भोजपुरी विशेष - लालूजी लचार काहे भइले,कइसे मिली राजद के गद्दी ?

भोजपुरी विशेष - लालूजी लचार काहे भइले,कइसे मिली राजद के गद्दी ?
लालू जी भोजपुरी भाषा के जरिए भी लोगन के जोड़त रहने.

लालू प्रसाद यादव दलित आ पिछड़ा के त पहचान देबे कइने, भोजपुरी के भी खूब प्रचार कइने. जगदीश आ चचा के बातचीत में लेखक अशोक जी बतावत हईं कि लालू जी के बेटा तेजपरताप उनका राजनीति के केतना आगे ले जइहेंs -

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 3:41 PM IST
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सांझ भइल तो बलेसर चा के दलान प पहुंचनी. नियम कयदा के माने वाला बलेसर चा अपना चौकी से फरके एगो खटोला रखले रहन. अइसे त महमारी में बहुत कमे अदमी आवत रहे लेकिन जे आवे से उहे खटोला प बइठे. दलान में हेलनी तो चचा टीभी देखत रहन. गोड़ लागी चचा ! हमार बोली सुन के चचा एक नजर देखले अउर खटोला प बइठे के इशारा कइले.

तेजपरताप केतना समझले ?

चचा - का जगदीश, तहरो बुझाता कि ई महामारी में अलेक्शन होइए के रही ? नेता लोगिन के छटपटी त बहुते बढ़ गइल बा.
जगदीश- बुझातs त इहे बा. टीभी में त आज लालूए जी से समाचार बा.
चचा – अब का कहीं जगदीश, लालूजी के हाल देख के बड़ा तपलीख होता. एक त उ जेल (अस्पताल) में बाड़े, बेमारो बाड़े, तबहूं उनकर लइका मरम नइखनs बुझतs. तेजपरताप के लालू जी बोलवने रहन समझावे के खातिर, लेकिन रांचिओ में बवाल होइए गइल. फैदा के फेर में नोकसान ना हो जाय. खबर में सुननी हं कि, ऊ 60 मोटर गाड़ी लेके लालू जी से मिले गइल रहनs. भला बतावs, ई महामारी में एतना अदमी के गइला के का जरूरत रहे ? सुने में त इहो आवतs कि अस्पताल में गाड़ी से एतना जाम लाग गइल कि झंझटो हो गइल. एह बात प भाजपा के लोग गदर मचवले बाड़नs. तेजपरताप त रघुबंस बाबू प बोल के पहिलहीं ममिला अझुरवले रहन. अब मोटर गाड़ी के बखेड़ा से बात अउर बिगड़ रहल बा. सब समय के फेरा हs.



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भोजपुरिया माटी के सान हवन लालूजी

जगदीश- हं चचा, लालूजी त भोजपुरिया माटी के सान हवन. ऊ मुखमंतरी रहन त देश-विदेश में भोजपुरिये बोलतs रहन. ऊ गांव, गरीब अऊर भोजपुरी के इज्जत बढ़वले. लेकिन आज अकदम्मे लचार हो गइल बाड़े.
चचा- हं जगदीश, हमरा उहो दिन इयाद बा जब ऊ पहिला बेर मुखमंतरी बनल रहन. गद्दी प बइठला के कुछुए दिन के बाद गांवें -गांवें घूम के गरीबन के हाल चाल जाने निकल जातs रहन. अचके में हेलीकौप्टर से उतर के मुसहर टोली पहुंच जास. अउर कहे लागस, अरे सुअर चरावे वला, अरे भंइस चरावे वला, अरे घोंघा चुने वाला, पढ़-लिख के जागs लोग. लालूजी त दोसरा के समझा के , जगा के अगुआ देहले लेकिन उनकर लइके उनकर मंतर ना सीख पवले.

लालूजी के गद्दी काहे छिनाइल ?

जगदीश- हं चचा, लालूजी के राज अगर छीनाइल त जरूरे कवनो बात रहे.
चचा- लालूजी गुदरी के लाल रहन. गरीबी से लड़ के आगा बढ़ल रहन. नीक-जबून सब जानत रहन. उमिर में बड़ से कइसे बतिआवलs जालाs ई तेजपरताप के सीखे के चाहीं. टीभी में देखलs नू कि कइसे तेजपरताप चंद्रिका- फंद्रिका कह देले ? का केहू से झगरा रही त ओकरा के उरेब बोल दिहिल जाई ? लालूजी के राजनीत में बाजपेयी जी से कितना लड़ाई रहे लेकिन ऊ हमेशा अटलेजी कहत रहन. जब लालूजी रघुबंस बाबू के इज्जत करे ले तो उनकर लइका कइसे ओछ बात बोल सकतs बाड़न ? सब बुझइला के फेर बा. लालूजी पहिले गरीब-गुरबा के खातिर जान देत रहन. लेकिन जब उनके हित-कुटम लोग जनता के सतावे लगले तो दिन पलटे में देर ना लागल. जवन जनता लालू जी के माथा प बइठवले रहे उहे एक दिन भुइंया में पटक देहलस. लालूजी अब गलती सुधारलs चाहत बाड़न लेकि घर के झंझट निक काम होके नइखे देत. तेजपरताप कबो घामा में पसेना नइखन बहावले. केतना मेहनत के बाद राजद बनल बा, ई बात उनका जाने के चाहीं. अगर लालू जी इहां तक पहुंचल बाड़े त रघुबंसो बाबू के ओकरा में सहजोग बा.

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पोरफेसर से नेता बनले रघुबंस बाबू
जगदीश- लालू जी उठान में रघुबंस बाबू के सहजोग बा ?
चचा- तू ओह घरी लइका होखबs. रघुबंस बाबू पहिले सीतामढ़ी के गोयनका कौलेज में गणित के पोरफोसर रहन. गणित से एमएससी अउर पीएचडी कइले रहन. हिसाब बनावे में धुराझार रहन. लइको उनको के खूब मानत रहनस. ऊ पोरफेसर त रहले रहन समाजवादी पाटी के पक्का सपोटरो रहन. 1974 में छात्र आंदोलन भइल त उहो लइकन के साथे हो गइले. एक दिन पुलिस पकड़ लेलस. कुछ दिन के बाद जेल से छूटले त जेपी के सिपाही बन गइले. एही घरी लालू जी से उनकर मोलकात भइल. 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पाटी से टिकट मिलल. सीतामढ़ी के बेलसंड से चुनाव लड़ले. जितिओ गइले. कर्पूरी ठाकुर के सरकार बनल त उ मंतरियो बनले. 1985 में अइसन संजोग भइल कि कर्पूरी जी, लालू जी अउर रघुबंस बाबू तीनों अदमी लोकदल से विधायक रहनs. 1985 में कांग्रेस के सरकार बनल रहे. कर्पूरी जी नेता प्रतिपक्ष रहन.



लालूजी के आगा बढ़े में रघुबंश बाबू के सहजोग

लेकिन फरवरी 1988 में बेमारी से कर्पूरी जी ई दुनिया से चल गइले. अब नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के सवाल आइल. 1985 में लोकदल के 46 विधायक जीतल रहन. लेकिन बाद में अजीत सिंह अउर हेमवती नंदन बहुगुणा में झंझट के चलते लोकदल में बंटवारा हो गइल. कर्पूरी जी समेत 33 विधायक लोकदल ब में रहन. एही गुट में लालू जी, रघुबंस बाबू, भी रहन. ओह घरी विनायक प्रसाद जादव लोकदल में सबसे बड़ विधायक रहन. नेता प्रतिपक्ष बने खातिर लालू जी, विनायक जी अउर अनूप लाल जादव जी में लुकाछिपी चलतs रहे. एही विकट समय में रघुबंस बाबू लालूजी के मददगार बन के सामने अइले. उ लालू जी पक्ष में अतिपिछड़ा अउर फारवड विधायक के गोलबंद कर के बहुमत जुटावे में खूब मेहनत कइले. लालूजी नेता प्रतिरक्ष बन गइले. अगर 1988 में ऊ नेता विरोधी दल ना बनल रहिते त 1990 में मुखमंतरी बने के दावेदारियो ना पेश कर पइते. एही से लालूजी आज तक रघुबंस बाबू के इज्जत करे ले.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)
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