दउड़ल. जवने सैनिकन के कुत्ता कटलन, उ पगलाइ गइलन और एक सैनिक दूसरे के काटय लगलन. इ खबर औरंगजेब के मिलल त उ अपने अंगरक्षकन से अपने ही सैनिकन के मरवाइ देहलस, ताकि पागल सैनिक ओकरे पास तक न पहुंचि सकय. औरंगजेब के समझ में आइ गयल कि काल भैरव मंदिर तोड़य क आदेश देहले क इ परिणाम हौ. औरंगजेब मंदिर तोड़य क आदेश रद्द कइ देहलस, अउर काल भैरव मंदिर जाइके बाबा से गलती बदे क्षमा-याचना मंगलस.

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Tags: Banaras, Bhojpuri Articles, Bhojpuri special, Kaal Bhairav, वाराणसी

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