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bihar politics challenges for tejashwi yadav after becoming deputy cm of bihar bhojpuri ashok kumar sharma

Bhojpuri में पढ़ें- चाइलेंज पs चाइलेंज फेस करे के पड़ी!

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टीभी पs समाचार देख के गोरखनाथ कहले, नीतीश जी मुखमंतरी अउर तेजस्वी उपमुखमंतरी बन गइले. नीतीश जी के पद बरकरार रहल. तेजस्वी के पांच साल बाद सत्ता मिल गइल. अभी खुशी के माहौल बा. एह से केहू चुनौती के बात नइखे करत. लेकिन दूनो दल के बीच एतना बिरोधाभास बा कि देर सबेर चुनौती से पाला पड़बे करी.

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तेजस्वी 2020 के चुनाव में बादा कइले रहन कि अगर सरकार बनी तब पहिला कैबिनेट में 10 लाख लोग के सरकारी नौकरी देब. तब जदयू एह घोषणा के मजाक उड़वले रहे. जदयू के बड़का नेता कहले रहन कि ई बादा असंभव बा. समाज में कनफ्यूजन फैलावे खातिर ई घोषणा कइल गइल बा. अगर एकरा के लागू कइल जाई तब सरकार के खजाना पर करीब 1.44 लाख करोड़ के बोझ पड़ी. अतना पइसा कहां से आइ? का ऊ विकास के टोटल काम बंद कर दिहें ? राज्य में कवनो दोसर काम ना होई ? जब पहिले राजद के शासन रहे तब सरकारी कर्मचारी के समय पर तनखाह ना मिलत रहे. लेकिन 2022 में नाया सरकार बनते तेजस्वी फेन ई मुद्दा उठा देले बाड़े. अब नीतीश सरकार कइसे ई बादा के संभव बनाई ? अतना सरकारी नौकरी देवे खातिर अब कहां से पइसा आयी ? अब 45 बिधायक वला जदयू के महागठबंधन में कइसे गुजर-बसर होई ? केतना भैलू मिली ? ई सही बा कि नीतीश जी मुखमंतरी बन गइले, लेकिन चली केतना ? नाया सरकार बनला के बाद सुशील मोदी बयान देले बाड़े, नीतीश जी बस नाम मातर के सीएम रहिहें, सीएम के असली पावर तs तेजस्वी भिरी रही. देवकांत बीच्चे में टोकले, गोरख भाई, तूं का कहल चाहत बाड़s? का नयका सरकार में जदयू सहज ना रह पाई? का ओकरा चाईलेंज पs चाइलेंज फेस करे के पड़ी ?

….तs का एक बेर फेन सरकार गिरी ?
गोरखनाथ जबाब देले, नीतीश जी जवना सवाल पs 2017 में राजद के साथ छोड़ले रहने ऊ सवाल अभियो नाग के फन जइसन खाड़ा बा. अगर आज ई सवाल भूला के सरकार बनी तब जदयू के मजबूरिये समझ जाई. राजनीति में जे मजबूरी के फैदा उठावे ला ओकरा के रणनीतिकार कहल जाला. अब जदयू पहिले जइसन शर्त पs राजनीति ना कर सके. जब 2017 में तेजस्वी यादव के खिलाफ रेलवे टेंडर घोटला में आरोप लागल तब नीतीश जी उनका सामने सफाई देवे के शर्त राख देले रहन. जब तेजस्वी सफाई ना देले तब नीतीश जी आपन रास्ता बदल दे ले. राजद के छोड़ के भाजपा साथे सरकार बना लेले. अब पांच साल बाद नीतीश जी भाजपा के छोड़ के राजद साथे सरकार बना ले ले. लेकिन पहिले से अब का बदल गइल कि जदयू के राजद से मेल हो गइल ? तेजस्वी उहे, आरोप उहे, सवाल उहे, आखिर बदलल का ? बल्कि कहल जाव तs रेलवे टेंडर घोटला के दायरा अब अउर बढ़ गइल बा. अब तs रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटला के जांच शुरू बा. लालू जी के सबसे करीबी नेता भोला यादव के गिरफ्तारी भी हो चुकल बा. उनका घरे से एगो गुप्त डायरी बरामद होखे भी चर्चा बा. अगर जांच के आंच राजद के प्रमुख नेता तक पहुंची तब का नीतीश जी एक बेर फेन महागठबंधन के सरकार गिरा दिहें ? अगर ना गिरइहें तब सवाल के जबाब देत ना बनी. लोग पूछिहें, राउर करप्शन पर जीरो टौलरेंस नीति के का भइल ? विरोधी पाटी सवाल पूछी, का सत्ता खातिर भ्रष्टाचार से समझौता हो गइल ?

राजद : तब अउर अब में बहुत फर्क
गोरखनाथ बिस्तार से आपन बात रखले. 2015 में राजद पर लालू जी के पूरा कंट्रोल रहे. राजद में अनुशासन रहे. लालू जी के मर्जी के खिलाफ पत्ता ना डोलत रहे. लेकिन अब अइसन बात नइखे. स्वास्थ्य के कारण अब लालू जी के पहिले जइसन पाटी पs कमांड नइखे. राजद में अंदरुनी लड़ाई रह रह के फूटल, आम बात बा. का तेजपरताप अउर तेजस्वी के आपसी लड़ाई खत्म हो गइल बा ? अगर सरकार बनी अउर ओह घरी कवनो बरियार झंझट हो गइल तब नीतीश जी कइसे मामला सलटइहें ? नीतीश जी के सोभाव हs कि ऊ अपना कामकाज में केहू के दखल पसंद ना करस. भले ऊ गठबंधन के सरकार चलावे ले लेकिन फ्रीहैंड काम कइल चाहे ले. भाजपा साथे जवन भी समस्या भइल होखे लेकिन नीतीश जी के शासन में पूरा दबदबा रहे. कुछ दिन पहिले जब भाजपा कोटा के राजस्व-भूमि सुधार मंतरी जब 110 कर्मचारी के ट्रांसफर कइले रहन तब नीतीश जी ओकरा पर रोक लगा देले रहन. गड़बड़ी के आरोप लागल रहे. बाद में भाजपा के मंतरी नरम पड़ गइल रहन. का राजद के मंतरी के साथे अइसन हो सकेला ? महागठबंधन के नयका सरकार में अगर अइसने स्थिति आई तब का मुखमंतरी ओकरा पर रोक लगा सके ले ? 2015 के सरकार में आरोप लगात रहे कि साधारण ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी राजद के बड़का नेता फोन के फोन आ जात रहे. राजद अब पहिलs से भी मजबूत बा. जाहिर बा ऊ आपन ताकत भी देखाई. का नीतीश जी तीन साल तक राजद के दखल बरदास कर सकेले ?

का होई शराबबंदी महाअभियान के नतीजा ?
देवकांत सवाल कइले, का शराबबंदी के मामला भी नयका सरकार में समस्या खाड़ा कर सके ले ? तब गोरखनाथ कहले, शराबंदी कानून 2016 में तब बनल रहे जब राजद-जदयू-कांगरेस के सरकार रहे. लेकिन एकरा बादो राजद नीतीश जी के शराबबंदी नीति के खुलेआम विरोध करत रहे. 2017 के बाद राजद के नेता शराबबंदी कानून के फेल बतावत रहन. बिधानसभा में भी राजद शराबबंदी के फेल होखे के मुद्दा उठावत रहे. नवम्बर 2021 में तs शराबबंदी के मुद्दा पs बिधानसभा परिसर में राजद अउर भाजपा बिधायक के लड़ाई हो गइल रहे. राजद बिधायक पs अपशब्द इस्तेमाल करे के आरोप लागल रहे. दिसम्बर 2020 में कांग्रेस के एगो बिधायक चिट्ठी लिख के बिहार सरकार से मांग कइले रहन कि शराबबंदी कानून खत्म कर देवे के चाहीं. अब महागठबंधन के नयका सरकार में राजद अउर कांगरेस रही तब शराबबंदी महाअभियान के का नतीजा होई? शराबबंदी नीतीश जी के ड्रीम प्लान मानल जाला. अगर एह मामला में कवनो दबाव बनी तब सरकार असुविधा में पड़ सके ले. गोरखनाथ के बात पs देवकांत कहले, अब देख कि जदयू दोस्ती पार्ट-टू के कइसे हैंडिल करे ला.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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