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भोजपुरी विशेष - काशी क मुकुट हयन गंगा क 88 घाट

भोजपुरी विशेष - काशी क मुकुट हयन गंगा क 88 घाट

काशी के घाट के महिमा त अपार ह साथे इहां के दृश्य भी बहुत मनोरम ह.

काशी के घाट के महिमा त अपार ह साथे इहां के दृश्य भी बहुत मनोरम ह.

काशी क जिक्र अउतय एक बात हर कोई कहि उठयला - दिव्य अउर अलौकिक. इ अलौकिक दृश्य देखय के होय त गंगा घाटे पहुंचिए जा. जवन कुछ सामने नजर आई, ओहसे समझ आ जाई कि बनारस वाकई दिव्य हौ.

बाबा विश्वनाथ क नगरी काशी कई मामले में अलग हौ. भौगोलिक. सांस्कृतिक. अध्यात्मिक. धार्मिक हर मामले में. इ एतना पुराना नगर हौ कि एकर जड़ पुराण से जुड़ल हौ. पुराण के अनुसार. भगवान शिव जब इ नगर बसउलन तब गंगा भी धरती पर नाही आइल रहलिन. एही से एकरे पुरातनता क अंदाजा लगावल जाइ सकयला. कहल त इ भी जाला कि काशी सृष्टि के रचना से भी पहिले क हौ. गोमुख से गंगासागर तक गंगा के यात्रा में खाली काशी अइसन जगह हौ जहां गंगा उत्तरवाहिनी हइन. काशी में ओनकर अकार आधा चंद्रमा क हौ. असमाने से नीचे निहारा त लगयला जइसे काशी विश्वनाथ के माथे पर गंगा क चंद्र लगल होय. गंगा क घाट अइसन जइसे काशी विश्वनाथ के सिर पर मुकुट रखल होय.

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गंगा के अर्धचंद्राकार तट पर लगभग सात किलोमीटर के विस्तार में कुल 88 घाट हयन. एतना घाट कौैनो एक शहर में अउर एक नदी पर पूरी दुनिया में शायदय कत्तौ होय. हालांकि असली काशी असी&गंगा क संगम अस्सी घाट अउर वरुणा&गंगा क संगम आदिकेशव घाट के बीच के क्षेत्र के मानल जाला. अस्सी से आदिकेशव तक कुल 84 ही घाट हयन. चार घाट आदिकेशव के बाद हयन. अउर उहो बनरसय में हयन. एह हिसाब से बनारस में कुल 88 घाट हयन. काशी में गंगा किनारे खाली एक ठे मस्जिद हौ. नाम हौ आलमगी मस्जिद. पंचगंगा घाटे पर बनल इ मस्जिद के धरहरा मस्जिद भी कहल जाला. एह स्थान पर पहिले बिंदु माधव क मंदिर रहल. मंदिर के जगह मस्जिद कइसे बनल एकर कहानी फिर कभौ लिखब. अबही गंगा घाट पर आवा.

पांच घाट के महिमा

काशी में गंगा घाट क विशेषता इ हौ कि कुल घाट पक्का हयन अउर आपस में जुड़ल हयन. केव भी चाहय त घाटय घाट काशी के एक छोरे से दूसरे छोरे तक जाइ सकयला. केतना जने रोज गंगा के किनारे अइसय घाट पर सुबह क सैर करयलन. हर घाट क धरम अउर अध्यात्म के अधार पर आपन अलग&अलग महातम हौ. हर घाट क अलग-अलग कहानी अउर पहिचान हौ. कई घाटन क चर्चा पुराण में हौ. मनिकनिक घाट अउर हरिश्चंद्र घाट के छोड़ि के बाकी कुल घाट स्नान. ध्यान. अर्पण. तर्पण बदे हयन. काशी में पांच घाट बहुत पवित्र मानल गयल हयन. इ पांचो घाटे के पंचतीर्थ कहल जाला. इ पांच घाट हयन अस्सी घाट. दशाश्वमेध घाट. मनिकनिका घाट. पंचगंगा घाट. अउर आदि केशव घाट.

17वीं सदी में फेर से निर्माण

बनारस में गंगा के ज्यादातर घाटन के 17वीं शताब्दी के बाद फिर से बनावल गयल हौ यानी पुनर्निर्माण कयल गयल हौ. जवने क स्वरूप आज देखय के मिलयला. ओह समय इ नगर मराठा सम्राज्य क हिस्सा रहल. वर्तमान समय में जवन घाट हयन. ओकर संरक्षण मराठा. सिंधिया. होलकर. भोसले अउर पेशवाई के हाथे रहल हौ. कई घाट निजी लोगन क भी हयन. काशी में गंगा घाट क खास बात इ भी हौ कि सब मजबूत पथरे क बनल हयन. जवने के नाते पानी के बहाव से जल्दी फुटतन नाही. काशी बहुत घनी आबादी वाला शहर हौ अउर इहां गली&कुच्ची जादा हयन. जवने के नाते जादातर घाट पर जाए बदे गली&गली पैदलय जाए के पड़यला. खाली अस्सी घाट. हरिश्चंद्र घाट. दशाश्वमेध घाट. राजेंद्र प्रसाद घाट अउर राजघाट पर ही मोटर&गाड़ी के जाए क रस्ता हौ.

गंगा जी भी घाट नाहीं छोड़ेली

काशी के घाटन क एक खासियत इ भी हौ कि गंगा कभौ घाट छोड़ि के नाही जातिन. एकरे पीछे एक ठे पौराणिक कथा हौ. गंगा जब शिव के जटा से निकललिन तब बहुत आवेग अउर गुस्सा में रहलिन. ओनके मन में रहल कि उ काशी के बीचो बीच से निकलिहय अउर नगर के नष्ट कइ देइहय. गंगा जब काशी से कुछ दूरी पर रहलिन तबय भगवान शिव के गंगा क इ मंशा पता चलि गयल. भगवान शिव अपने हाथे क बसावल नगर काशी अउर इहां के निवासिन के बचावय बदे आपन त्रिशूल फेकि के गंगा के पहिलय रोकि देहलन. त्रिशूल के कारण गंगा के बहुत तकलीफ होवय लगल. फिर उ भगवान शिव क प्रार्थना कइलिन. भगवान शिव ओनसे बचन लेहलन कि गंगा हमेशा काशी क स्पर्श करत क बहिअय. काशी के निवासिन क कौनो नुकसान न करिहय. गंगा के पानी में रहय वाला जीव-जंतु काशी में गंगा नहाए आवय वाले भक्तन के कौनो नुकसान न पहुंचइहय. गंगा जब इ कुल बचन मानि लेहलिन तब भगवान शिव आपन त्रिशूल वापस खीचि लेहलन अउर गंगा काशी के किनारे से होइ के आगे निकल गइलिन. भगवान शिव अपने त्रिशूल से जहां गंगा के रोकले रहलन. उ स्थान शूल टंकेश्वर हौ. ओही ठिअन से गंगा उत्तरवाहिनी भयल हइन. काशी से 15 किलोमीटर दूर मिर्जापुर जिला में माधवपुर गांव में मौजूद एह स्थान पर शूल टंकेश्वर महादेव क मंदिर हौ. मंदिर में बहुत बड़ा शिवलिंग स्थापित हौ. जवने के दर्शन क बहुत धार्मिक महत्व हौ. मान्यता हौ कि जवने तरह से भगवान शिव के त्रिशूल खिचले से गंगा के संकट से मुक्ति मिलल रहल. ओही तरह से जे शूल टंकेश्वर महादेव क दर्शन करयला. ओकर कुल दुख दूर होइ जाला.

काशी में उत्तरवाहिनी गंगा

काशी में गंगा के उत्तरवाहिनी होवय क एक ठे अउर कथा हौ. भगवान शिव के जटा से निकलले के बाद जब भगीरथ गंगा के धरती पर लेइके चललन तब उ बिना काशी अइलय इहां से 30 किलोमीटर दूर निकलि गइलन. गंगा के इ बात पता चलल त उ भगीरथ से काशी चलय का आग्रह कइलिन. गंगा के आग्रह पर भगीरथ के आपन रथ पूरब से उत्तर दिशा में घुमावय के पड़ल. गंगा काशी आइके बाबा विश्वनाथ क दर्शन कइलिन. फिर आगे बढ़लिन.

काशी में गंगा के उत्तरवाहिनी रहले के नाते कुल घाटन क मुह पूरब की तरफ हौ. सबेरे जब सूर्योदय होला त सूरज क पहिली किरण गंगा के घाट पर पड़यला. इ काशी के गंगा घाट क सबसे बड़ी खासियत हौ. घाट एतना सुंदर हयन कि एके देखय बदे देसी पर्यटकन के अलावा विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में बनारस आवयलन. घाट पर तमाम मठ&मंदिर बनल हयन. जहां साधु&संन्यासी निवास करयलन. काशी अउर इहां गंगा के धार्मिक महत्व के नाते कई राजा&महराजा भी घाट पर आपन महल बनउलन. उ महल आज भी मौजूद हयन. आज के समय में बनारस में धरम के अलावा पर्यटन क महत्व बहुत जादा बढ़ि गयल हौ. एकरे नाते अब कई घाटन पर कई ठे आलीशान होटल भी खुलि गयल हयन.

गंगा में गंदगी रोके के प्रयास

लेकिन पर्यटन के रस्ते में सबसे बड़ा रोड़ा गंदगी क हौ. शहर क गंदा पानी घाट से होइके गंगा में गिरयला. जवने के नाते घाट गंदा रहयलन. पानी भी गंदा होइ जाला. एकरे अलावा गंगा में सब फूल- माला. मूर्ति-प्रतिमा डालि देलन. जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोेदी बनारस क प्रतिनिधित्व करत हयन. तब से गंगा घाट के सफाई अउर पर्यटन पर बहुत जोर देहले हयन. अबही हालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी में गंगा घाट के सफाई पर 10 करोड़ रुपिया खरचय क योजना बनउले हयन. घाट पर कचरा रिसाइकिल करय वाली मशीन भी लगाइ जाई. ताकि जवन कचरा निकलय. उ तुरंत रिसाइकिल होइ जाय अउर फिर से गंगा में न जाइ पावय. रिसाइकिल कयल गयल कचरा क दूसरे कामे में इस्तेमाल कइ जाई. घाट पर 500 कचरा डिब्बा भी लगावय क योजना हौ. कचरा डिब्बा के अलावा साफ&सफाई क 24 घंटा निगरानी करय बदे 200 से जादा सीसीटीवी कैमरा लगाइ जाई. इ कुल कैमरा नमामि गंगे परियोजना के अधिकारिन के कंप्यूटर से जुड़ल रहिअय अउर अधिकारी गंगा घाट के सफाई पर सीधे नजर रखिहय. सरकार क योजना बनारस में गंगा घाट के रोल माडल बनावय क हौ. ताकि पूरी दुनिया में एकर अलग संदेश जाय.

Tags: Article in Bhojpuri, Ganga, Kashi

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