भोजपुरी विशेष: निरहुआ रिक्शावाला के विधायक सुशील के फिल्म जिगर में काम कइके ढेर खुशी भइल जानी काहे

भोजपुरी विशेष: निरहुआ रिक्शावाला के विधायक सुशील के फिल्म जिगर में काम कइके ढेर खुशी भइल जानी काहे
फिल्म जिगर में काम कइके सुशील के ढेर संतोष मिलल.

मॉडर्न भोजपुरी सिनेमा के टॉप थ्री विलेन में से एक सुशील सिंह के जन्मदिन ह आज. कलर्स के शो भाग्य-विधाता में भी सशक्त अभिनय कइले बाड़े.

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  • Last Updated: September 8, 2020, 1:30 PM IST
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भोजपुरी सिनेमा लगभग साठ साल के हो गइल बा. कहल जाला साठा पर पाठा. खैर, एह पाठा पर त फेर कबो बात होई. आज हम बात करत बानी सिनेमा के ओह पाठा के जेकरा के विलेन कहल जाला आ जेकरा चलते कवनो हीरो हीरो बनेला.

कहल जाला कि जब ले अन्हार ना होई, अंजोर के कीमत ना बुझाई. रावण के बिना राम के  श्रीराम बनल मुश्किल रहे.  नाट्यशास्त्र के रचयिता भरतमुनि भी लिखले बानीं कि व्यवस्थित वेशधारी प्रतिनायक भा खलनायक नाटक के मध्य पात्र ह जे नायक के स्थापित करे आ प्रसंग के आगे बढ़ावे में विदूषक भा कॉमेडियन के जइसन सहायता करे ला. दुनिया के कवनो भाषा भा बोली के नाटक होखे, उहे नाटक सबसे बेसी सफल चाहे यादगार भइल बा, जेकरा में खलनायक के भूमिका भी ओतने दमदार रहल बा जेतना नायक के. अगर हिंदी सिनेमा के बात कइल जाय त कई गो फिलिम में अइसन डायलाग चाहे खलनायकन के करेजा कंपकपा देवे वाला एक्टिंग बा जेकरा कारण कई दशक बीतला के बादो ऊ सब फिलिमन के याद कइल जाला.

90 के दशक के फिलिम प्रेमी से पूछ लिंही कि तहलका फिलिम याद बा त ऊ शायद सोच-विचार में पड़ जाई  कि कवन तहलका बाकिर अगर ओही घरी एगो  डायलाग सुना दिहीं ‘डॉन्ग कभी रॉन्ग नहीं होता’ त तुरंते सब याद आ जाई. धर्मेंद्र, शम्मी कपूर, नसीरुद्दीन शाह, आदित्य पांचोली जइसन बड़-बड़ हीरो लोग से सजल ई फिल्म अपना खलनायक अमरीश पुरी के डेरावे वाला भेष-भूसा आ डायलाग खातिर आजो याद राखल जाला. मिस्टर इंडिया के मोगैंबो खुश हुआ केकरा ना याद होखी. तेजाब फिल्म के हीरो से जादे जलवा ओकर खलनायक मोगैंबों के रहे. सिनेमा देख के निकले वाला लोग मोगैंबों के चर्चा करत निकलल रहे. गब्बर सिंह शोले फिल्म के करीब तीन दशक बादो ओसहीं याद बाड़न जइसे उनकर डायलाग कितने आदमी थे.



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हिंदी सिनेमा सौ साल से ऊपर के हो गइल बा त भोजपुरियो सिनेमा 58 साल के हो गइल बा. भोजपुरी सिनेमा में हीरो के रोल त एह स्तर के गढ़ल गइल जे दशकन बीतलो पर याद रहे बाकिर खलनायकन के चरित्र में ओह स्तर के प्रयोग ना भइल जइसन कि हिंदी सिनेमा में देखे के मिलल.

एकर कारण शायद कुछ सामाजिको हो सकेला. सिनेमा अपना समाजे  के नू प्रतिनिधित्व करेला. ओकरे नू प्रतिबिम्ब ह. शुरूआती भोजपुरी सिनेमा के कहानी गंवई वातावरण में बेसी गढ़ल गइल बा जहां लोग के बीच परमानेंट खलनायक जइसन बात चाहे भावना जादे ना रहेला. गांव-घर या गोतिया-नाता से बेसी मुंह-फुलाई चाहे जरनियाही जइसन बात रहेला. ई आपसी मनमुटाव तक त रहेला बाकिर बहुत सा अइसन परब-त्योहार चाहे शादी-बियाह के मोका बा जवना में ई गोतिया देयाद  के भी साथे लेवे के पड़ेला. कुल देवता के पूजा चाहे परिवार के कवनो आदमी के किरिया करम होखे, लाख जरनियाही के बादो सब गोतिया लोग के साथे आवे के होखेला त गंवई माहौल या आपसी फूट के बहुत बड़ा स्तर पर देखावे के कम गुंजाइश के कारणे शायद भोजपुरी में मौगैंबो, गब्बर सिंह डॉन्ग के स्तर के ना गढ़ाइल होखी.

भोजपुरी सिनेमा में शुरु में विलेन अमूमन ठाकुर, दबंग अउर डाकू होत रहल.  देखल जाय  त हिंदी फिलिमन के  शुरुआती दौरके खलपात्र भी एही तरह के होत रहले.  धीरे-धीरे ओकरा में नया-नया रंग आइल आ ऊ मोगैंबों, डॉन्ग, लॉयन चाहे डॉर डैंग के ओरे कूच कइल.  त भोजपुरी सिनेमा धीरे-धीरे हिंदी के बेसी लगे आवत गइल त खल चरित्र पर भी काम होखे शुरू भइल. खल चरित्रन के भेस-भूषा से लेके, उनकर रुआब, संवाद सब पर काम होखे शुरू भइल. भोजपुरी भाषा में जतना मिठास बा ओतने कड़क एकर मिजाजो ह त जब खल चरित्रन पर प्रयोग भइल त उहो जबरदस्त हिट रहल. भोजपुरिया विलेन में भी विविधता आवे लागल.

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‘जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा' भोजपुरी के ई हिट डायलाग त हिंदी सिनेमा से लेके टीवी चैनलन पर आ कॉमेडी शो में भी केतना बेर इस्तेमाल भइल होखी कवनो ठेकाना नइखे. ई भोजपुरी के गर्व, ओकरा अक्खड़पन आ ओकर फकीरी मिजाज तीनों के बड़ सुघर संजोग ह.  ओसहीं ‘न खेलब न खेले देब, खेलवे बिगाड़ देब’ होखे चाहे ‘फटी त फटी लेकिन पावर ना घटी’ जइसन डायलॉग के साथे देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर वाला बात बा.  ‘अपना जबान के लंबाई से हमरा करेजा के चौड़ाई के नाप मत लीहे, ना त खानदान के लास उठावत-उठावत जिनगी बीत जाई..’ खतरनाक गेट अप, लाल-आंख चढ़ाके जब भोजपुरिया फिलिमन के खलनायक भी दमदार डायलॉग बोलेले त फिलिम के स्तर ऊपर उठ जाला. ई बात कहे में कवनो संकोच ना होखे के चाहीं कि भोजपुरी सिनेमा में विलेन पर ओतना काम नइखे भइल जतना होखे के चाहत रहे बाकिर जतना भइल बा, उहो कम दमदार नइखे.

मॉडर्न भोजपुरी सिनेमा यानी कि 2001 के बाद  शुरू भइल दौर में टॉप थ्री विलेन बाड़न अवधेश मिश्रा, संजय पांडेय आ सुशील सिंह. आज सुशील सिंह के जन्मदिन ह. अबगे उनका से उनका सफर पर कुछ बातचीत भइल ह.  रउरो से साझा करत बानी.

कहानी सुशील सिंह के
जब भोजपुरी सिनेमा आपन नया सवेरा देखत रहे तब 2003 में एगो फिलिम आइल कन्यादान. फिलिम के मुख्य किरदार में 90 के दशक के हीरो कुणाल सिंह अउरी भोजपुरी में आपन करियर लगभग शुरु करत रविकिशन रहलें. फिलिम में एगो खलनायक भी पहिला बार पर्दा पर आइल रहलें जे बाद में भोजपुरी फिलिमन के बड़ नाम साबित भइलें. फिल्म में रविकिशन के लालची भाई के रोल वाराणसी के सुशील सिंह कइलें रहले. सुशील सिंह वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से बीएससी में डिग्री लिहलें, साथ में थियेटर भी चलत रहल. ओकरा बाद उ फिल्मन में आपन किस्मत आजमावल शुरु कइ दिहले. ‘कन्यादान’ उनकर पहिला फिलिम रहे. सुशील के अगिला फिल्म ‘हो गइल बा प्यार ओढ़निया वाली से’ रहे जवन निरहुआ के करियर के बड़ फिल्म रहे.

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ओकरा बाद आइल फिल्म ‘निरहुआ रिक्शावाला’ जवना से कई गो कलाकार भोजपुरी सिनेमा अउरी दर्शक के दिल में स्थापित भइलें. दिनेश लाल यादव भी एही फिल्म के बाद निरहुआ बनलें. सुशील सिंह भी एही फिल्म से घर-घर में जानल गइलें. फिल्म कई गो सिनेमाघरन में एक साल तक चलल. सुशील सिंह के किरदार एगो अड़ियल विधायक भाई के रहे जे आपन बहिन के शादी एगो रिक्शावाला से नइखे होखे देबे चाहत. इहवां भी उहे हिंदी फिल्म के फार्मूला काम आइल जेकरा में एगो गरीब आदमी अपना लोगन के मसीहा बनेला अउरी सिस्टम आ दबंग लोग से लड़  के आपन हक छीन लेला.

ऊ सुशील सिंह ही रहलें जिनकर वीभत्स छवि से निरहुआ के हीरो के रूप में स्थापित होखे के स्कोप मिलल. सुशील सिंह आपन अगिला फिल्म ‘श्रीमान ड्राईवर बाबू’ में एगो बहीर अउरी मजाकिया बस ट्रांसपोर्ट के मालिक के रोल कइलें जे समय पड़ला पर आपन कमीना रुप देखावेला. ई किरदार भी बेहतरीन रहे. मुन्ना बजरंगी में एगो सकारात्मक चरित्र निभवला के बाद सुशील सिंह के बढ़िया रोल ऑफर होखे लागल. एगो इंटरव्यू के दौरान सुशील सिंह बतवलन कि उनका पर भोजपुरी के विलेन के मोलम्मा चढ़े लागल आ जवन रोल मिले उ एके टाइप के होखे. मेहनताना भी कुछ खास ना मिले. एह से उनके आपन रणनीति बदले के पड़ल. उ टीवी सीरियल के तरफ रुख कर लेहलें अउरी लगभग चार साल तक कलर्स के शो भाग्य-विधाता कइलें.

एह बीच भोजपुरी में नया निर्माता- निर्देशक अउरी लेखक भी आ गइलें, फेर उनके नीमन रोल मिले लागल आ उ फेर से फिलिम में आ गइलें. सुशील सिंह प्रतिज्ञा 2 फिलिम कइलें जे में उनके किरदार मलखान काफी खूंखार अउरी हीरों से भी मजबूत रहे. कहानी में उनके काफी स्पेस मिलल. फेर निरहुआ के साथ ‘मोकामा 0 किलोमीटर’ कइलें. ई एगो प्रयोगात्मक फिल्म रहे अउरी मोकामा में व्याप्त अपराध जगत के कहानी रहे. उनकर किरदार छोटे सरकार के रहल जवन साँच घटना से लिहल गइल रहे. ई सुशील सिंह के अब तक के सबसे पसंदीदा किरदार भी ह.

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एके लेखा रोल बार-बार कइला से सुशील सिंह के भीतर के कलाकार खुल के निकल के ना आवत रहे. कलाकार के कला के विविधता जिंदा राखेला. एह से सुशील सिंह के एगो मौका के इंतजार रहे आ उ मौका जल्दिए मिल गइल. बकौल सुशील सिंह, ‘जिगर में हमार रोल सकारात्मक रहे, जे में एगो भाई अपना बहिन के बहुते प्यार करsता. उ ओकरा खुशी खातिर जान भी देबे के तैयार बा. हम फिलिम में हीरो के बराबर विलेन के मिल रहल स्थान से खुश बानी.’

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के शोधी विद्वान हैं )
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