भोजपुरी विशेष: आठवीं अनुसूची में भोजपुरी खातिर संघर्ष, संसद में ई लड़ाई कुछ रंग ले आई

भरोसा कइल जा सकेला कि अब भोजपुरी के ओकरि जगहि मिली.
भरोसा कइल जा सकेला कि अब भोजपुरी के ओकरि जगहि मिली.

नीरज शेखर के इशारा उनइस सौ उऩहतर में लोकसभा सदस्य भोगेंदर झा के प्राइवेट मेंबर बिल से रहे, जवन ऊ संसद में उठवले रहले. तब से भोजपुरी खातिर पनरह हाली संसद में प्राइवेट मेंबर बिल आइल बा....परधानमंत्री बनारस से बाड़े, रक्षा मंतरी भोजपुरिया हइए हऊवन. भरोसा बा कि भोजपुरी के आपन जगहि मिली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 4:51 PM IST
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हाल के दिनन में आपन भोजपुरिया लोगन के उम्मींद बढ़ल बा. उम्मीद ओह लोगन के आपन भाषा के लेके के बा. भईल इ हा कि उनइस सितंबर के राज्यसभा में नीरज शेखर भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के आवाज उठवले हा. परधानमंत्री रहले चंद्रशेखर के बेटा अउर राज्यसभा के मेंबर नीरज शेखर से पांच दिन पहिले चउदह सितंबर, माने हिंदी दिवस के दिने एही तरह के बात लोकसभा में जगदम्बिका पाल भी उठवले रहले. अब सवाल इ बा कि एहि लोगन के संसद के दुनों सदनन में आवाज उठावला से का होई. नीरज शेखर कहबो कइले कि भोजुरी खातिर उनइस सौ उनहतरे से मांग कइल जात बा.

नीरज शेखर के इशारा उनइस सौ उऩहतर में लोकसभा सदस्य भोगेंदर झा के प्राइवेट मेंबर बिल से रहे, जवन ऊ संसद में उठवले रहले. तब से भोजपुरी खातिर पनरह हाली संसद में प्राइवेट मेंबर बिल आइल बा. ओकरा करीब 30-32 साल बाद यूपीए सरकार के गृहमंत्री पी चिदम्बरम, जवन अंगरेजी छोड़ि कबो हिन्दी बोलत नाहीं देखल-सुनल गइले, ऊहो लोकसभा में कहि गइले-  “हम रऊवा सबके भावना के समझत बानी.” ओह टाइम देश के गृहमंत्री के मुंह से अपना भाषा में ई बात सुनि के एमपी लोगन के संगे भोजपुरिया माटी के लोग भी बाड़ा खुश भईले. बाकी ऊ खुशी ‘फेरू बैतलवा डाढ़ी के डाढ़ी’ वाला हालति हो गईल.

डॉ. मनमोहन सिंह के परधानमंत्री रहते ओहि घरि के गृहमंत्री पी चिदंबरम भोजपुरी में एगो लाईन बोलि के अब भुलाइए गलि होइहें. बाकिर भोजपुरिया लोग आपन लड़ाई कइसे भुलाई. अभी पचीस-तीस साल पहिले इ हालति रहे कि दिल्ली-बांबे अइसन अपने देश के सहरन में भोजपुरिया लोगनि के परब-तेवहार हंसी के विसे रहे. दु सौ साल पहलि भारत से मॉरिशस, सूरीनाम गइल गईल भारतीय मजदूर नियर भले हालति खराब ना होखे, तबो दिल्ली- बांबे में छठ पूजा खातिर माथा पर डाला राखि के मरद- मेहरारू जब नांगा पांव निकलसु, त उहां के लोग एकरा के अजीब तरह से देखत रहले.



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बाकिर धन्य हे भोजपुरिया माटी कि लोग लागले रहि गईल. आजु हालि ई बा कि बांबे के समुंदर किनारा अउर दिल्ली में यमुना जी के किनारे दुनो जगहि के सरकार पूजा खातिर घाट साफ-सुथरा करावे ले. दिल्ली में त भोजपुरिया लेगनि के इ असर बा कि एगो एमपियो जरूर भोजपुरिया मानुस चुनल जाले. पहिले कांग्रेस के महाबल मिसिर एमपी रहले, त अब दुई हाली से भाजपा के मनोज तिवारी जीतत तारे. विधायक त कई लोग बा. बंबइयो में इ हालि बा कि जवन पार्टी उत्तर भारतीय (यूपी-बिहार) के लोगनि के खिलाफ रहे, उहो अब एह लोगन के जरूरी मानत बा.

भोजपुरिया मटिये अइसनि ह कि इहां के लोग जहां जाले, ओहिजा अइसनि रचि-बसि जाले कि उहवां खातिर जरूरी हो जाले. अब इहे कारनि त बा कि हरियाणा के फरीदाबाद अइसनि जगह में भी भोजपुरी समाज के धरमशाला बनल बा. इ धरमशाला खाली भोजपुरिये लोगनि का ना, बलुक हरियाणा के दोसरा समाज के भी कामे आवत बा. हर शहर के समाज में भोजपुरिया  का खाना छोला-भटूरा जस हो गइल बा. लोकल रहवसिया लोग भी अपना इहां शादी-बियाह के खाना में एगो आइटम लिट्टी-चोखा के जरूरे राखत बाड़े.

जवन भोजपुरी समाज दोसरा लोगनि पर असर डलले बा, उ जनसंख्या अउर बोली-भाषा में जरूर असर डाले वाला होई, ई बात त बड़ले बा. तबो देखीं कि दिल्ली में छव गो भाषा अकादमी बाड़ी सनि. पांचि गो के भाषा के पढ़ाई होत बा. खाली भोजपुरी-मैथिली के नइखे होत. भोजपुरिया लोग एहि भाषा के पढ़ावे के मांग करते बाड़े.

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दिल्ली के संगे देश-दुनिया में भोजपुरी पर नजर डालल जाउ त पता चलत बा कि सोरह देशन में 20 करोड़ से जेयादा लोग भोजपुरी जानत-बोलत बा. संविधान के आठवीं अनुसूची में मूल 14 भाषा के अलावा जवन आठ गो भाषा शामिल कइल गईल बा, ओकरा कुल्हि के बोले वाला खाली 3 करोड़ 12 लाख लोग बाड़े. अब बताईं कहां 20 करोड़, कहां 3 करोड़. अब आठवीं अनुसूची में शामिल करे खातिर साहित्य के बात बा, त ऊ आठ गो भाषा से कवनो मामला में कम नइखे. देश के कई गो विश्वविद्यालय में भोजपुरी पढ़ावल जाला. सबसे बड़का विश्वविद्यालय इन्नू माने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय में भी भोजपुरी के फाइंडेशन कोर्स चले ला.

अइसन भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल कईल एसे जरूरी बा कि इ होइ गइला से भोजपुरी के विकास, पढ़ाई, ओकर साहित्य के बढ़ावा देबे खातिर य़ोजना आयोग से अलगा से रूपया-पइसा तय होखे लागी. तमाम साहित्यिक संस्थनान से भोजपुरिया साहित्याकर लोगनि के सम्मान ओइसहिं मिली, जइसे ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी जइसन संस्था से  दोसरा भाषा के मिलेला. साफ बाति इ बा कि अपना माटी-भाषा खातिर आवाज उठावल जरूरी बा. उहो अइसन भाषा जवन बहुत धनी बा, बाकिर ओकरा पर सरकार के ध्यान नइखे जात. एहि घरि के परधानमंत्री भले गुजराती होखसु बनारस से एमपी बाड़े. पहिले के गृहमंत्री अउर अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोजपुरिया हइए हऊवन. भरोसा कइल जा सकेला कि अब भोजपुरी के ओकरि जगहि मिली.
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