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Bhojpuri: लालू जी पूछले, सुखमनी तुम ईहां कहां ? तुम्हारा बियाह इहें हुआ है का?

Bhojpuri: लालू जी पूछले, सुखमनी तुम ईहां कहां ? तुम्हारा बियाह इहें हुआ है का?

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पटना के बोरिंग रोड चौराहा. सांझ के बेरा रहे. मिठाई के दोकान गुलजार रहे. बिबेकानंद अउर गगनबिहारी गरमागरम गुलाब जामुन के आनंद उठावत रहन. बिबेकानंद कहले, काल्ह तेजपरताप मलाई चौप खाये अइले तs मीडिया में हाईलाइट हो गइले. ऊ जतना के मलाई चौप ना खइले ओकरा से कई गुना बेसी पइसा, गरीब लइकी के मदद में खरच कर देले.

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सड़क के किनारा पेन बेचे वली लइकी के पढ़े खातिर पचास हजार के आईफोन खरीद देले. तेजप्रताप के दिलदारी भी खूब बा. गगनबिहारी तातल गुलाब जामुन के चमच से काट के कहले, तेजपरताप के राजनीतिक शैली में बेलकुल लालू जी के छाप बा. लालू जी भी अइसहीं राह चलत केहू के मदद कर देत रहन.

लालू जी के जमाना में आईफोन कहां रहे !

गगन बिहारी के बात सुन के बिबेकानंद कहले, का लालू जी भी केहू के आईफोन गिफ्ट कइले रहन ? तब गगनबिहारी कहले, ओह जमाना में आईफोन कहां रहे ? छोटको मोबाइल ना रहे. टेलीफोनो बहुत हैसियत वला बात रहे. लेकिन लालू जी जवन मदद करत रहन ओकर अहमियत पइसा से ना आंकल जा सके. उनकर मदद में पइसा से अधिक अपनापन के भाव रहे. इहे खूबी के बल पs ऊ जनता के दिल में आज भी बसल बाड़े. एह बात के समझे खातिर तहरा के एगो सांच खिस्सा सुनावत बानी. लालू जी 1990 में मुखमंतरी बनल रहन. गद्दी सम्हरला के कुछुए दिन के बाद लालू जी पटना जिला के एगो गांव में कार्जक्रम खातिर पहुंचले. उनका साथे शिवानंद तिवारी भी रहन. लालू जी तय समय पs पहुंच गइले. लेकिन कार्जक्रम के आयोजक लोग के ही अतापता ना रहे. ऊ लोग इहे समझत रहे कि लालू जी सीएम बाड़े अउर उनका आवे में समय लागी. लेकिन लालू जी टाइम के पक्का रहन. गांव के मुहाने पs दलित समुदाय के टोला रहे. जब ऊ लोग के मालूम भइल कि लालू जी आइल बाड़े तs उनका के देखे खातिर जुटे लगले. ओह घरी लालू जी के राजनीतिक उठान शुरुए भइल रहे.

“सुखमनी तुम ईहां का कर रही हो ?….”

गगनबिहारी लय में आपन बात कहत रहन. जब दलित टोला के लोग मीटिंग के जगह पs जुट गइले तs तनी भीड़ जइसन बुझाये लागल. भीड़ में एगो औरत रह-रह के एंड़ी अलगा के लालू जी के देखे के कोशिश करत रहे. ऊ बार-बार देखे लेकिन लालू जी के धेयान दोसरा देने रहे. ऊ औरत ईहे इंतजार में रहे कि कब लालू जी के नजर ओकरा पs पड़े. अचानक लालू जी के नजर ओह औरत पs पड़ गइल. लालू जी के तनी अचरज भइल. लेकिन तुरंते पहचान गइले. दूरे से लालू जी कहले, अरे सुखमनी तुम ईहां का कर रही हो ? ईहे गांव में बियाह हुआ है का ? ऊ औरत पीछा से निकल के आगा आ गइल. ओकरा गोदी में एगो लइका भी रहे. ऊ मुड़ी हिला के हां कहलस. तब लालू जी ओकरा से बतियावे लगले. ओकर बड़ बहिन के भी नांव पूछ ले. हालचाल जनले. फेन अपना पाकिट से पांच सौ रोपेया के नोट निकाल के औरत के हाथ में राख के कहले, जा लइकन के मिठाई खिया दिहs. लालू जी के ई रूप देख के ऊहां मौजूद लोग गदगद हो गइले. एक मुखमंतरी के जनता से जुड़ाव के ई अदभुत दृश्य रहे. लेकिन सबके मन में एक सवालो रहे कि आखिर ई औरत के हs ?

…तs अइसे बनले लालू जी जननेता

बिबेकानंद पूछले, तब का भइल ? गगनबिहारी जबाब देले, धीरज धरs, सभ बात बतावत बानी. आसपास के लोग अउर अफसर हक्का-बक्का रहन कि आखिर मुखमंतरी दलित टोला के एक औरत के नांव से कइसे जानत बाड़े ? ऊ ई औरत से अतना अपनापन से कइसे बात कर रहल बाड़े ? सबके मन में ई सवाल तूफान जोतले रहे. लेकिन मुखमंत्री से पूछे के भला केकर हिम्मत रहे. केहू कुछ ना बोलल. लेकिन शिवानंद तिवारी से बरदास ना भइल. शिवानंद तिवारी लालू जी के सबसे नजदीकी संघतिया रहन. छात्र जीवन से ही दोस्तियारी रहे. लालू जी भी उनकर बहुत इज्जत करत रहन. सभा खतम भइल तs शिवानंद तिवारी सवाल पूछ बइठले. के हs ई ? तब लालू जी कहले, ई औरत के तब से जानत बानी जब ऊ छोटहन लइकी रहे. पढ़ाई के समय लालू जी आपन बड़ भाई के साथे भेटनरी कौलेज के चपरासी कोवाटर में रहत रहन. कोवाटर से थोड़का दूर पs मुसहर समुदाय को झोंपड़पट्टी रहे. ई लइकी आपन परिवार के साथे ओहिजे रहत रहे. कमकाज खातिर ऊ लइकी अउर ओकर बहिन भेटनरी कौलेज के कोवाटर में आवत रही सs. तब्बे से लालू जी ओकरा के जानत रहन. बाद में लालू जी मुखमंतरी बन गइले. लेकिन उनका 15-20 साल पहिले के बात भी इयाद रहे. उनका ऊ लइकी के नांव अउर चेहरा तक इयाद रहे. ई संजोग के बात रहे कि ओह लइकी के बियाह ओही गांव में भइल रहे जहां लालू जी सभा करे गइल रहन. एतना बड़ ओहदा पs रहला के बादो लालू जी ओकरा के चिन्हे में तनिको देर ना कइले. ऊ सधारन से सधारन अदिमी के भी भुलात ना रहन. इहे खूबी लालू की जननेता बना देलस. तेजपरताप भी भी लालू जी के रस्ता पs चल रहल बाड़े. अतने में गुलाब जामुन खतम भइल तs बतकही भी खत्म हो गइल. लेकिन बिबेकानंद अउर गगन बिहारी के ओठ पs नरम-गरम गुलाब जामुन के मिठास अभियो बाकी रहे.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri News, Lalu Prasad Yadav

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