भोजपुरी विशेष: भोजपुरी ठाट के हीरो रहनी हा महेंद्र मिसिर

सुरेंद्रलाल घोष नाम के जासूस ‘गोपीचंद’ बनिके तीन साल तक महेंदर मिसिर के इहां नौकर के तरह रहल.

सुरेंद्रलाल घोष नाम के जासूस ‘गोपीचंद’ बनिके तीन साल तक महेंदर मिसिर के इहां नौकर के तरह रहल.

भोजपुरी गीतन के चरचा आवते महेंद्र मिसिर के नाम दिमाग में उभर जाला. महेंद्र जी जीवन उनका गीत से कम सरस ना रहल हा. पहलवान, क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी और सबसे बढ़िके समर्पित मित्र. उनका जीवन के अलग-अलग पहलु पर लेख –

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  • Last Updated: September 8, 2020, 1:27 PM IST
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कहानी एगो गीतकार के ह, त चलीं पहिले उनकर कुछ गीत इयादि दियावल जाइ. भोजपुरिया लोग इ गीति आजुओ गावे ला- (1) अंगुरी मे डंसले बिआ नगिनिया, ए ननदी दिअवा जरा दे (2) सासु मोरा मारे रामा बांस के छिउंकिया, सुसुकति पनिया के जाय, पानी भरे जात रहनी पकवा इनरवा, बनवारी हो लागि गईले ठग बटमार (3) आधि आधि रतिया के पिहके पपीहरा, बैरनिया भईली ना, मोरे अंखिया के निनिया बैरनिया भईली ना (4) पिया मोरे गईले सखी पुरबी बनिजिया, से दे के गईले ना, एगो सुनगा खेलवना से दे के गईले ना. इ गीतियन के सुनते बहुते लोग बता सकेले कि एकर लिखे वाला महेंदर मिसिर हउवन.

भोजपुरिया माटी महेंद्र मिश्र के महेंद्र मिसिर के नाम से ही चीन्हे जाने ला. बिहार में  छपरा के मिश्रवलिया में पैदा भइले महेंदर मिसिर आजु कथा कहानिये में रहि गइल बाड़े. एकर कारण इ बा कि अपना जिनगी भर ऊ अजीब तरह के आदमी जनात रहि गइले. अब जरूर पता लागत बा कि फिल्मिया लोग उनका गीत-गाना अउर जिनगी के कहानी में डूबल उतराइल शुरू कइले बा. महेंदर मिसर के कहनियो त खूब बा. पहलवानी, घोड़ा के सवारी आ राग-रागिनी के शौखीन महेंद्र मिसिर भोजपुरी गीत-संगीत के कवनों कोना छोड़ले नइखन. आपना घर वाली आ बेटा के छोड़ि के राग-रागिनी में धूनी रमा लिहले. सबसे जियादा उनका बारे में इ जानल जाला कि बनारस, कलकत्ता, छपरा अऊर मुजफ्फरपुर के गावे वाली तवायफ लोगनि महेंदर मिसिर के गुरू के तरह मानत रहे.

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एकर कारन इहे बा कि महेंद्र मिसिर के गवनई में भक्ति अऊरी श्रृंगार के संगे विरह के बड़ा मिलवनी बा. ओकरा के गावे में रस बा. दोस्ती अइसन कि जमींदार हलिवंत राय के कहला पर एगो गावे वाली के बेटी ‘ढेला बाई’ के उठा ले अइले. पर बाह रे महेंद्र मिसिर कि हलिवंत राय के ना रहला पर जमींदारी में ढेला बाई के हक दिअवले खातिर लड़बो कइले. आ अपने जब सरग सिधरले ते ढेला बाई के कोठी के बगल में एगो मंदिर के लगे. अब ए परिचय के बाद इ बतावल खास बा कि उहे महेंद्र मिसिर आजादी के लड़ाई में क्रांतिकारी लोगन के मददगार रहले. ए खातिर उनका जेल जाएके पड़ल.
भईल कि बंगाल में संन्यासी विद्रोह अउर भोजपुरिया क्रांतिकारी मंगल पांड़े के विद्रोह के बाद 1886 में पैदा भईले महेंद्र मिसिर भी अंगरेजी राज के खिलाफ हो गइले. उनकर परिचे एगो अंगरेज से भइल, जवन बंगला बोले भी जानत रहे. जब उ अंगरेज इंगलैंड जाये लागल त एगो नोट छापे वाली मशीन महेंदर मिसिर के दे गइल. मिसर जी गांवे अइले. क्रांतिकारी लोग से परिचे रहबे कइल. मिसिर जी नोट छापि के क्रांतिकारी लोगन के देबे लगले. इ बात स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ सिंह अउर तापसी सिंह भी मनले बाड़े कि मिसिर जी सेनानी लोगन के मदद करत रहले.

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संसद सदस्य रहि चुकल स्वतंत्रता सेनानी बाबू रामशेकर सिंह के भी मानल बा कि मिसिर जी के घर क्रांतिकारी लोगन के अड्डा बनि गइल रहे. असली बात त इ रहे कि नोट छापे के काम आपन सुख के खातिर ना बलुक अंगरेजी राज के इंतजाम चउपट करे खातिर शुरू भईल. आखिर गीतकार महेंद्र मिसिर के मन में भी इ बात त रहबे कइल-
‘हमरा नीको ना लागे राम गोरन के करनी/ रूपया ले गइले, पइसा ले गइले/ ले इगले सारा गिन्नी/ ओकरा बदला में दे गईले ढल्ली के दुअन्नी.’

अंगरेज सरकार के पाता लागल त महेंदर मिसिर के पीछे जासूस लगा दिहलस. ओही में से एगो सुरेंद्रलाल घोष नाम के जासूस ‘गोपीचंद’ बनिके तीन साल तक महेंदर मिसिर के इहां नौकर के तरह रहल. धीरे-धीरे मिसिर जी के करीब आइके उनके पान खिआवे के काम भी करे लागल. पान के शौखीन महेंदर मिसर ओकरा सामने खुले लगले. फेर त गोपीचंद के जासूसी पर सोरह अपरैल उनइस सौ चौबीस के मिसिर जी गिरफ्तार कइ लिहल गइले. पटना हाइकोर्ट में मिसिर जी के बचावे खातिर कलकत्ता, बनारस, छपरा अऊर मुजफ्फरपुर के गायिका लोगनि अपना जमा-पूजी, गहना-थाती सब लेके हाजिर. तबो मिसिर जी के दस साल के सजा भइल. ओघरी महेंदर मिसिर लिखि परले-
पाकल पाकल पानवा खिअवले गोपीचनवा पिरितिया लगा के ना,

हंसी हंसी पानवा खिअवले गोपीचानवा पिरितिया लगा के ना…

मोहे भेजले जेहलखानवा रे पिरितिया लगा के ना…
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