• Home
  • »
  • News
  • »
  • bhojpuri-news
  • »
  • भोजपुरी फिल्मकार मोहनजी के निधन पर रवि किशन कहने - ‘’आप नहीं होते तो मेरी पहचान अधूरी रह जाती’’

भोजपुरी फिल्मकार मोहनजी के निधन पर रवि किशन कहने - ‘’आप नहीं होते तो मेरी पहचान अधूरी रह जाती’’

रवि किशन को ब्रेक देबे वाला मोहन जी  घर द्वार जइसन  यादगार फिल्म भी बनवले रहनीं.

रवि किशन को ब्रेक देबे वाला मोहन जी घर द्वार जइसन यादगार फिल्म भी बनवले रहनीं.

भोजपुरी के निर्माता निर्देशक मोहन जी प्रसाद वो लोगन में हवें जिनका योगदान के भोजपुरी फिल्म कभी ना भुला सकेला. उहे रविकिशन के ब्रेक दिहले. एकरा अलावा राजेश खन्ना और कई बड़े कलाकारन के लेकर उ कई गो यादगार फिल्म बनवले हवें.

  • Share this:
निर्माता-निर्देशक मोहन जी प्रसाद ना रहनी., 17 नवम्बर दोपहर 2 बजे मुंबई में उहाँ के निधन हो गइल. मोहन जी के भोजपुरी सिनेमा के तीसरा चरण भा मॉडर्न युग के अगुवा भी कहल जाला. अभिनेता रवि किशन के भोजपुरी में उहें के लॉन्च कइनी. रवि जी के पहिला, दूसरा, तीसरा आ चौथा लगातार चार गो फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक उहें के रहनी.

उहाँ के निधन के बाद सांसद-अभिनेता रवि किशन अपना फेसबुक पेज पर शोक सन्देश लिखलें कि ‘ श्री मोहन जी प्रसाद जी ने ब्रेक दिया था. फिर लगातार blockbuster फ़िल्म साथ की. मोहन जी आज दोपहर 2 बजे हम सबका साथ त्याग दिए. मोहन जी बहुत कुछ सिखा आपसे. आप भोजपुरी में ब्रेक नहीं देते तो शायद मैं और मेरी पहचान अधूरी रह जाती. धन्यवाद आपको. महादेव आपको अपने चरणो मैं स्थान दे. ओम् शांति शांति’

ये भी पढ़ें : Diwali पर भोजपुरी में पढें- तांत्रिक साधना एतना रहस्यमय काहें बा

रवि किशन जी तुरंत एगो अउर पोस्ट कइले- ‘आज भोजपुरी इंडस्ट्री के जनक का देहांत हो गया. मोहन जी आपके वजह से तीसरे दसक में सबको रोज़ी रोटी मिली. भोजपुरी इंडस्ट्री का काला दिन आज आपका जाना. ॐ शान्ति शान्ति ’

कई पारिवारिक फिल्म देले बाने मोहन जी

मोहन जी हिंदी में भी कई गो पारिवारिक फिल्म देले बानी. एगो लेखक-निर्देशक आ निर्माता के रुप में ‘औरत तेरी यही कहानी’, नाचे नागिन गली-गली,‘घर परिवार’ ( राजेश खन्ना, ऋषि कपूर, मौसमी, मीनाक्षी आदि स्टारकास्ट रहे), ‘दोस्ती के सौगन्ध’, फूलवती, दिवाना हूँ पागल नहीं, आ ‘मेघा’ (करिश्मा कपूर, राहुल रॉय, शम्मी कपूर स्टारकास्ट रहे ) आदि प्रमुख फिल्म बा. मोहन जी निर्मित निर्देशित लिखित बंगला फिल्म ‘विधातार खेला’ आ ‘माधुरी’ भी उल्लेखनीय बा.

bhojpuri Mohan ji

पंडी जी बताईं ना बियाह कब होई

मोहन जी प्रसाद के भोजपुरी फिल्म्स के लम्बा फेहरिश्त बा लेकिन उनकर दू गो फिल्म पुरनका दौर में ‘ हमार भौजी’ आ नयका दौर में ‘ पंडी जी बताईं ना बियाह कब होई’’ सबसे ज्यादा लोकप्रिय भइल. नग्मा आ श्वेता तिवारी जइसन कई गो हिरोइन के भोजपुरी में उहाँ के अवसर देनी.

छपरा के रहनी हा

मोहन जी प्रसाद भोजपुरी सिनेमा के पहिला निर्माता विश्वनाथ शाहबादी जी के भगिना हईं. घर छपरा ह. संजोग देखीं कि जब हम पटना से मुंबई अइनी 2002 में त सिनेमा खातिर पहिला इंटरव्यू कुणाल सिंह आ दूसरा मोहने जी प्रसाद के कइनी. तब रवि किशन के दूसरका फिलिम सैयां से कर द मिलनवा हे राम के शूटिंग चलत रहे. ओही सेट पर रवि जी से भी लमहर बातचीत (इंटरव्यू) भइल.  मोहन जी पैकअप के बाद सेट से अपना आवास ‘मंजू महल’ (बांद्रा स्टेशन से थोड़ही दूर नर्गिस दत्त रोड पर ) पर लेले चल गइनी. एही महल में बइठ के भोजपुरी सिनेमा के संदर्भ में मोहन जी से घंटन बात भइल.

मोहन जी से बातचीत के कुछ अंश -

भावुक- मोहन जी, हम पीछला दू बरिस में कई गो फिल्म स्टार आ सुपर स्टार फिल्मकार लोग से भेंट मुलाकात कइनी हs. ऊ लोग भोजपुरी सिनेमा के वर्तमान स्थिति से निराश बा. ओह लोग के कहनाम बा कि ‘अब भोजपुरी सिनेमा के बाजार उड़से-उड़से के कगार पर बा’ राउर का कहनाम बा?

मोहन जी-  देखीं, पहिला बात कि भोजपुरी सिनेमा के वर्तमान स्थिति से हम तनिको निराश नइखीं. निराश भइल भा हथियार डाल दीहल कवनो समस्या के समाधान ना हs . अइसन स्थिति में त अउरो जोर-शोर से काम करे के चाहीं. अनुकूल परिस्थिति में तs सभे चलेला. तूफान में चल के देखाई तब नू?..  हम तनिको निराश नइखीं. निराश रहितीं त एह परिस्थिति में दू गो भोजपुरी फिल्म के निर्माण ना करितीं. एह में कवनो संदेह नइखे कि माहौल तनि खराब भइल बा, त एकरो खातिर उहे लोग दोषी बा, जे आधा मन से बिना लगन के, बिना कवनों भावना के खाली पइसा कमाए खातिर अलूल-जलूल कुछुवो बनावेला. हमरा विश्वास बा कि जदि लगन से, सही भावना से फिल्म बनावल जाय त सफलता जरुर मिली. भोजपुरी सिनेमा के बाजार उड़से के कल्पना निराधार आ बेतुका बा.

भावुक- त का ई मान लिहल जाए कि रउरा पइसा कमाए खातिर फिल्म नइखीं बनावत?

मोहन जी- बनावत बानी बाकिर खाली पइसा कमाए खातिर नइखीं बनावत... कमाए खातिर त हम हिन्दियो फिल्म बनवले बानी आ बनावत बानी. पइसा उहँवे कमा सकेनी, जहँवा ओकर व्यापक क्षेत्र बा. तबहूँ भोजपुरी फिल्म बनावत बानी, काहे?... उहो प्रतिकूल परिस्थिति में... सिर्फ अपना मातृभाषा के प्रति प्रेम के चलते. अपना बोली में कुछ अलग हटि के कुछ करे के जूनून के चलते. आजुवो हिन्दी फिल्म निर्माण के प्रति हमार रुझान जादा बा. बावजूद एकरा बीच-बीच में भोजपुरी फिल्म बनिये जाता. खाली भोजपुरी के प्रति सेन्टीमेन्ट के चलते. हमार घर छपरा (रिविलगंज) हs. भोजपुरी माटी के गंध हमरा मन-प्राण में रचल बसल बा. एकरा संस्कृति, रहन-सहन, भाषा के हमरा जानकारी बा. एह से एह भाषा के फिल्म बनावल हमरा खातिर सहज आ आसान बा. हम एह भाषा के दर्शक से परिचित बानी. ओकर रिक्वायरमेंट आ डिमांड समझत बानी. कैमरा के हमरा ज्ञान बा. एही से हम अपना क्षेत्र के लोगन के पसंद के हिसाब से कहानी के ताना बाना बुनि के कैमरा में कैद कइले बानी. शायद रउरा मालूम होई कि ‘सइयां हमार’ आ ‘सइयां से कर द मिलनवा हे राम’ दूनू के स्क्रिप्ट हमरे हs. हम फिल्म बनावत खानी दूइये गो चीज पर विशेष ध्यान देनी-पहिला कहानी आ दूसरा गीत. क्षेत्रिय फिल्म खातिर कहानी के दमदार भइल त एक दम जरुरी बा, काहें कि क्षेत्रिय फिल्म में लंगटे-उघारे लइकी त नइखे देखवल जा सकत, स्वीटजरलैण्ड त देखावल नइखे जा सकत. तब क्षेत्रिय फिल्म मेकर के ई मजबूरी होला कि स्क्रिप्ट सशक्त होखे. गाना बढ़िया होखे. ई बेसिक नीड्स हs. फेर खूबसूरती से फिल्मांकल कइल जाए.

अच्छा चीज बनाइब त लोग पसंद करबे करी. जब-जब अच्छा मूवी बनल बा, इतिहास गवाह बा लोग पसंद कइले बा. (हँसत) हमरा से केहू के दुश्मनी थोड़े बा, जे लोग हमार फिल्म ना पसंद करी. हम लागल बानी इहे हमरा बस में बा. आगे भगवान के मर्जी।

भावुक- मोहन जी, सन् ई.1987 में भोजपुरी चलचित्र संघ के स्थापना भइल. रउरा ओकर अध्यक्ष (कार्यकारिणी समिति के) रहीं. का उद्देश्य रहे, ओह संस्था के आ कहाँ तक सफलता मिलल?

मोहन जी- भावुक जी रउरा पुराना जख्म कुरेद देनी. बड़ी मेहनत से आ मन से ऊ संस्था खड़ा भइल रहे. संस्था में भोजपुरी फिल्म के हर एक पक्ष से जुड़ल लोगन के समावेश रहे. सुजीत कुमार( वरिष्ठ अध्यक्ष), कांत कुमार( उपाध्यक्ष), देवनाथ सिंह (कोशाध्यक्ष), पद्मा खन्ना( सह सचिव), चाँद मिश्रा (सह सचिव) संगीतकार नौशाद, बद्री प्रसाद, विनय सिन्हा, युनुस परवेज, बाबू भाई दीक्षित, हरि शुक्ला, राम सिंह, वन्दिनी मिश्रा.. अरे केकर केकर नाम गिनाईं. महासचिव आलोक रंजन सक्रिय सुत्रधार रहलें एह संस्था के. बड़ी उम्मीद रहे एह संस्था से. भोजपुरी चलचित्र संघ के स्थापना के उद्देश्य रहे- उत्कृष्ट भोजपुरी फिल्म के निर्माण, फिल्म निर्माण आ प्रदर्शन में आवेवाला कठिनाई से निर्माता के छुटकारा दिलवावल आ फिल्म के सब पक्ष से जुड़ल लोगन के ऊ तमाम सुविधा मुहैया करावल जवन कि अन्य प्रादेशिक भाषा के फिल्म से जुड़ल लोगन के प्राप्त बा. बाकिर सब सपना चूर-चूर हो गइल।

भावुक- अइसन का हो गइल ?

मोहन जी- आम के टोकरी में एगो सड़ल आम पड़ गइल।

भावुक- नाम . . .

मोहन जी- जाए दीं. जे भी रहे, अच्छा ना कइल. इहवाँ यूपी आ बिहारवाद आ गइल. क्षेत्रवाद संस्था के खा गइल. संस्था कागजी होके रह गइल. काम कुछुओ ना हो सकल. सब मेहनत पर पानी फिर गइल.

भावुक- मोहन जी, अन्तिम सवाल, राउर आगे के का योजना बा?

मोहन जी- ‘सइयां हमार’ पर्दा पर बा. अच्छा व्यवसाय कर रहल बा. ‘सइयां से कर द मिलनवा हे राम’ के शूटिंग चलता. जदि इहो सफल हो गइल आ क्षेत्र बनल त फेर बनाइब. हमार त इहे इच्छा बा कि हर साल एगो भोजपुरी फिल्म बनाईं आ अगर स्थिति अनुकूल रहल त हम हर साल एगो भोजपुरी फिल्म बनाइब.

ई मोहन जी प्रसाद से हमार पहिला बातचीत ह आज से 18 साल पहिले के. तब के जब भोजपुरी सिनेमा के तीसरा दौर शुरू भइल रहे. ओकरा बाद मोहन जी प्रसाद न जाने केतना ब्लाकबस्टर फिल्म देनी. लेकिन ओह समय के बात हम एह से कइनी ह कि मोहन जी तब भी आशावान आ सकारात्मत रहीं जब भोजपुरी सिनेमा मृतप्राय रहे, ICU में रहे. उहाँ के लगातार कोशिश कइनी. उनके स्मृति खातिर बातचीत के कुछ हिस्सा इहां छापल जाता. मोहन जी के स्मृतिशेष के नमन !

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं.)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज