Diwali पर भोजपुरी में पढें- तांत्रिक साधना एतना रहस्यमय काहें बा

तंत्र के कई मार्गबा,आ दीपावली पर बहुत से लोग तंत्र-साधना भी करेला.
तंत्र के कई मार्गबा,आ दीपावली पर बहुत से लोग तंत्र-साधना भी करेला.

दीपावली के रात सब सफलता के प्रयास में लागल रहेला. गृहस्थ आपन घर दुआर साफ करिके सजा के लक्ष्मी के पदचाप सुनन चाहेला, त व्यवसायी लोग आपन काम धंधा बढ़ावे के आशिर्वाद मांगेला. यही राति में एक वर्ग तंत्र के जरिए साधना कइके सिद्धि के प्रयास करेला.

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  • Last Updated: November 13, 2020, 5:04 PM IST
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तंत्र साधना के बहुत रहस्यमय मानल जाला. अनेक तंत्र साधक दीपावली के रात में विशेष अनुष्ठान करे खातिर एह रात्रि काल के इंतजार करेला लोग. तंत्र साधकन खातिर ई रात कुबेर के खजाना नियर मानल जाला. दीपावली के रात कौनो तंत्र सि्दधि खातिर प्रधान रात्रि के रूप में मान्यता पवले बिया. त ई साधना खाली श्मशान पर होला कि अउरियो जगह हो सकेला? ई प्रश्न अधिकतर लोग पुछेला. ई त सभे जानेला कि मां काली तंत्र विद्या के दस महाविद्या में एगो देवी हई. बाकिर ओकरा आगा ढेर लोग ना जाने कि दस महाविद्या भा श्रीविद्या का ह. दस महाविद्या आ श्रीविद्या एक ही ह. तांत्रिक लोग कहेला कि श्रीविद्या एह सृष्टि के सर्वोच्च साधना ह. त सबसे पहिले सवाल ई उठी कि “श्री” का ह. तंत्र में उतरब त “श्री” कहल जाला एह ब्रह्मांड के सर्वोच्च ऊर्जा भा एनर्जी के, जवन कि स्त्री यानी देवी रूप में बा. आ “श्री” शिव जी माने शंकर भगवान के भी कहल जाला. अब रउरा खिसिया जाइब. ई कवन बाति ह भाई “श्री” देवियो हई आ शंकर जी भी हउवन. त खिसियाए के कौनो बाति नइखे. शिव जी के अर्द्ध नारीश्वर एही से कहाइल बा कि उनुका में श्री तत्व बा. अब रउरा कहब कि श्री त पुरुष के नांव के पहिले लगावल जाला, ई कइसे देवी के सूचक होई. त महाराज जी, “श्री” “श्री”मान या “श्री”मती दूनो में रहेला. श्री पर खाली पुरुष के ही अधिकार नइखे, स्त्री के भी बा. त तंत्र में “श्री” माने सर्वोच्च “देवी”. तंत्र साधना में बीज मंत्र के बड़ा महत्व होला. बीज मंत्र जइसे- अइम, क्लिम. एकर उच्चारण कइला से जवन ध्वनि भा साउंड निकली आ जवन स्पंदन भा वाइब्रेशन होई ओकर प्रभाव बड़ा जबरदस्त होला. एक तरह से तंत्र विद्या ध्वनि आ वाइब्रेशन के विद्या ह. ए स्पंदन भा वाइब्रेशन से अपना भा केहू दोसरा के शरीर आ मन में इच्छित परिवर्तन करेके शक्ति होला. ईहे ना ब्रह्मांड में भी कौनो परिवर्तन के शक्ति होलाउ

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दू तरह के श्री विद्या
चलीं अब श्री विद्या भा देवी के विद्या भा तंत्र साधना के बाति समुझल जाउ. तंत्र साधना दू तरह के होला 1- समय मार्ग 2- कौल मार्ग. बोलचाल आ व्यवहार में एकरा के 1-कुलाचार आ 2- समयाचार भी कहल जाला. पहिले कौल मार्ग पर चर्चा क लीं जा, काहें से कि एकरा में सोझउवा मामला बा. कौल संप्रदाय में दू गो मत बा- 1- पूर्व कौल 2- उत्तर कौल. कौल के उत्पत्ति कुल से भइल बा. कुल माने कुंडलिनी आ अकुल माने शिव. दूनो के सामंजस्य करावे वाला के नांव ह कौल. कौल मार्गी लोग पंच मकार के सेवन करेला लोग- 1- मद्य 2- मांस 3- मत्स्य (मछली) 4- मुद्रा (एक्शन) आ 5- मैथुन. त पूर्व कौल संप्रदाय के व्याख्या ह कि ब्रह्मरंध्र से रिसे वाला (स्रवित) मधु “मदिरा” ह, वासना रूपी पशु के वध “मांस” ह, इड़ा- पिंगला के बीच प्रवाहित श्वांस- प्रश्वांस “मत्स्य” ह, प्राणायाम प्रक्रिया “मुद्रा” ह, आ मूलाधार में स्थित कुंडलिनी जब सहस्रार पर स्थित शिव से मिल जइहें त ई “मैथुन” ह.
काली उपासक कौल


कौल लोग काली के उपासक होला आ लंगटे पूजा आ साधना करेला लोग. उत्तर कौल, कापालिक आ दिगंबर तीनों प्रकार के तंत्र साधक अपना के भैरव माने ला लोग. उत्तर कौल के माने वाला लोगन के साधना के प्रमुख केंद्र कामाख्या (असम) ह. आ पूर्व कौल के माने वाला लोगन के साधना के प्रमुख केंद्र श्रीनगर (कश्मीर) ह. बाद में एह दूनो मत के मिला के एगो नया सिद्धांत बनल जवना के नांव परल- योगिनी कौल. त योगिनी कौल के स्थापना कामाख्या में ही भइल. योगिनी कौल के माने वाला एगो साधक कहले बाड़े- “कामरूप इदं शास्त्रं योगिनीनं गृहे गृहे”. (कामरूप के योगिनी शास्त्र घर घर में पहुंचि गइल बा) हमनी के देश में आठवीं से लेके ग्यारहवीं शताब्दी के बीच सिद्ध आ नाथ तांत्रिक संप्रदाय के बहुते प्रभाव रहे. बाकिर एगो अउरी बाति बा. कौल मार्ग में कई गो साधक त सिद्ध होखे में सफल हो जाला लोग बाकिर कई साधक भ्रष्ट हो जाला. कइसे? ऊ लोग मदिरा, मांस आ मैथुन के भौतिक स्तर पर ले के चलि आवेला. कहे के मतलब कि खूब शराब पीहीं, मांस- मछरी के सेवन करीं आ मनमाना मैथुन करीं. नतीजा ई होला कि ओह लोगन के पतन हो जाला. भगवान प्राप्ति के जगह पर ओ लोगन के अंधकार आ अज्ञान मिलेला. रोग, कलह आ अशांति मिलेला. त एमें बहुत बड़ खतरा बा. तनिको इंद्रिय चेतना पुष्ट भइल कि साधना गइल हवा खाए.

समय मार्ग आ शंकराचार्य
अब आईं समय मार्ग के बात कइल जाउ. आदि शंकराचार्य भी समय मार्ग के साधक रहले. ऊ अपना पुस्तक “सौंदर्य लहरी” के एगो श्लोक में दस महाविद्या के नाम के उल्लेख कइले बाड़े. समयाचार श्रेष्ठ आ विशुद्ध तांत्रिक आचार मानल जाला. कौल अनुयायी लोग बाहरी अनुष्ठान ढेर करेला. बाकिर समय मार्ग के साधक आंतरिक अनुष्ठान करेला. अपना शरीर के भीतर अनुष्ठान करेला लोग. एमें मूलाधार में स्थित कुंडलिनी जब सहस्रार चक्र में स्थायी रूप से पहुंचि जाले त सिद्धि मिल जाला. त जे ई चक्र नइखे जानत ओकरा के मोटामोटी बता दीं कि हमनी के मेरुदंड ( आदमी के रीढ़) के सबसे नीचे गुदा का लगे मूलाधार चक्र, लिंग या योनि का लगे स्वाधिष्ठान चक्र, नाभि का लगे मणिपुर चक्र, हृदय का लगे अनाहत चक्र, कंठ का लगे विशुद्धि चक्र, दूनों भौंह का लगे आज्ञा चक्र आ कपार के सबसे ऊपरी हिस्सा का लगे सहस्रार चक्र रहेला.

समय मार्ग के दू भेद
समय मार्ग में दू कटगरी के बीजाक्षर होखेला- 1- पंचदशाक्षरी (15 गो बीजाक्षर) आ 2- षोडषाक्षरी (16 गो बीजाक्षर). एहू में दू गो कटगरी बा. जब बीज मंत्र “ह” अक्षर से शुरू होई त ओकरा के हाड़ी विद्या आ जब बीज मंत्र “क” अक्षर से शुरू होई त ओकरा के काड़ा विद्या कहल जाला. समय मार्ग के साधक एगो श्री चक्र राखेला लोग. श्रीचक्र के रउरा श्रीयंत्र नियर समुझि लीं. कई गो तिकोन रहेला एक के भीतर एक आ केंद्र में एगो तिकोन जवना में एगो बिंदी रहेला जवना के “बिंदु” कहल जाला. श्री चक्र दू तरह के होला एगो के संहार यंत्र कहल जाला आ दोसरका के सृष्टि यंत्र. संहार यंत्र साधक के भीतर के कुल खराब चीज बाहर निकाल के नष्ट क देला. साधक के एकदम शुद्ध क देला. आ सृष्टि यंत्र साधक के सिद्धि प्राप्त करे लायक बना देला.
त दस श्रीविद्या चाहे महाविद्या के देवी लोगन के नांव जानल जाउ- 1- काली 2- तारा 3- त्रिपुर सुंदरी 4- भुवनेश्वरी 5- छिन्नमस्ता 6- बगलामुखी 7- भैरवी 8- धूमावती 9- मातंगी 10- कमला.

ई कुल देवी जी ह लोग. परम शक्तिशाली. ब्रह्मांड के जवन भी शक्ति होला विभिन्न रूप में एह लोग का लगे बा. त साधक बड़ा मजबूत चाहीं. काहें से कि देवी जी लोगन के रूप बड़ा भयंकर बा. कमजोर साधक तंत्र साधना में मति आओ. मजबूत दिल- दिमाग आ दृढ़ इच्छा शक्ति होखे तबे साधना में आवे के चाहीं. पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिला में रामपुर हाल्ट रेलवे स्टेशन से चार मील के दूरी पर तारापीठ बा. ओइजा कई गो तांत्रिक आवेला- जाला लोग. मां तारा के भी बड़ा उग्र रूप ह. साधक अगर दृढ़ इच्छा शक्ति वाला होई आ मां के गोड़ पर सरेंडर क दी त ओकरा अब जीवन भर कौनो डर- भय ना रहि जाई. चालाक साधक डेराला ना, माता तारा भा ऊपर लिखल कौनो माता जब उग्र रूप में आई लोग त साधक गोड़े पर गिर के शरण मांगे लागी. बस माता अपना संतान पर पिघल जइहें. साधक के काम बन जाई.

बाकिर ई एतना आसान नइखे.
हर महाविद्या के देवी लोगन के अलग- अलग मंत्र बा, साधना के तरीका बा. जे श्रीविद्या भा महाविद्या के दसो देवी लोगन के साधि ली, ऊ देवी लोगन के पुत्र के समान हो जाई. ईश्वर पुत्र हो जाई. कुछ मनाही के कारण हम एहिजा देवी साधना मंत्र नइखीं लिखि सकत. काहें से कि तंत्र साधना में बहुत कुछ गुप्त बा. जतना लिखल संभव बा, ऊ रउरा सामने विनम्रता के साथे प्रस्तुत बा. पढ़ीं आ आनंद लीं.

( ये लेखक के अपने विचार हैं.)
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