• Home
  • »
  • News
  • »
  • bhojpuri-news
  • »
  • भोजपुरी विशेष: नवही संन्यासी में रमल भारत

भोजपुरी विशेष: नवही संन्यासी में रमल भारत

स्वामी विवेकानंद भारत आ भारतीयता के जियतार प्रतिमान रहलन, आजुओ बाड़न आउर भविष्यो में बनल रहिहन.

स्वामी विवेकानंद भारत आ भारतीयता के जियतार प्रतिमान रहलन, आजुओ बाड़न आउर भविष्यो में बनल रहिहन.

स्‍वामी विवेकानंद अपना गुरु के परिनिर्वान का बाद उहे रामकृष्ण मिशन के स्थापना कइलन, जेकर शाखा आजु सउंसे संसार में फइलल-पसरल बाड़ी स.

  • Share this:
जु हरेक हलका में कठकरेजी होड़ के जबाना बा. लरिका, किशोर आउर नवहिन के हर हाल में कठिन ललकार के मुंहतोड़ जवाब देबे खातिर खुद के तय्यार राखे के बा. एह से ओह लोग के डेगे-डेग होसला बढ़ावत ऊर्जावान बनवले राखे के जरूरत बा. इहे कारन बा कि पढ़ाई-लिखाई से जुड़ल तमाम महकमा में मोटीवेशन के पढ़ाई हो रहल बा. अइसन कक्षा सकारात्मक सोच आ मनोबल के जगावे-उठावे में अगहर भूमिका निबाहेली स. बाकिर नवकी पीढ़ी के सभसे बड़हन अभिप्रेरना-गुरु रहल बाड़न स्वामी विवेकानंद. उहे ओजस्वी नवही संन्यासी सउंसे दुनिया का सोझा भारतीय गौरव के झंडा गड़ले रहलन,नाहीं त ओह घरी ले लोग भारत के लुटेरन, भिखमंगन आ सपेरन के देश बूझत रहे. उहे अपना गुरुजी के आदेश पाके तमाम मुसीबत झेलत विलायत में देश के डंका बजवलन. लरिकाईं के नरेन्दर आ नरेने आगा चलिके स्वामी विवेकानंद बनलन. ओज से ओतप्रोत नवही संन्यासी. स्वामी रामकृष्ण परमहंस के दुलरुआ चेला. अपना गुरु के परिनिर्वान का बाद उहे रामकृष्ण मिशन के स्थापना कइलन, जेकर शाखा आजु सउंसे संसार में फइलल-पसरल बाड़ी स.

सेसर मंजिल खातिर

नवहिन के ललकारत स्वामी विवेकानंद कहले रहलन-' उतिष्ठत जाग्रत, प्राप्य बरान्निबोधत!'

माने, उठऽ जागऽ, खुद के चीन्हऽ! तब ले मति ठहरऽ, जब ले सेसर निशाना आ मंजिल हासिल ना हो जाउ!

भारत के विश्वगुरु बनावे के पहल
स्वामी जी के महज उनतालिस बरिस के उमिर मिलल रहे. उन्हुकर जनम 12जनवरी,1863के आ महापरयान 04जुलाई,1902के हो गइल रहे. बाकिर ओह छोटे जिनिगी में ऊ सउंसे देश के परिकरमा कइलन आ इहां के तमाम खूबियन से अभिभूत भइलन. अतने ना,इहंवां के मूलभूत मुसीबतन के आत्मसातो कइलन. फेरु त ऊ पच्छिमी देशन में भारत के विश्वगुरु का रूप में नांव-जश दियवावे के दिसाईं रचनात्मक पहल कइले रहलन.

भारतीय संन्यासी दुनिया के मंच पर
खेतड़ी के महाराजा अजित सिंह सभसे पहिले नरेन्द्रनाथ दत्त के स्वामी विवेकानंद के नांव से संबोधित कइले रहलन. महज तीस साल के उमिर में अमेरिका के शिकागो में धर्म महासभा के विश्वमंच पर 11सितम्बर,1893 के दीहल स्वामी जी के ऐतिहासिक भासन आजुओ इयाद कइल जाला. उन्हुकर संन्यासी भेसभूषा देखिए के बुझिला मखौल उड़ावत शूना प भासन देबे के कहल गइल रहे. बाकिर जब ऊ बोले लगलन,त सुननिहारन लोग चकित रहि गइल. दोसर मए वक्ता 'लेडिज एण्ड जेंटलमैन ' के संबोधन से बतकही शुरू करत रहलन. बाकिर विवेकानंद जी के संबोधन रहे-' ब्रदर्स एण्ड सिस्टर आफ अमेरिका!' ई सुनते खूब ताली बाजल आ देखते-देखत स्वामी जी सभकर दिल जीति लिहलन. ऊ भारतीय दर्शन, वसुधैव कुटुंबकम् आउर विशवबंधुत्व के मौलिक चिंतन से आपन अमिट छाप छोड़लन.

लमहर जद्दोजहद
बाकिर ई कामयाबी अचके ना मिलल रहे. एकरा खातिर लमहर संघर्ष करेके परल रहे. खेतड़ी के महाराजा से जवन धन मिलल रहे,ऊ जाहीं में खरच हो गइल. पानी के जहाज से कोलंबो,सिंगापुर,हांगकांग,नागासाकी,याकोहामा बंदरगाह होत ऊ कनाडा के वैंकुवर बंदरगाह पहुंचल रहलन आ फेरु उहां से पैसिफिक रेल राह से शिकागो. धर्म महासभा में जाए खातिर उहां के परिचय-पत्र बनवावल जरूरी रहे. संजोग से रेलगाड़ी में एगो लेखिका मिलली-कैथरिन सैनबर्न,जे स्वामी जी के शख्सियत से बहुत प्रभावित भइली आ उन्हुके मार्फत परिचय-पत्र बनि गइल.

बाकिर शिकागो पहुंचला प फेरु आफत आ गइल. धर्म महासभा के चेयरमैन के पता-ठेकाना भुला गइल,बहुत पूछलो पर केहू बता ना पावल. धन के अभाव में भूखि-पियास से हाल बेहाल. सड़क के फुटपाथ पर बइठिके ऊ अलचारी में गुरुजी के सुमिरत रहलन. तलहीं एगो दंपती के नजर परल. मिसेज जाॅर्ज डब्ल्यू हेल आ मिस्टर जाॅर्ज हेल भगवान के भेजल दूत लेखा आके ना खाली उन्हुका के अपना घर में शरन दिहलन, बलुक अपना संतान नियर नेह-छोह देत सभे मुसीबत से मुकुती दियववलन. फेरु त ओह लोग के चारू बेटी उन्हुकर बहिन बनि गइली.

हाजिरजवाबी
धर्म महासभा के ऐतिहासिक भासन के धमक सउंसे दुनिया में गूंजल. अगिला दिने जब स्वामी जी के मान-सम्मान में जब एगो जलसा भइल, त उहां अनगिनत प्रशंसकन का संगें किछु देखजरुओ लोग मौजूद रहे. उहवां एगो टेबुल पर दुनिया के तमाम धर्मग्रंथ राखल रहलन स. बाइबिल के सभसे ऊपर धइल गइल रहे आ श्रीमद्भगवद्गीता के सभसे नीचे. जइसहीं स्वामी जी मेज का लगे पहुंचनीं,एगो विरोधी बोलल,' देखीं स्वामीजी! राउर गीता सभ धर्मग्रंथन के नीचे दबाइल कराहत बा.' बाकिर स्वामीजी के हाजिरजवाबी सभकर बोलती बन्न कऽ दिहलस. उहां के मुसुकात कहले रहनीं,' राउर सोच गलत बा. एह तरतीब में ई भाव छिपल बा कि हमार गीता ऊ आधार-स्तंभ बा,जवना पर दुनिया के तमाम धर्मग्रंथ टिकल बाड़न स.'

शिक्षा में संगम
स्वामी विवेकानंद राष्ट्रभक्त पहिले रहलन आ संन्यासी बाद में. ऊ चाहत रहलन कि शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्य आ पच्छिमी तकनीक के संगम होखे. उहांके कहनाम रहे-'शिक्षा के मतलब खाली जानकारी दिहल ना होला. शिक्षा के अर्थ होला श्रेष्ठ विचारन के आत्मसात कइल. शिक्षा अनुपम निरमान करेवाली,जिनिगी देबेवाली,चरित्र निरमान करेवाली होखे के चाहीं.एमें कार्यकुशलता का संगें उत्पादनशीलतो होखे. मौजूदा शिक्षा बेवस्था नवही के अपना गोड़ पर ठाढ़ नइखे कऽ पावति. मनई में स्वाभिमान-आत्मविश्वास नइखे जगा पावति. एह से शिक्षा में भारतीय आदर्शवाद आ पाश्चात्य कुशलता (तकनीक) के संगम होखे के चाहीं.'

नारी-शिक्षा
विवेकानंद के नजरिया समन्वयवादी रहे. उन्हुकर इच्छा रहे कि भारत के गरीबी,अशिक्षा,अज्ञानता दूर होखे. एकरा खातिर समरथी विदेशी भारत आवसु. इहां के विचारवान लोग अध्यात्म,जीवनमूल्य आउर शांति के सनेस पच्छिमी देशन में जाके फइलावसु. एह प्रसंग में ऊ महात्मा बुद्ध के उदाहरन देत रहलन,जे बौद्धधर्म के परचार-परसार खातिर दुनिया भर में अपना शिष्यन के भेजले रहलन. ऊहो रामकृष्ण मिशन के किछु गुरुभाई आउर चेलन के विदेश में भेजलन आ विलायत से शिष्या लोग के भारत में ले आके नारी-शिक्षा के काम में लगवलन. लंदन के एगो स्कूल के प्राचार्या रहली मारग्रेट नोबल. स्वामी जी ओह अनन्या शिष्या के भारतीय नांव दिहनीं-भगिनी निवेदिता आ ऊ आपन पूरा जीवन भारत में नारी-शिक्षा आ रामकृष्ण मिशन के कामन खातिर समर्पित कऽ दिहली.

भारतप्रतिमा
स्वामी जी के दिन-रात भारते के फिकिर घेरले रहत रहे. भारत के खोज में उन्हुका सांच के खोज लउकत रहे. उहांके एगो कविता लिखनीं-'ओह ट्रुथ'(ए सांच),जवना में देश के दुरदशा उजागर कइल गइल रहे. सांच कहल जाउ,त स्वामी जी के देशभक्त-समाजसेवी व्यक्तित्वे 'घनीभूत भारत' बनि गइल रहे. भगिनी निवेदिता कहले रहली-'भारत रहे स्वामी जी के गम्हीर आवेग के केन्द्र. भारत रहे उन्हुकर दिवासपना. रात के दु:सपनो भारते रहे. सिरिफ अतने ना,ऊ खुदे हो गइल रहलन भारतवर्ष. हो गइल रहलन रकत-मांस से गढ़ल भारतप्रतिमा.' भगिनी क्रिस्टीन एह बात के आगा बढ़ावत कहले रहली-'जब ऊ 'इंडिया ' शब्द के उच्चारन करत रहलन,त ओमें अतना गर्व, अतना प्रेम,अतना सपना झलकत रहे कि ओकरा के जेही सुने,ऊ भारतवर्ष से प्रेम करे लागे. स्वामी जी के मन में भारत खातिर अतना प्रेम खाली एसे ना रहे कि भारतवर्ष उन्हुकर मातृभूइं रहे. ई प्रेम आदर्श के नेंव पर ठाढ़ रहे. जवना आदर्श खातिर उन्हुकर जिनिगी न्योछावर रहे, ओही आदर्श के ऊ भारतवर्ष में साकार रूप में देखले रहलन. एही से उन्हुका भारत का प्रति अगाध प्रेम रहे. विवेकानंद जदी दोसरो देश में जनम लेले रहितन, तबो भारतवर्ष से ओतने प्रेम करितन. उन्हुका नजर में भारत सत्यस्वरूप रहे.'

जदी भारत के जाने के होखे
रोमां रोलां जब कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर से भारत के जाने के जिज्ञासा जाहिर कइलन,त रवि बाबू सुझाव देले रहलन, 'जदी भारतवर्ष के जाने के होखे,त विवेकानंद के पढ़ऽ! एहू से कि उन्हुका में सभ कुछ सकारात्मक बा. नकारात्मक कुछऊ नइखे.' फेरु त फ्रांसीसी मनीषी रोमां रोलां विवेकानंद के जमिके पढ़लन. तब जाके भारत के गहिराई से समुझलन. उन्हुकर पांती गौर करे लायक बा-'अरविंद घोष के आध्यात्मिक आ मानसिक जीवन रामकृष्ण आ विवेकानंद के जिनिगी आउर बानी से प्रबल रूप से प्रभावित बा. गांधी खुदे ई मनले बाड़न कि विवेकानंद के रचना से उन्हुका भरपूर मदत मिलल रहल बा आ भारत के अउरी दिल से चाहे आ नीके तरे समुझे-बूझे में सहायता मिलल बा. महात्मा गांधी के 'हरिजन' आ रवीन्द्रनाथ के 'मनुष्य नारायण' विवेकानंद के 'दरिद्रनारायण' से प्रभावित बा. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस त एक माने में स्वामी जी के मानसपुत्रे रहलन.'

अद्वैत दर्शन
स्वामी जी के दर्शन रहे-अद्वैत दर्शन. दुनिया में जवन किछु बा,बस एके गो बा. दोसर केहू हइए नइखे. एह से जब हम केहू के दुख दे तानीं,त खुदे के दु:ख पहुंचावत बानीं. दोसरा के सुख दिहला से हमरा सुख मिलेला. एह से सुखी जिनिगी जीए के मूल मंत्र बा-केहू के दुखी ना कइल आ सभके सुख पहुंचावल. ऊ कहत रहलन कि नवही लोग मूर्तिपूजक बनला का जगहा फुटबॉल खेले आ तंदुरुस्त रहे. उन्हुकर तहेदिल से कामना रहे कि नौजवान लोग तेजस्वी,ओजस्वी,कर्मशील आ कला-कौशल से भरल-पुरल रहे.नवही से सच्चा पियार-दुलार का वजह से उन्हुकर जनमदिन (12जनवरी) युवा दिवस का रूप में मनावल जाला.

ऊ महिला लोग से कहले रहलन-'जवन बात हम पुरुष खातिर कहेनीं,ऊहे नारियो लोग से कहब. भारत आ भारतीय धरम मेंबिसवास करऽ. तेजस्विनी बनऽ,आशावान बनऽ! भारतीय होखे के नाते लजा मत,गौरव-बोध करऽ! इयाद राखऽ,हमरा दोसरा देश से जरूर किछु लेबे के परि सकेला, बाकिर दुनिया के अन्यान्य देशन के तुलना में हमनीं में दोसरा के देबे खातिर हजार गुना बेसी कीमती चीजु बा.'

स्वामी विवेकानंद भारत आ भारतीयता के जियतार प्रतिमान रहलन, आजुओ बाड़न आउर भविष्यो में बनल रहिहन. उन्हुकर हरेक बात भारत के आवाज बनिके दुनिया में गूंजत रही आ सभकरा के अभिप्रेरित करत रही. एही में 'युवा दिवस' के प्रासंगिकता सन्निहित बा.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज