भोजपुरी में पढ़ें: आईं समझल जाय कि बनारस में का बा

राढ़, साढ़, सीढ़ी, सन्यासी जईसे किस्सा त आप के खूब मिली लेकिन बनारस एतने ना ह. ‘काशी क अस्सी’ पढ़ब त लगी की बनारस में खाली गारी देवे वाला भरल हवें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 8:58 AM IST
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विविधता में बनारस क आपन पहिचान ह. येह विविधता आउर बनारसी ठाठ के लेके उहाँ के कलमकार लोग खूब मेहनत कईले हवें. वोह खासियत के ले के बहुत लिखल-पढ़ल गयल ह. साहित्यकार, इतिहासकार आउर राजनीति करेवाला बहुत लोगन नगर के बारे में बुझले आउर लिखले बा. भारतेंदु हरिश्चंद्र से ले के मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद आउर काशीनाथ सिंह जईसन बनारसी माटी क लोग उहाँ की खूबसूरती की बारे में खूब लिखले बाड़ें. ओकरा में बनारसी पान से लेके दाल मंडी में नाचे वाली बाई तक की बारे में राउर पढ़ सकीला. लेकिन राउर जब पढ़ब त आप के लागी की कुछ बड़हर बात त कह गईल बा लेकिन असली बनारस क जवन गुन बा, ओकरा के अबहीं लिखल बाकी बा.



राढ़, साढ़, सीढ़ी, सन्यासी जईसे किस्सा त आप के खूब मिली लेकिन बनारस एतने ना ह. ‘काशी क अस्सी’ पढ़ब त लगी की बनारस में खाली गारी देवे वाला भरल हवें. लेकिन जब कबहू आप बनारस जाईब त उहाँ आउर बहुत कुछ अईसन मिली जवन किताबिन क लेखक लोग ना लिखले हवन. उ लोग शायद एसे छोड़ दिहलन की बनारस के बनवले में उनहन लोगन क भूमिका त ह लेकिन प्रचार ना भयल ह. जेकर प्रचार ढेर भयल ओकर लिखल गयल लेकिन जेकर प्रचार ना भयल उ रह गयल. बस एतने बात ह. लिखे वालन क प्रतिभा कम रहे, इ कहल ठीक ना ह. एतना जरुर कहल जा सकेला की जेकर जईसन भावना रहे, वोईसन लिखलन.

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परकिरती की बारे में लोग खूब लिखले ह. बनारस क सबेर अईसने होखेले जईसे सूरज गंगा में नहा के निकलत होखे. ललछाहू से उज्जर भाईले की बीच में आप सूरज के देखब त लागी की सच में कवनो कलाकार गेरुआ कपड़ा रंग के बीच में सूरज बना दिहले बा. उहाँ क बनल साड़ी में अईसन कलाकारी आप के खूब देखेके मिली. गलीचा में एक से एक चित्र आप देख सकीला. बनावे वालन क प्रतिभा आप के सोचले पर मजबूर क देई. एगो खासियत इहो ह की बहुरंगी नगरी ह. उहाँ निक जबून कई तरह क व्यवहार करे वाला लोग आप के मिल जयिहें. गली कूचा से ले के घाट पर ले आप घूम आईब. बहुत ठग मिलिहें स. लेकिन ओहिमा बहुत मनई अईसनों मिलिहअ की जबान दे दिहलन त केतनो बुरा भला होत रही, अपनी बात से पलटी ना मरिहें.



जब आप उहाँ क विविधता देखब त आपो के इहे समझ आई की बनारस के खाली धरम ना बनवले ह. ठठेरी बजार से लेके सोनारी बजार ले क एकहक गो कारीगर मील के बनवले हवन. एक से एक छाप बनावे वाला मनई आप के आजो मिल जईहें, जिनकर केहू नाम लेवा नईखे आउर नाही उनकरी बारे में केहू लिखले बा. आप त जानीला की मेहनत करे वाला मनई परचार में ना पड़ेला. ओकराके सोझ बात समझ आवे ले की ‘समान नीमन बनवा, खोजवार बहुत हवें’. लेकिन एह परचार क ज़माना में उ तनी पीछे रह गयल बाड़ें जा. अब उनकर काम धीरे-धीरे बिलात बा. एसे की उनकी मेहनत क कदर करे वाला त बहुत लोग ह लेकिन ख़रीदे वाला केहू ना मिलत ह. ओकर कारन ह परचार क आभाव. जे खरीदार ह ओकरा तक सूचना पहुँचबे ना करेले. आज इ हालत ह कि लागतो भर कीमत ना मिलत बाड़े. एसे नयका लईका आपन पुस्तैनी काम छोड़ के कुछ आउर करे दूर चल जात बाड़ें स.

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एक ओर बजार में हाथ से बनल समान क मांग बढ़त बा आउर दूसरी ओर ओकरा के बनावे वाला कम होत जात बड़न जा. अइसना में हाथ से बनल समान एतना महंग हो गईल बा की सामान्य मनई खरीद ना सकेला. अब एमे केकर दोष दिहल जाव? अब अईसन बदलाव आयल बा की लईका गाँव छोड़ के शहर भागत बड़ान स. पुरनका काम अब कम होखे लागल.

दुनिया की धींगा कुश्ती की बादो बनारस बहुत मस्त रहे वाला नगर ह. आप उहाँ जाईब त आप के रेक्सा चलावे वालन से लेके, पनवाड़ी आउर चाय बेचे वाला मनई अपनी दुनिया में रमल देखाई. एकर मतलब इ ना ह की ओकरा कवनो चिंता नईखे. एकर मतलब इ ह की हर समस्या क सामना उ हस कईले क कला जानत ह. ओकरा के मालूम ह की रोवले समाधान ना निकली. एसे उ खुद मस्त ह आउर ओकरा आसपास जे देखाई, सबके मस्त करत रही. इहे असली बनारस ह. हर हर महादेव की संगे दुरंगिया बोली.

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साहित्य पढ़ब त ओकरा में लक्षणा व्यंजना क बहुत महत्व दिखाई देला आउर जे लिखले की एह तरीका क उपयोग करेला लोग ओकरा के ‘हरिशंकर परसाई’ क उपाधि देला. जब आप बनारस जाईब लईका/जवान, बुढ़वा/सयान सब लक्षणा/व्यंजना में बतियावत भेटा जाई. सीधे बहुत कमे लोग बोलत मिली. हंसी-ठठा त उहाँ की चऊरहा क सुन्दरता बा. जे हंसी-ठठा ना करेला लोग ओकरा के कहेला की ‘मरले की बाद सीधा सरग जाए क सीढ़ी बनावे में बाझल बा’. केहू ढेर खुश हो जाई त कही की ‘इ गुरु अईसने पईदा भईल रहलन, एसे कुछऊ बोलत ना हउवन.’ आप देखब की एह महामारी के बखत में जब सब डेरात/परात बा त बनारस क मनई सबेरे गंगा नहा के भांग घोटे में लागल बा. कोरोना में न भांग क छनाई बंद बा न गजही चिलम के फुरसत मिलल बा.

बनारस क आदमी अपनी काम में बहुत फुर्ती देखावेला. जईसे उहाँ कुल काम मनई अपनी फयदा खातिन करेला लेकिन कईले क श्रेय भोलेनाथ, काल भैरव आउर बउरहवा बाबा के दे देई. आप ओकरा से पूछब त कही की सब इनही लोगन क माया ह. लेकिन जब कहीं फयदा क बात आई त तुरंत काम क के निकल जाई. कुल मिलाके इ बात ह की बनारस एगो अदमी क ना ह. सब मिल के बनवले ह. मोची से लेके ठेला चलावे वाला तक, अमीर से ले के गरीब ले उहाँ की हवा में सब अयीसही रस घोरत जियत मिल जईहन जा.
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