अपना शहर चुनें

States

भोजपुरी विशेष - भोजपुरिया स्वाभिमान के प्रतीक पहिला राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू

देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद पर भोजपुरी समाज बहुत गर्व करेला.
देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद पर भोजपुरी समाज बहुत गर्व करेला.

भोजपुरी के रजेन्दर बाबू देश के सही माने में रत्न रहनीं हा. पढ़ाई के समय से ही बहुत मेधावी रजेन्दर बाबू राष्ट्रपति भवन खातिर हर तरह से योग्य रहनी हा. इ उनकर आपन लोकप्रियता रहे कि देश के इ सर्वोच्च पद खातिर दुबारा उंहा के चुनन गइलीं. एकरा अलावा देश के संविधान निर्माण में रजेन्दर बाबू के योगदान अमूल्य बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 1:29 PM IST
  • Share this:
26 नवम्बर 1949 के भारत के संविधान बनके तइयार भइल, लागू भइल 26 जनवरी 1950 के. विश्व के सभ संविधान के अध्ययन कके व्यापक विचार-विमर्श के बाद भारतीय संविधान तइयार भइल. संविधान निर्माण खातिर संविधान के प्रारूप समिति के 141 गो बइठक भइल आ एह तरह से 2 बरिस 11 महिना 18 दिन लागल रहला के बाद एगो प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद आ 8 गो अनुसूची के संगे स्वतंत्र भारत के संविधान के मूल प्रारूप तइयार करे के काम पूरा भइल. हालाँकि एह 71 साल में एह में ढेर बदलावो कइल गइल. आज हमनी के संविधान में 12 अनुसूची सहित 400 से अधिक अनुच्छेद बा.

त अभिये 26 नवम्बर के पूरा देश में संविधान दिवस मनावल गइल ह. 2015 से हीं संविधान दिवस मनावल जाता. केंद्र सरकार वर्ष 2015 में गजट नोटिफिकेशन द्वारा 26 नवंबर के 'संविधान दिवस' के रूप में मनावे के घोषणा कइलस, तब से. एकरा पहिले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा वर्ष 1979 में एगो प्रस्ताव के बाद से ई दिन 'राष्ट्रीय कानून दिवस' (National Law Day) के रूप में मनावल जात रहे.
खैर, संविधान दिवस भा राष्ट्रीय कानून दिवस के शुभकामना देत अपना संविधान के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर के ओह बतिया पर विशेष ध्यान चाहsतानी जवन अक्सर नजरंदाज होला. "संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह अंततः बुरा साबित होगा, अगर उसे इस्तेमाल में लाने वाले लोग बुरे होंगे" - डॉ भीमराव अंबेडकर. बात बहुत बड़ बा. बूझे के जरुरत बा.

ये भी पढ़ें : भोजपुरी विशेष - सद्भाव के नगरी ह काशी, कबीर के शहर में बाबा नानक के गुरुबाग भी
भारत के रत्न


अब ओहू से बड़ बात जवन बूझे के जरुरत बा, उ ई बा कि 26 नवम्बर से सटले एगो अउर तिथि बा- 3 दिसम्बर. 3 दिसंबर 1884 के ओह महान छात्र के जन्म भइल जेकरा खातिर एग्जामिनर कहलस कि ‘The Examinee is better than Examiner.’ ..सादगी, सेवा, त्याग आ स्वतंत्रता आंदोलन में अपना आपके होम कर देवे वाला ओह महान देशभक्त के जनम भइल जेकरा के भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाज़ल गइल. जेकरा के पूरा देश प्यार से ‘देशरत्न’ कहल.
आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 के भारत के गणतंत्र राष्ट्र के दर्जा मिलला के साथ जे देश के राष्ट्रपति बनल, फेर साल 1957 में दुबारा राष्ट्रपति बनल, देश के एकमात्र नेता जे दू बार राष्ट्रपति बनल, 12 साल तक राष्ट्रपति रहल, ओह पुण्यात्मा के जन्मदिन ह 3 दिसम्बर. जी हाँ, डॉ. 3 दिसम्बर जयंती ह डॉ. राजेंद्र प्रसाद के.  डॉ. राजेंद्र प्रसाद माने हमनी के इलाका के रजिंदर बाबू. जीरेदेई सिवान के नू हईं. खाँटी भोजपुरिया. कादो, अपना लोग से भोजपुरिये में बतिआईं अउर उहें के प्रेरणा से भोजपुरी में सिनेमा बनल शुरू भइल.

संविधान सभा के अध्यक्ष
खैर, ई सब कथा-कहानी त जवन बा तवन बड़ले बा. असल बात ई बा कि बात भारतीय संविधान आ संविधान दिवस से शुरू भइल बा त ई जानल जरुरी बा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद हीं संविधान सभा के अध्यक्ष रहनी आ उहाँ के जवन 24 गो उप-समितियन के गठन कइले रहीं, ओही में से एगो ‘‘मसौदा कमेटी’’ के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर रहनी. अम्बेडकर साहेब के काम रहे 300 सदस्यीय संविधान सभा के सब चर्चा आ उप-समितियन के सब अनुशंसा के संकलित कके एगो मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कइल, जवना के संविधान सभा के अध्यक्ष भइला के नाते रजिन्दरे बाबू स्वीकृत करत रहनी. तब उ ड्राफ्ट संविधान में शामिल होत रहे. त भाई हो, तनी रजिन्दरो बाबू के योगदान के ओतने मन से ईयाद कइल जाय. हमरा विश्वास बा कि उहाँ के ईयाद कइला से, सच्चा मन से उहाँ के श्रद्धांजलि देला से, उहाँ के जीवन में आत्मसात कइला से राजनीति के आत्मा परिष्कृत होई आ देश, समाज के बेहतर दिशा मिली.

कश्मीर पर राजेंद्र बाबू के विचार
एगो-दूगो बात अउरी कहे के बा. पहिला बात रजिंदर बाबू, वर्तमान केंद्र सरकार आ कश्मीर से जुड़ल बा. रउरा सब के मालूम बा कि 26 जनवरी 1950 के सुबह 10 बजके 18 मिनट पर भारत गणतंत्र बनल रहे. ओकरा 6 मिनट बाद यानी 10 बजके 24 मिनट पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहिला राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेनी आ अपना भाषण में कहनी - 'हमारे लंबे और घटनापूर्ण इतिहास में ये पहला अवसर है जब कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक ये विशाल देश सबका- सब इस संविधान और एक संघ राज्य के छत्रासीन हुआ है.'
बाकिर, डॉ. प्रसाद के एह भाषण के ठीक 7 साल बाद यानी 26 जनवरी 1957 के जम्मू-कश्मीर में राज्य के आपन अलग संविधान लागू भइल. तब रजिंदर बाबू के आत्मा जरूर कलपल होई. लेकिन पीछला साल 6 अगस्त 2019 के केंद्र द्वारा जब जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जा देवे वाला अनुच्छेद 370 हटावल गइल अउर जम्मू-कश्मीर आ लद्दाख के दू गो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनावल गइल. तब जाके उहवों केंद्र सरकार के सभ कानून आ भारतीय संविधान लागू हो गइल. जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान 62 साल 6 महीना आ 11 दिन बाद लागू भइल. केंद्र सरकार के एह पहल पर रजिंदर बाबू के आत्मा के सकून मिलल होई आ उहाँ के खूब आशीर्वाद देले होखब.

नेहरु आ राजेंद्र प्रसाद में मतभेद
कहे के त अउरो बहुत कुछ बा. नेहरू आ डॉ. प्रसाद के झगड़े प कहाव त केतना-केतना बात कहा जाई जवना में हऊ चिठ्ठियो वाली बात बा जवना खातिर नेहरू जी लजा गइलें बाकिर कहला-सुनला से बेसी बात आ ओकरा मरम के बुझला आ ओकरा से सिखला के जरुरत बा. ओही तरे एगो अउर बात बा. बात एही साल के बा. अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर प्रधानमन्त्री के गइला पर किसिम-किसिम के बात भइल ह। आज से 70 साल पहिले जब राजेंद्र बाबू सोमनाथ मंदिर के प्राणप्रतिष्ठा पर उपस्थित भइल रहनी तबो किसिम-किसिम के बात भइल रहे. नेहरू जी खिसी भूत रहीं. अब राजिंदर बाबू भले पढ़े में तेज रहनी, रहनी त साधारने परिवार के. उहाँ के कपड़ा कवनो पेरिस धोये त जात ना रहे.

दरअसल जादा तेजो भइल ठीक ना ह. ईमानदार आ स्पष्टवादी भइल त अउरो ना. एह सब के भी कीमत चुकावे के पड़ेला. त आख़िरी दिन पटना के सदाक़त आश्रम में जवन गुज़रल, जेकरा प गुजरल उहे जानी. बाकिर भोजपुरिया स्वाभिमान के प्रतीक हमनी के रजिन्दर बाबू के सामने सांसारिक आ भौतिक सुख सुविधा के शायद कवनो मोल ना रहे. एही से उहाँ के अनमोल बानी आ करोड़ों हिन्दुस्तानी के दिल में समाइल बानी.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य एवं सिनेमा के जानकार हैं.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज