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भोजपुरी में पढ़ें - Diwali 2020 Special -श्रम के लाठी से दलिद्दर के भगावल जाये

श्रम साधना से मिलल सफलता के दीया से ही दीवाली जगमग हो सकेला.

श्रम साधना से मिलल सफलता के दीया से ही दीवाली जगमग हो सकेला.

दिवाली के बाद भोरही मेहरारू सभ सूप पीट-पीट के दरिदर भगावेली स. ई एह से कि लक्ष्मी आ दरिद्रा ई दूनो बहिन एक साथे कबो ना रहस त दरिद्रा के भगा के लक्ष्मी के स्थायी निवास के कामना कइल जाला.

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मनी के हर साल जइसे एहूं साल दियरी-बाती के पर्व मनावे जा रहल बानी स त एह पर्व के निहितार्थ के धेयान में राखल आजु के समय खातिर सबसे बड़ जरुरत बा. 14 बरिस के वनवास के दौरान अपना पराक्रम से असुरी शक्ति के नाश कइला के बाद अपना कर्तव्य के मान राखत भगवान श्रीराम जब अयोध्या लौटनी त उहां के स्वागत में दिवाली मनावल गइल. फेर अयोध्या में रामराज्य स्थापित भइल. एह पूरा आख्यान में कर्तव्य प्रधान बा, अधिकार ना. सभ अधिकार कर्तव्यन के पालन से स्वत: मिल जाला. कर्तव्य समाज द्वारा निर्धारित होखेला. हमनी के अइसने समाज बनावे के दिशा में अग्रसर होखे के पड़ी.

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साधना से सफलता के संदेश ह दिवाली
दियरी-बाती के त्योहार माने दिवाली खाली दियरी जलावे, मिठाई बांटे आ पटाखा फोड़े के त्योहार ना हवे बलुक जिनगी में त्याग, श्रम, साधना आ कर्तव्य के बोध करावे वाला परब-त्योहार हवे. धन के देवी लक्ष्मी के पूजन के साथे नया बही-खाता शुरू करे के पर्व हवे, जवन ई संदेश देला कि पिछला बरिस नफा भा नुकसान कुछुओ भइल होखे ओकरा से आगे बढ़ के नया शुरुआत कइल जाव त ओहिजे भगवान राम के लौटे के प्रसंग ई संदेश देला कि उपलब्धि खाली श्रम से मिल सकेला आ एकर कवनो दोसर विकल्प नइखे.
ई एगो अइसन साल रहल बा, जवना में हर कुछ पर कोरोना वायरस के संक्रामक प्रभाव के छाया रहल बा. दिवालियो पर एकर छाया बा. बाजार पहिले जइसन गुलजार नइखे. एकर कारण बा कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग के अबहियों पालन क रहल बाड़े त दोसरा ओर कोरोना के वजह से जवन देश-दुनिया के आर्थिक गतिविधि ठप पड़ल रहे ओकरो असर बाजार पर हावी बा. कोरोना काल में भोजपुरिया प्रदेश के जवन ‘परदेसी बालम’ गांव-जवार छोड़ के ‘बाहरा’ कमाये गइल रहले ऊ फेर गांवे लौटले त अबही ले ऊ बगैर कामकाज के गांवहीं बइठल बाड़े. उनकर श्रमशक्ति के समुचित उपयोग नइखे हो पावत आ एकरा वजह से उनका श्रमशक्ति से उपार्जित होखे वाला धन उनका लगे नइखे, जवना से दिवाली के बाजार में रौनक पहिले वाला नइखे.

दरिद्रता आ बेरोजगारी
एही दौर में बिहार में विधानसभा के चुनावो भइल आ दिवाली के पहिले होली के पर्व मनावे के एगो अवसरो आइल. हर चुनाव में नेता लोग बड़का–बड़का दावा वादा करे ला बाकिर एकरा में से अधिकतर वादा-दावा पूरा ना भइला के वजह से बेरोजगारी आ दरिद्रता के स्थायी वास भइल बा. बिहार में उद्योग –धंधा स्थापित करे के ले के कबो कवनो राजनीतिक दल गंभीरता ना देखवलस बाकिर एह चुनाव में रोजगार आ नोकरी के मुद्दा उठल त ई उमेद लउकता कि शायद अब एह दिशा में सार्थक प्रयास होई आ ‘परदेसी बालम’ लोग के एहीजे उनका श्रम आ प्रतिभा के मूल्य मिली आ दियरी के प्रकाश जइसन उनको जिनगी में रोशनी आई. हमनी इहाँ एगो परंपरा रहल बा कि दिवाली के बाद भोरही मेहरारू सभ सूप पीट-पीट के दरिदर भगावेली स. ई एह से कि लक्ष्मी आ दरिद्रा ई दूनो बहिन एक साथे कबो ना रहस त दरिद्रा के भगा के लक्ष्मी के स्थायी निवास के कामना कइल जाला. एही तरे जब बिहार में श्रम आ प्रतिभा के उपयोग के संसाधन विकसित होई तब एहिजा से विपन्नता आ दरिद्रता से निजात मिली. बिहार से दरिद्रता खेदे के अब महती जिम्मेदारी सत्ता में लौटल सत्ताधीश के बा. ई जिम्मेदारी ओह लोगन के कर्तव्यो हवे जवन दियरी–बाती के ई त्योहार संदेश देला. हमार एगो गजल बा जवना में दिवाळी के लेके कई गो अशआर बा-



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मेहनत से खुशहाली आई
एह में श्रम के लाठी से दलिद्दर के भगावे के बात कहल गइल बा. हम सूप से दलिद्दर भगावे के सदियन से चलत आ रहल परंपरा के उपहास नइखीं करत बल्कि ओह दलिद्दर के भगावे में श्रम के जवन महत्ता बा ओकरा के पकड़े के कोशिश करsतानी. हम बहुत सोचनी गरीबी आ दरिद्रता पर. हमरा लागल कि ई खाली श्रम के लाठी से ना भागी. श्रम से भागे के रहित त बहुत अइसन श्रमिक बाड़न जेकर दिन-रात खटला के बादो पेट नइखे भरत. त फेर एगो गजल लिखनी-

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गिरमिटिया लोग उदाहरण बा
तब जाके ई रहस्य खुलल कि श्रम के लाठी से ना ज्ञान भरल श्रम के लाठी से गरीबी भागी. अनुभव आ ज्ञान के आधार पर श्रमशक्ति के उपयोग से दुनिया में अनके करिश्मा भइल बा. आज से 186 साल पहिले 2 नवंबर के अपना घर के रौशन करे के उमेद लीहले पहिला गिरमिटिया मजदूरन के खेप मॉरिशस के धरती प पहुंचल रहे. ई ऊ धरती रहे जवन चारो ओर से समुन्दर से घिरल, जंगल आ पत्थर से भरल एगो टापू रहूवे, बाकिर जिनगी में रोशनी के कामना लिहले ई मजदूर अपना श्रमशक्ति के बूता प ओह पत्थर के टापू के दुनिया के स्वर्ग बना दिहले. त का ऊ श्रमशक्ति भोजपुरिया प्रदेश, बिहार भा अपना देश के स्वर्ग में तब्दील करे के कुबत नइखे राखत? बिल्कुल राखता, बाकिर एकरा खातिर जवन इच्छा शक्ति आ मर्यादा के कर्तव्यबोध होखे के चाही ओकरा के जगावे के जरुरत बा. एह कर्तव्यबोध के एहसास करावे खातिर हमनी के भगवान श्रीराम के शरण में जाये के होई आ उनके से ई फेर सीखे के पड़ी.

भगवान राम भी इहे संदेश देले रहने
दरअसल, राम खाली एगो राजा आ व्यक्ति ना रहले बलुक एगो व्यवस्था रहले. जिनगी के हर आयाम, चाहे उ राजनीति होखे, चाहे समाज, चाहे आर्थिक परिप्रेक्ष्य होखे, चाहे न्यायिक परिप्रेक्ष्य, चाहे लोक होखे, चाहे लोक खातिर तंत्र, सबका खातिर राम एगो मर्यादा स्थापित कइले. हमनी के इहां राम के केतना महत्व रहल बा, ई एह बात से भी समझल जा सकत बा कि राम से संबंधित हमनी के तीन गो बड़ उत्सव बा. दिवाली 14 बरिस के वनवास के बाद राम के अयोध्या लौटला के उत्सव ह. ऊ रामराज्य के आरंभ के भी उत्सव ह. रामनवमी राम के जन्म के उत्सव ह अउर ओकरा के पूजा परिवार में मनावल जाला. बाकिर दशहरा सार्वजनिक उत्सव ह. दशहरा आसुरी बाधा सब के समाप्ति के उत्सव ह. राम जी लंका विजय के बाद ओकरा के विभीषण के वापस लौटा देले रहनी. एह से ऊ असुर सत्ता के समाप्ति ना ह. ओकरा के फेर से धर्म के शासन में ले आवल ह. दशहरा राम के पराक्रम के उत्सव ह. एकर साफ अर्थ बा कि अपना पुरुषार्थ के बल प बड़का से बड़का चुनौती के ना खाली सामना कइल जा सकता बलुक ओकरा से पार पा के एगो अलग लोक स्थापित कइल जा सकता.

हमनी के समाज के एह लोक-स्मृति से हमनी के रामराज्य के तीन गो महत्वपूर्ण विशेषता के पहचान सकत बानी स. रामराज्य धर्म के शासन ह, ओकर आदर्श नैतिक ह, ओकरा में राजा अउर प्रजा दूनो ही धर्म द्वारा शासित होखेले. ओहिजा प्रजा प राजा के भा राज्य के शासन नइखे. रामराज्य के स्थापना खातिर खुद ईश्वरे अवतार लेके पृथ्वी प प्रकट भइल रहन. त का अब जबकि ठीक दिवाली के पहिले बिहार के सत्ता में आइल लोग राम के आदर्श राज से कवनो सीख लीहे?

दीया के आगे संकल्प होखे - अपराजेय बनेके
रामराज्य के दूसर विशेषता ई बा कि ऊ अपराजेय बा. उ अनुलंघनीय बा. ऊ पराक्रम में एतना ऊंचा बा कि केहू ओकरा से युद्ध करे के साहस ना क सके. ऊ नीति में एतना ऊंचा बा कि केहू ओकरा से युद्ध करे के इच्छा ना क सके. अइसहूं बिहारी भा भोजपुरिया प्रतिभा के कवनो सानी नइखे, एहिजा के लोग जहवां गइल ओहिजे आपन परचम लहरावल बाकिर ऊ अपने घर में पराजित बाड़े, उनकर पराक्रम हेरा गइल बा. रामराज्य स्थापित करे खातिर अब फेर से भगवान राम ना अइहे बलुक हमनिये के राम बनके अपना के अपराजेय बनावे के पड़ी, अपना पराक्रम के धार दे के ओकरा के गौरी शंकर तक पहुंचावे के पड़ी. रामराज्य के तीसरा विशेषता ई बा कि ओकर राजा राम मर्यादा पूर्वक रहत रहन. श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम रहनी. उहां के अनुकरण प भारत के सभ राजा लोगन के मर्यादा में रहे के प्रेरणा मिलत रहेला. आज हमनियो के मर्यादा के ओह शिखर प पहुंचे के संकल्प लेवे के पड़ी तबे हमनी खातिर ई दियरी-बाती के पर्व सार्थक हो सकी.

(लेखक कवि और भोजपुरी के गज़लकार है.)

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