मानसिक तनाव खतम करे खातिर ऋषि- मुनि लोगन के उपाय

डिजाइन फोटो.
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तनाव खातिर इंतजार ना करे के परेला. ऊ खुदे रउरा ऊपर आ जाला. शांत मन के खउरि देला. बाकिर सबसे सुंदर आ राहत देबे वाली बात ई बिया कि हमनी के ऋषि- मुनि लोग मानसिक तनाव के लखेदे के उपाय क गइल बा लोग.

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  • Last Updated: November 5, 2020, 1:13 PM IST
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संसार में कई गो बेमारी अनादि- अनंत बाड़ी सन. ओही में से एगो के नांव ह- मानसिक तनाव. अब रउरा मन में सवाल उठी कि तनाव त दिन- दुपहरिया, सुबह- शाम कबो हो सकेला. त एकरा के स्वाभाविक भावना ना मानि के बेमारी काहें कहतानी. त सरकार, कतने लोग छोटी- छोटी बात पर तनाव में आ जाला ओकरा के का कहब? स्वाभाविक प्रतिक्रिया? ना नू. कुछु आदमी त तनिकी भर बात पर गरमा जाला. चिड़चिड़ा के अक- बक बोले आ गारी देबे लागेला. त एकरा के रउरा स्वाभाविक कइसे कहि सकेनी. हर बात में तनाव त रोगे ह. बेमारिए ह. हालांकि ए संसार में अइसन कवनो आदमी नइखे जे कभी ना कभी तनाव में ना आइल होखे.

महापुरुष लोगन के अमृत-तत्व

रुपया- पइसा के मामला होखे तब, आपसी गलतफहमी हो जाउ तब, केहू से झगड़ा- झंझट हो जाउ तब, आफिस में केहूके अभद्र व्यवहार झेले के परे तब, आ चाहे व्यक्तिगत अउरी कौनो समस्या होखे तब. तनाव खातिर इंतजार ना करे के परेला. ऊ खुदे रउरा ऊपर आ जाला. राउर शांत मन के खउरि देला. बाकिर कई लोग एह तनाव से मुक्त होखे के उपाइ क लेला. सबसे सुंदर आ राहत देबे वाली बात ई बिया कि हमनी के ऋषि- मुनि लोग मानसिक तनाव के लखेदे के उपाय क गइल बा लोग. तनाव के अदृश्य लाठी से लखेदे के उपाय देके महापुरुष लोग हमनी के अमृत तत्व दे गइल बा लो.
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शवासन के महत्व



सबसे बड़का उपाय त शवासन ह. शवासन माने? शवासन माने जइसे शव या मुअल आदमी के अवस्था हो जाला ओइसहीं सूति जाईं. अब रउरा कहब कि ई कुल का खराब बात कहे लगनी. त हम नइखी कहत सरकार, हमनी के ऋषि- मुनि कहि गइल बा लो. एही से एह आसन के नांव ह शवासन. त चितान माने पीठ के भरे सूति जाईं. कुल अंग- प्रत्यंग ढीला छोड़ि दीं, जइसे ई कुल अंग राउर ना ह. मन से कुल चिंता- फिकिर निकाल दीं. मानि लीं कि रउरा कुछु देर खातिर एह देह आ मन से अलग हो गइलीं. राउर कुल चिंता- फिकिर राउर ना दोसरा के ह.

एह अवस्था में दस मिनट लेटल रहीं आ कल्पना करीं कि भगवान के आसिरबाद रउरा ऊपर सफेद प्रकाश के रूप में बरिसता. सफेद प्रकाश रूपी भगवान के आसिरबाद से रउरा नहा रहल बानी. दस मिनट एह अवस्था में लेटल रहीं. बाकिर ध्यान राखबि कि नींद ना आवे. भगवान के प्रकाश के आनंद में डूबल रहीं. दस मिनट बाद रउरा देखबि कि खूब तरो- ताजा हो गइनी. एगो नया स्फूर्ति महसूस होखे लागी.

“टेंसन फ्री टाइम”

अब दोसरका उपाय का बतावल बा? दोसरका उपाय ई बा कि दिन आ रात मिला के कवनो घरी एगो टाइम फिक्स क लीं. ओह टाइम के रउरा “टेंसन फ्री टाइम” नांव ध दीं. ठीक ओह टाइम में रउरा ध्यान राखीं कि टेंसन के नइखे आवे देबे के. जइसे गेट कीपर के हिदायत दिहला पर ऊ केहू के भीतर ना ढुके देला, ठीक ओही तरी “टेंसन फ्री टाइम” में रउरा सावधान रहीं. धीरे- धीरे एह प्रेक्टिस के एक बार से दू बार, फिर तीन बार, फिर चार बार क दीं. बढ़त- बढ़त ई प्रेक्टिस 24 घंटा के हो जाई आ रउरा हमेशा टेंसन फ्री हो जाइब. बाकिर ई एतना आसान नइखे. एकर प्रेक्टिस करे के परी. आ प्रेक्टिस नियमित होखी तब लाभ होई. ई ना कि एक दिन कइनी आ दू दिन छोड़ि दिहनी. हर काम में शुरू में मेहनत आ अभ्यास के जरूरत परेला. बाद में ऊहे रउरा स्वभाव के अंग बनि जाला. जेकर जेतना गहिर तनाव रही ओकर तनाव रूपी कचरा खतम होखे में ओतने समय लागी.

श्वांस व्यायाम

त तिसरका उपाय का बा? रउरा याद होखी ऋषि- मुनि लोग कहले बा- “श्वांस व्यायाम करीं सभे.” श्वांस व्यायाम यानी अपने सांस के आवत आ जात देखीं. कइसे? एकर सबसे आसान तरीका ई बा कि शांत मन क के बइठि जाईं चाहे बिस्तर पर लेटि जाईं. अब अपना सांस के अइसे देखीं जइसे ई दोसरा के सांस होखे. सांस आवता आ जाता. बस ओकरा देखे के बा. अंग्रेजी में कहीं त वाच करेके बा. बस देखत रहीं. रउरा चकित हो जाइब कि सांस के देखे वाली एह प्रक्रिया में रउरा तनाव फ्री हो गइनी. शुरू में ई तनी कठिन लागी. दिमाग दोसरा ओर चलि जाई.

अंड- बंड कुछू दिमाग में आवे लागी. बाकिर दिमाग शांत राखे के बा आ अपना सांस के अइसे देखे के बा जइसे ई दोसरा के सांस होखे. एही से राउरा मये तनाव छू- मंतर हो जाई आ राउर मन आ शरीर बहुत हल्का लागी. अच्छा महसूस होखी. एही के कहल जाला श्वांस व्यायाम. पढ़ला पर त ई लागी कि एमें का बा. ई त चुटकी में हो जाई. बाकिर करे लागला पर बुझाई कि एहू के प्रेक्टिस जरूरी बा. तब जा के ई हमनी के स्वभाव में शामिल हो पाई. एही का संगे अनुलोम- विलोम प्राणायाम क लेब त सोना में सुहागा हो जाई. अनुलोम- विलोम प्राणायाम तनाव के दुश्मन ह.

मनपसंद संगीत

त चौथा उपाय का बतावल बा? मनपसंद संगीत सुने के चाहीं. एमें तनी पेंच बा. पेंच ई बा कि अगर रउरा रैप संगीत सुने के आदत बा त तनाव कौनो हालत में ना जाई. बल्कि अउरी बढ़ि जाई. रैप संगीत, शोर वाला संगीत ह. हं, अगर रउरा शास्त्रीय संगीत सुनतानी, कौनो मीठा भजन सुनतानी त ओकर बहुत लाभ मिली. रउरा संगीत में डूबि के तनाव मुक्त हो जाइब. शास्त्रीय संगीत के रचना भगवान के भजन खातिर भइल रहे. एही से एकरा के देव संगीत भी कहल जाला.

बाकिर ई जरूरी नइखे कि सभे के शास्त्रीय संगीत पसंद होखे. ढेर लोगन के फिल्मी गाना पसंद ह. त फिल्मी गाना/संगीत रउरा तंत्रिका तंत्र के उत्तेजित करे खातिर होले सन. रउरा के शांति के साम्राज्य में ले जाए खातिर ना. हम फिल्मी गाना/संगीत के रचना करे वाला लोगन से एइजा क्षमा मांगि लेतानी. हो सकेला ऊ लोग कुछु संगीत शांति देबे वाला भी बनवले होखसु, बाकिर हमरा ध्यान में उत्तेजक संगीते ढेर आइल बा. त मीठा संगीत सुनीं आ तनाव भुला दीं.

मौसमी फल- मूल

अउरी का उपाय बा? त सरकार, उपाय बहुते बा. बाकिर खास- खास उपाय के बात करीं त ओमें खाद्य पदार्थ के महत्वपूर्ण भूमिका बा. त का खाए- पीए के चाहीं. डाक्टर आ मनोचिकित्सक लोग कहले बा कि शराब, सिगरेट, अधिका कॉफी, चाय आ तंबाकू (सिगरेट, जर्दा वाला पान, गुटका वगैरह) के सेवन ना करे के चाहीं. लोग बुझेला कि ए कुल के सेवन कइला से तनाव कम हो गइल बाकिर कौनो नशा के सेवन से हमनी के तंत्रिका तंत्र चौपट हो जाला. ढेर मांस आदि के सेवन तनाव के बढ़ावेला. तलल- भुनल खाना से परहेज आ शुद्ध शाकाहारी भोजन से प्रेम. मौसमी फल- मूल खाएके चाहीं. डाक्टर बाबू लोग ईहे कुल उपाय बतवले बा.

तनकी भर कसरत 

हं, कसरत भी तनाव से मुक्ति में बहुत लाभकारी ह. कौनो कसरत. आज भी कई लोग दंड- बैठक करेला. कुछ लोग पार्क भा कौनो मैदान के तेज चलि के चार चक्कर लगा देला. केहू धीरे- धीरे दौड़ लगावेला. केहू घरे में कुछ गिनल- चुनल. हल्का- फुल्का कसरत करेला. कसरत हल्का होखी तबो फायदा करी.
आ अंतिम बात ई कि कौनो अच्छा किताब पढ़े के चाहीं. किताबियो तनाव दूर करे में बहुत मदद करेली सन. किताब के मौन मददगार साथी कहल गइल बा. अच्छा आ प्रेरक किताब पढ़ल बहुत लाभदायक ह. जे धार्मिक प्रवृत्ति के बा ऊ धार्मिक किताब पढ़ी, जे खेल- कूद वाला बा ऊ ओही से जुड़ल किताब पढ़ी. जेकर जइसन पसंद. बाकिर ई त प्रमाणित हो गइल बा कि किताब तनाव से मुक्ति देले.
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