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भोजपुरी में पढ़ें - जइसे बहे गंगाजी के धार, ओहिसे बढ़े एहवात

भोजपुरी में पढ़ें - जइसे बहे गंगाजी के धार, ओहिसे बढ़े एहवात

भोजपुरी इलाका खातिर गंगा जी जीवन आ जीवन के बाद भी हर हिस्सा से जुड़ल बाड़ी.

भोजपुरी इलाका खातिर गंगा जी जीवन आ जीवन के बाद भी हर हिस्सा से जुड़ल बाड़ी.

भोजपुरी इलाका के रहे वालन खातिर गंगा जी माई हई. अइसन माई जेकरा जल के शक्ति से जीवन मिलेला और मरला के बाद मुक्ति भी. बहुत से लोग खातिर गंगा में जा के नहाइल आ पंवरल रोज के काम ह. गंगा जी जाए में जवन कोस दू कोस चलेके पड़ेला ओसे उनकर रोज टहरल भी हो जाला.

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दुनियाभर में नदियन के ओकरा धार आ पानीए से खाली पहचान नइखे, बल्कि सब नदी सभ्यता आ संस्कृति के भी हजारों - हजार साल से अपना धार संगे बहावत चलि आइल बाड़ी स. एही से दुनियाभर में तकरीबन हर नदी के लोग माई मानेला. माई जे आपाना दूध से. दुलार से सबके पोसेले, पालेले.हमनीं इहां भी गंगाजी खाली पानी के धार न हई. बल्कि उ माई हई. देवी हई.अइसन देवी. जवन जीवन देले. पालेले, पोसेले, आ जिनगी के बाद माटी बनि गइल देहि के मुक्ति देले.

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हर परब त्योहार पर गंगा जल
महाराज भगीरथ के तपस्या से महाराज सगर के वंश के तारे खातिर शिवजी के जटा से हहरात निकलल गंगा जी के पूरा सनातन समाजे देवी मानिके श्रद्धाभाव से पूजेला. बाकिर भोजपुरी इलाका में जाहां - जाहां से गंगाजी गुजरेली.उहां के लोगन के कुछ खासे नेह-छोह गंगाजी से बा. लोग गंगाजी के पूजेला. व्रत-त्योहार, एकादशी, पूरनमासी, ग्रहण के दिन, श्रद्धा से डुबकी लगावेला आ गंगा मइया के जयकारा लगावत मंदिर पर जाके उनुकर जल ढारेला, फेरू घर लौटेला.ओइसे त सावन में गंगा जी के प्रति अलगे किसिम के रूप लउकेला. चाहे उत्तराखंड के हरिद्वार होखे भा उत्तर प्रदेश के बनारस भा झारखंड के देवघर, हर जगह लोग गंगाजी के शरण में जात लउकेला. उहां जाके डुबकी लगावेला आ श्रद्धा भाव से जल लेके लवटेला आ आपाना गांव, भा बनारस, हरिद्वार भा देवघर के शिवाला में शिवलिंग पर जल ढारि देला. जवना शिवजी के जटा से निकलल हई गंगा जी, ओही शिवजी पर लोग गंगाजी से ढारि के आपन जन्म-जन्मांतर के मुक्ति के कामना करेला.

ओइसे त गंगा जी सालोभर पवित्रे मानल जाली.बाकिर उनुका पवित्र धार में दशहरा के बाद से नहान शुरू हो जाला.फेरू त जइसे त्योहारन के तांते लागि जाला.शरद पूरनमासी, दीवाली, छठि, एकादशी, कातिक पूरनमासी, अगहन के पंचमी, बसंत पंचमी, खिचड़ी, मकर यानी मौनी अमावस्या, फगुआ, शिवरात्रि, रामनवमी, बैसाख नवमी, जेठ के गंगा दशहरा.गंगाजी में नहाने नहान रहेला.

रोज गंगा नहाए वाला लोग
गंगाजी के किनारा रहेवाला लोग त तकरीबन रोजे गंगेजी में नहाला आ उहां के जल से पूजा-पाठ करेला.लेकिन आजुओ के जमाना में अइसन-अइसन लोग बा.जेकर घर-दुआर गंगाजी से दू-चार कोस दूरि बा.बाकिर बिला-नागा ऊ लोग पैदल भा साइकिल से गंगेजी के किनारा जाला आ उहां के जल में नहान के बाद घर लौटेला आ आपन कामकाज करेला.

गंगाजी के भोजपुरी समाज में काताना महत्व बा. एकरा के भोजपुरी लोकगीतन से समझल जा सकेला.एह विषय पर विश्वनाथ शाहाबादी जी 1963 में मशहूर फिलिम बना देले रहले.गंगा मइया तोहके पियरी चढ़इबो. एह फिलिम के निर्देशन कइले रहले कुंदन कुमार, जबकि पटकथा लिखले रहले नाजिर हुसैन.कुमकुम, पद्मा खन्ना, नाजिर हुसैन अभिनीत ई सिनेमा इतिहास रचि देले रहे.बादों में गंगाजी के नाम जोड़ि के कइगो फिलिम बनली स. जवना में दूल्हा गंगा पार के बहुते मशहूर भइल. गंगाजी के लेके भोजपुरी में पता ना काताना लोकगीत बा. फगुआ में त गंगाजी पर केंद्रित गीत से फाग के शुरूआत होला. एगो गीत देखीं -
सुरसरी नाव तोहार आरे लाल, सुरसरी नाव तोहार
आरे अबकी, आरे अबकी पार उतार गंगा माई
सुरसरी नाव तोहार, आरे लाल, सुरसती नाव तोहार

भोजपुरी इलाका में लइकन के एगो संस्कार होला बार उतराई.जवना के मुंडनो कहल जाला. ई संस्कार बच्चा के तीन, पांच, सात, नौ भा ग्यारह बरिस के भइला के बाद होला. ओइसे त तीन-पांच साल एह संस्कार खातिर बेहतर उमिर मानल जाला.एतना उमिर तकले बच्चा के बाल ना काटात रहल हा.निर्धारित मुहूरत के दिन गंगाजी के किनारे लइका के माइ गंगा नहा के बच्चा के कोरा में लेके बइठि जाली आ फेरू पंडिजी के मंत्रोच्चार के बीच नाई भाई बच्चा के बार काटेले.सिर से बार उतारला से बनल बार उतराई. ओह में नाई भाई के जमकर नेगचार मिलेला. ओह घरी एगो गीत जरूर गावाला. जवना के बोल अइसन बा-
गंगा मइया जइसे बढ़ेला तोर लहरिया, हाली हाली उठेला हो,
ए गंगा मइया, ओइसे बढ़े, सबके वंश

गंगा जी के माला
बहरहाल एह के बाद गंगाजी के माला पहिनावल जाला. एह खातिर बच्चा के माई बच्चा के कोरा में लेके गंगा के एक ओर खूंटा गाड़ि के बइठि जाली.ओह पवित्र खूंटा में गंगाजी के माला बान्हि के घर के कुछ जिम्मेदार लोग, आजी-दादी, कुछ जवान गीत गवनहारिन लोग नाव से ओह पार जाला आ धीरे-धीरे उ माला छोड़त जाला. ऊ माला आम के पल्लव, फूल आ मूंजि के रसरी से बनेला. नाव ओह पार जाले आ उहवों एगो खूंटा गाड़ाला आ ओह में माला बान्हाला. ऊहंवा गंगाजी के सानल आटा के पीठा, ओह में पइसा खोंसि के पूजा होला. ऊ आटा मल्लाह भाई ले लेले आ नाव पार उतराई के नेग वसूलेले.बाद में माला पहिना के लोग नाव से लवटि आवेला.गंगाजी के माला पहनाई खातिर नाव से होखे वाला आवाजाही में गीत गवनिहारिन लोग गंगाजी के गीत गावेला.जवन कुछ अइसन बा.
मटिया का वेदिया बनावेनी, घाट बनावेनी हो,
से ही बेदी बइठेली गंगा माई, ओढ़ेलि पिताम्बर हो
जब हम जनिती गंगा मइया ओढेले पिताम्बर अइलि हो,
निहुरी-निहुरी गोड़वा लगती, मांगन कुछ मंगती न हो
सोनवा न मंगती हरदी अइसन, चनिया त दहिया नियर हो,
हे गंगा मइया पुतवा त मंगती नरियर अइसन, धियवा लबंग अइसन हो

गीत गवनिहारिन लोग के एगो दल एह के गाइ के एक तरह से सवाल पूछेला त दोसरका दल गीतिये में एकर जवाब देला-
तिरिया सोनवा का होई,
हरदिया अइसन का होई चनिया दहिया नियर का होई
पूतवा नरियर अइसन, धियवा लबंगे अइसन हो

आजुकाल्ह त नाव मशीन से चलतारी स. पहिले मल्लाह लोग बांस आ पतवार से नाव खेवत रहल हा लोग. ओहघरी बीच धार में ले जाके नाव के झिंझिरि यानी घुमरी खेलावत रहल हा लोग. ओहू पर भोजपुरी में गीत बा.
धीरे-धीरे झिंझिरि खेलइहे रे मल्लहावा.
गंगा माई के पूजा के लिए भी भोजपुरी में गीति बा.
मटिया का वेदिया बनावेनी, घाट बनावेनी हो,
से ही बेदी बइठेली गंगा माई, ओढ़ेलि पिताम्बर हो
जब हम जनिती गंगा मइया ओढेले पिताम्बर अइलि हो,
निहुरी-निहुरी गोड़वा लगती, मांगन कुछ मंगती न हो
सोनवा न मंगती हरदी अइसन, चनिया तऽ दहिया नियर हो,
हे गंगा मइया पुतवा त मंगती नरियर अइसन, धियवा लबंग अइसन हो

गंगाजी अपने आप में पवित्र हई. बाकिर पूजा-पाठ में उनुकर बहुत जिक्र बा. भोजपुरी इलाका में बियाह-शादी, जनेव में सबसे पहिले सगुन उठावल जाला. ओह दिन हरदी फोराला.एहवात मेहरारू लोगन के तेल-सेनुर लागेला.बताशा बांटाला. ओह सगुन में एगो गीत गावल जाला.ओहू में गंगाजी के जिक्र होला. शादी-बियाह, जनेव के पहिलका नेवता गंगाजी आ शिवजी के दियाला. गंगाजी के नेवता जहां उनुका धार में जाके दियाला त शिवजी के गांव के शिवाला पर. बहरहाल ओहू मोका पर के भोजपुरी में गीत बा.
पहले नेवता पेठाईले गंगा मइया, दोसरे शिव भगवान हो
जइसे बहे गंगाजी के धार, ओइसे बढ़े एहबात हो
जब बियाह में सेनुरदान हो जाला. तबो गंगाजी के एगो गीत गावाला.
सभके सेनुरवा झरि झुरी जाला,
गंगा माई के सेनुरवा, युग-युग एहवात हो

गंगा भोजपुरी लोकजीवन के नस-नस में समाइल बाड़ी. जनम से लेकर राम-नाम सत् तक उऩुकर छांहे में भोजपुरी समाज डूबल रहेला. गंगा खाली श्रद्धा के प्रतीक नइखी.बल्कि जिनगी के रंगो बाड़ी.गंगाजी बिना भोजपुरी जिनगी के ताकत के कल्पनो ना कइल जा सकेला. गंगाजी ताकत बाड़ी, श्रद्धा बाड़ी आ बाड़ी जिनगी के प्रतीक.

Tags: Article in Bhojpuri, Ganga river

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