Home /News /bhojpuri-news /

भोजपुरी विशेष : बनारसी मलइयो मतलब ओस क मिठाई

भोजपुरी विशेष : बनारसी मलइयो मतलब ओस क मिठाई

बनारसी मिठाई मलइयो के कहीं कवनो जोड़ नाहीं मिलेला.

बनारसी मिठाई मलइयो के कहीं कवनो जोड़ नाहीं मिलेला.

मलइयो एकमात्र अइसन मिठाई हौ, जवन बनारस के अलावा दूसरे जगह नाही बनत. हलांकि नबाबन के जमाने में लखनऊ में ‘निमिष’. कानपुर में ‘मक्खन’ मिलत रहल. इ दूनों भी मलइयो क रूप रहलन.

बनारस अपने धार्मिक पहचान के अलावा खान - पान पहिनावा बदे भी प्रसिद्ध हौ. तरह- तरह क व्यंजन अउर पकवान भी बनारस क शान हयन. बनारसी मिठाई. चाट क नाव लेतय मुंहे में पानी आइ जाला. बनारस में एक ठे खास मिठाई बनयला. नाव हौ मलइयो. मलइयो जाड़ा के मौसम क मिठाई हौ. आज के जमाने में पूरब क पकवान पश्चिम. अउर पश्चिम क पकवान पूरब पहुंचि गयल हयन. उत्तर क दक्षिण अउर दक्षिण क उत्तर भी. लेकिन मलइयो आज भी बनारस के गलिन से बहरे नाही निकलि पउले हौ. असली मलइयो खाए बदे बनारस में सड़क छोड़ि के गंगा किनारे बसल पक्का महाल के गली में ही घुसय के पड़यला.

भोजपुरी में ये भी पढ़ें - तीसिया के तेलवा करहिया जरे रे ननदी..

मलइयो मतलब मलाई. यानी इ मिठाई दूध से बनयला. आह मलइयो. वाह मलइयो. याद अउतय मुहे में पानी. इहय इ मिठाई क खासियत हौ. ठोस, द्रव, गैस तीनो अवस्था में रहयवाली इ मिठाई मुहे में जातय गलि के गला के नीचे उतरि जाला. अब एके खाब कहल जाई कि पीयब. एकर निर्णय मलइयो के मुरीदन के ऊपर हौ. ओइसे पुरवा क मलइयो खतम भइला के बाद दुकानदार कड़ाहा में नीचे जुटल दूध भी ग्राहकन के कुल्हड़ में परोसि देलन. ठीक ओही तरे जइसे पानी&पुरी खइला के बाद घेलुआ में सूखा खाए अउर चटपटा पानी पीयय क परंपरा हौ. एह हिसाब से बनारसी मलइयो खायल भी जाला अउर पीयल भी जाला. लेकिन इ मिठाई जीभी पर जवन स्वाद छोड़ि के नीचे उतरयला. उ जिनगी भर मन मस्तिष्क पर चढ़ल रहयला. केसर क भीनी- भीनी सुगंध अउर हल्की मिठास वाली मलइयो क स्वाद जे लेहले होई. उ इ बात के समझत होई. अउर जे न समझत होई उ एकर स्वाद लेहला के बाद समझि जाई.

कहीं अउर नाही बनेले इ मिठाई

मलइयो एकमात्र अइसन मिठाई हौ. जवन बनारस के अलावा दूसरे जगह नाही बनत. हलांकि नबाबन के जमाने में लखनऊ में ‘निमिष’. कानपुर में ‘मक्खन’ मिलत रहल. इ दूनों भी मलइयो क रूप रहलन. इहा तक कि पारसी समुदाय के खान-पान में भी इ ‘दूधनी पफ’ के रूप में रहल हौ. लेकिन कहल जाला कि मलइयो क इ कुल रूप बनरसय से हर जगह पहुंचल रहल. बनारस में भी मलइयो क असली स्वाद पक्का महाल में ही मिलयला. मलइयो बनाइब सबके बस क बात नाही हौ. एकर हुनर सबके पास नाही हौ. पक्का महाल में रहयवाला खासतौर से यादव समुदाय क कुछ लोग ही इ मिठाई बनावय क माहिर हयन. हलांकि अब दूसरे लोग भी बनावत हयन लेकिन उ बात नाही हौ. मलइयो बनावय बदे सबसे पहिले लोहे के बड़ा- बड़ा कड़ाहा में कच्चा दूध के उबालि जाला. फिर ओके रात भर खुले असमाने के नीचे रखि देहल जाला. ताकि रातभर दूधे पर ओस गिरय. इहय ओस मलइयो क जान हौ. जेतना ओस ओतनय मलइयो क स्वाद. बिना ओस के मलइयो नाही बनि सकत. रातभर ओस खइले दूधे के सबेर होतय मथनी से दुइ-तीन घंटा मथल जाला. ओकरे बाद एहमें चीनी. मेवा. इलायची. बदाम. पिस्ता मिलाइ के फिर से मथल जाला. मथले से कड़ाहा क दूध स्पंज की नाही झाग में बदलि जाला. बस मलइयो तइयार. मलइयो मट्टी क पुरवा यानी कुल्हड़ में ही ग्राहकन के खाए बदे परोसल जाला.

मलइयो बनावे के विधि

इ बात क हालांकि गारंटी नाही हौ कि जवन विधि इहां लिखल गयल हौ. ओहसे मलइयो बनय जाई. अगर अइसन होत त मलइयो पूरे देश में बनत अउर मलइयो क स्वाद लेवय केहू के बनारस न जाए के पड़त. इ खाली मोटा-मोटा फारमूला हौ भाई. एकर असली फारमूला पक्का महाल के यादव लोगन के ही पल्ले हौ. अउर गुप्तचर एजेंसी रॉ के योजना की नाही अबही तक गोपनीय हौ. मलइयो क एक कारीगर दिलीप क कहना हौ कि इ मिठाई बनावत समय हर कदम पर ताव-तरक देखल जाला. दूध केतना समय तक उबालय के चाही. केतना गाढ़ा होवय के चाही. केतना घंटा ओके ओसी में रखय के चाही. अउर कब दूधे के मथय के चाही. इ सारा चीज मलइयो बनावय में बहुत मायने रखयला. अगर तनी&सा भी ताव&तरक गड़बड़ायल त मलइयो क मजा किरकिरा. इहय कारण हौ कि पक्का महाल के मइलयो में जवन स्वाद मिलयला उ गोदौलिया पर नाही मिलत. यानी गली से सड़क पर निकलतय मलइयो क मजा गायब. सिगरा. रथयात्रा या अउर दूसरे मोहल्ला में मलइयो क स्वाद अउर फीका होइ जाला. जेतना नाजुक इ मिठाई हौ. ओतनय नाजुक एकर बनावय क विधि भी.

ओस के मिठाई

ओस इ मिठाई क सबसे बड़ी जरूरत हौ. जवने के नाते इ ठंढी के तीन महीना के अलावा दूसरे मौसम में नाही बनि पावत. नवंबर अंत से बनारसी मलइयो मिलय लगयला अउर आधा फरवरी तक मिलयला. मलइयो बनारस में कब से बनत हौ. अउर एकर आविष्कार के कइलस. एकर कौनो सही तारीख अउर इतिहास नाही हौ. लेकिन कहल जाला कि इ मिठाई सैकड़ों साल से बनारस क एक पहिचान बनल हौ. पक्का महाल में कई दुकान अइसन हइन जहां 100 साल से अधिक समय से मलइयो बनत बिचात हौ. पीढ़ी दर पीढ़ी मलइयो क हुनर चलल आवत हौ. हलांकि अब बनारस के दूसरे मोहल्ला में भी मलइयो बनय लगल हौ. अउर मशीन से भी मलइयो बनत हौ. लेकिन मलइयो क पक्का स्वाद लेवय पक्का महालय जाए के पड़यला. बनारसी लोग. खासतौर से पक्का महाल यानी गंगा किनारे बसल बस्ती क निवासी ठंढी के मौसम में सबरे क शुरुआत मलइयो से ही करयलन. एकरे अलावा भी जे बनारस घूमय पहुंचयला. अउर ओके मलइयो के बारे में जानकारी हौ त उ मलइयो क स्वाद लेहले बिना बनारस नाही छोड़ि पावत. इहां तक कि विदेशी भी मलइयो क मुरीद हयन. केतना विदेशी त ठंढी में बनारस मलइयो के नाते ही आवयलन. मलइयो सुबह होतय गली में बिचाए लगयला अउर 12 बजत- बजत खतम होइ जाला. यानी मलइयो क स्वाद लेवय वालन के ठंढी क मौसम अउर इ समय क भी ध्यान रखब जरूरी हौ. जेतना खास इ मिठाई हौ. ओतना खास एकर कीमत नाही हौ. असली बनारसी मलइयो चार सौ से पांच सौ रुपिया किलो मिलि जाला. बड़-छोटा कुल्हड़ के हिसाब से पचीस से पचास रुपिया में बिचाला.

मिठाई कि दवाई ?

मलइयो में ओस मिलला के नाते इ मिठाई सेहत बदे आयुर्वेदिक दवाई क काम करयला. आंखी क रोशनी बढ़ावय में इ बहुतय गुणकारी हौ. ओस में कई ठे अइसन मिनरल मिलल रहयलन. जवने के कारण मलइयो चमड़ी पर झुर्री भी रोकय में मददगार होला. केसर. पिस्ता अउर मेवा पड़ला के नाते इ चेहरा क चमक भी बढ़ावयला. अउर बनारस क चमक त इ सैकड़न साल से बढ़उतय हौ.

Tags: Article in Bhojpuri, Banaras, Indian Sweets

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर