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भोजपुरी विशेष - सद्भाव के नगरी ह काशी, कबीर के शहर में बाबा नानक के गुरुबाग भी

धर्म की नगरी काशी में सब संप्रदाय के सम्मान मिलेला.
धर्म की नगरी काशी में सब संप्रदाय के सम्मान मिलेला.

कबीर के काशी सद्भाव के भूमि ह. इहां संस्कृत और संस्कृति के पुरान से पुरान परंपरा बा त दूसरा संप्रदाय के विद्वान के सम्मान भी बा. महात्मा बुद्ध के त यही काशी के पासे सारनाथ में ज्ञान मिलल रहे. बाबा नानक भी इहां आ के निवास कइले रहलें. उनके स्मृति में इहां सिख समुदाय के तीर्थ गुरुबाग बन गयल.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 1:12 PM IST
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भूतभावन बाबा भोलेनाथ क नगरी काशी धरती पर एक अइसन जगह हौ, जहां सबकर स्वागत होला. शैव, वैष्णव, जैन, बौद्ध, सिख हर पंथ-धर्म क संत एह पवित्र धरती पर आइ के धन्य भयल हयन अउर इहां के लोगन के भी धन्य कइले हयन. इहय कारण हौ कि इहां हर धर्मावलंबी हयन, अउर आपस में सब मिलि - जुलि के रहयलन. काशी के संस्कृति के एही बदे गंगा-जमुनी कहल जाला. सिख धर्म क संस्थापक, निर्गुण धारा क 15वीं शताब्दी क महान संत गुरु नानक देव भी फरवरी 1507 में शिव के नगरी काशी क यात्रा कइले रहलन. उ शिवरात्रि के दिना काशी पहुंचल रहलन. काशी में रथयात्रा इलाके में ओह समय एक ठे बहुत बढ़िया हरा-भरा बगइचा रहल. नानक देव अपने चेलन के संगे ओही बगइचा में आपन डेरा जमउलन. ओह समय ओनकर उम्र लगभग 35-37 साल रहल. गुरु नानक देव जहां ठहरल रहलन, आज ओही ठिअन गुरुबाग गुरुद्वारा हौ. काशी क सबसे बड़ा गुरुद्वारा आज सिख समुदाय क बड़ा तीर्थ बनि गयल हौ. सिख समुदाय क लोग दुनिया भर से इहां दर्शन करय आवयलन.

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काशी अपने धर्म-अध्यात्म अउर विद्या बदे पुरातन काल से ही प्रसिद्ध रहल. इहां एक से एक विद्वान पैदा भइलन. एक से एक धर्म क ज्ञाता भइलन. काशी के विद्वानन से शास्त्रार्थ कइले बिना केहूं के विद्वान क मान्यता न मिलय. काशी के विद्वानन से शास्त्रार्थ में जीतब काफी मुश्किल रहय. कहल जाला कि गुरु नानक देव काशी के विद्वानन क इ अहंकार तोड़य बदे ही काशी क यात्रा कइले रहलन. उ अपने चेलन के साथ एक ठे छायादार बगइचा में ठहरलन, अउर उहां सबद-कीर्तन करय लगलन. नानक देव के सबद-कीर्तन से प्रभावित होइके बगइचा क मालिक पंडित गोपाल शास्त्री ओनकर शिष्य बनि गइलन. काशी के विद्वानन के गुरु नानक देव के बारे में पता चलल त उ ओनसे शास्त्रार्थ करय अइलन. एहमे सबसे जादा विद्वान पंडित चतुरदास रहलन. चतुरदास के अपने विद्वत्ता क बहुत अहंकार रहल. उ कई विद्वानन के शास्त्रार्थ में हराइ चुकल रहलन. जब पंडित चतुरदास पहुंचलन तब नानक देव ओनके मन के भीतर क बात समझि गइलन. नानक देव ओेनसे कहलन -पंडित चतुरदास अगर तोहय हमसे कुछ प्रश्न पूछय के होय त पहिले जा एह बगइचा में एक ठे कुत्ता हौ ओहके लेइके आवा, उहय तोहरे प्रश्न क उत्तर देई.



खूब आदर - सम्मान मिलल रहे
गुरु नानक देव के कहला पे चतुरदास कुछ दूर गइलन कि ओन्हय कुत्ता मिलि गयल. उ ओहके लेइके गुरुनानक देव के पास अइलन. गुरु नानक देव जब कुत्ता पर नजर डललन त उ धोती, जनेऊ, कंठी-माला पहिनले, माथेे पर चंदन लगउले आदमी के रूप में प्रकट होइ गयल. इ दृष्य देेखि के उहां मौजूद लोग चकित रहि गइलन. चतुरदास क त जबानय जइसे बंधि गयल. लोग कुत्ता से आदमी बनय के पीछे क कहानी पूछलन त उ बतइलस कि पहिले उहो विद्वान रहल, लेकिन ओकरे भीतर ईष्या अउर अहंकार भरल रहल. उ बतउलस,’’ काशी में जे भी जोगी, महात्मा, साधु, संत, संन्यासी आवय, सबके शास्त्रार्थ में हराइ के इहां से भगाइ देत रहली. एक बार एक विद्वान से बहुत देर तक बहस भयल. उ हमरे जिद पर श्राप देइ देहलस. माफी मंगला पर कहलस कि कलयुग में गुरु नानक देव अइहय, ओनही के कृपा से तोहार उद्धार होेई.’’ इ बात सुनला के बाद लोग गुरुनानक देव के आगे नतमस्तक होइ गइलन.

गुरु नानक देव ओह समय अपने उपदेश में कहलन कि हर आदमी कर्मकांड अउर आडंबर में लिप्त हौ, लेकिन इ सबसे मोक्ष तबतक संभव नाही हौ, जबतक कि निश्चय के साथ परम पिता क ध्यान न कयल जाई. नानक देव क बचन सुनि के उहां मौजूद सब लोग ओनके चरण में गिरि पड़लन. पंडित चतुरदास क मन भी निर्मल होइ गयल. ओेनके भीतर विद्वत्ता क अहंकार पानी होइ गयल.

तबहिने शास्त्री जी बगइचा के नाम गुरुबाग रखि देहने

पंडित गोपाल शास्त्री इ पूरा घटना देखि के पूरी तरह गुरु नानक देव के भक्ति में डूबि गइलन. उ कहलन कि " गुरु क चरण पड़ला से हमार इ बगइचा पवित्र होइ गयल. एह बदे अब इ बगइचा आपके चरण में समर्पित हौ.’’ मान्यता हौ कि ओही दिना से इ बगइचा गुरुबाग के नाम से प्रसिद्ध होइ गयल. आज पूरा मोहल्ला गुरुबाग कहल जाला. बाद में इहां गुरुद्वारा क निर्माण भयल. मौजूदा समय में एह स्थान पर जवन गुरुद्वारा मौजूद हौ, ओकर उद्घाटन गुरुनानक देव के 500वीं जयंती पर 23 नवंबर, 1969 के भयल रहल. गुरुद्वारा क पूरा परिसर एक एकड़ से अधिक हौ. सिख समुदाय क इ प्रमुख तीर्थस्थान हौ. दुनिया भर से सिख इहां दर्शन बदे आवयलन.

गुरु नानक देव काशी क यात्रा अपने पहिली उदासी के दौरान ही कइले रहलन. एह दौरान काशी के अलावा उ सुल्तानपुर, तुलंबा (मौजूदा नाम मखदूमपुर, जिला मुल्तान), पानीपत, दिल्ली, नानकमत्ता (मौजूदा नाम नैनीताल), टांडा वंजारा (रामपुर), कामरूप (असम), सैदपुर (मौजूदा नाम अमीनाबाद, पाकिस्तान), पसरूर (पाकिस्तान), सियालकोट (पाकिस्तान) आदि जगह क भी भ्रमण कइले रहलन. नानक देव क दूसरी उदासी 1507 से 1513 ईस्वी के बीच भयल रहल. एह दौरान उ धनसारी घाटी, सांगलादीप (सीलोन) आदि जगहन क भ्रमण कइले रहलन. नानक देव अपने तीसरी उदासी (1514-1518) के दौरान कश्मीर, सुमेर पर्वत, नेपाल, ताशकंद, हिमाचल, सिक्किम, तिब्बत आदि जगह गयल रहलन. अपने चैथी उदासी (1519-1521) में उ बहावलपुर, साधुबेला (सिंधु), मक्का, मदीना, बगदाद, बल्ख बुखारा, काबुल, कंधार, ऐमानाबाद आदि स्थानन क यात्रा कइलन. पाचवीं उदासी (1523-1524) के दौरान गुरु नानक देव पंजाब के भीतरय कई जगह क भ्रमण कइलन. नानक देव कुल पांच बार यात्रा पर निकलल रहलन. ओनके इ पांचों यात्रा के पांच उदासियां कहल जाला.

नानक देव कुल 40 शहरन क यात्रा कइले रहलन. उ हरिद्वार, अयोध्या, प्रयाग, गया, पटना, जगननाथपुरी, रामेश्वर, सोमनाथ, द्वारका, नर्मदातट, बीकानेर, पुष्कर, दिल्ली, कुरुक्षेत्र, लाहौर आदि जगह भी गयल रहलन. अपने यात्रा के अंत में उ करतारपुुर पहुंचलन अउर ओही ठिअन 22 सितंबर, 1539 के अंतिम सांस लेहलन. नानक देव क जनम 1469 में कार्तिक पूर्णिमा के भयल रहल, अउर उ 31 साल के उमर में ही पहिली उदासी पर निकलि गयल रहलन. अंतिम उदासी जब समाप्त कइलन तब ओनकर उम्र 56 साल होइ गइल रहल. नानक देव अपने उमर क लगभग 24 साल यात्रा में बितउलन. कहल गयल हौ कि जब उ ऐमानाबाद के यात्रा पर रहलन तबय बाबर भारत पर हमला कइ देहले रहल. नानक देव अपने आंखी से देखलन अउर कहलन कि मौत क दूत आयल हौ. ओही समय नानक देव अपने मुंहे कुछ शब्द बोललन, जवने में पहिली बार हिंदुस्तान शब्द क उच्चारण भयल रहल -खुरासान खसमाना कीआ. हिंदुस्तान डराईआ.

गुरु नानक देव दुनिया में चारों दिशा में गइलन अउर मानवता क संदेश फइलउलन. धार्मिक पाखंड के खिलाफ उ ’एक ओंकारा’ क उपदेश देहलन. यानी ईश्वर एक हयन, अउर हर धर्म के लोगन के ओही के मानय के चाही. उ कई धर्मन के बदले खाली मानव धर्म क वकालत कइलन. मनुष्य के मानव बनय क मंत्र देहलन -नाम जपो कीरत करो बांट के खाओ बंदे. यानी ईश्वर क नाम जपा, कर्म करा, अउर जवन कमाई होय ओहमे से जरूरतमंद लोगन क भी मदद करा. हर धर्म क लोग ओनकर शिष्य रहलन. ओनके दुइ ठे प्रमुख शिष्यन में बाला अउर मरदाना रहलन. बाला हिंदू अउर मरदाना मुसलमान. नानक देव तमाम तीर्थस्थानन क यात्रा कइलन, अउर उ जहां-जहां गइलन, ठहरलन, उपदेश देहलन उ स्थान भी तीर्थ बनि गइलन. नानक देव भारत के अलावा अफगानिस्तान, फारस अउर अरब के प्रमुख स्थानन क भ्रमण कइलन.
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