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भोजपुरी विशेष - चलत फिरत कहानी रहलें नेउर मामा

गांव में अइसन कई गो कैरेटक्टर होला जेके बुलाइल ना जा सकेला.
गांव में अइसन कई गो कैरेटक्टर होला जेके बुलाइल ना जा सकेला.

गांव अउर बचपन के स्मृति कुछ अइसन होला जवन भुलइबे ना करेला. गांव में अइसने एक व्यक्ति के कहानी जवन आवत रहला हां त लागत रहल हा कि कहानी आ गइल. चलत फिरत कहानी के रेखाचित्र

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2020, 3:42 PM IST
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एगो राजा रहलन. उन पर विपत्ति पड़े वाली रहे. जब बखत आईल त विपत्ति राजा की घरे गईल आउर उनसे कहलस की, ‘ये राजा! हम तोहरा पर पड़ब.’ राजा कहलन की अबहीं मत पड़ा. हम घरे अकेले हईं. रानी गरभ में हईं. उनकरा के केहू देखे वाला ना बा. एतना कहिके राजा लोटा उठवलन आउर पोखरी की तरफ चल गईलन. लेकिन विपतिया ना मानल. ओकर समय आ गईल रहे. उ राजा पर पड़ गईल. ओकरी बाद राजा क कुल बिलाए लागल. ओह दुःख के कहवइया गाके सुनावे- ‘हथिया मरे हो रामा ओही हथिसरवा हो’, घोड़वा लवंगिया के डाढ़ जी. राजा मरे हो रामा पोखरी की भिटवा हो, रानी मरेलीं गजओबर जी. बहिनी के ले हो गईलें बंशी क राजा हो, भईया .........’

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सुनबा तू सुनबा हो भईया. . .



चार-पांच दशक पाहिले क बात ह. तब इ गीत गावे वाली आवाज़ के पूरा गांव चिन्हत रहे. राती क जब कुकुर आउर सियार छोड़ के सब सुत जाय. कहीं-कहीं से झींगुर आवाज़ आवे लागे. असमान में तनी हवा आउर कुहेसा छा जाय. चाँद-तारा कहीं कुछ ना देखाय. तबो नेउरा मामा क इ अवाज़ लोगन के रजाई से बहरे निकाल लियावे. खेती किसानी/चारा-पानी में दिनभर लागल रहे वाला किसान क थकान छूमंतर हो जाय. गांव क लोग अपने के रोक ना पावें. पूस की जाड़ा में भेड़ीहवा कमरा लेके आ जायं आउर रात भर नेउरा मामा क किसा चले. नेउर एगो कान पर हाथ क गदोरी लगा के, मुंह के उपर क के तनी लमहर तान लें आउर गावें.....‘सुनबा तू सुनबा हो भईया बटोहिया हो ना, भईया पति मोरा गईलें परदेशवा हो ना, भईया भेजलन ना एकहू सनेसवा हो ना, भईया.....’
नेउर माम कहास

नेउर मामा कहनी ना सुनावें, कथा के जिए लागें. अईसन लगे जईसे कि किसा क घटना सम्हने होत बा. उनकी अवाज़ में एतना भराव आउर अकर्षन रहे कि सुने खातिन केहू के बोलावे ना जाए के परे. नेउर मामा के अयिले क खबर गांव में जेठ की आग मतीन फयिल जाय. जेके जनकारी ना मिले ओकरा के रात में नेउर क अवाज़ बोला लियावे. किसा की बीच में कवनो अड़चन ना आवे, लईका/छेहर हल्ला ना करें, केहू घर से गोहरावे ना आवे, एहीसे किसा क बईठकी रात में होखे. दूसरी पहर से शुरू होखे त भोर ले चले. लईकन के राती क किसा सुनले क अनुमति ना रहे. खाली बुढ़-पुरनियन क जुटाव होखे.

कहनी शुरू भईले से पहिले कह देहल जाय कि जेके बहरे-भीतर जाए के होखे उ घूम आवे. बाद में शुकवा देखले की पहिले केहू हिली नाही. केहू क पेट ख़राब रहे त उ दरवाजा की पास बईठे. सुरती खाए वाला थूक घोंट लें, लेकिन उठे नाहीं. नेउर के नराज भईले क डर रहे. हमहन की होश में नेउर एक बेर नराज़ भईल रहलन. गांव से चारगो जबान क धनी लोग उनकरा के मनावे गयल रहलन. बहुत मिन्नत कईले पर उ राजी भयिलें.

नेउर लईकन के बहुत माने. दिनभर केहू न केहू क लईका कान्ही पर टांग के घूमें. कहें- ‘असली देवता इहे हवन स. बिना सुवारथ के प्रीत वाला. असली गियानी इहे हवन स. आपन-पराया पहिचाने वाला.’ हमरी मतीन लईका उनके ‘नेउर तोहर कय दांत, कगो-टूटल, कगो बाकी’ कह के दिन भर चिढ़ावें. लेकिन उ कबों कवनो लईका के कुछ ना कहें. बस एतने कहें- ‘अरे नाती. मिला तब बतायिला.’ लेकिन कबो उ केहू के ना बतावें. इ ‘बतावल’ उनकर जुमला रहे. राती क लईकन के कहनी सुने ना जाए दें. एसे की लईका बेर-बेर उठ के बहरे जायं. अयिले-गईले से कथा क उतार-चढ़ाव टूटे लागे. नेउर कहें- ‘इ ससुर लईका ह की बानर. का घड़ी-घड़ी आवत-जात हवे रे.’ लेकिन एसे अधिका नेउर कबो कवनो लईका के ना बोलें.

नेउर के कवनो लईका ढेर परेशान करे त उ कहें कि ‘अरे हम तोहार मामा हईं न. मामा के परेशान ना कईल जाला.’ तब लईका कहें की, ‘नाहीं! तू बुढ़वन क मामा हवा. एहिसे खाली उनहने लोगन के कहनी सुनावेला. जब लईका ढेर शिकायित करे लगें त नेउर मामा एक दिन सांझी क गांवभर की लईकन के लेके बईठ जायं कहनी सुनावे. लईका खुश. एसे की जबले कहनी चले तबले कवनो लईका क घर वाला ओके बोलावे ना जाय. नेउर के नराज भईले क डर रहे.

बच्चा आ बूढ़ दूनो के कहानी

आज जब पीछे मुड़ के देखल जाला त समझ आवेला की नेउर क पासे दुगो तरह क कहनी होखे. बड़-बूढ़ की कहनी में जीवन जियले आउर विकट परिस्थिति से लड़ले क हौसला रहे. ‘मेहनत क फल मीठा होला’- उनकरी कहनी में इ गियान छिपल रहे. एकरा के आज साहित्य आउर सनीमा में ‘आदर्श’ कहल जाला. जबकि लईकन की कहनी में हंसी-ठिठोली, उत्साह क बात रहे. ओकरा में हमेशा प्रेरना देवे वाली बात रहे. नेउर बतावें कि ‘कईसे जंगल में रहे वाला एगो गरीब लईका शेर से बाज गयल आउर ओकरा के उठा के पटक दिहलस.’ इ बात कहत समय नेउर क हाथ-पांव अईसे चले जईसे सच में कुश्ती होत होखे. उ कहनी एतना उत्साह में कहें की लईका रोमांचित हो जायं. घरे गईले पर लईका खुद कहनी सुनावें लागें. नेउर क एगो कहनी लईकन के एतना प्रभावित क दे.

अंगरेजन जइसनर रूप

नेउर अंगरेज मतीन भुंवर रहलन. छोटी-छोटी आंख रहे. एतना छोट कि लगे जईसे की देखे खातिन बहुत मेहनत करेके परत ह. उनकर असली गांव कहां रहे? केहू के ना पता. उनकरी घर-परिवार की बारे में केहू पूछे त उ नराज हो जायं. ओह दिन खाना ना खायं. मन से बहुत उदास हो जायं. उनकर कुछ कहनी अयिसनो रहे जेके सुनके लागे की उनकर आपन जीवन कहनी में रचल बसल ह. कहे में उ हसल/रोवल/गावल एक समान करें. अयिसहीं लईकन क कहानी कहत समय लगे कि उ आपन बचपन जियत हवें. रोवत लईकन के हंसा दें. खुद रोवे लागें. येह हिसाब से बहुत बड़हर कलाकार रहलन. उनकी कहनी के बुझले पर लागेला की उ मनई क मनोभाव देख के कहनी कहें. इ सामान्य बात ना ह की गवईं मनई क केहू मन पढ़ ले. उनकी सुख-दुख के अपनी कहनी में उतार ले. आपन सुख-दुख उ कहनी में अईसे रखें की केहू के कुछ पता ना चले.

दुनिया क जेतना महान साहित्य ह उ जीवन क गहराई बतवले खातिन जानल जाला. आज रहतन त नेउर क गुन ढेर आगे बढ़ल रहत. एसे की नेउर में जवन समझ आउर समर्पन रहे उ बिरले लोगन में होखे ला. नेउर क घर-गांव परिवार बहुत बड़हर रहे. उ एह गांव से ओह गांव घूमें आउर कहनी उनकी संग्हे जाय. ओहीके जिएं. कबहूं कुछ आउर ना कईलें. उ कथा क वाहक रहलन.

अउर नेउर मामा खुदे कहानी बन गइने

एक बार कहनी कह के गईलन त उ वापस ना अईलन. गांव क लोग कुछ दिन इंतजार कईलन फिर उनकर खोज शुरू भईल. एह गांव से ओह गांव. जहां-जहां उनकर कहनी गईल रहे, उहां-उहां खोज भईल. कई कोस ले की गांव में जाके पूछ-ताछ कईलन जा. लेकिन नेउर एगो कहनी की तरह एह गांव से ओह गांव आगे बढ़त गईलन. खोजे पूछे वाला लोग थक हार के घरे आ गईलन. इ मान लिहलन जा नेउर अब कहनी बन गईलन.
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