भोजपुरी विशेष: रामविलास पासवान बिन बिहार चुनाव

रामविलास पासवना भले शरीर से हमनी सभ के बीचे नइखन, पर अंतिम क्रिया के बाद भी उनकर धमक बिहार चुनाव में रही. कइसे? आईं पढ़ल जाउ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 1:47 PM IST
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मे लोग जानत होई कि रामविलास पासवान बिहार सर्विस कमीशन से डिप्टी एसपी बनि गइल रहले. एगो जगहि खुदे लिखले बाड़े कि 1969 में ऊ डिप्टी एसपी भईले अऊर ओहि साले एमएलए भी चुनि लिहल गईले. एगो दोस्त रामविलास से पूछले कि गवरमेंट बने के चाह तार कि सरवेंट. एह पर रामविलास जी फैसला लिहले कि नौकरी ना कइ के राजनीति में आइके अऊर ज्यादे लोगनि के सेवा करिहें. जगह-जगह ऊ बतवले बाड़े कि दलित परिवार, ऊहो बहुत साधारण घर से आवे के कारन उनकरा के बहुत जलालत भी झेले के पड़ल. एकरा के ऊ गांठि बान्हि लिहले आ सरकार में अइला पर दबल-कुचलल लोगन खातिर खूब काम कईले. ई अलगा बात बा कि तबो कई लोग कहेला कि पासवान जी सत्ता खातिर एतना दल बदलले कि राजनीति के मौसम भांपे वाला बनि गईले. अब जबकि बाहर में चुनाव होत बा, जानल बड़ा जरूरी बा कि उनकरा बिना ई चुनाव कईसन होत बा.

पासवान जी के दलित राजनीति में लोग सूट बूट वाला नेता के पदवी भी दिहल. देखल जाउ त ई सूट बूट वाला दलित नेता बनल आसान ना रहे. रामविलास जी के पहिले उनकरे परदेस बिहार से बाबू जगजीवन राम बहुत बड़ दलित चेहरा मानल जात रहले. भोला पासवान शास्त्री के भी बिहार के राजनीति में बड़ नाम रहे. फेर बाद में त कांसीराम अऊर मायावती नियर दलित नेता के आगे केहू दोसरा के जादू ई समुदाय पर ना चलल. तबो धियान देबे के बात बा कि राजनीति में रामविलास पासवान के जगहि बनते गईल. ऊ खुद त आगे बढ़ते गईले, अपना पार्टी के बिहार में जगहि बना दिहले. दलित समुदाय, ओहूमें एगो खास जाति में त उनकर अईसन धाक बनि गईल कि ऊ जब चहले आ जईसे चहले, दोसरा पार्टी अऊर गठबंधन संगे ऊहे करवले. सवाल बा कि बिहार में जब विधानसभा के चुनाव चलत बा, रामविसाल जी के धाक अऊर वोटो पर केकर अऊर कईसे कब्जा होई.

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रामविलास पासवान के खुद आपन राजनीति में देखे के चाहीं कि ऊ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर 1969 में जीति के एमएलए बनले. अलौली विधानसभा सीट से ऊ अइसन बड़ नेता के हरवले रहले जे आजादी के बादे से हर बेरि विधायक चुनल जात रहले. ई जरूर बा कि अलौली अनुसूचित जाति खातिर सुरक्षित सीट रहे. फेरू बाद में जवना हाजीपुर अऊर रोसड़ा सीट से एमपी बनत गईले, ऊहो दुनों सुरक्षिते क्षेत्र रहे. एसे साफ बा कि रामविलास पासवान जाति के बल पर चुनाव त जरूर लड़ले अऊर जीतत गईले, पर उनकर बैकग्राउंड सोशलिस्ट नेता वाला रहे. 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एमएलए रामविलास जी बिहार के बदलत राजनीति के संग अपना के बदलत गईले. 74 में छात्र आंदोलन में जेपी के आईल, देश में इमर्जेंसी लागल, फेरू जनता पार्टी के सरकार बनल, लालू-नीतीश जईसन नेतन के बीच रामविलास पासवान के दलित नेता के पहुचान बनि गईल.
सोशलिस्ट पार्टी के ट्रेनिंग बराबर काम आईल. रामविलास जी भाषण अऊर बेवहार में एक नंबर के रहले. एखाला जे उनकरा से मिल लिहल, रामविलास जी के परिचित हो गईल. कवनो काम होखे, पासवान जी सुनत जरूर रहले अऊर भरसक काम करा देसु.

ई जरूर बा कि रामविलास के पहिचान कवनो बड़ दलित आंदोलन से ना बनल, बाकिर दलितन खातिर ऊ लागल रहि गईले. 1977 के चुनाव के बाद रामविलास पासवान के नाम बहुत ऊपर हो गईल. ऊ एतने जेयादे वोट से जीतले कि गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड् में आगईले. पासवान जी कांग्रेस के उम्मीदवार के सवा चार लाख से भी जेयादे वोट से हरवले रहले. 40 साल से भी जेयादे के राजनीति में पासवान जी नौ बार सांसद बनले. ऊ खाली 1984 अऊर 2009 में हारल रहले. नरसिम्हा राव अऊर मनमोहन सिंह के दोसरका सरकार के छोड़ि के हर प्रधानमंत्री के संगे मंत्री बनले. तीसरका मोरचा, कांग्रेस के अगुआई वाला यूपीए अऊर बीजेपी के अगुआई वाला एनडीए, हर जगह मंत्री बनले. ऊ देश के अकेले नेता हऊवन, जे छव गो प्रधानमंत्री के संगे मंत्री रहले.

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बार बार जीतल अऊर मंत्री बनत गईला के फायदा ई भईल कि पासवान जी अपना क्षेत्र, प्रदेश अऊर समाज खातिर खूबे काम करवले. अब त सभे जानत बा कि जब ऊ रेल मंत्री बनले हाजीपुर में क्षेत्रीय रेल के मुख्यालय खोलवा देहले. फेरू खाद-बीज वाला मंत्री, कोईला खदान के मंत्री बनला पर भी खूबे काम करवले. एहि बेरि के त कोरोना में गरीब लोगनि के मुफत में अनाज दियावे के काम में खाद्य अऊर नागरिक आपूर्ति मंत्री रामबिलास पासवान के खास हाथ मानल जात बा. जब कभो दलित अऊर बिहार के बात होखे, ऊ कहत रहले कि ए समुदाय के दरद हम जानत बानी. वीपी सिंह सरकार में मंत्री रहत, ऊ आरक्षण खातिर जवन काम करवले, देश के दसे बदलि गईल. बड़का जाति के पढ़े वाला नौजवान लोग आंदोलन कईल, कुछ लोग जान भी दिहले बाकिर दलित-महादलित के जवन कल्याण भईल, ओकरा खातिर पासवान जी याद कईल जईहें.

एकर असर ई भईल कि बिहार के सइ में से जवन सात से आठ आदमी दलित-महादलित ह, ओकरा में पासवान जी अकेले राज करे लगले. दलित- महदलित के 23 गो जाति में से रामविलास पासवना दुसाध समुदाय के अबो बड़का नेता रहले हा. अब उनकरा जगहि पर उनकर बेटा चिराग बाड़े. लोग कहत बा कि रामविलास नियर चिराग मझल खेलाड़ी ना हऊवन. बाकिर एगो बाति बा कि रविदास लोगन के बाद बिहार में दुसाधे समुदाय बड़ बा. फेर पासवान जी अकेले दुसाध लोग के नेता त रहले ना. चिराग अपना पिता के नक्शा पर चलिके प्रदेश में फेरू अलगा राहि अपनवले बाड़े. कुछ त होखबे करि.
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