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भोजपुरी विशेष – जाड़ा के जोरदार जवाब कउड़ा कथा कहानी के केंद्र रहल हा

सुख-दुख, चिंता-परेशानी सब कउड़ा के आगि में जारि दिहल जात रहल हा.
सुख-दुख, चिंता-परेशानी सब कउड़ा के आगि में जारि दिहल जात रहल हा.

गांव के जीवन के सबका ले विशेष बात रहल हा कि उंहा केहू अकेले ना रह सकत रहल हा. शायद इहे कारण रहल हा कि दू-चार घर के अंतर पर कउड़ा लागत रहल हा. जाड़ा में भोरे आ सांझि के लोग जुट के बतकही करत रहल हा. बातचीत से जाड़ा के साथ ही चिंता भी निपट जाति रहल हा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 11, 2020, 2:22 PM IST
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एगो जमाना में हर मोहल्ला में एगो- दूगो घर अइसन रहत रहल ह सन जहवां जाड़ा का दिन में आदमिन के जुटान होखत रहल ह आ ओहिजा चाह- पानी के जोगाड़ त रहते रहल ह, बीड़ी- सिगरेट, सुरती आ गांजा के भी जोगाड़ रहत रहल ह. कउड़ा माने आगी तापे के सामूहिक स्थान. कउड़ा का चारो ओर खूब बढ़िया से बइठि के आगी तापे के मजा ऊहे जानी जे गांव में रहल बा. कउड़ा तापे वाला लोग अइसन- अइसन संस्मरण, समाचार आ मनोरंजक प्रसंग सुनाई कि आजु के लोकल टीवी चैनल आ रेडियो बुलेटिन फेल बा. आ मजा देखीं कि ओकरा में रंग में भंग डाले वाला कौनो विज्ञापन ना रहत रहल ह. कार्यक्रम में ब्रेक ना रहल ह कि विज्ञापन जबरन देखहीं के परी. टीवी पर त रउरा चैनलो बदलि देब बाकिर इंटरनेट पर कुछु पढ़तानी, वीडियो देखतानी तले बीचे में विज्ञापन आ जाई आ स्किप के बटनो ना रही. अब झेलीं विज्ञापन. त कउड़ा पर कौनो विज्ञापन के झंझट ना रहल ह.

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रोग - व्याधि से लेकर ज्ञान तक के चर्चा
कउड़ा पर खूब भोरहीं आवे वाला लोग कम रहत रहल ह. छव से लेके आठ बजे ले आवे वाला ढेर रही लोग. कतने लोग त बाजार में भेंटाई त कही कि ठीक बा, अभी त तेजी में बानी, काल सबेरे फलाना के कउड़ा पर भेंट होई. त ऊ एगो बतकही के अड्डा रहल ह. रउरा कवनो रोग भइल बा. दवाई करावत- करावत थाकि गइल बानी. अकिल काम नइखे करत. त कउड़ा के लोग बता दी कि डाक्टर- बैद छोड़ीं, रउरा हई खरबिरउवा दवाई करीं. राउर रोग ठीक हो जाई. आ रोग तनी गंभीर बा, त फलाना बैद जी, हकीम जी भा डाक्टर साहेब किहां चलि जाईं. त कउड़ा लोक सेवा के भी बड़ा बढ़िया जगह रहल ह. गांव- देहात में अइसहीं बड़ा खुला जगह रहेला. त खूब सनसनात हवा सीधे हाड़ के छू देला. कउड़ा वाला लोग आगी से आ बातचीत से अपना के एतना गरम कइले रही लो कि जाड़ा के बापो ना कुछ बिगाड़ सकेला. कउड़े पर सादी- बियाह के बात, मोकदिमा में गवाही के बात, झगड़ा बा त सुलहा के बाति, कुछु कीने के बा त कहां सस्ता आ टिकाऊ सामान मिली, एकर बात आ गांव जवार में कहां- कहां चोरी- घटिहाई होता ओकर बात, सुनत रहीं बाकिर राउर मन ना भरी. बाकिर एही बीच में रामचरितमानस आ भगवद्पुराण के कथा- कहानी आ साधु- संत, जगता मंदिर, मेला आ जज्ञ के बात भी होत रहल ह.
जब बड़ बुजुरुग लो रही त शुद्ध आ सात्विक बाति के प्रधानता रहबे करी. भले ऊ लोग चलि गइल त कुछ देर हंसी मजाक में रास- रंग के भी कुछ बात हो जाई. भूत- प्रेत आ ओझा गुनी के बात हो जाई. आ कौनो मेहरारू मन- मिजाज से टांठ बिया त ओकरा वीरता आ ढीठता के प्रसंग भी चली कि फलनिया से सब डेराला. त एही से कहनी हं कि कउड़ा लोकल टीवी चैनल आ रेडियो बुलेटिन से कईगुना बढ़िया रहल ह. कउड़ा पर एगो आत्मीयता के माहौल रही. कउड़ा पर बइठकी करे वाला केहू ना आइल त बाकी लोग चिंता में परि जाई कि फलाना ठीक बाड़े नू. काहें नइखन आवत. कहीं गइल बाड़े, कि केहू हित- नात आइल बा कि बेमार बाड़े- आखिर का बाति बा? त सुख- दुख के पुछवइया के एगो सहारा रही.



राजनीति प भी नजर
आ कउड़ा पर राजनीति के बात? ई त पुछबे मत करीं. एक बार राजनीति के बात सुरू होखे त बस देस- बिदेस के सभ नेता लोगन के किरिया- करम हो जात रहल ह. आ कौनो नेता के बड़ाई होखे लागी त ओहू के आकास पर चढ़ा दिहल जात रहल ह. एक्सट्रीम लेवेल पर बतकही होखत रहल ह. कउड़ा पर एगो खास इंटरवल के बाद कौनो लोकल देवता के कहानी जरूर सुनात रहल ह. एगो रहले ह माया बाबा. एगो बरगद के पेड़ के चारो तरफ से घेरि के उनुकर स्थान बनावल रहल ह. अब त उनुकर एगो मंदिरो बनि गइल बा. त माया बाबा चमत्कारिक देवता मनाले. कउड़ा पर उनुका के लेके कतने घटना सुने के मिलत रहल ह. रउवो एगो कथा सुनीं.

कथा के अड्डा

एक बेर एगो छोट व्यापारी के बलिया शहर से गांवे लौटला में देरी हो गइल. बलिया शहरे में हिसाब- किताब करत देरी हो गइल. ओइजा से ओकर गांव 12 किलोमीटर दूर रहे. रास्ता में माया बाबा के स्थान रहे. ओकर ओही बेरा घरे आइल जरूरी रहे. काहें से कि ओकरा मेहरारू के तबियत खराब रहे. बस ऊ एगो दोसरा व्यापारी से साइकिल मंगलस आ चल दिहलस गांवे. रास्ता भर- जय माया बाबा, जय माया बाबा के जाप करत गइल. ओह घरी रास्ता में एगो अइसन स्थान परे जहवां रात में रास्ता चले वाला के लूट- पाट होत रहल ह. डकइत टाइप के लोग सक्रिय रहत रहल ह. अब त इ कुल खतम हो गइल बा. बाकिर ओह घरी रहे. जब डकइत लोगन के जगह आइल त बीच रास्ता में में एगो साधु व्यापारी के रोकले- बेटा कहां जइब? व्यापारी जानि गइले कि हो ना हो इहे माया बाबा हउवन. व्यापारी साइकिल रोकि के अपना गांव के नांव बतवले.

माया बाबा कहले कि चल तोहरा के गांव ले पहुंचा दीं. माया बाबा के हाथ में एगो लाठी रहे. व्यापारी कहले कि बाबा रउरा पैदल बानी आ हम साइकिल से. कइसे संगे चलबि. त ठीक बा हम साइकिल से उतरि के पैदल चलतानी. साधु कहले कि ना, तू साइकिल पर चलत रह, हम तोहरा संगही रहब. व्यापारी साइकिल से चले लगले. कइसन चमत्कार. साइकिल तेज चलावला पर भी साधु बाबा का जाने कइसे एकदम उनका एकदम पिछहीं रहसु. आ ऊ दउरबो ना करसु. आखिरकार व्यापारी के साधु बाबा ओकरा गांव तक पहुंचा दिहले. आ लौटे के बेरा आसिरबाद दिहले- भगवान के कृपा तोहरा पर बनल रहे. सबेरे व्यापारी गांव के लोगन से ई किस्सा सुनवले. सभ कहल कि ऊ माया बाबा रहले ह. पूरा जवार के रक्षा ऊहे करेले. जे उनुका के भक्ति से पुकारी, ऊ दउरल चलि आवेले.

किस्सा चलते रही
ई किस्सा खतम होत- होत दोसरका आदमी माया बाबा के एगो अउरी कहानी सुरू क दे. ओह दिन कउड़ा खतम होखे तक माया बाबा के बात के अलावा कुछु ना होखे. त गांव में कउड़ा तापे के जवन आनंद रहल ह, ओकर कवनो तुलना भा दोसर उदाहरण रउवा ना पाइब. ऊ मिठास, ऊ गरम ताप आ रोचक कहानी किस्सा. कहीं- कहीं अतिश्योक्ति अलंकार के प्रयोग भी होत रहल ह. बाकिर ओकरो एगो सीमा रहत रहल ह. अनर्गल कुछु ना होई. कउड़ा तापि के रउरा कई गो सकारात्मक ऊर्जा लेके घरे आवत रहनीं ह.
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