भोजपुरी विशेष जानी छठ पूजा के का ह कहानी

छठ पर्व के कहानी पुराण से ह आ लोक आस्था में घुल मिल गइल बा.
छठ पर्व के कहानी पुराण से ह आ लोक आस्था में घुल मिल गइल बा.

छठ पूजा के दिन पूजा तऽ सुरूज बाबा के होला बाकी ढेर गीत छठी मइया के गावाला. आखिर ई छठी मइया के हई . छठी मइया के बारे में पढ़ी एह आलेख में.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 19, 2020, 11:42 AM IST
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सांझ होखे वाला बा , धूप खतम हो रहल बा , किरिन डूबे वाला बा , आसमान लाल हो चलल बा , तबहीं कवनो पोखरा , नदी भा तालाब में ढेर औरत आ मरद लोग पानी में डूबकी मार - मार के नहा ताड़े . कई लोग आम के दतुअन से मुंह धो के कुला - मुखारी कऽ कके नहाता – धोवाता. कई लोग नहा - धोवा के कमर भऽ पानी में गीला कपड़ा पहिर के खड़ा बा. परबइतिन लोग पछिम ओरे मुंह कऽ के सुरुज बाबा के गोड़ लागता, उन्हुकरा के निहारता, टकटकी लगइले बा. तालाब के किनारे ढेरे डागारा रखल बा. डागारा में कइगो फल आ सामान रखल बा. पानिए में ऊख भी गाड़ल गोइल बा. देखते - देखत ढेरे लोग अपना - अपना माथा पऽ डागारा, दउरा आ हाथ में ऊख लेके गली आ खोरी से आवता. जे दउरा आ ऊख लेलेबा उ लोग पैर में जूता चपल नइखे पहिरले. कवनो - कवनो महिला भा आदमी भुंइयापरी करताड़े. उ लोग बार - बार जमीन पऽ सूतऽता आ एगो बाती से जमीन के नांपता आ आगे बढ़ता. आज गली आ खोरी पानी से धोवाइल बा. परबइतिन के संगे- संगे अउरी मेहरारू आ लइकी लोग झूंड बना - बना के तालाब तऽ आवता. उ लोग खूबे गीत गावता . उ लोग के मुंह से गीत निकलत.
कांच ही बांस के बहंगिया
बहंगी लचकत जाय
पेन्ह ना कवन बाबा पियरिया
दउरा घाटे पहुंचाय
बाट जे पूछेले बटोहिया
इ दल केकरा के जाय


आन्हर हव ए बटोहिया
इ दल सूरुज बाबा के जाय
इ दल छठी मइया के जाय
इ दल छठी मइया के जाय

सूर्य देवता के पर्व

कातिक महीना के शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन बिहार, झारखंड आ पूरबी उत्तरप्रदेश में लोग बड़ी धूमधाम आ आस्था के साथ छठ पूजा करेला. ओह दिन सांझ के आ अगिला दिन सबेरे में सुरुज बाबा के पूजा होखेला आ गीत गावाला. अइसे तऽ भगवान सुरुज के पूजा हिंदू के घरे रोजो - रोजो होखेला . लोग सबेरे - सबेरे नहा - धोवा के सुरुज भगवान के जल चढ़ावेला . कहल जाला कि लोग जब कोई के पूजा करेके शुरुआत कइलें तऽ ओह में सुरुज भगवान सबसे प्रमुख रहीं . भगवान से हमनी के जीवन चलेला , एकरा संगहीं एह भगवान के हमनी के रोज देखत भी बानी जा . सबेरे से सांझ तक उन्हुकरा के महसूस करऽ तानी जा . जेकर पूजा घरे - घरे होला फिर लोग कातिक महीना में शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन खास रुप से करेला ? धेयान देला पऽ ओह दिन जवन गीत गावल जाला ओह में छठी मइया के गीत खूबे गावाला. छठी मइया के कवनो पूजा ना होखे बाकी गीत होला . ओह समय में छठी मइया के अलग - अलग काम खातिर अलग-अलग बखान होला . एगो गीत में छठी मइया छठ पूजा के तैयारी के लेके बात करऽ ताड़ी. उ कहऽ ताड़ी कि पूजा के समय आ गोइल आ अबहीं घाट भी ना बनल . घाट पऽ घास पात लागल बा. ओइसे इ सब देर से होखबो करेला . लोग गोधन पूजा के दिन पीठा खा के घर से कुदारी लेके नहर , तालाब , आहारा भा पोखरा पऽ जाला आ घाट के साफ - सफाई कऽ के ओहिजा गीला माटी से एगो गोल आकार के घाट बना देला . जब लोग पूजा करे ओहिजा जाला तऽ ओहिजे बइठेला आ गोल घाट पऽ लोटा रखेला . कतहुं - कतहुं स्तुप नियन भी बनेला . लोग मनत के अनुसार पांच मंजिला तक बनावेला . छठ के तैयारी के लेके एगो गीत देखीं.
कोपी - कोपी बोलेली छठी मइया
सुनऽ ए सेवक लोग
मोरा घाटे दुबिया जनम गइली
मकड़ी बसेर लेली
हंसी - हंसी बोलेले कवन सिंह
सुनऽ ए छठी मइया
रउआ घाटे दुबिया छिलाई देबो
मकड़ी उजारी देबो
चंदन पड़ोरी देबो
दुधवो अरघ देबो.

पुराण से लोकगीत तक 

छठी मइया के हई , एकरा के लेके ढेरे बात होखेला .कोई कुछ कहेला तऽ कोई कुछ . लोकगीत में आ लोक किंवदंती में कुछ बात बा तऽ पौराणिक कथा में कुछ अउर . कइगो कथा बा , पौराणिक कथा में सबसे अधिक जवन सुनल जाला उ अइसे बा. राजा प्रियव्रत आ महारानी शतभिद्या के कवनो संतान ना रहे . तब संतान खातिर महर्षि कश्यप यज्ञ करवलें. यज्ञ के बाद राजा - रानी के एगो बेटा तऽ भइल बाकी उ लइका मरल रहे . एकरा के देख के सब कोई रोवत रहे, बिलखत रहे . ओही घरी आसमान से एगो रथ आइल . ओह रथ में एगो औरत बइठल रही. सब लोग उन्हकर स्तुति कइलस . ओकरा बाद उ औरत लइका के देह आ माथा के छू दीहली . लइका जिंदा हो गइल . तब लोग उन्हुकरा बारे में पूछलस तऽ उ कहली कि हम भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्री हईं आ हमार नाम षष्ठी हऽ . ओकरा बाद उ आसमान ओरे चल गोइली . तब से महाराज षष्ठी के पूजा के आयोजन करे लगलन . उन्हुकरा संगे - संगे लोग भी करे लागल. . एकरा संगहीं कइगो गीत में भी कहल गोइल बा कि छठी मइया के पूजा कइला से बेटा के कवनो कष्ट ना होखे . एकर बखान एह गीत में होखता .
पलंग पऽ सुतेली छठी माता
जाटावा देली फहराय
ओही मुहे अइलन कवन सिंह
जाटावा लिहलन बटोर
तड़पी के बोलेली छठी माता
हमरा अंगानावा केइ भइले खाड़
बिनती से बोलले कवन सिंह
जाटावा लेले बानी बटोर
जियस - जागस तोहार बालाकावा
परबत लिहल बटोर .

एगो दोसर गीत में एगो बरती छठी मइया के पूजा करऽ ताड़ी तऽ उन्हुकरा से बेटा तऽ मांगते बाड़ी , बेटी आ दामाद भी मांगऽ ताड़ी . बेटी के मांगल बहुत बड़ बात बा, काहे से कि ढेर लोग बेटे चाहेला . देखीं एह गीत में-
चार पहर राति जल , थल सेइना
सेइना चरन तोहार ए छठी मइया
दरसन दीहीं ना आपन
मांगु - मांगु तिवई कवन फल मांगेलु
जे तोहरा हिरदय समास
रुनुकी - झुनुकी बेटी मांगिना
पढ़ल पंडितवा दामाद
घोड़वा चढ़न के बेटा मांगिना
गोड़वा लागन के पतोह
आपना के मांगिना अवध सिन्होरवा
जनम - जनम एहवात
ए छठी मइया.

ओइसे छठी मइया के कवनो रुप भा आकार के बखान कतहुं नइखे भइल . अगर उ ब्रह्मा जी के मानस पुत्री रहती भा कवनो देवी रहतीं तऽ उन्हुकरा रुप के भी बात होइत . उन्हकर चित्र आ मूर्ति भी बनीत . उन्हकर मंदिर भी बनावल जाइत . बाकी उन्हकर मूर्ति भा निशानी नइखे . फिर भी एगो लोक गीत में उन्हुकर बाल के बखान होता . देखीं एह गीत में-
केकर लाली - लाली अंखिया
केकर लंबी - लंबी केश
सुरुज बाबा के लाली - लाली अंखिया
छठी मइया के लंबी - लंबी केश .. .

कुछ विद्वान लोगन के कहनाम बा कि कातिक महीना में शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन छठ पूजा होला . सुरुज बाबा पूजा होला. तऽ ई जवन षष्ठी के दिन बा , समय बा, काल बा उतरायन में जाए के, उहे षष्ठी हऽ . षष्ठी शब्द छठी बन गोइल . लोग षष्ठी के बदला में छठी बोले लागल . हर साल भगवान सुरुज उतरायन में जालन तऽ एह बात के इयाद रखे लागल आ रात भर जाग के ओह प्रक्रिया में शामिल होखे लागल . अब रहल बात मइया के छठी शब्द औरत के नाम जइसने बा , ओकरा संगे मइया जोड़ दिहलस लोग . दोसर बात कि शुरू से पूजा - पाठ औरतें सब जादा करेला. पहिले छठ भी औरत सब ही करत रही . ई लोग उन्हुकरा के माई कहके आपन सब कुछ मान लिहली . माई सबसे करीब होखेली . उन्हुकरा संगे अलग लगाव होला . समय बीतत गोइल आ गीत - गवनई में उन्हकर बखान होखत गोइल . छठी के दिन सांझ के पानी में खड़ा होके सुरुज बाबा के करघ देला से कइगो रोग ठीक हो जाला . पौराणिक कथा, लोक जीवन आ लोक कथा में एह बात के कहल गोइल बा . कइगो विचारक भी कहले बाड़ें कि सुरुज के जल देला से कइगो रोग ठीक हो जाला. वैज्ञानिक नजर से भी कहल जाला कि छठ के दिन सांझ के आ ओकरा बिहान भइला सबेरे के पानी में खड़ा होखे से सुरुज बाबा के किरन जब पानी पऽ पड़ के शरीर पऽ आ चेहरा पऽ रिफलेक्ट होला तऽ ओह से कइगो रोग ठीक हो जाला . ओह घरी अलग-अलग रंग के किरन निकलेला आ शरीर पऽ पड़ेला ओह से छोटे - छोटे रोग के साथे कोढ़ी अइसन रोग भी ठीक हो जाला . लोग निरोग हो जाला .
ओइसे बात चाहे जवन भी होखे . एकरा बारे में शोध करेके जरुरत बा . बहुत लोग करत भी बाड़ें . बाकी छठ पूजा आ छठी मइया से आम लोग के जवन लगाव बा , आस्था बा ओकरा के भुलावल ना जा सकेला .
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