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भोजपुरी सिनेमा में माई : तोर मनवा गंगा के पनिया हे राम

भोजपुरी सिनेमा माई के चरित्र के प्रति केतना सजग रहेला?
भोजपुरी सिनेमा माई के चरित्र के प्रति केतना सजग रहेला?

मां के जवन रूप भोजपुरी सिनेमा में बरसो से चलता भोजपुरी सिनेमा ओकरा से आगे नइखे सोचत. भोजपुरी सिनेमा के माई हमेशा एकही दशा में रहेली. जबकि दूसरा भाषा में मां के रोल में अलग अलग आयाम देखे के मिलेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 2:18 PM IST
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अब माई मई में याद आई का ? मई महीना के दूसरा एतवार के? कादो ई मदर्स डे के दिन ह. यूरोप आ अमेरिका से शुरू भइल ई सिलसिला भारत में भी फ़इल-पसर गइल. उहाँ मदरिंग संडे आ मदरिंग संडे फेस्टिवल के भी रिवाज़ बा. हमरा त माई बारहो महीना मन परत रहेले. माघ में रजाई बन के, गर्मी में बेना बन के आ बरसात में छाता बन के. दूर होनी त सपनो में लोरी सुनावेले. एही से माई हमरा रचना-संसार में खूब आइल बिया. गीत में, ग़ज़ल में, दोहा में, कविता में, हाइकु में. इहाँ तक कि कहानी आ निबंध में भी. जी हाँ, हमरा प्रेम-कहानी में भी. जब हम लइका रहीं त ई कहत भा टोक-टाक करत कि रे बउराहा अभी पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दे, इहे काम आई. भा बड़ भइला पर जब कवनो कहानी में हम अपना नायिका के दुपट्टा के घूंघट बनाईं तबो लागे कि माई कहीं से देखsतिया आ कहsतिया जो रे बउराहा इहे मिलली ह- विदेशी. आपन ईलाका में अकाल बा का ? आ फेर बड़ा सौम्य आ शांत होके कहे कि ‘जवना में तोहार ख़ुशी, तोहरे नू रखे आ निबाहे के बा.. ना त ईलाका में का बा, जाति-धरम में का बा.. तू देखs आपन. हमनी के गोतिया-देयाद आ जाति-बिरादर के खूँटा से बन्हाइल बानी जा‘’ .तब माई हमरा अपना समय से सौ साल आगे दिखे. बेपढले प्रगतिशील दिखे.

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खैर, अपना माई पर चाहे माई पर केन्द्रित अपना रचनन पर फेर कबो बतिआयेम. आज त भोजपुरी सिनेमा में माई पर बात करे के मूड बनवले बानी. लेकिन बात शुरू करे से पहिले माई पर आपन कुछ शेर त कहबे करब -
हजारो गम में रहेले माई, तबो ना कुछुओ कहेले माई
हमार बबुआ फरे-फुलाये, इहे त मंतर पढ़े ले माई


नजर के कांटा कहेनी रउरा, जिगर के टुकड़ा कहेले माई
‘मनोज’ हमरा हिया में हरदम, खुदा के जइसन रहेले माई

हमार ई शेर माई के अहमियत के दरसावता. माई के दर्जा त भगवानो से ऊपर मानल गइल बा, काहे कि उ हमनी के सृजनकर्ता बाड़ी. भोजपुरी सिनेमा में माई के अहमियत दर्शावे वाला कई गो फिलिम बनल बा. भोजपुरी फिलिम अक्सर गांव के कहानी पर केन्द्रित रहेला. गांव में रिश्तन के कद्र आजुओ शहर से ज्यादा बा. एही से भोजपुरी फिलिम में माई के रोल भले तनी कम होखे, बाकिर रहेला जरूर.

रोल करे वाला एक्टरन के राय
हम इहां भोजपुरी सिनेमा में माई अउर भोजपुरी स्टार के ऑनस्क्रीन आ ऑफस्क्रीन माई के बात करे जा रहल बानी. माई के का-का योगदान बा अपना बेटा चाहे बेटी के हीरो-हीरोइन बनावे में, एहू पर चर्चा करब. इहो बताइब कि भोजपुरी सिनेमा में कवना तरह के माई गढ़ल जात रहल बाड़ी. साथहीं कुछ अइसन माई के भी जिक्र करब जे खुद भोजपुरी फिलिम के अभिनेत्री बाड़ी, माई बनत बाड़ी आ अपना बेटियो के हीरोइन बना देले बाड़ी. कबो-कबो त उ खुद अपना बेटियो के माई बनत बाड़ी. त ऑफस्क्रीन माई के ऑनस्क्रीन माई बनला पर ओकर संतान केतना सहज या असहज रहेला, इहो जानल दिलचस्प होई. भोजपुरी के सुप्रसिद्ध अभिनेत्री अक्षरा सिंह के माई नीलिमा सिंह भी भोजपुरी सिनेमा में काम करेली अउर बहुत सारा फिलिमन में उ माई के रोल कइले बाड़ी. नवोदित अभिनेत्री काजल यादव के माई माया यादव भी भोजपुरी सिनेमा के पुरान आर्टिस्ट बाड़ी अउर बहुत सारा फिलिमन में उहो माई के रोल कइले बाड़ी.

एगही पैटर्न बा का?
भोजपुरी सिनेमा में भी सब भाषा के सिनेमा जइसन अधिकतर फिलिम में माई के भूमिका गढ़ल जाला लेकिन भोजपुरी में माई के कई गो रूप नइखे देखावल गइल. अमूमन भोजपुरी फिलिमन में माई के किरदार गढ़त समय कुछ विशेष पैटर्न के इस्तेमाल कइल जाला, जे कि किरदार के स्कोप कम करके ओकरा के स्टीरियोटाइप बना देला, जइसे कि भोजपुरी फिलिम में माई, बाबूजी के मर गइला के बाद लाचार विधवा बन जाली, फेर आपन पति के कातिलन से बदला लेवे खातिर अपना बच्चन के तइयार करेली. कबो माई मूक-दर्शक बनके अत्याचार सहत-सहत तलवार उठा लेली, लेकिन ई ओही परिस्थति में होला जब उनका पास उनकर हीरो बेटा ना होला. अगर फिलिम के कहानी में माई अउर बाबूजी दूनो जिंदा बाड़न त माई उहां मात्र एगो फिलर के रूप में रहेली. हालांकि कई गो फिलिम अइसन बनल बा, जेकरा के मदर इंडिया के लीक पर बनल मानल जा सकता, जइसे कि राम बाबू के बनावल फिलिम ‘माई’ जे सन् 1989 में बनल रहे. ई फिलिम माई के केंद्र में रख के बनावल गइल रहे. एह फिलिम में एगो माई अपना बच्चन खातिर संघर्ष करत बाड़ी.

भोजपुरी फिलिमन के माई ओतना प्रगतिशील नइखी, जेतना कि दूसर भाषा के फिलिम के माई. दूसर भाषा के फिलिमन में जहां बेटी के शिक्षा खातिर उ अपना पति अउर पूरा समाज से लड़ जाली, पन्ना-धाय के तरह बलिदानी होखेली, त कबो अइसन बागी बन. जे अपना बच्चन के खुशी खातिर अपना घर-परिवार के छोड़ के अकेले निकल जाली, उहें भोजपुरी फिलिमन में माई के अइसन संघर्ष आ जीवटता दुर्लभ बा. जबकि असल जिनगी में हमनी के समाज में अइसन त्याग बाटे. भोजपुरी फिलिम इंडस्ट्री में बरिसन से माई के किरदार करे वाली कुछ अभिनेत्री लोग से हमार बात भइल. आईं ओह बात के रउआ लोग से साझा करत बानी.

बंदिनी मिश्रा -
सन् 1984 में आइल फिलिम ‘पान खाए सइयां हमार’ में हीरो सुजीत कुमार के साथे हीरोइन के भूमिका से डेब्यू करे वाली बंदिनी मिश्रा बाद के फिलिमन में माई के सफल किरदार निभवले बाड़ी. बकौल बंदिनी उ अभी ले 70 के करीब भोजपुरी फिलिम कऽ लेले बाड़ी, जेकरा में माई के भूमिका वाला कई गो रोल रहल बा. उनका माई के किरदार वाला कुछ फिलिमन में खून पसीना, बारूद, सात सहेलियां अउर दीवाना प्रमुख बा. दीवाना फिलिम के गाना ‘तोहरा में बसेला परनवा’ अउर सात सहेलियां के ‘माई हऊ माई बुझऽ माई के दरदिया’ इनका पर फिल्मावल खूबसूरत गाना बा.

पुष्पा वर्मा -
100 गो से ऊपर भोजपुरी फिलिम करे वाली पुष्पा वर्मा के माई के भूमिका निभावे खातिर भोजपुरी के ‘निरूपा रॉय’ भी कहल जाला. उ भोजपुरी के तकरीबन हर बड़का कलाकार के साथे काम कर चुकल बाड़ी. उनका माई के मजबूत किरदार वाला कुछ फिलिम में ‘माई के चरनिया में चारो धाम’, मनोज तिवारी के फिलिम ‘देहाती बाबू’ अउर ‘दामाद जी’, पवन सिंह के फिलिम ‘देवरा बड़ा सतावेला’ अउर ‘प्रतिज्ञा’ बाटे.

माया यादव -
साल 2001 में रवि किशन के फिलिम ‘सइयां हमार’ से आपन करियर के शुरुआत करे वाली माया यादव फिलिम में भाभी अउर माई के किरदार खूब निभवले बाड़ी. नवोदित अभिनेत्री काजल यादव माया यादव के ही बेटी हई. पुरनका भोजपुरी फिलिमन के प्रसिद्ध अभिनेत्री माधुरी मिश्रा उनका के भोजपुरी फिलिम में काम करे के सलाह देले रहली. बकौल माया, उ अभी तक 250 से ऊपर फिलिम कर चुकल बाड़ी, जेकरा में माई के दमदार रोल वाला सराहनीय फिलिमन में दिनेशलाल यादव निरहुआ के ‘दिलेर’ अउर ‘बिदेसिया’, खेसारीलाल के ‘लाडला’, विराज भट्ट के फिलिम ‘आंधी और तूफान’ उल्लेखनीय बा. फिलिम ‘लाडला’ के एगो गाना उनका पर फिल्मावल गइल रहे, जवन कि ओ बेरा खूब चलल रहे. गाना के बोल रहे ‘ममता के अनमोल खजाना कबो ना दिल से तेजे, कुहुकेला हरदम बेटा खातिर माई के करेजा.’

नीलिमा सिंह -
मशहूर भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह के माई नीलिमा सिंह भी भोजपुरी फिलिमन में माई के कई गो किरदार निभवले बाड़ी. हालांकि उनकर नेगटिव किरदार ज्यादा मशहूर रहल बा. उ हिट टीवी शो ‘निमकी मुखिया’ में अनारो देवी के रोल खातिर भी जानल जाली. बकौल नीलिमा, उ अभी ले भोजपुरी में 50 से अधिक फिलिम कर चुकल बाड़ी. उनका माई के रोल वाला कुछ चर्चित अउर बढ़िया फिलिम में, ‘उगऽ हो सूरुज देव’, ‘बिदाई’, ‘आज के करण अर्जुन’ अउर ‘ससुराल’ रहल बा जवन कि उनका किरदार के चलते भी खूब चलल रहे. फिलिम ‘उगऽ हो सूरुजदेव’ में उनका ऊपर एगो गाना ‘अनमोल रतन धन’ फिल्मावल बा जेकरा में माई के ममता के सुंदर रूप देखावल गइल बा.

किरण यादव -
साल 2003 में कुणाल सिंह के फिलिम ‘कन्यादान’ से आपन करियर शुरू करे वाली किरण यादव भी माई के दमदार रोल निभवले बाड़ी. निरहुआ के अधिकांश फिलिम में माई के रोल करे वाली किरण यादव मनोज तिवारी के फिलिम ‘दरोगा बाबू आई लव यू’ में पहिला बार माई के रोल कइले रहली. उ लाचार माई से लेके वंश खातिर कवनो हद तक जाये वाली माई के भूमिका निभवले बाड़ी. फिलिम ‘लहू के दो रंग’ में उनकर किरदार उनका सबसे ज्यादा पसंद बा काहे कि ओकरा में औरत के डोली से ब्याह के अइला से लेके अर्थी पर अंतिम यात्रा तक के कहानी बा. एकरा अलावा फिलिम ‘कच्चे धागे’ में कुटिल सौतेली माई जे बाद में कोमल हो जात बाड़ी, के भी लोग खूब पसंद कइले बा. ‘बेटा’ फिलिम में जेल में एगो बच्चा के पैदा करे वाली माई के संघर्ष भी उनका दिल के बहुते करीब बा. निरहुआ के फिलिम ‘जिगरवाला’ में उनका पर फिल्मावल गइल गाना ‘अमृत के धार’ काफी सुंदर बन पड़ल बा.

भोजपुरी सिनेमा में माई पर गीत
भोजपुरी फिलिम में माई पर खूब गीत लिखाइल बा अउर गावल गइल बा। 1980 में आइल फिलिम ‘रुस गइलें सइयां हमार’ के गीत ‘माई रे माई तोर मनवा गंगा के पनिया हो राम’ रफी साहेब के आवाज में यादगार गीत बा. एगो अउर अइसनके गाना ‘पंडी जी बताईं ना बियाह कब होई’ फिलिम में बाटे, ए गाना के बोल बा ‘माई जइसन हो, के करी दुनिया में प्यार’.

ई गाना माई के अपना बच्चन खातिर प्रेम आ ममता के खूबसूरत उदाहरण बा. फिलिम ‘गंगा किनारे मोरा गांव’ के एगो लोरी ‘जइसे रोज आवेलू तू टेर सुनके’ ओ बेरा भोजपुरी क्षेत्र में बहुते मशहूर भइल रहे. ओह गाना के आपन दर्द भरल आवाज दिहले रहली उषा मंगेशकर. सुपरस्टार खेसारीलाल के फिलिम ‘लाडला’ में भी एगो गाना माई के समर्पित कइल गइल बा जवना के बोल बा ‘ममता के अनमोल खजाना’. ई फिलिम भी माई अउर बेटा के अनमोल रिश्ता पर बनल यादगार फिलिम बा. एह फिलिम के कहानी, पटकथा, गाना आदि बहुते नीक बन पड़ल बा. फिलिमन से इतर भोजपुरी गीत-संगीत में भी लोक गायक द्वारा माई पर केन्द्रित ढेर सारा गाना गावल गइल बा जवन कि बहुत मशहूर भइल बा. जइसे कि लोक गायिका चन्दन तिवारी के आवाज में सुभाष यादव के लिखल गीत ‘केहू केतनो दुलारी बाकी माई ना होई’  चाहे हमार (मनोज भावुक) लिखल गीत ‘बबुआ भइल अब सेयान कि गोदिये नू छोट हो गइल’, खूबे पसंद कइल गइल बा.  चंदन एगो अइसन गायिका बाड़ी जे माई पर सीरीज कर रहल बाड़ी. ओह में माई पर केंद्रित हमरो कविता आ गजल शामिल बा.  निर्देशक-संगीतकार रजनीश मिश्रा के फिलिम ‘मेंहदी लगा के रखना’ में हमार लिखल जवन गीत शामिल बा, ओकर बोल बा-
अंचरा छोड़ा के चल काहे दिहले, एतना दूर ए माई
अब के बबुआ-बबुआ कहके हमके पास बोलाई
तोरा बिना जीही, जीही कइसे, तोर बउरहवा ए माई

रजनीश मिश्रा अपना फिलिमन में माई के खूबसूरती से देखावत रहल बाड़न. निरहुआ के फिलिम‘ जिगरवाला’ में उनका संगीत निर्देशन में प्यारेलाल यादव के लिखल आ आलोक कुमार के गावल एगो खूबसूरत गीत बा, ‘अमृत के धार केहू केतनो पिआई, एगो माई बिना, कइसे करेजवा जुड़ाई, ए भाई, एगो माई बिना.’

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं )
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