भोजपुरी विशेष: लइकवा खेल खेलत खानी जवन गीत गावेलसन ओकर मतलब का बा....

लइकन के शरीर तऽ बढ़बे करेला दिमाग भी बढ़ेला...शायद एही चलते हमनी के संस्कृति में मनोरंजक तरीका से लइकन के खेले खातिर उत्साहित कइल जाला.

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  • Last Updated: October 15, 2020, 1:48 PM IST
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लेखक: भुनेश्वर भास्कर


आज-काल्ह के लइका सब यूट्यूब पर वीडियो देखे में ब्यस्त रहताड़े लोग. उनका खातिर वर्चुअल दुनिया ही सभ कुछ हो गइल बा. लेकिन गांव-गंवई में अबहु जादातर लइका-बच्चा सब पारंपरिक तरीका से ही खेल खेलेऽला लोग. ठीक ओइसही, जइसे हमनी सब खेलत रहीं जा. लड़काईं में गांव में खेल खेलत खानी कै तरह के गीत गावल जाला. हमनी के इ संस्कृति हऽ अउर खेल खेले के रिवाज बहुते पुराना हऽ. जबसे लइका भा लइकी डेगा-डेगी चले लागेला तबे से कइगो खेल ओहनी के खेलावल जाला. उ लोग जब तनी बड़ हो जाला तऽ अपने से अलग-अलग खेल खेले लागेला. खेल खेलल बहुते जरुरी बा. ओकरा से लइकन के शरीर तऽ बढ़बे करेला दिमाग भी बढ़ेला...


शायद एही चलते हमनी के संस्कृति में मनोरंजक तरीका से लइकन के खेले खातिर उत्साहित कइल जाला. लइकन सभ खेल खेलत खानी ढेरे गीत गावेला. ओह गीतवा के धेयान से सुनला पऽ भा समझला पऽ एगो अलगे दुनिया लउकेला, जेवना में उ लोग अपना घर-परिवार के संगे-संगे अपन समाज अउरी देश-दुनिया के हाल-चाल आ कमी-बेसी पऽ भी बात करेला. अइसने एगो खेल के गीत में पुरानी भीति गिरेके आ नई भीति उठेके बात होला. अगर एह बात के समझलजाव तऽ संकेत रुप में पुरानी भीति के मतलब पुरानी पीढ़ी आ नई भीति के मतलब नई पीढ़ी. एह गीत में एकरा के देखल जाव ---




घुघुआ माना, उपजे धाना
पुरानी भीति गिरेली, नई भीति उठेली


सम्हरिहे बुढ़ियो, बरतन उठइहे......



खेल के अइसन ढांचा बनल बा कि लइका अउरी लइकी खेलवो खेल लिहें आ संगे-संगे उन्हकर पढ़ाइयो हो जाई. एगो गीत में उ लोग गिनती गिनऽता, एही बहाने गिनतियो इयाद हो जाई आ खेलो हो जाई. एही गीतवा में अंगरेजी सरकार के हटावे के बात तऽ उ लोग करते बा, अपनही सरकार चलावे के बात भी करऽ ताड़ें. उनहुकरा अंगरेजी सरकार पऽ तनिको भरोसा नइखे , देखी एह गीत में ----




दस, बीस, तीस, चालीस, पचास, साठ, सतर, असी, नब्बे, सौ
सौ में लागल धागा, चोर निकल कर भागा
टूटे घर की चिड़िया बोली चांइ, चुंइ, चूस
मैदान बोला भस
एक गली में आना-जाना
दू गली में बम
अंगरेज साला का करेगा,
राज करेंगे हम....



 जब बरसात आवेला आ आसमान में करिया बदरी छा जाला, सगरो आन्हार हो जाला, लागेला कि बारिस अब होई कि तब होई, ओह घरी लइका सभ कवनो आंगन-गली भा खलिहान में मस्ती में झूमे लागेला. ओह घरी घर बहरी कवनो समान रखल बा तऽ ओकरा के हटावे के बात करेला लोग. अतने ना, जब खूबे बारिस होखे लागेला, बारिस के चलते जीव नकनका जाला अउर मन उबिया जाला, गांव के लोग परेशान हो जाला तऽ बदरी फाटे खातिर भा बारिस कम होखे खातिर उ लोग खेल खेलेला आ गीत भी गावेला. उ लोग के बिसवास होला कि अइसन कइला से बदरी फाट जाई आ आकास निबदर हो जाई . एगो गीत देखीं ----




आन्ही, बुनी आवेला, चिरइंया ढोल बजावेले
बूढ़ी माई हाली - हाली गोंइठा उठावेले
आन्ही आइल बुनी आइल , फूट गइल लबनिया
तड़वा धऽध के रोवेले पसिनिया
गाड़ी तीती लागल जाला , बदरी पाराइल जाला
चलनी में आंडा , बादल फाटा, बादल फाटा....



लड़िकाईं में लइका लोग जब खेल खेलला तऽ खूबे मौज मस्ती आ मर- मजाक भी करेला लोग. मरे मजाक में भउजी से धेर तरह के बात करेला लोग आ गीत गावेला लोग. एगो गीत में उ लोग भउजी से बेटा जनमांवे के बात करता लोग. उन्हुकरा लोग के लागता कि जब बेटा होई तऽ उ लोग के साथे खेल खेली. एह गीत में संगे - संगे एगो बुढ़िया माई के खूबे पिनकावता लोग . ई सब लइकाइं के मौज मस्ती हऽ , देखीं एगो गीत में -----




उ पुआवा काहे के? भउजी के खिआवे के
उ भउजी काहे के? लाले लाले बेटवा जनमावे के
उ बेटवा काहे के? गुली डंडा खेले के
गुली डंडा टूट गइल, बबुआ रुस गइल...........


ए बूढ़ी तू काहां जा ताड़ु ?
तेल लेबे
का बनइबू?
पुआ
एगो हमरो के दिहऽ
एगो हमरो के दिहऽ



एगो दोसरा गीत में एगो रोबदार आदमी के आ एगो कमजोर आदमी के बात होखता, संकेत रुप में आपाना से कमजोर के धमकावे के बात होता. हमनी के गांव समाज में अइसन कइगो घटना देखे के मिलेला. हमनी के समाज में बहुत खराब बिचार बा, देखी एह गीत के ----




मइनी के बाचा चुचुहिया रे
दुगो जामुन गिराव
कांचे गिरइबे तऽ मारब रे
दुगो पाकल गिराव-------.



एगो दोसरा गीत में अलगे बात बा, एगो महिला के सात गो बेटा बा लोग, उ आपाना के बलवान समझताड़ी, बाकी कवनो कुटिल आदमी उन्हुकरो के ताना मारऽ ता. एह गीत में देखीं ---




मइनी खाली खइनी,
बकुलवा खाला पान
मइनी के सात बेटा
सातो पहलवान
मइनी चलेली उतान
बकुला मारेला तान
मारेला तान ........ .



एकरा से अलग एगो गीत में लइका सब के भीतर जीव जंतु आ पशु-पक्षी खातिर दया आ मोह नजर आवता. उ लोग बहुते दयालु बा. हमनी के भीतर उतना चिंता नइखे, जितना उ लोग के बा. फितिंगी सब के उ लोग पकड़त नइखे, ओकरा के भागे के बात करता लोग. उड़ जाए के बात करता लोग. देखीं एह गीत में........




हूल फितिंगिया हूल
तोर जान मारऽता
पिपरा के पतवा पऽ खून चुवता
हूल फितिंगिया हूल......



खेल खेलत खानी कइगो गीत अइसन गावल जाला जेकरा के समझे के जरूरत बा आ ओकरा के लिखे के जरूरत बा. लेकिन, गते-गते अब टेक्नोलॉजी के कारण एह सभ खेल से लइका दूर होत बाड़न जा. हमनी के एह सबके सम्भारे के जरूरत बा. (यह लेख लेखक के न‍िजी विचार हैं.)

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