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Bhojpuri Spl: 20 लाख रोजगार के हवा मिठाई, केकरा-केकरा भेंटाई ?

आज बिहार के वित्तमंत्री बजट के सामवेशी विकास वला बतवलन हs. किसान के अमदनी दोगिनी करे खातिर हर खेत में पानी पहुंचावल जाई जवना से कि कबो सुखाड़ के समस्या ना आ सके. एकरा खातिर बजट में 550 करोड़ रोपेया दिहल गइल बा. सरकारी अउर निजी क्षेत्र में 20 लाख लोग खातिर रोजगार के मौका पैदा कइल जाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 5:45 PM IST
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आज हटिया के दिन रहे. हप्ता में दू दिन बजार लगात रहे. तेल- मसाला, साग सब्जी किने खातिर अगल-बगल के गांव के लोग आवत रहे. मास्टर मणिकांत अउर महेनदरनाथ बतिय़ावत बजार जात रहे लोग. महेनदरनाथ कहले, बिहार के बजट होखे भा देश के, आम अदिमी के तs अतने मतलब बा कि महंगी कइसे कम होई. बिहार सरकार के कहनाम बा कि राज्य के लोग के औसत आमदनी बढ़ल बा. राज्य के विकास दर भी बढ़ला बा. लेकिन असलियत मे कहीं तs घर चलावल मोसिकल बा. मास्टर मणिकांत कहले, आज बिहार के वित्तमंत्री बजट के सामवेशी विकास वला बतवलन हs. किसान के अमदनी दोगिनी करे खातिर हर खेत में पानी पहुंचावल जाई जवना से कि कबो सुखाड़ के समस्या ना आ सके. एकरा खातिर बजट में 550 करोड़ रोपेया दिहल गइल बा. सरकारी अउर निजी क्षेत्र में 20 लाख लोग खातिर रोजगार के मौका पैदा कइल जाई. तब महेनदरनाथ कहले, ई बात सुने में तs निमन लागत बा लेकिन काम आसान नइखे.

20 लाख लोग के रोजगार कइसे मिली ?
मणिकांत अउर महेनदरनाथ के धेयान सैकिल के ट्रिन-ट्रिन सुन के भंग हो गइल. पीछा देखले तs उमाकांत सैकिल पs बइठल लउकले. उमाकांत कहले, का माट साहेब, कवना किसान अउर कवन रोजगार के बात कर रहल बानी ? मास्टर मणिकांत कहले, तूं पीछा से सभ बात सुनत आवत रहs ? अरे आज बिहार बजट के बात करत रहीं. देखले रहs नूं कि बिधानसभा चुनाव में रोजगार केतना बड़ मुद्दा बनल रहे. के केतना रोजगार दिही, एकरा खातिर टेंडर अइसन बोली लागे लागल रहे. भाजपा 19- 20 लाख लोग के रोजगार देवे का बादा कइले रहे. एही से आज बजट में एकरा खातिर घोषणा कइल गइल. उमाकांत तनी मुस्का के कहले, का रउआ एतने से खुश हो गइनी ?

24 लाख लोग आइल रहे बिहार, केतना मिलल रोजगार ?
उमाकांत कहले, इयाद करीं जब लौकडाउन के समय अपरिल- मई में लाखों मजदूर दोसरा राज्य से बिहार आइल रहन. मोटामोटी 23-24 लाख लोग के आवे के बात कहल गइल रहे. ओह घरी सरकार कहले रहे कि अब केहू के बाहर जाये के जरूरत नइखे. सभ केहू के बिहार में ही रोजगार दिहल जाई. जेकर जइसन हुनर बा ओकरा वइसन काम मिली. लेकिन भइल का ? जइसही लौकडाउन खतम भइल बिहार के लोग फेन ट्रेन-बस में भर-भर के दोसरा राज्य में कमाये जाए लगले. अबहीं उत्तराखंड के जलपरलय में बिहार के केतना मजदूर लोग के मारे जाये के खबर मिल रहल बा. अगर बिहार में रोजगार मिलल रहित तs कम से कम एह लोग के तs जान बांच सकत रहे.



किसान के अमदनी कइसे होई दोगिना ?
महेनदरनाथ कहले, उमाकांत बेलकुल बाजिब बात कर रहल बाड़े. किसान के अमदनी कइसे दोगिना होई ? अक्टूबर में हमनी के 40-50 रोपेया किलो आलू खरीद के खइनी जा. अब जब किसान के आलू तइयार भइल तs ओकर भाव हो गइल 10 रोपेया किलो. जोजना बनावे में कवनो कमी नइखे, लेकिन ओकर फैदा कइसे मिली, एह बात पs कबो ईमानदारी से बिचार ना होखे. वित्त मंत्री तारकिशोर जी के शायरी सुने में तs निमन लागल लेकिन ई बताईं सभे कि कबो आज ले समुंदर पियासल अदिमी भिरी आइल बा ? ई कबि लोग के सोंचावट हो सकेला लेकिन गरीबी के मार से जूझ रहल गांव के किसान कइसे भरोसा करिहें. बिहार सरकार के कहनाम बा कि राज्य के लोगन के औसत आमदनी बढ़ल बा. लेकिन प्रति व्यक्ति आय में बिहार अभी देश में बहुत पीछा बा. देश के प्रति व्यक्ति आय, बिहार से तिनगुना अधिक बा. तब कइसे कहल जाव कि बिहार विकास कर रहला बा. एहिजा आज ले कल-कारखाना ना खुलल तs रोजगार कहां से मिली ?

महंगाई के मार
हटिया में गाजर साव तेल में छानल गुरहा जिलेबी को दोकान लगावत रहन. पकौड़ी, समोसा भी ऊ करुए तेल में बनावत रहन. हटिया के दिन उनका दोकान पs रेलम-ठेल लागत रहे. मास्टर मणिकांत गाजर साव के दोकान पs पहुंचले तs देखले के गांहक साथे जिलेबी के भाव खातिर हुज्जत होत रहे. गहंकी अनराजी में कहले, पहिले अस्सी रोपेया किलो जिलेबी मिलत रहे, अब कहिया से सै रोपेया हो गइल ? लूट मचवले बाड़s लोग ? गाजर साव कहले, एह भीड़ काहे किचकिच कइले बाड़s ? पिछिला महिना में करुआ तेल एक सौ दस रोपेया किलो रहे, अब एक सौ चालीस –पैंतालिस हो गइल बा. 80 रोपेया में पोसाई खाई ? पइसा कम बा तs कमे लs, झंझट काहे कइले बाड़s ?

का खाईं, का परहेज करी ?
मास्टर मणिकांत के देख के गाजर साव कहले, देखsतानी नूं माट साहेब, महंगी के हाल बा ? मास्टर मणिकांत कहले, आम अदिमी के जरूरत के चीज के भाव अकाश छूअले बा. पिछला छह महीना में करुआ तेल के भाव किलो पs 50 रोपेया बढ़ गइल बा. तीसरा लौकडाउन ले करउआ तेल 90 से 95 रोपेया किलो मिलत रहे. लेकिन साल बितत-बितत रेट 110 रोपेया पहुंच गइल. अब तs एकर भाव 130-144 रोपेया पहुंच गइल बा. जइसन कंपनी वइसन दाम. बिधानसभा में भी महंगाई के मुद्दा बनावल गइल. कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान अउर अजीत शर्मा तs महंगाई के रेटलिस्ट पs पोस्टर बना के बिधानसभा पहुंचल रहन. मास्टर मणिकांत झोरा देखा के कहले, देख लs पियाज के भाव में कइसे आग लागल बा. अस्सी-नब्बे से 30-35 भइल, अब फेन 60 रोपेया किलो बेचाए लागल. ई महंगाई पs कइसे लगाम लागी, एकर जबाबदेही तs सरकारे पs बा. मास्टर मणिकांत पहिले बजार आवस तs आधा किलो जिलेबी किनस. लेकिन आज पावे भर के ठोंगा बन्हवा के घरे चल देले. (लेखक अशोक कुमार शर्मा जी वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)
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