भोजपुरी में पढ़ें - कोरोना से लड़ि के धीरे-धीरे पटरी पर आवत हौ बनारस

काशी के कारोबार तीर्थ यात्री अउर पर्यटक पर बहुत निर्भर करेला.

काशी के कोतवाल के पुजारी से लेकर किराना का धंधा करे वाले, होटल चलावे वाले से लेकर नाव चलावे वाले तक सब पर कोरोना काल भारी पड़ल ह. सबके धंधा मंदा हो गयल रहल. अब लोगन के उम्मीद हव स्थिति ठीक रही त काम धंधा फिर पटरी पर आई.

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बाबा विश्वनाथ क नगरी काशी के पुराण में पूरी दुनिया से अलग बतावल गयल हौ. लेकिन कोराना महामारी के मामले में काशी क हालत दुनिया से अलग नाही हौ. कोरोना के नाते पूरे देश के साथ काशी भी बंद रहल. काशी विश्वनाथ मंदिर से लेइके संकटमोचन मंदिर तक शहर क कुल मंदिरन क कपाट, घाट, हाट, होटल लॉकडाउन के दौरान बंद रहलन. काशी यात्रा के दौरान देखय के मिलल कि कोरोना महामारी के आठ महीना बाद भी बनारस क मस्ती पूरी तरह लौटल नाही हौ. इ बात अलग हौ कि सड़क पर लोगन क आवाजाही बढ़ि गयल हौ, कोरोना के प्रति सबके भीतर डर अब ओतना नाही रहि गयल हौ, लेकिन लोगन के चेहरा पर भविष्य के लेइके उदासी हौ, साथ ही उम्मीद भी हौ कि धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर आइ जाई, कुछ दिना में सबकुछ ठीक होइ जाई.

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32 लाख से ज्यादा सैलानी आवयलन

काशी के देश क सांस्कृतिक राजधानी कहल जाला, दुनिया क एक सबसे पुराना शहर भी मानल जाला. इहां काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर, पिशाचमोचन, गंगा घाट, कबीर दास क जन्मस्थली लहरतारा, क्रियायोग क जनक लाहिड़ी महाशय क जन्मस्थली, भगवान बुद्ध क स्थली सारनाथ, पंचकोसी परिक्रमा अउर रामनगर क किला क बहुत मान हौ. काशी पुराने जमाने से शास्त्रीय संगीत अउर विद्या क केंद्र रहल हौ, काशी एक विरासत शहर हौ, जवने के नाते दुनिया भर से पर्यटक इहां घूमय आवयलन. एक अनुमान के मुताबिक इहां हर साल 32 लाख से अधिक देसी-विदेशी पर्यटक आवयलन, अउर एही पर्यटकन के भरोसे तामाम लोगन क रोजी-रोटी चलयला. होटल कारोबारी, दुकानदार, रिक्शा चालक, नाव चलावय वाला माझी, पंडा-पुजारी, पुरोहित सबकर जिनगी पर्यटकन पर ही निर्भर हौ. लेकिन कोरोना के नाते सबकर धंधा चउपट होइ गयल हौ.

शहर में हालांकि अब कुल चीज खुलि गयल हौ, लोगन के मुंहे से मास्क भी लगभग उतरि गयल हौ. लेकिन गंगा घाट से लेइके मंदिरन तक में आदमिन क ओतना आवाजाही नाही हौ, जेतना कोरोना से पहिले रहल. स्थानीय लोगन क कहना हौ कि अबही तक 25 प्रतिशत से लेइके 40 प्रतिशत तक ही आवाजाही शुरू भइल हौ. हालत में धीरे-धीरे सुधार होत हौ, लेकिन जबतक पर्यटकन क शहर में आवाजाही शुरू न होइ जाई तबतक हालत पूरी तरह न सुधरी.

होटल कारोबार पर बहुत बुरा असर

पर्यटकन के न रहले से सबसे बुरा असर होटल कारोबार पर पड़ल हौ. बनारस में छोटा-बड़ा लेइके लगभग साढ़े पांच सौ होटल हयन अउर एतने होटलन से 40 हजार अधिक लोगन क रोजी-रोटी जुड़ल हौ. लेकिन आज के तारीख में होटल क बुकिंग लगभग शून्य होइ गयल हौ. होटल कारोबारी, कैंट स्थित होटल रिलैक्स क मालिक हरीश सिंह क कहना हौ कि ’’कोरोना के नाते बनारस में होटल कारोबार पूरी तरह चउपट होइ गयल हौ. बुकिंग न के बराबर रहि गयल हौ. जल्दी सुधार होवय क कौनो उम्मीद भी नाही हौ.’’ हरीश क कहना हौ कि ’’होटल पर्यटकन से चलयला, लेकिन बनारस में एह समय न देसी पर्यटक हयन न विदेशी. केहू के जेबा में पइसा नाही हौ. देसी पर्यटक भी तीर्थ बदे काशी नाही आवत हयन. जवन थोड़ा बहुत आवत हयन उ धर्मशाला या फिर सस्ते होटलन में शरण लेत हयन.’’

नाविक परेशान

कोरोना के कारण नौका के कारोबार पर भी बुरा असर पड़ल हौ. बनारस में निषाद समुदाय क लगभग 50 हजार लोग हयन अउर एह पूरे समुदाय क रोजी-रोटी गंगा अउर नौका पर निर्भर हौ. निषाद समुदाय बदे काम करयवाला सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र निषाद क कहना हौ कि ’’नौका क काम 40 प्रतिशत शुरू होइ गयल हौ, लेकिन इ स्थिति केराया आधा कइले के बाद हौ.’’ बनारस में सामान्य सीजन में एक नौकाचालक क कमाई आठ से 10 हजार रुपिया महीना हौ. लेकिन अगर केराया आधा होइ गयल अउर धंधा 40 प्रतिशत, तब हिसाब लगाइल कि नौका पर निर्भर निषाद समुदाय क हालत एह समय का हौ. वीरेंद्र बतइलन कि ’’देव दिवाली बदे अबही तक नौका क 80 प्रतिशत बुकिंग होइ जात रहल, लेकिन एह साल अबही तक खाली 25 प्रतिशत बुकिंग होइ पइले हौ. उम्मीद हौ कुछ अउर बुकिंग होई.’’

देव दिवाली से उम्मीद

इहां इ बात बताइब जरूरी हौ कि काशी में देव दिवाली क बहुत महत्व हौ, अउर एह पर्व पर पूरा 88 गंगाघाट से लेइके काशी में मौजूद लगभग 23 हजार मंदिर दिया से जगमग होइ जालन. काशी क देव दिवाली देखय बदे दुनिया भर से लोग आवयलन. होटल अउर नौका क बुकिंग लोग काफी पहिलय से कराइ लेलन. वीरेंद्र क कहना हौ कि ’’एक त कोरोना क डर हौ, दूसर सबके पइसा क तंगी हौ. अबही स्थानीय पर्यटक ही आवत हयन. जबतक बनारस में बहरे क पर्यटक न आवय लगिहय तबतक स्थिति में पूरा सुधार न होई.’’

बनारस में गली, सड़क, गंगा घाट, मंदिरन में हमेशा पर्यटकन क भीड़ देखय के मिलि जात रहल. लेकिन कोरोना के नाते एह समय सब सूना-सूना हौ, कुल गुड़़ गोबर होइ गयल हौ. अंतर्राष्ट्रीय उड़ान बंद रहले से विदेशी पर्यटक भी बनारस नाही आइ पावत हयन, जबकि विदेशी पर्यटकन क भारत आवय क इहै मौसम हौ. अंतरदेेसी उड़ान अउर कुछ रेलगाड़िन के शुरू होइ गइले से कुछ देसी पर्यटक आवय लगल हयन, लेकिन अबही पहिले की नाही आवाजाही क रफ्तार नाही हौ.

श्राद्ध अउर पिंडदान बदे देशभर में मशहूर पिशाचमोचन धाम क पुरोहित पंडित धर्मेंद्र पांडेय क कहना हौ कि ’’लॉकडाउन के नाते तीन महीना तक सारा कर्मकांड बंद रहल. कोरोना पंडित-पुरोहितन क कमर तोड़ि देहलस. अब जजमान आवय लगल हयन अउर कर्मकांड शुरू होइ गयल हौ. गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर आवत हौ’’ काशी क कोतवाल कालभैरव मंदिर के एक पुजारी क कहना हौ कि दर्शनार्थी आवय लगल हयन, लेकिन पहिले वाली बात अबही नाही हौ. ओनके अनुसार मंदिर में 50 प्रतिशत भीड़ लौटि आइल हौ.

बनारस पुराना शहर हौ, अउर इहां क सड़क बहुत संकरी हइन. साइकिल रिक्शा, ऑटोरिक्शा, बैटरी रिक्शा इहां आवाजाही क साधन हयन. बनारस घूमय बदे लोग ज्यादातर साइकिल रिक्शा के महत्व देलन. लेकिन एह समय बनारस में सड़क पर साइकिल रिक्शा बहुत कम देखात हयन. दरअसल, रिक्शा चलावय वाला मजदूर ज्यादातर बिहार क हयन, लाॅकडाउन में सब अपने गांव चलि गइलन, अउर अबही तक सबकर वापसी नाही भयल हौ. रिक्शाचालक हरी क कहना हौ कि ’’अबही बनारस में जेतना रिक्शा चलत हयन, ज्यादातर स्थानीय लोग चलावत हयन. पर्यटकन के न रहले से रिक्शा क ग्राहक भी बहुत कम हयन.’’

हां, बनारस में केराना कारोबार पर कोरोना क कौनो खास असर नाही देखात हौ. केराना, मसाला अउर सूखा मेवा क मशहूर मंडी गोला दीनानाथ में काफी चहल-पहल हौ, ग्राहकन क भीड़ हौ. केराना कारोबारी अभिषेक गुप्ता बताइल कि ’’हमरे सबके कारोबार पर कोरोना क कौनो खास असर नाही हौ. थोड़ा बहुत जवन असर हौ, उ भी धीरे-धीरे खतम होत हौ.’’

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