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भोजपुरी विशेष - झारखंड में गरमाइल बा सरना धर्मकोड के मामला

भोजपुरी विशेष - झारखंड में गरमाइल बा सरना धर्मकोड के मामला

झारखंड में सरना जनजाति प बहस एक बार फेरि तेज हो गइल बा.

झारखंड में सरना जनजाति प बहस एक बार फेरि तेज हो गइल बा.

झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार सरना धर्मकोड के प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के भेज देले बा. 2021 के जनगणना में आदिवासी लोगन खाती सरना धर्मकोड के प्रावधान लागू करे के मांग वाला इस मसला अब केंद्र के पाला में चलि गइल बा. बाकी बीजेपी के सामने एकरा के लेके अलग दिक्कत बा.

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वर्ष 2021 जनगणना के साल बा. एह मौका प झारखंड में सरना धर्मकोड के मामला गरम हो गइल बा. हालांकि ओहिजा के हेमंत सोरेन सरकार सरना धर्मकोड के प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के भेज देले बा. ओकरा में केंद्र सरकार से मांग कइल गइल बा कि 2021 के जनगणना में आदिवासी लोगन खाती सरना धर्मकोड के प्रावधान लागू कइल जाए. अभी तक ऊ लोग के गिनती हिन्दू धर्म में होत रहल बा. 2011 के जनगणना के मोताबिक झारखंड में आदिवासी लोगन के आबादी राज्य के कुल जनसंख्या के 26.2 प्रतिशत रहे. ओकरा में 3 प्रतिशत ईसाई रहलन. धर्म के लिहाज से देखल जाए त ओहिजा के आदिवासी तीन हिस्सा में बंटल बाड़ें. एक हिस्सा ईसाई हो गइल बा. एक हिस्सा हिंदू धर्म के माने वाला बा. लेकिन ओकर सबसे बड़ हिस्सा सरना धर्म के अनुआई बा. ऊ लोग आपन अलगा पहचान खाती बहुत पहिले से सरना धर्म कोड के मांग कर रहल बाड़ें. एकरा खाती आजादी के समय से कई बार आंदोलन हो चुकल बा.

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जनगणना में छौ ठो धर्मकोड
अभी जनगणना में छौ ठो धर्मकोड बा. जवन हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख, बौध आ जैन लोगन खाती बा. सातवां अन्य बा जेकरा में ई छौ धर्म के अलावा कौनो धर्म माने वाला लोग गिनाए लन. सरना धर्म माने वाला आदिवासी लोग अभी तक अन्य में दर्ज होत रहल बाड़ें. उनका खाती कौनो अलगा कोड ना रहे. ऊ लोग सातवां अंक आपन धर्मकोड खाती चाहत बाड़ें. एकरे प्रस्ताव देल गइल बा. अब राज्य सरकार के प्रस्ताव प केंद्र सरकार के निर्णय लेवे के बा.

सोरेन के सीएम बनला के बाद मुद्दा फेर तेज भइल
2019 में जब झारखंड में हेमंत सोरेन के सरकार बनल त नागरिकता आ धर्म पर देशव्यापी बहस चलत रहे. साथे-साथ 2021 के जनगणना की तैयारी भी शुरू हो गइल रहे. 2014 से 2019 तक एनडीए के सरकार रहे जेकरा में रघुवर दास मुख्यमंत्री रहलन. उहां के झारखंड के पहिला गैर आदिवासी मुख्यमंत्री रहीं. 2019 के चुनाव में पांच साल बाद महागठबंधन के जीत भइल आ आदिवासी नेता हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बन गइलें, उनका मुख्यमंत्री बनला के बाद सरना कोड का मामला एकबार फिर जोर-शोर से उठल रहे.

अलग पहचान के चाह
सरना एक ठो प्रकृति आधारित धर्म हवे. झारखंड के आदिवासी समाज आदिमे युग से एकरा मानत रहल बा. हालांकि एकर कौनो लिखित धर्मशास्त्र या विधि-विधान नइखे. एकर नियम-कानून एक पीढ़ी से दोसरा पीढ़ी तक मुहांमुहीं चलत रहल बा. एकर वाहक पाहन मने आदिवासी पुजारी रहल बाड़न. हर गांव के आपन पाहन होए लन. सरना धर्म के माने वालन के संख्या 60 लाख से जादा होए के दावा कइल जाए ला. असल संख्या का बा ई 2021 के जनगणना के बादे पता चली. सरना धर्म के माने वाला लोगन के सबसे बड़ देवता सूरज बाड़न. जिनका के ऊ लोग मरांग बुरू कहे लन. एकरा अलावा भी कई ठो देवी-देवता बाड़ें जे जंगल पहाड़ से लेके गांव स्तर तक के होखे लन. हर आदिवासी गांव के बाहर कौनो पेड़ के नीचे उनकर स्थान होला. ओहिजा एक ठो पत्थर के रूप में उनका के राखल रहे ला. सरना धर्म के माने वाला लोग आपन अलग पहचान चाहे लन. आजादी के पहिलहीं से एकर मांग के लेके संघर्ष कर रहन बाड़ें. उनकर कहनाम बा कि जवन आदिवासी ईसाई धर्म स्वीकार कर चुकल बाड़न ऊ जनगणना के समय धर्म के कॉलम में ईसाई लिखे लन. बकी सरना माने वाला लोग जब सरना लिखे लन त हिंदू चाहे अन्य के खाता में गिनाए लन. तकलीफ के बात इहो बा कि जवन आदिवासी ईसाई बन चुकल बाड़ें सरकार के खाता में उनकरो के अनुसूचित जनजाति मानल जाला आ एकर लाभ देल जाला. सरना धर्म के माने वाला लोग अपना के हिंदू धर्म के नजदीक समझे लन लेकिन हिंदू ना माने लन. उनकर रीति-रिवाज, खान-पान, पर्व त्योहार, पूजा-पाठ के तौर तरीका एकदमे अलगा बा. 2011 के जनगणना के समय भी सरना कोड को शामिल करने की मांग उठल रहे. ओ घड़ी सरकार निर्देश देले रहे कि छौ धर्म के अलावा जे कोई अउर धर्म मानत बा ऊ बिना कोड नंबर के धर्म के नाम लिख देवे. ओह जनगणना में करीब 42 लाख लोग सरना धर्म लिखले रहलन. जवन अन्य के खाते में चल गइल रहे.

1951 में जब आजादी के बाद भारत के पहलका जनगणना भइल रहे तब आदिवासी खाती धर्म के कॉलम में नउआं नंबर प ट्राइब उपलब्ध रहे. लेकिन बाद में ओकरा हटा देल गइल. अब आदिवासी लोगन के कहनाम बा कि ई प्रावधान हटा देला से आदिवासी के गिनती अलग-अलग धर्म में होखे लागल जेकरा चलते उनकर समुदाय के बहुते नुकसान भइल बा. पिछला चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा आपन चुनाव घोषणापत्र में सरना कोड को शामिल कइले रहे.

भाजपा के दिक्कत
आदिवासी लोगन के पारंपरिक पंचायत राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के धर्मगुरु बंधन तिग्गा आपन स्तर पर सरना धर्म के माने वालन के गणना पहलही शुरू करा देले बाड़न. जबले रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहन उनका से कौनो उम्मीद ना रहे लेकिन आदिवासी नेता होने के चलते हेमंत सोरेन से समर्थन के उम्मीद रहे. हेमंत जी उनका उम्मीद पर खरा उतरलन. अब निर्णय मोदी सरकार के लेवे के बा. चुनाव के समय भाजपा आदिवासी समाज के बीच हिंदुत्व के एजेंडा चलइले रहे. हालांकि विधानसभा चुनाव मे एकर कौनो खास लाभ ना मिलल. सरना और ईसाई आदिवासी के बीच झगड़ा भी करावल गइल लेकिन ऊ लोगन के बीच जादा टकराव ना हो पाइल. अब केंद्र के भाजपा सरकार सरना धर्मकोड के मांग नइखे मानत त बाद में ओकरा खाती आदिवासी समाज में हिंदुत्व के एजेंडा चलावल मुश्किल हो जाई. आ समर्थन करके एकर श्रेय लूटे के कोशिश करी त हेमंत सरकार के कार्यकाल तक सरना-आदिवासी विवाद बढ़ावे में दिक्कत होई. हालांकि भाजपा संघ के मदद से ईसाई आ सरना धर्मावलंबी के बीच के विवाद धीरे-धीरे बढ़ा सके ले. झारखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वनवासी कल्याण केंद्र के बैनर तले बहुत पहिले से ईसाई विरोधी आंदोलन चलाल बा. खासतौर पर धर्म परिवर्तन ओकर मुख्य मुद्दा रहल बा. एह मुहिम के जरिए संघ मिशनरी के खिलाफ हिन्द आ सरना आदिवासी के एक मंच पर लावे में सफल रहे. धर्मकोड बन गइला के बाद ईसाई मिशनरी के खिलाफ सरना धर्मावलंबियों के इस्तेमाल में कौनो दिक्कत ना आई लेकिन सरना वालन के हिंदू जमात में खाड़ा कइल मुश्किल हो जाई. अब देखे के बा कि केंद्र के मोदी सरकार सरना धर्मकोड के प्रस्ताव के कवना रूप में लेत बा आ का फैसला करत बा.

Tags: Article in Bhojpuri, Hemant soren, Jharkhand news

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