Bhojpuri: जब लालू यादव और नीतीश कुमार में भइल तकरार, तब Nitish के गेस्ट हाउस से बाहर करा देलें Lalu

...लालू यादव सबसे पहले सरकारी गेस्ट हाउस से नीतीश के बाहर करवा देलें

...लालू यादव सबसे पहले सरकारी गेस्ट हाउस से नीतीश के बाहर करवा देलें

एक समय नीतीश कुमार, लालू यादव के सबसे विश्वासी संघतिया रहन. नीतीश कह चुकल बाड़ें कि ऊ तेजस्वी के गोदी में खेलवले बाड़ें. लेकिन अइसन का भइल रहे कि मुख्यमंत्री बनते ही लालू यादव सबसे पहले सरकारी गेस्ट हाउस से नीतीश के बाहर करवा देलें। पढ़ीं...

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 11:39 AM IST
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पंकज, मुकुल अउर दिनकर में बिहार के राजनीति पे बहस होत रहे. पंकज कहले, बिहार बिधानसभा के बजट सत्र में तेजस्वी अउर नीतीश कुमार के राजनीतिक लड़ई चरम पे पहुंच गइल बा. एक समय रहे कि नीतीश कुमार लालू जादव के सबसे बिसवासी संघतिया रहन. नीतीश कुमार कह चुकल बाड़े कि ऊ तेजसवी के गोदी में खेलवले बड़े. लेकिन आज देखे कि तेजस्वी अउर नीतीश में रोज भिडंत हो रहल बा. ई बात सुन के दिनकर कहले, सांच पूछते ते नीतीश कुमार अउर लालू जादव के रिस्ता धूप-छांह के खेल रहल बा. कबो दोस्ती कबो तकरार. मुकुल कहले, ई कहे के बात हे कि दूनो जना में बहुत दोस्ती रहे. ई लोग के दोस्ती में खूब कुस्ती होत रहे. लालू जादव 1990 में मुखमंतरी बनला के साते महीना के बाद नीतीश कुमार के सरकारी गेस्ट हाउस से निकलवा देले रहने.

जब कबर गइल नीतीश कुमार के डेरा-डंटा

पंकज के पूछला पे मुकुल कहले, अक्टूबर 1990 में वीपी सिंह के सरकार गिर गइल. नीतीश कुमार केन्द्र सरकार में कृषि राज्यमंत्री रहन. सरकार गिर गइल ते नीतीश कुमार मंतरी ना रहले. जवना स्थिति में सरकार गिरल रहे ओह से नीतीश कुमार नाखुश रहन. ऊ दिल्ली से पटना चल अइले. जब नीतीश पटना से दिल्ली आवत रहन ते ऊ असस्टेट गेस्ट हाउस में ठहरत रहन. नीतीश कुमार पटना पहुंचले ते सीधे अस्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गइले. लेकिन लालू जादव के इशारा पे गेस्ट हाउस के केयर टेकर नीतीश कुमार के रहे के जगह ना देलस. अचानक ई बेवहार पे नीतीश कुमार अवाक रह गइले. अब जास ते कहां जास ? तब उनका आपन इंजीनियर दोस्त अरुण कुमार के इयाद आइल. दूनो जना साथे इंजीनियरिंग कौलेज में पढ़ल रहे लोग. अरुण कुमार बिहार सरकार में इंजीनियर रहन. उनका पटना के पुनाईचक में रहे खातिर सरकारी कोआटर मिलल रहे. नीतीश कुमार बिरिफकेस लेले अरुण कुमार के डेरा पे पहुंचले.

नीतीश कुमार के रहल भइल रहे मोसकिल
दिनकर पूछले, नीतीश कुमार सांसद रहन, मंत्री रह चुकल रहन तब्बो उनका पटना में रहे खातिर आपन घर ना रहे? मुकुल कहले, ना नीतीश कुमार के पटना में आपन कौनौ घर ना रहे. एकरा चलते उनका बहुत दिक्कत भी भइल. जब नीतीश कुमार आपन संघतिया अरुण कुमार के डेरा में कुछ दिन रह गइले ते अचके में अरुण कुमार के पटना से बदली हो गइल. कहल जाला कि ई अरुण कुमार के बदली लालू जादव के इशारा पे ही कइल गइल रहे जवना से कि नीतीश कुमार के डेरा छिना जाव. अरुण कुमार के नाया जगह जाये खातिर डेरा छोड़े पड़ले नीतीश कुमार के भी दोसर जगह खोजे के पड़ल. तब नीतीश कुमार आपन डेरा-डंटा लेके एगो अउर पुरान संघतिया बिनय कुमार भिरी पहुंचले. बिनय कुमार के ई आपन मकान रहे. ईहां नीतीश कुमार तब ले रहले जब ले ऊ 2005 में मुखमंतरी ना बन गइले. नीतीश कुमार ते लालू जादव 1994 में अलगा भइल रहन. लेकिन भीतरे-भीतरे तकरार 1990 से ही शुरु हो गइल रहे. नीतीश कुमार जब दिल्ली से पटना आवत रहन ते ऊ लालू जादव के सरकार चलावे के सलाह देत रहन. ई बात लालू जादव के बहुत खराब लागत रहे। एही से उ नीतीश कुमार से दूरी बनावल चाहत रहन.

लालू जादव के अलग रंग

मुकुल के बाद खतम भइल ते पंकज कहले, लालू जादव जब बिहार के मुखमंतरी रहन तब ऊ अपना आंगा केहू के कुछ ना बूझत रहन. पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के आत्मकथा- मैटर्स ऑफ डिस्क्रीशन : एन ऑटोबायोग्राफी अगर पढ़बे ते लालू जादव के अलग रंग से बाकिफ हो जइबे. गुजराल जी जवन लिखल बाड़े ओकरा मोतिबक ई 1996 के बात हे. गुजराल जी बिहार से राज्यसभा के चुनाव लड़त रहीं. लालू जादव ही उनका के खड़ा कइले रहन. एक दिन लालू जादव दिल्ली पहुंचले ते गुजराल जी के बिहार भवन में बोलवले. गुजराल जी उनका से मिले खातिर पहुंचले. बातचीत शुरू भइल. लालू जादव गुजराल जी के इशारा-इशारा में कहले कि चुनाव जीते खातिर कुछ पइसा भी खरच करे के पड़ी. गुजराल जी समझ के भी बात के महटिया देले. लालू जादव एक दू बेर अउर ई बात कहले. गुजरल जी फेन टार देले. एकर बाद ते लालू जादव अगिया बैताल हो गइले. ऊ चिचिया के कहले, निकलिये कमरे से बाहर. गुजराल जी चुपचाप उहां से बहरी निकल गइनी. वीपी सिंह के कहला पे गुजराल जी ई बत के केहू से चरचा न कइले. लेकिन तकलीफ बहुत लागल रहे. पंकज के बात पे मुकुल कहले, राजनीत में सत्ता परम सत्य मानल जाला. ई सत्य के पावे खातिर नेता लोग कब आपन से पराया हो जइहें, केहू ना बता सके.



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