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Chhath Puja 2020 - डूबत सूर्य के अर्घ्य देबे के अद्भुत परंपरा

लोक आस्था के पर्व छठ के विशेष बात डूबत सूर्य भगवान के पूजा भी ह.

लोक आस्था के पर्व छठ के विशेष बात डूबत सूर्य भगवान के पूजा भी ह.

छठ खाली गीत गावे भा झूमर पारे खातिर ना ह. ओह गीत के गगन गुफा में उतर के अमृतपान करे खातिर ह. गीत से साधना-आराधना आसान हो जाला. मंत्र में साधे के पड़ेला.

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साँझ के घाट पर सूरुज भगवान पुजइहें आज. अरघ दिआई उनका के. पूरा दुनिया में जहाँ-जहाँ बिहार आ पूर्वांचल के लोग बा तहाँ-तहाँ. ई संझिया घाट के पूजा ह. संझिया बेरा के अरघ ह. जब सुरुज डूबे लागेले तब अरघ दियाला. डूबत सूरुज के अरघ दिआला. जहाँ दुनिया उगत सुरुज के सलाम ठोकेला, बिहार आ पूर्वांचल के लोग डूबत सूरुज के पूजेला. ई छठ के रहस्य ह. दर्शन ह. जे एह में डूबी से कुछ पाई. कुछ का, बहुत कुछ पाई. जिनगी जीये के सलीका पा जाई. दुख-सुख से दू ठूंठ ऊपर उठ के ओकरा में समभाव रहे के ताकत पा जाई. ओकरा बुझा जाई कि दुख-सुख स्टेट ऑफ़ माइंड ह. हार-जीत से ऊपर उठ जाई आदमी.

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छठ खाली गीत गावे भा झूमर पारे खातिर ना ह. ओह गीत के गगन गुफा में उतर के अमृतपान करे खातिर ह. गीत से साधना-आराधना आसन हो जाला. मंत्र में साधे के पड़ेला. गीत खुदे साध देला. एह से छठ में तिले-तिले गीत बा, डेगे-डेगे गीत बा, विधि-विधी गीत बा. गेहूं धोवत-पसारत से लेके ठेकुआ बनावत ले, कोशी भरत से लेके अरघ देत ले, घाटे जात से लेके घरे आवत ले आ ओह गीतवा में पूरा जिनगी बा. हवा-हवाई बात ना करेली छठी मइया. आम आदमी के बात करेली. लोक के बात करेली. प्रकृति के करीब वाला बात करेली. काहे कि जे गरीब बा उ प्रकृति के करीब बा. एही से छठ पूजा प्रकृति के करीब बा. बल्कि साँच कहीं त ई प्रकृति के हीं पूजा बा.

अब देखीं सूरज भगवान के अइसन भा एतना व्यापक पूजा हमरा जानकारी में दोसर कवनो नइखे. व्यापक के साथे-साथ ई गूढ़ भी बा. पहिले डूबत सूरुज के पूजा. फेर उगत सूरज के पूजा. एह में केतना गहिरा सन्देश छुपल बा. जेतने सोचsब ओतने अर्थ खुली. नज़र के विजन बढ़ जाई. सोचे के दायरा बढ़ जाई. आपन दुख छोट लागी. आज हम छठ पूजा खातिर लोग के गन्ना (ऊंख) खरीदत देखनी ह. सोचे लगनी ह. हे छठी मइया तू ऊँखिया के मोल बढ़ा देलू हो. ना त देवता लोग पर त सेव, संतरा, केला इहे कुल्हि फल नू चढ़त रह. लेकिन तू आरा से अमेरिका ले ऊँखिया के पूछ, ऊँखिया के मोल बढ़ा देलू.
बड़ी देर ले ऊंख प सोचनी ह आज. एगो गीत लिखनी ह. ई बुझीं कि हमरा दिल के कोल्हू में एकदम ताजा गीत पेराइल बा. अब रउरा लोग चीख के बताईं कि एकर स्वाद कइसन बा. खाली मुखड़ा सुनावत बानी –
ऊँखवा के दुखवा केहू ना बुझे भाई रे
रही चाहे कतहूँ, उ कोल्हू में पेराई रे
मुँहवा से चूसी लोग, दांतवा गड़ाई रे
चूसला के बाद उ त चूल्हा में झोंकाई रे

हमार आँख झरे लागल ह. ई कोरोना काल के छठ ह. केतना जगह सार्वजनिक पूजा प पाबंदी लागल बा. बाकिर आँख एह से ना झरल ह. लइका-बच्चा गोदी में टंगले, गठरी-मोटरी लेले उ मंजर ईयाद आ गइल ह जेमें जवान पैदले नू चल देलन स दिल्ली-मुंबई से बिहार. ऊंख के देखनी ह, फेर कोल्हू ईयाद परल ह. फेर ओह जवानन के ईयाद आ गइल. सब इंडस्ट्री आ धंधा में, चाहे उ मुंबई में होखे भा दुबई में, एही लोग से मिठास बा. बाकिर एह लोग के कहीं पूछ नइखे. पूछ त ऊँखियो के नइखे. बाकिर छठी मइया ऊँख के मान बढ़ा देले बाड़ी. कोशी इनके से भराला. केतना-केतना बात कहsतारी छठी मइया. सब हमरा बुझात थोड़े बा. हमरा छोट बुद्धि में जेतना आंटल भा जेतना बुझाइल ह, साझा कइनी ह, करsतानी.

छठी मइया के लेके कई गो फिलिमो बनल ह ताकि लोग अधिक से अधिक उनका के बूझो लेकिन अभी संतोषी मइया जइसन फिल्म वाली बात ना पहुंचल. इहवाँ उल्टा बा संतोषी मइया फिल्म से घरे-घरे पहुँचली बाकिर छठी मइया घरे-घरे आ लोक में व्याप्त होके फिल्म में पहुंचल बाड़ी.

छठ पर फिल्म

फिल्म 'बिटिया छठी माई के' साल 2019 के खूबसूरत फिल्म बा. यश कुमार एह में लीड रोल में बाड़ें. बाकी रोल में अंजना सिंह, ब्रजेश त्रिपाठी, श्यामली श्रीवास्तव, अनूप अरोरा, प्रीति सिंह, उधारी बाबू, राधे मिश्र, अमित शुक्ल, वर्षा तिवारी आदि बा लोग. फिल्म के निर्माता दीपक शाह बाड़ें अउरी कहानी खुद यश कुमार अउर एसके चौहान के लिखले बाड़ें. भोजपुरी फिल्म 'बिटिया छठी माई के' सामाजिक विषय पर बनल फिल्म बा. एमें एगो मानसिक रूप से असंतुलित आदमी अपना भाभी से बोलsता, जे छठी माई के पूजा करsतारी कि 'एगो औरत, एगो देवी के पूजा करतारी अउरी मांगsतारी बेटा. का विडम्बना बा कि उ स्त्री, एगो स्त्री के पूजा करके एगो स्त्री नइखे मांगत.

पूर्वी भारत अउरी पूरा बिहार में अइसन मान्यता बा कि छठी मईया से अगर पुत्र के कामना करीं त पुत्र-रत्न के प्राप्ति होला. भोजपुरी फिल्म खातिर ई नया विषय बा अउरी समाज में एह बात के लेके जागरुकता जरूरी बा कि हरबार स्त्रीए बाँझ ना होली, कई बार पुरुष में भी कमी हो सकेला. उहो बांझ हो सकेले. एह जरुरी बिंदू के एह फिल्म मे उठावल गइल बा. फिल्म में यश कुमार एगो विक्षिप्त व्यक्ति के भूमिका निभवले बाड़ें. यश के किरदार छठी मैया में काफी आस्था रखsता अउरी एक दिन जब उ छठी माता से एगो बेटी के कामना करsता त ओके मंदिर में एगो लावारिस नवजात बच्ची मिल जातिया, उ पागल बच्ची के पालता अउरी ओके सफल बनावता आ ओकरा खातिर सबसे लोहा लेबे खातिर तैयार रहsता.

एही साल 2019 में हीं छठी मईया पर हिंदी में भी एगो फिल्म आइल जवना के जिक्र इहाँ जरूरी बा काहें से कि भोजपुरी में एह विषय पर नगदे फिल्म बनल लेकिन एतना विस्तार से चर्चा अउरी छठ माता के प्राचीन इतिहास के तह में जाके शोध कर के देखावे वाला फिल्म ना बनल. निर्देशक मुरारी सिन्हा के एह प्रयास के खूब प्रशंसा भइल. रविकिशन आ प्रीति झिंगयानी एह फिल्म मे मुख्य भूमिका मे बा लोग.

एह बारे में निर्देशक मुरारी सिन्हा के कहनाम बा कि ‘’ चूँकि छठ में गैर बिहारी लोगों की भी आस्था बढ़ी है और भारत के दुसरे राज्यों या दूसरे देशों के लोग भी इससे जुड़ते जा रहे हैं तो फिल्म के माध्यम से उन्हें छठ का रहस्य समझाना जरुरी है. ‘’

आशीर्वाद छठी मइया के नाम के फिल्म भी बनल. एह साल एकर भाग-2 बनल जवना के निर्माता भोजपुरी फिल्म के स्थापित पीआरओ उदय भगत बाड़न. उदय जी बतवलन ह कि ‘’ एह फिल्म में छठी मइया के महिमा से बेसी उनकर परिचय आ इतिहास पर फोकस बा.’’ छठी मइया लोक खातिर अइसन ग्रन्थ बाड़ी जेकरा के जेतने पढ़ीं जिनगी ओतने सुलझी. लोक ओतने समझ में आई. लोक के एह महादेवी छठी मइया के प्रणाम आ रउरा सभ के लोक आस्था के एह महापर्व के शुभकामना. –  ‘जय हो छठी मइया. जय हो सुरुज भगवान.’

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य के मर्मज्ञ और भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं.)

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