भोजपुरी में योग चर्चा- बज्रासन सब जानेला, बाकिर कतना लोग करेला !

वज्रासन क कई तरह से लाभ होला आ करे में इ बहुत आसान आसन ह.
वज्रासन क कई तरह से लाभ होला आ करे में इ बहुत आसान आसन ह.

कुछ आसान अइसन बाने स, जवन बहुत आसानी से हो जाने स अउरी बहुत ज्यादा फायदा करेला. एही में एगो बज्रआसन ह. एकर कई गो फायदा ह.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 1:47 PM IST
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केहू से पूछि लीं कि बज्रासन में कइसे बइठल जाला? त ऊ जरूरे बता दी. बाकिर पूछीं कि भोजन कइला का बाद सही पाचन खातिर थोरे देर एह आसन में बइठेनीं? त जबाब मिली- ना. जानल एक बात ह आ जानल बात के पालन कइल दोसर बात. हमनी के पुरनिया लोगन के दिनचर्या में रहल ह योगासन. कबो शवासन में लेटि जाई लोग त कबो पद्मासन में बइठि जाई लोग. कबो भुजंगासन करे लागी लोग त कबो दंड- बैठक. बाकिर हर आसन के समय तय रहल ह आ ऊहे समय आजुओ लागू होई. जइसे भोजन के बाद बज्रासन, शवासन छोड़ि के अउरी कौनो योगासन नइखे करेके. अनुलोम- विलोम, दोसर प्राणायाम, भुजंगासन, मत्स्यासन खाली पेटे कइला से ढेर फायदा होला. हमनी के ऋषि- मुनि लोग बिना पइसा खर्चा कइले स्वस्थ रहेके कतने उपाय बता गइल बा लोग. आचार संहिता बना गइल बा लोग, बाकिर हमनी का ओकरा पर ध्यान नइखीं जा देत. सभे के एके लाठी हांकल ठीक नइखे. अबहियों ढेर आदमी बाड़े जे नियम से ध्यान, योगासन आ सात्विक जीवन जी रहल बाड़े. बाकिर ओह लोगन के संख्या कम बा. हमनी के देस के आबादी एक अरब 30 करोड़ बा. ओमें कतना आदमी नियम- संयम से रहत होइहें. नवका पीढ़ी में ढेर लोग जंक फूड खाता. ओह लोगन के भोजन में सलाद आ फल के जगह अगड़- बगड़ आइटम आ गइल बा. जबकि जतना दाम पिज्जा, बर्गर आ पास्ता के बा, ओतने फल आ सलाद वाला चीज के भी बा.

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पंडित जी के बात
हमरा जिला के एगो पंडित जी खाली भगवान के भक्ति आ योगासन ईहे जानत रहले ह. रउवां कौनो बात करीं, ऊ रउवां के घुमाके ईश्वर चर्चा चाहे योगासन पर ले अइहें. गांव में उनुकर बड़ा इज्जत रहल ह. धर्म संबंधी कौनो प्रश्न रउरा मन में घूमता त ओकर जबाब पंडित जी का लगे मिल जात रहल ह. का जाने उनकर पढ़ाई कहां ले रहल ह. बाकिर अजब जानकार रहले ह. रउवां भगवद्गीता के कौनो श्लोक पढ़ि दीं, ऊ बता देत रहले ह कि ई अमुक अध्याय के अमुक नंबर के श्लोक ह. उनुका आगा बड़े- बड़े अकादमिक डिग्रीधारी लोग फेल हो जात रहल ह. का जाने कतना वेद मंत्र आ उपनिषद के मंत्र उनुका याद रहल ह. आ रहिहें एकदम धोती आ हाफ कुर्ता पहिन के. कौनो आडंबर ना. अपना विद्वता के कौनो घमंड ना. सरल, सहज आ मिलनसार व्यक्तित्व. हरदम हंसमुख चेहरा. आ गांव छोड़ि के शहर में उनुका नीक ना लागत रहल ह. ई आजु से चालीस- पैंतालिस साल पहिले के बात ह. अब उनुका नियर विद्वता आ सहज- सरल व्यक्तित्व का जाने केहू बा कि ना, जानकारी नइखे.
त पंडित जी के अतना लंबा परिचय एसे दिहनी हं कि ऊ हमेसा कहिहें कि कई गो योगासन बड़ा सरल बाड़े सन. आदमी खेल- खेल में क सकेला. बाकिर लोगन के सरल योगासन करे में भी आलस लागेला. अधिकांस लोग आलसी मानसिकता वाला बा. खाए का बेरा चटपट स्मार्ट हो जाई, बाकिर कहीं कि खाए के पहिले तनी “हरि ओम तत्सत” के जाप क लिहीं त उनुका नीक ना लागी. कहीं कि तीन बार जाप कइल भी पर्याप्त बा. त ओतनो करेके मन ना करी. त हमनी के पंडित जी से पूछत रहनीं हं जा कि ई काहें पंडित जी? त ऊ कहिहें कि असल में हमनी का जीवन में छद्म प्राथमिकता (प्रियारिटी) तय क लेले बानी जा. ईहे ठीक बा, आ हई ठीक नइखे. अपना मने तय क लेले बानी जा. जबकि शरीर आ मन राउर गुलाम ह. रउरा शरीर आ मन के गुलाम ना हईं. बाकिर का मजाल कि हमनी के मन हमनी के बाति सुन लेउ. ना. रउवां कौनो खराब बाति के अभ्यास बा आ मन अगर कंट्रोल में नइखे त अदबदा के रउवां ऊहे काम क देब. भले रउवां ऊ काम करेके नइखी चाहत, तबो मानसिक अभ्यास हो गइल बा त ना चाहते हुए भी रउवां ऊ काम क देब आ फेर पछताइब, मन कचोटी. कतने सिगरेट आ शराब पीए वाला लोगन के अफसोस कइल देखले बानी. त शरीर आ मन में बइठि जाई कि हइहे चीज में आनंद बा त राउर माइंड भा मन ओही में आनंद पावे लागी. कतने लोगन के नमकीन छोड़िके दोसरा चीज में कौनो आनंदे ना आवे, बाकि ओकरा बिपरीत ढेर लोग अइसनो बाड़े जे नमकीन में ना मिठाई में आनंद पावेला. केहू मीठा के तुलना में नमकीन से प्रेम करेला त केहू नमकीन के दूर हटाके मीठा पर जान न्यौछावर करेला. वैज्ञानिक कहेला लोग कि ई माइंड में बइठि गइला के कारन होला. एह आदत के बदले खातिर माइंड पावर बढ़ावेके परी. एमें सब बिजयी ना होला.



इच्छा शक्ति चाहीं
ढेर लोगन के इच्छा शक्ति बहुते कमजोर होला. ऊ कहि दी कि ठीक बा, एही छन से हम सिगरेट छोड़ि दिहनी. बाकिर जब लंबा समय बीति जाई त सिगरेट पीए के तलब अइसन लागी कि लागी कि प्रान छूटता. अजब के छटपटाहट होखे लागी. लागी कि केहू जूठ सिगरेट भी दे दिहित त हम पी लीतीं. ऊहे हाल शराब के लत के बा. ठीक एही तरे अगर योगासन के आदत परि जाउ त हमनी के कल्यान हो जाई. आजुए से अगर संकल्प क लिहीं जा कि रोज पांच गो योगासन करब जा, त रउरा के के रोकी? रोके वाला राउर दिमाग बा. ओकरा के ठोक- बजा के ठीक क दीं, बस राउर दिनचर्या ठीक हो जाई. ढेर लोग त अइसनो बा कि कतनो झकझोरि दीं, कतनो उत्साहजनक बात कहि दीं, रउरा आगा ऊ मानि जइहें कि आजु से योगासन करिहें, बाकिर घरे जाके भुला जइहें भा अलसा जइहें आ योगासन के इच्छा पाताल में फेंकि दीहें.

योगासन से ईश्वरीय ऊर्जा
कुल ऋषि- मुनि लोग कहि गइल बा कि योगासन से मनुष्य के ईश्वरीय ऊर्जा मिलेला. मेरुदंड में स्थित सूक्ष्म चक्र जागृत होके शरीर आ मन में शक्ति के संचार क देले सन. ऊर्जा के पावर हाउस मस्तिष्क के कोशिका भा न्यूरॉन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देले सन. मनुष्य के एकर अभ्यास करे खातिर नियम बना लेबे के चाहीं. बाकिर के सुनता. कान में हेडफोन लगा के घंटा भर गाना आ अवांट- बवांट सुने के टाइम बा, बाकिर दस मिनट ध्यान से योगासन कके आ ईश्वर के ध्यान कइल नइखे सपरत. हं, जब कौनो शारीरिक परेशानी हो जाई, तब डाक्टर जवन कही, करे के तेयार बानी. एतरे सावधानी भा एहतियात खातिर योगासन ना क सकेनीं. बहाना बा- टाइमे ना मिलेला. गप- शप में घंटा भर समय बर्बाद करेके समय बा बाकिर योगासन आ ध्यान खातिर समय नइखे. चलीं, समय हमनी के सिखाइए दी.

पहिले के खेल से भी दम-खम मिलता था
पहिले हमनी का खेल के रूप में कबड्डी, चीका आ उल्हा- पाती खूब करब जा. उल्हा- पाती में पेड़ पर चढ़ि के जे चोर बनी ऊ हे डाल से हो डाल पर लुकाइल लइकन के छूए के कोसिस करी. जेकरा के छू दी, ऊ चोर हो जात रहल ह. कबड्डी में एक सांस में कबड्डी- कबड्डी- कबड्डी कहि के विपरीत पक्ष में खड़ा होखे वाला के छुए के रहेला. एसे कइसनो पेड़ होखे ओकरा पर एक डाल से दोसरा डाल पर जाए के कला भी सीखत एसे सांस रोके के अभ्यास त होइए जाला, एक प्रकार के कसरत भी हो जाला. चीका भी कबड्डी से मिलत- जुलत खेल ह. बाकिर अब ई कुल खेल गांव से गायब हो गइल बा. अब मोबाइल पर प्ले स्टोर से कौनो गेम लोड क लीं आ खेलत रहीं. खाली मानसिक खेल. ओमें शरीर के कौनो हरकत नइखे. त अइसना में घरे बइठल व्यायाम, योगासन आ ध्यान ना कइला से शरीर धर्म के निर्वाह ना होई. बुजुर्ग लोग कहि गइल बा कि कौनो बाति के अति ना करेके चाहीं- अति सर्वत्र वर्जयेत. त खाली नीमन- नीमन खाईं, नीमन- नीमन पहिरीं आ नीमन से आराम करीं क, त शरीर आरामतलब हो जाई. अंग्रेज आरामकुर्सी पर बइठे के आदत दे गइले सन. आ आरामकुर्सी के खराबी ई ह कि एकरा पर बइठला पर मेरुदंड (रीढ़ के हड्डी) सोझ भा टाइट ना रहेला. आ स्वस्थ रहे खातिर मेरुदंड सीधा कइके बइठे के चाहीं. झुकि के, मेरुदंड झुका के बइठला पर शरीर में ऊर्जा के प्रवाह में बाधा परेला. त एही से हरदम सूतल ना रहेके चाहीं. मेरुदंड सोझ कइके बइठहूं के चाहीं. बाकिर ढेर लोग जब ना तब दिनों में बिछवना पर लेटि जाला. लेटिए के फोन से काम करता, लेटिए के अखबार पढ़ता, किताब पढ़ता आ कुछ लोग त लेटिए के खात- चबात रहेला. त सतर्क ना रहला पर हमनिए के सकेता परब जा.
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