भोजपुरी में पढ़ें : बिहार में का बा क जवाब ‘बहार’ काहे ना बा

बिहार में अबकी चुनाव में बहुत ढेर नारा नइखे सुनात.
बिहार में अबकी चुनाव में बहुत ढेर नारा नइखे सुनात.

पिछला चुनाव में बड़ा जोर शोर से नारा लागल रहे – बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है. लेकिन अबकी चुनाव में काहें इ सवाल खड़ा हो गइल कि बिहार में का बा. आखिर बिहार के बहार कहां बा ?

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 1:51 PM IST
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करोना काल क गाना अबकी बिहार क चुनाव के सवाल बन गइल ह. भोजपुर क एगो कलाकार करोना काल में देस के कोना-कोना से भागल परायल प्रवासी बिहारी मजदूर भाइयन क दुख दर्द बतावे के बहाने पूरा बिहार के बेहाली क हाल क ‘बखान’ कइलस, सुशासन बाबू के बिरोधी लोगन के हाथे जैइसे एगो बड़का तोप लग गईल. सबे पूछे लागल.बिहार में का बा. मजे क बात इ ह कि 15 साल से सुशासन अउर बिकास क ताल ठोंके वाले लोगन के पास इ सवाल क जवाबो न सूझत ह.

पिछला चुनाव में बिहार में बहार रहे
पिछला चुनाव में दोस्त से दुस्मन बनल छात्र राजनीति क संगी साथी से बीस साल बाद हाथ मिलावे वाला सुशासन बाबू क बिहार क सियासत में धनक ऐइसन रहे कि तबकर साथी पीके क राय बात से सगरो बिहार में पोस्टर लगल. बिहार में बहार है. ‘नीतिसे कुमार है.’ उ पोस्टर पर ना त बिहार क जनता के कउनो परेशानी रहे नाहीं दुश्मन से दोस्त बनले पुरान संगी के. उ पूरा चुनाव सुशासन बाबू के जीउ जान से आगे राखि के लड़ले लालू जी. काहे से कि उहो जानत रहले कि खाली नामे में ना कामों में उनका के सुशासन बाबू मानत रहे बिहार क जनता. लेकिन अबकी जब सवाल उठावल जा ता कि. बिहार में का बा . त पिछला चुनाव क जीत क मंतर बा नारा भी भुला गइले सुशासन बाबू के लोग कि, बिहार में बहार है नीतिसे कुमार है.

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फेर काहें ना नारा गढ़ाइल


अबकी चुनाव में न त उ नारा गढ़े वाला संगी साथे रह गइले अउर नाही ताल ठोक के उनका के ही अगला मुख्यमंत्री बनावे खातिर दिन रात एक करे वाला पुरान साथी. उ त ई चुनाव में जेल-अस्पताले से बेटा के यशस्वी भव क आशीर्बाद देबे के अलावे कुछ न कर पावत हउअन. पांच साल में उप मुख्यमंत्री अउर विपक्ष क नेता पद पर रहि के भतीजा भी कांग्रेस अउर बामपंथियन के सहजोग से चच्चा के खिलाफ ताल ठोके में माहिर हो गइल ह. माहिर एतना कि उ न त चुनाव में अपने बाबू जी के नाम के आगे करत ह अउर न त बाबू जी क 15 साल क जंगलराज के खिलाफ दागल गोला के रोके क ही परयास करत ह.. मुड़ी के दाहिना बायां नीचा झुका के विपक्षी गोला के निकल जाए देत ह. कहे क माने इ कि बाबू जी क जंगलराज क याद ई चुनाव में बिहार के लोगन के न आवे एकर पूरा परयास भतीजा की ओर से होत ह. उलटे उ चच्चा के 15 साल के सुशासन पर ही सवाल दाग के ई चुनाव के रोचक बना देले ह. सवाल ई ह कि चच्चा आपके 15 साल के राज में बिकास के नाम पे केतना कल करखाना लगल अउर केतना नौजवानन के नौकरी मिलल बा बेरोजगारन के रोजगार मिलल.

हर चुनाव में सब राजनीतिक दल आपन नया नारा गढ़ेला अउर बिसेस कर एगो बा दुगो मुद्दा के आगे बढ़ा के आपन चुनावी योजना बनावेला. एकरा अलावा चुनाव परचार करत समय नेता लोगन के बोल बिचार भी विरोधियन के हाथ में नया मुद्दा थमा देला. जइसे 2015 के बिहार चुनाव से पहिले माननीय मोदी जी सुशासन बाबू के राजनीतिक डीएनए पर सवाल उठा देले त सुशासन बाबू के बैइठल बइठावल एगो मुद्दा मिल गइल त ओके मथ डलल कि मोदी जी बिहारियन क डीएनए प ही सवाल उठावत हउंअन. हस्ताक्षर अभियान से लगाके दुका दुका . जेतना कइल जाला सब कइलें. फायदो मिलल, भाजपा बैकफुट पर आ गइल. एही तरह संघ परमुख पिछला चुनाव के बीच में आरक्षन क समीक्षा क बात कहिके बवाल मचा देलें त दलित पिछला जाति क राजनीति करे वाला लोग एकर खूब फायदा उठवलस ई परचार करिके कि अगर आरक्षन बिरोधी लोग सत्ता में आइल त आरक्षने खतम कर देही. तब संघ अउर भाजपा के नेता लोगन के सफाई देते न बनल बलुक पत्रकारन के सफाई देत देत थाक गइल लोग.

सवाल प सवाल होता लेकिन जवाब ?
एही तरह चाचा के खिलाफ भतीजा ए बार के चुनाव में रोजगार क सवाल खड़ा कर देले ह. सवाल त बिकास कारज में गड़बड़ी घोटाला क भी ह लेकिन घोटाला क सवाल दागते ही दोसरा ओर से चारा घोटाला क गोला जरूर दागल जाइल, दागलो जात ह. उ त भतीजा क परिवार पर बीसन साल से दागल जात ह जेकरा चलते परिवार क मुखिया जेल में हउअन. वैइसे ए बार क चुनाव तनी अलग ह काहे से कि भइया भतीजा के खिलाफ घोटाला जंगलराज क सवाल उठावते सुशासन बाबू से उनकरो 15 साल क हिसाब मांगे लगत ह भाई लोग. भतीजा भी राजनीति क चतुर खेलाड़ी जैइसन खाली रोजगार क सवाल उठातव ह साथे बेरोजगार नौजवानन के दस लाख नौकरी क सपनों दिखावत ह. करोना काल में लकडाउन के चलते जान परान लेके मुंबई दिल्ली कलकत्ता से पराइल बेरोजगारन के ई सपना खूबे निक लागत त ह लेकिन रोजगार क सवाल पर सुशासन बाबू खिसिया जात हउअन. बौखलाहट में आएं बाएं बोले लागत हउअन. उनके जाने वाला उनकर राजनीत क चाहे दुश्मन हो चाहे दोस्त बा पत्रकार लोग. सबे अजरज में ह कि सुशासन बाबू के इ का हो गइल ह. कबहू निजी हमला न करे वाला काहे ए तरह से बोलत ह.

सुशासन बाबू क बिगड़ल मन मिजाजे के चलते जइसे 70-80 के दसक में भीड़ खींचे खातिर बड़ नाम वाला हीरो के मेहमान कलाकार के तौर पर फिलम में रख जात रहल. फिलम में ओकर रोल पांचे दस मिनट क भलेहू होवे लेकिन पोस्टर में ओकर नाम सबसे पहिले रहत रहल. ओही तरह ई चुनाव में 20 साल तक आपन नाम क डंका बजावे वाला बाबू के मेन हीरो रहते मेहमान कलाकार के भरोसे चुनाव लड़ल जात बा. मेहमान कलाकार क पोस्टरों सगरो बिहार में भरोसा क गारंटी के साथ लगावल गइल ह. बिहार क जनता के इहो भरोसा दिहल जात ह कि जीतल जाई त उनकर भाग्य मेन कलाकार के भरोसे ही रही. अब देखे वाली बात ई रही कि मेहमान कलाकार के कहले पर मेन हीरो पर बिहार क जनता भरोसा जतावत ह कि ना. वैइसे मेहमान कलाकार क सभा में भीड़ त खूब जुटत ह.

( ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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