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Bhojpuri: बिहार बिधानसभा में 100 साल पहिले ही उठल रहे शराबबंदी के मुद्दा

Bhojpuri: बिहार बिधानसभा में 100 साल पहिले ही उठल रहे शराबबंदी के मुद्दा

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Assembly Election: बिहार विधानसभा भवन. सौ साल के राजनीतिक इतिहास के गवाह. 7 फरवरी 2021 के दिन पहिला बैठक भइल रहे. ओह घरी बिहार अउर उड़ीसा एक्के राज्य रहे. लेजिस्लेटिभ काउंसिल (विधायी परिषद) के बैठक के अध्यक्षता कइले रहन सर वाल्टर मोरे.

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राज्य के पहिला राज्यपाल लौर्ड सत्येन्द्र प्रसन्नो सिन्हा के अभिभाषण से बैठक के शुरुआत भइल रहे. ई कतना सुखद आश्चर्य के बात बा कि आज से सौ साल पहिले जब लेजिस्लेटिभ काउंसिल के बैठक भइल रहे तब राज्यपाल आपन भाषण में शराबबंदी के जिक्र कइले रहन. लौर्ड सिन्हा कहले रहन, शराबबंदी के जरिये समाज सुधार के बढ़ावा देवे के चाहीं. सौ साल बाद आज शराबबंदी बिहार के पहचान बन गइल बा.

बिहार बिधानसभा भवन के निर्माण

22 मार्च 1912 के बंगाल से अलग होके ‘बिहार अउर उड़ीसा’ राज्य बनल रहे. 43 सदस्यीय लेजिस्लेटिभ काउंसिल के गठन भइल रहे. एकरा में 24 सदस्य के चुनाव अउर 19 सदस्य के मनोनयन होत रहे. पहिले चुनिंदा लोग के ही भोट देवे के अधिकार रहे. बिहार अउर उड़ीसा नाया राज्य तs बन गइल लेकिन एकर विधानसभा भवन अउर सचिवालय ना रहे. लेजिस्लेटिभ काउंसिल के मेम्बर लोग के अलग-अलग जगह पs बैठक करे के पड़े. एही बीच भारत सरकार अधिनियन 1919 के मोताबिक भारत में नाया शासन बेवस्था शुरू भइल. केन्द्र में दू सदन वली बिधायिका के शुरुआत भइल. राज्य के शासन आरक्षित अउर हस्तांतरित बिषय में बांट दिल गइल. राज्य में शासन के संचालन राज्यपाल के जिम्मे रहे. राज्यपाल आरक्षित बिषय के शासन कार्यकारी परिषद (नौकरशाही) के माध्यम से करत रहन. जब कि हस्तांतरित बिषय के शासन ऊ मंतरी लोग के सहयोग से कतर रहन. मंतरी के चुनाव लेजिस्लेटिभ काउंसिल के मेम्बर में से कइल जात रहे. राज्यपाल कवनो मंतरी के बर्खास्त कर सकत रहे.

राज्यपाल सत्येन्द्र प्रसन्नो सिन्हा

1919 के भारत शासन अधिनियम के मोताबिक बिहार अउर उड़ीसा के पूर्ण राज्य के दर्जा मिल गइल. उपराज्यपाल के जगह राज्यपाल के नियुक्ति भइल. लौर्ड सत्येन्द्र प्रसन्नो सिन्हा बिहार अउर उड़ीसा के पहिला राज्यपाल बनले. नया राज्य तs बन गइल लेकिन बिधानसभा के भवन ना रहे. तब लेजिस्लेटिभ काउंसिल के बैठक खातिर नाया भवन बनावे के तइयारी शुरू भइल. 1920 में बिल्डिंग के काम पूरा हो गइल. आज इहे भवन बिहार विधानसभा के मेन बिल्डिंग के रूप में हमनी के सामने मौजूद बा. 1919 में एकरा के लेजिस्लेटिभ काउंसिल कहल जात रहे. पहिले के तुलना में सदन के सदस्य संख्या 43 से बढ़ के 103 हो गइल जवना में 76 सदस्य के चुनाव होत रहे अउर 27 सदस्य मनोनीत होत रहन. 7 फरवरी 1921 के दिन बिहार अउर उड़ीसा राज्य लेजिस्लेटिभ काउंसिल के पहिला बैठक ई नयका भवन में भइल रहे. राज्य के पहिला राज्यपाल सत्येन्द्र प्रसन्नो सिन्हा के अभिभाषण से सत्र के शुरुआत भइल.

बिहार के पहिला राज्यपाल

लार्ड सत्येन्द्र प्रसन्नो सिन्हा के जन्म पश्चिम बंगाल के रायपुर में भइल रहे. ऊहां के वकालत में नाम कमइला के बाद कांग्रेस के राजनीत कइनी. 1915 में कांग्रेस के अध्यक्ष भी चुनल गइनी. ऊहां के पहिला भारतीय रहीं जिनका के अंग्रेजी राज में प्रांतीय शासन के बागडोर दिहल गइल रहे. 7 फरवरी 1921 के उहां के बिहार-उड़ीसा लेजिस्लेटिभ काउंसिल के नयका भवन (पटना स्थित मौजूदा बिधानसभा भवन) में पहिला भाषण कइनी. ऊहां के कहले रहीं, शराबबंदी से समाजसुधार के कोशिश के बढ़ावा देवे के चाहीं. शराब अउर नसा के नियंत्रण खातिर अइसन नीति बनावे के चाहीं कि जेकरा से सरकार के भी इच्छा सम्मान होखे अउर जनता के भी. मतलब बिहार में सौ साल पहिले ही शराबबंदी से समाजसुधार के कोशिश शुरू हो गइल रहे. आखिरकार 95 साल बाद 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू हो गइल. लेकिन अफसोस के बात ई रहल कि लार्ड सिन्हा 11 महीना ही राज्यपाल रह पवले. तबीयत खराब रहे के वजह से ऊ राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे देले. बिहार-उड़ीसा राज्य के विधायी परिषद में पहिले 43 (1912) सदस्य रहन. 1919 में सदन के संख्या 103 हो गइल. मतलब बिहार के नयका भवन में जब विधायी परिषद के बैठक शुरु भइल तs ओह घरी सदन में कुल 103 सदस्य रहन.

1936 में बिहार बिधानसभा

17 साल तक बिहार उड़ीसा एक राज्य रहल. 1935 में भारत सरकार अधिनियम पास भइला के बाद 1 अप्रील 1936 के बिहार अउर उड़ीसा अलग-अलग राज्य बन गइल. बिहार में बिधायी कार्य खातिर द्विसदनात्मक बेवस्था लागू भइल. एकरा बाद बिहार विधानसभा अउर बिहार विधान परिषद के गठन भइल. बिहार विधानसभा के सदस्य संख्या 103 से बढ़ के 152 हो गइल. चूंकि बिहार विधान परिषद के गठन पहिला बेर भइल रहे एह से ओकर सदस्य संख्या 30 रहे. बिहार विधान परिषद खातिर नया भवन बनल रहे जेकरा में 22 जुलाई 1936 के पहिला बैठक भइल रहे. बैठक के अध्यक्षता राजीव रंजन प्रसाद कइले रहन. 1937 में 152 सदस्य के चुनाव खातिर बिहार विधानसभा के चुनाव भइल रहे. कांग्रेस के जीत मिलल रहे. लेकिन राज्यपाल के दखल के बिरोध में कांग्रेस सरकार बनावे से इंकार कर देलस. तब राज्यपाल, मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद यूनुस के सरकार बनावे खातिर नेवता देले. ओह घरी राज्य के मुखमंतरी के प्रधानमंतरी कहल जात रहे. एह तरे मोहम्मद यूनुस बिहार के पहिला प्रधानमंतरी बनले. लेकिन तीन महीना बाद उनका पद से हटे के पड़ल. एकरा बाद 20 जुलाई 1937 के श्रीकृष्ण सिंह ने अगुआई में कांग्रेस के सरकार बनल.

आजादी के बाद बिहार बिधानसभा

आजादी के बाद 1952 के पहिला चुनाव भइल. ओह घरी बिहार विधानसभा में कुल 330 सदस्य रहन. राज्य पुनर्गठन आयोग 1956 के सिफारिश के बाद बिहार विधानसभा के सदस्य संख्या घट के 319 हो गइल. 1962, 1967, 1969 अउर 1972 में 319 सीट खातिर बिधानसभा के चुनाव भइल. 1977 में आबादी बढ़े के आधार पs बिधानसभा 324 सदस्यीय हो गइल. एक मनोनीत सदस्य के भी प्रावधान रहे. सन 2000 में झारखंड के बंटवारा के बाद बिहार बिधानसभा के सदस्य संख्या 243 रह गइल. बिहार के 81 विधानसभा सदस्य झरखंड बिधानसभा के सदस्य बन गइले. एक मनोनीत सदस्य मिला के झारखंड बिधानसभा के सदस्य संख्या 82 हो गइल. मतलब सौ साल के राजनीतिक सफर के बाद अब बिहार विधानसभा में 243 सदस्य बाड़े.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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Tags: Bhojpuri News, Bihar election news

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