भोजपुरी में पढ़ें - का बिहार के भाग जागी?

सरकार केहू के बने बिहार के विकास चाहीं.
सरकार केहू के बने बिहार के विकास चाहीं.

मुख्यमंत्री आ मंत्री के कुर्सी पर त जनता के फैसला से नेता लोग बइठबे करिहें, लेकिन राज्य के लोगन के विकास के इंतजार बा. अब इ जरूरी बा की समय के साथ बिहार भी देश के दूसर राज्य जइसन तरक्की करे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 1:09 PM IST
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सात नवंबर के बिहार विधानसभा के चुनाव के अंतिम चरण के वोट डालल गइल आ एही के साथे एह चुनाव के अंत भइल, अब मंगलवार के देखे के मिली कि आखिरकार भला केकर भइल. बाकिर कई मायने में एह पारी के बिहार विधानसभा के चुनाव विशेष रहल. खाली एही से ना कि ई चुनाव कोरोना महामारी के दौरान भइल बलुक एकर अउरी कइगो कारण बा. अगर एह कारण प चर्चा कइल जाव त ई अइसन चुनाव रहल जवना में पारंपरिक बिहारी राजनीति के दूगो गो दिग्गज चुनाव मैदान में ना रहले, एक त राजद के लालू प्रसाद यादव आ दोसर लोजपा के रामबिलास पासवान. बीतल महीना रामबिलास पासवान के निधन हो गइल. बाकिर एह दूनो लोगन के वारिस माने नेतापुत्र लोग मोर्चा संभलस, तेजस्वी यादव आ चिराग पासवान, मंझल-मंझावल राजनीतिज्ञ नीतीश कुमार के राजनीतिक पकड़ पर केतना सेंध लगा पाई लोग ई त चुनाव परिणाम के बादे लउकी. बाकिर ई सोचल जात रहल हs कि बड़ा जोरशोर से तीन गो युवा नेतृत्व - तेजस्वी यादव, चिराग पासवान आ पुष्पम प्रिया एह चुनावी दंगल में कूदल लोग त चुनावी मुद्दो नौजवानन के होई. बाकिर 10 लाख आ 19 लाख नोकरी भा रोजगार के वादा-दावा के अलावा नौजवानन के मुद्दा पूरा तरह से चुनाव से गायब रहे. उहे जंगलराज के मुद्दा भा 15 साल के सुशासन बाबू के खिलाफ एंटीइंकमबैंसी फैक्टर के इर्द-गिर्द ही पूरा चुनाव घूमत रहे

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चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पूर्णिया जिला के धमदाहा में अपना आखिरी जनसभा में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एह चुनाव के आपन अंतिम चुनाव कहले, त एकरा प अलग-अलग राजनीति दल के अलग-अलग प्रतिक्रिया आइल आ राजनीतिक विश्लेषक एकर कई एंगल से व्याख्या करे लगले. बाकिर सबसे अधिका आश्चर्य ई भइल कि नीतीश के एह बयान पर जनता दल (यू) तुरंते बचाव के मुद्रा में आ गइल. जबकि होखे के ई चाही कि उनका एह बयान के भलहीं कवनो रूप में व्याख्या कइल जाव, भलहीं दोसर राजनीतिक दल उनका बयान के काट खोजे बाकिर एकर स्वागत होखे के चाही. अगर नीतीश कुमार सांचहूं एह चुनाव के आपन अंतिम चुनाव घोषित करत बाड़े त लोकतंत्र में ई एगो स्वागत योग्य कदम होखे के चाही. ना त राजनेता लोग राजनीति से रिटायर ना होला बलुक उम्र चाहे जेतना बढ़ जाव अंत तक उनका नेतृत्व करे के लालसा बनल रहेला. एकर कइगो नुकसानो बा.



राजनीतिक दृष्टि से देखीं त अंतिम चरण के मतदान से पहिले ई एक तरह से नीतीश के चलल मास्टर स्ट्रोक रहे जवन एंटी इंकमबैंसी फैक्टर के ध्यान में राख के दिहल गइल रहे, लेकिन फेर जदयू के तरफ से बचाव के मुद्रा अपनावत कहल गइल कि- "नीतीश कुमार तीसरा चरण के चुनाव प्रचार का अंतिम दिन रहे एहसे ई बात कहले, राजनेता कबो रिटायर ना होले." ई बयान एक तरह से नीतीश कुमार के चलल मास्ट्रर स्ट्रोक के डेंट लगा दिहलस.
अइसहूं लोकतंत्र में चुनाव ई निश्चित करेला कि अगिला पांच साल राज्य के दशा-दिशा का होई. भलहीं चुनाव संपन्न हो गइल. परिणाम कवनो दल के पक्ष में आवे बाकिर ई तय बा कि बिहार के आगे के दशा-दिशा में कवनो परिवर्तन आवत नइखे लउकत. ई चुनाव एक प्रकार से अइसन बा जवना में राजनीति दल के त जीत होखबे करी बाकिर जनता के हार निश्चत तौर प भइल बा. काहे कि 15 साल से सत्ता में रहला के बावजूद एनडीए बिहार खातिर अगिला पांच साल के कवनो स्पष्ट ब्लू प्रिंट ना रख पवलस आ ई चुनाव विकास के नाम पर लड़े के शुरुआत कइलस आ फेर 15 साल पहिले के लालू शासन काल के साथे तुलना में अझुरा के रह गइल, त ओहिजे राजद के नेतृत्व में महागठबंधन एक सूत्री कार्यक्रम के तहत चुनाव लड़लस आ ऊ रहे नीतीश कुमार के एंटी इंकमबैंसी फैक्टर. ओकरो लगे भविष्य के कवनो ब्लू प्रिंट ना रहे. 10 लाख के नोकरी के वादा भलहीं तेजस्वी यादव कइले बाकिर ई सभे जानsता कि वर्तमान परिस्थिति में ई संभव नइखे आ अगर महागठबंधन के सरकार बनतो बा आ ई वादा पूरा कइल जाता त एकरा से राज्य के माली हालत अउर बिगड़ी. राज्य के वर्तमान जरुरत ई बा कि राजस्व के संसाधन बढ़ावल जाव बाकिर ई मुद्दा कवनो राजनीतिक दल के प्राथमिकता में ना रहे. औद्योगिक विकास प चुनावी भाषण देत नीतीश कुमार राज्य ‘लैंडलॉक’ प्रदेश बता के पल्ला झाड़ लिहले. जबकि राज्य में बीतल कुछ साल में निश्चत तौर पर परिवहन आ बिजली के स्थिति में बहुते बढ़िया सुधार भइल बा. कवनो राज्य के औद्योगिक विकास खातिर बेहतर सड़क, बिजली-पानी के बेहतर आपूर्ति आ ढंग के शासन व्यवस्था अउरी सरकार के इच्छा शक्ति के जरुरत होला. त अपना के सुशासन बाबू कहाये वाला नीतीश कुमार के का अपना सुशासन प भरोसा नइखे. जबकि उ खुदे एह चुनाव में अपना विकास कार्य के उपलब्धि बतावत ई घूम-घूम के कहत रहल बाड़े कि उनका कार्यकाल में बेहतर सड़क आ बिजली-पानी के सुविधा आइल बा. त साफ बा कि राज्य के औद्योगिक विकास के प्रति नीतीश कुमार के इच्छा शक्ति कमजोर रहल बा. दोसरा ओरी स्वास्थ्य, शिक्षा आ कृषि के क्षेत्र में अबहीं राज्य में बहुते काम कइल बाकी बा. बाकिर इहो मुद्दा गंभीरता के साथे कवनो राजनीतिक दल के एजेंडा में ना रहल.

जवन अंतिम चरण के मतदान भइल बा ओहिजा के 35 गो सीट अइसन बा जहवां पिछड़ा आ अति पिछड़ा जाति के असर बा. कोसी व सीमांचल के जवना 20 गो सीट प जदयू चुनाव लड़ रहल बिया, ओकरा में 12 गो ओकर सीटिंग सीट हवे. सीमांचल के 24 गो सीट प 40 फीसद से जादे मुसलमान एनडीए खातिर परेशानी के सबब बाड़े, ई पहिलहूं एनडीए के खिलाफ रहले हा, लेकिन ई नइखे लागत कि एकर फायदा महागठबंधन के होई. धीरे-धीरे एह क्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी के एआइएमआइएम आ मायावती के बहुजन समाज पार्टी सेंध लगवले बिया, एकरा से महागठबंधन के खेल बिगड़ सकsता. एही सब के ध्यान में राखत प्रचार के अंतिम चरण में भाजपा अपना फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ आ  गिरिराज सिंह जइसन नेता सब के उतरलस. एनआरसी आ सीएए के मुद्दा उछालल गइल आ घुसपैठियन के बाहर निकाले के बातो कहल गइल. अइसन सब मुद्दा उठा के भाजपा आ ओवैसी के पार्टी एआइएमआइएम ध्रुवीकरण करे के कोशिश कइलस बाकिर ई सौभाग्य के बात बा कि जवन स्थिति ओहिजा के लउकल ओकरा से नइखे लागत कि जनता प एह ध्रुवीकरण करे के कोशिश के कवनो असर पड़ल बा. ई एगो शुभसंकेत बा. 10 नवंबर के चुनाव के नतीजा आई. एनडीए के नेतृत्व में नीतीश कुमार फेर चउथा बेर मुख्यमंत्री बनस, चाहे महागठबंधन के नेतृत्व में तेजस्वी यादव, बाकिर बिहार के त असली में विकास के इंतजार बा.
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