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भोजपुरी में पढ़ें- कोरोना के असर सब पर पड़ल लेकिन राजनीति पर नाहीं

भोजपुरी में पढ़ें- कोरोना के असर सब पर पड़ल लेकिन राजनीति पर नाहीं

कोरोना के दौरान भी एक दूसरी पार्टी के खिंचाई चलत रहल.

कोरोना के दौरान भी एक दूसरी पार्टी के खिंचाई चलत रहल.

असल में देश के हवा में ही राजनीति घुलि गयल हौ. लोग भोजन-पानी के बिना भले रहि जाय, लेकिन राजनीति के बिना नाही रहि सकतन

देश में राजनीति से खाली जनतय नाही, कोरोना जइसन भयानक बीमारी भी पस्त हौ. जवने कोरोना से पूरी दुनिया थर थर कांपत हौ, ओह कोरोना के हमरे देश क राजनीति ठेकाने लगाइ देहले हौ. कोरोना सबकुछ ठप्प कइ देहलस, लेकिन राजनीति क एक ठे रोआं तक टेढ़ नाही कइ पइलस. चाहे सरकार गिरावै क काम होय या सरकार बनावै क काम, चुनाव होय या चयन क काम, राजनीति अपने पूरी मस्ती से चलत हौ. नवरातर में दुर्गा मइया क पूजा नहीं भयल, पंडाल मूर्ति, रामलीला, दशहरा, मेला-ठेला क अनुमति नाही मिलल. लेकिन राजनीति पर कौनो रोक-टोक नाही हौ.

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बिहार में चुनाव, बाकी राज्यन में उपचुनाव भयल, तनिखौ लगल कि देश में एतना भयानक कोरोना बीमारी हौ? नेता से लेइके जनता तक, सब राजनीति के रंग में डूबल हौ. कोरोना के भागय क पैड़ा नाही मिलत हौ. इ राजनीति क ताकत हौ भइया. जवने से कोरोना भी कांपत हौ.

असल में देश के हवा में ही राजनीति घुलि गयल हौ. लोग भोजन-पानी के बिना भले रहि जाय, लेकिन राजनीति के बिना नाही रहि सकतन. हमरे नेता लोग भी एह मामले में जनता क पूरा खियाल रखयलन. राजनीति क पूरा डोज जनता के समय-समय पर देहले जालन. बहुत बड़ा एहसान हौ भइया. कोरोेना के नाते जब पूरे देस में लाकडाउन लगल, तब भी हमरे नेता लोग अपने धरम से पीछे नाही हटलन.

कोरोना के शुरुआत से ही देखा त कुल बात सीसा की नाही साफ होइ जाई. जब कोरोना देस में फइलत रहल, तब संसद चलत रहल. संसद में सरकार क लोग बोलत रहलन कि भारत में कोरोना क कौनो संकट नाही हौ. दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी फरवरी से ही डफली बजावत रहलन कि देश में कोरोना क बहुत बड़ा संकट आवत हौ, बहुत बड़ा संकट आवत हौ. लेकिन ओनकर सुनय के केव तइयार नाही भयल.

इ कुल चलतै रहल तबतक मध्य प्रदेश में राजनीति क बड़का नाटक शुरू होइ गयल. ई नाटक कर्नाटक तक पहुंचि गयल. भयल ई कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के अगुआई में कांग्रेस क 22 विधायक बागी होइ गइलन. कांग्रेस बड़ा जोर लगइलस कि विधायक वापस आइ जाय, लेकिन दाल नाही गलल. दूसरी ओर भाजपा बहुमत साबित करय के मांग पर चपि गइल. मामला सुपरिम कोर्ट तक पहुंचल. अंत में 20 मार्च के बहुमत साबित करय से पहिलय मुख्यमंत्री कमलनाथ इस्तीफा देइ देहलन. राज्य में नई सरकार बनावय क भाग-दउड़ शुरू होइ गयल. कोरोना भीतरय-भीतरय जड़ जमावत रहल.

कमलनाथ बाद में पत्रकारन से रोना रोइलन कि खाली ओनकर सरकार गिरावय बदे लाकडाउन देरी से लगाइ गयल, काहे से कि जइसय सरकार गिरल लाकडाउन क घोषणा कइ देहल गयल. कमलनाथ आरोप लगउलन कि सरकार कोरोना से लड़ाई क इंतजाम करय के बदले मध्यप्रदेश सरकार के गिरावय के जुगाड़ में लगल रहल.

एह बीच, जांच अउर दवाई क भरपूर व्यवस्था न रहले से कोरोना अंदर अंदर बहुत फइलि गयल. नतीजा ई भयल कि 21 दिना बाद भी लॉकडाउन बढ़ावै के पड़ल. सबकुछ बंद होइ गयल. जे जहां रहल उ ओही फंसि गयल. सबसे जादा परेशान दिहाड़ी मजदूर भइलन. न रहय क ठेकाना न खाये क ठेकाना. भूखल-पियासल सब पैदलय निकलि पड़लन अपने-अपने गांव. केतना मजदूर बेचारे रस्तै में एक्सीडेंट में मरि गइलन. अब मजदूरन के मदद पर भी राजनीति शुरू होइ गयल.

राहुल गांधी 16 मई के नई दिल्ली के सुखदेव विहार में सड़़क किनारे 25 मजदूरन से मुलाकात कइलन. ई सब हरियाणा से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड पैदलय जात रहलन. राहुल मजदूरन क दुखड़ा सुनलन अउर सबके खाये-पीये क व्यवस्था से लेइके गांव तक छोड़य क जुगाड़ बनउलन. मजदूरन क मदद करब कौनो गलत त नाही रहल, लेकिन भाजपा के ई मेल-मुलाकात अच्छा नाही लगल. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण राहुल गांधी पर कोरोना संकट पर राजनीति करय का आरोप लगाइ देहलिन.

राहुल गांधी पूरे लाकडाउन भर सरकार पर बदइंतजामी क आरोप लगावत रहलन. गरीबन के सीधे नगद पइसा देवय क मांग भी कइलन. सरकार बाद में मुफ्त राशन, रसोई गैस सिलिंडर, महिला जन धन खातन में पांच-पांच सौ रपिया के साथ ही गरीबन क कई तरह से मदद कइलस. लेकिन जेतने क जरूरत रहल, ओतना मदद नाही होइ पइलस. एके लेइके नेतन के बीच हुमची-हुमचा बराबर चलल.

लाकडाउन लगातार बढ़उले से प्रवासी मजदूरन के गांव तक पहुंचावय क बहुत बड़ी समस्या पैदा होइ गइल. एके लेइके राजनीति भी शुरू होइ गइल. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश में जमि के राजनीति भइल. चुनाव रहल न इहां. कौनो अइसन पार्टी नाही रहलिन जवन प्रवासी मजदूरन के घरे पहुंचावय के राजनीति में न कूदल होय. मजदूरन के लेइके सबसे गरम राजनीति उत्तर प्रदेश में भइल. राजस्थान से लगभग 50 मजदूर एक ट्रक में सवार होइके मध्यप्रदेश जात रहलन. उत्तर प्रदेश के औरैया में 16 मई के मजदूरन क ट्रक एक दूसरे ट्रक से टकराइ गयल, 25 मजदूर मरि गइलन. कुल विपक्षी पार्टी सरकार पर टूटि पड़लिन.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी त मजदूरन के घरे पहुंचावय बदे बस लेइके मैदान में उतरि आइलिन. उत्तर प्रदेश सरकार अउर कांग्रेस के बीच बस चलावय क मुद्दा एतना गरमायल कि कई दिन तक धुंआ उड़त रहि गयल. एक हजार बस क नकली सूची देवय के आरोप में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू अउर प्रियंका गांधी के सचिव संदीप सिंह पर एफआईआर होइ गयल. लल्लू बेचारे जेल भेजि देहल गइलन. सैकड़न बस उत्तर प्रदेश के सीमा पर कई दिन तक खड़ी रहि गइलिन, लेकिन सरकार टस से मस नाहीं भइल, बस नाही चलि पइलस. हा, राजनीति खूब चलल.

प्रवासी मजदूरन क मुद्दा एही ठिअन खतम नाही भयल. सरकार पर दबाव एतना बढ़ल कि अंत में विशेष रेलगाड़ी चलावय क निर्णय लेवय के पड़ल. असल में सरकार के पतय नाही रहल कि देस में एतना प्रवासी मजदूर हयन अउर लाकडाउन के बाद सबके घरे पहुंचावय क एतनी बड़ी समस्या पैदा होइ जाई. पहिली रेलगाड़ी पहिली मई के यानी मजदूर दिवस पर तेलंगाना के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से लगभग 1200 मजदूरन के लेइके झारखंड के हटिया बदे रवाना भइल. एकरे बाद त हर शहर से विशेष रेलगाड़ी शुरू होइ गइल, अउर संगे-संगे राजनीति भी. मजदूरन से केराया वसूलय क खबर आइल त विपक्ष सरकार पर चढ़ि बइठल. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी घोषणा कइलिन कि केराया कांग्रेस देई. हर प्रदेश में कांग्रेस क लोग टिकट खरीद-खरीद के मजदूरन के बांटलन. केराया क मामला सुपरिम कोर्ट तक पहुंचि गयल. कोर्ट सरकार के निर्देस देहलस कि मजदूरन से केराया कौनो कीमत पर न लेहल जाय.

अबही तक त कोरोना पर राजनीति चलत रहल. असली राजनीति एकरे बाद शुरू भयल. भाषणबाज नेतन के एतना दिना मुंह बंद कई के रहब कौनो सजा से कम नाही रहल. लेकिन भाषण देय त देय कहा, अउर कइसे. अब नेता लोग वर्चुअल भाषण क रस्ता ढूढ़ि निकललन.

एकरे बाद राज्यसभा क चुनाव शुरू होइ गयल. चुनाव में कोरोना क कुल प्रोटोकाल उठाइके ताखे पर रखाइ गयल. विधायकन क बाड़ाबंदी से लेइके कुल खेल भयल. एह दौरान कई लोग संक्रमित भी भइलन. लेकिन का फरक पड़ल?

कोरोना बदे एक-दूसरे के जिम्मेदार ठहरावय क भी खेल कम नाही खेलल गयल. कभौ तबलीगी जमात निशाने पर रहल त कभौ गुजरात में डोनाल्ड ट्रंप क कार्यक्रम. एक राज्य दूसरे राज्य से भी आपन हिसाब-किताब पूरा कइलन अउर आपन-आपन सीमा सील कइ देहलन. कोरोना क कम मामला देखाइके आपन बहादुरी बघारय क भी राजनीति खूब भइल. शायद इहै कारण हौ कि आज आपन देस कोरोना के मामले में दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर पहुंचि गयल हौ. होइ सकैला कोरोना में विश्वगुरू भी बनि जाय.

एही बीच लद्दाख में चीन के साथ एलएसी पर तनातनी शुरू होइ गयल. खबर आइल त विपक्ष हाय-तोबा मचावय लगल. सरकार पर मामला दबावय-छिपावय क आरोप लगल. सरकार भी विपक्ष पर चीन क भाषा बोलय क आरोप ठोकि देहलस. गलवान घाटी में 15 जून के अपने 20 जवानन के शहीद होवय क खबर आइल त असली मामला खुलि के सामने आयल. कांग्रेस केंद्र सरकार पर आंख गुरेरय लगल. सर्वदलीय बैठक बोलावय क मांग कइलस. प्रधानमंत्री मोदी 19 जून के सर्वदलीय बैठक बोलइलन. बैठक में भी कांग्रेस क मुंह सोझ नाही भयल.

अब का, अब तक कुल खुलि गयल हौ. राजनीति क मैदान भी. राजनीति क खेलाड़ी क्रिकेट थोरौ खेलिहय, ओनसे एकर उम्मीद लगाइब भी मूर्खता हौ. क्रिकेट त खुदय देस में नाही होइ पइलस. आइपीएल संयुक्त अरब अमीरात लेइ जाए के पड़ल, उहो बिना दर्शकन के, खाली स्टेडियम में. देस में चुनाव, उपचुनाव होइ गयल, किसानन क आंदोेलन चलत हौ. हर बीमारी क दवाई खाली राजनीति हौ, एकदम से रामबाण. कोरोना का बिगाड़ि लेई. हम सबके एह व्यवस्था पर गर्व भी हौ. नाही त महामारी से मसान बनि चुकल देस में आर्थिक तबाही अउर बेरोजगारी के मलबा पर बइठि के नेतन क ई भाषण सुनय के न पड़त.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

Tags: Article in Bhojpuri, Corona, Politics

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