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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- चंद्रशेखर जी जवन सैतालीस बरिस पहिले कहले रहले, उहे बाद में भइल

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चौहत्तर के आंदोलन में जय प्रकाश नारायण के चंद्रशेखर जी चेता दिहले रहले कि कई गो पाटी आ किसिम-किसिम के लोग के संगे अइला से ढेर अगरइला के जरूरत नइखे. ई लोग बेवस्था बदले खातिर आंदोलन में नइखे आवत. एइमें बेसी लोग कुर्सी आ गद्दी के लालच में संगे लटकल-सटल बा. बाद में ई लोग अपना-अपना जात के नेता बन जाई.

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पांव लागीं मलिकार! पांड़े बाबा आज एगो बात बतावत रहुवीं. बलिया वाला जवन चनरसेखर जी एक बेर परधानोमंतरी बनल रहले, इमरजेंसी में इनरा गान्हीं उनहूं के जेल में ठूंसवा दिहलो रहली. जेल में रहत भर में ऊ डायरी लिखले. उनका डायरी में एगो बात अइसन लिखल बा, जवन एह घरी सांच हो गइल बा. सन चौहत्तर में इनरा गान्ही के खिलाफ जब जयपरकास नारायन जी महंगाई, बेरोजगारी, पढ़ाई आ समाज सुधारे के खातिर आंदोलन शुरू कइले रहले त नदी-नाला जवनी गंतिया बहत-बहत समुंदर ले पहुंच जाला, ओही तरे किसिम किसिम के लोग आ पाटी उनका संगे आवे लागल रहे. एही पर चनरसेखर जी एगो पाती जयपरकास जी के लिखले रहले. ओह पाती में ऊ पहिलहीं चेता दिहले रहले कि कई गो पाटी आ किसिम-किसिम के लोग के संगे अइला से ढेर अगरइला के जरूरत नइखे. रउरा जदि ई बात सोचत बानी कि ई लोग बेवस्था बदले खातिर आंदोलन में आवता त, राउर सोच गलत हो सकेला. सांच बात ई बा कि एइमें बेसी लोग कुर्सी आ गद्दी के लालच में संगे लटकल-सटल बा. बाद में ई लोग अपना-अपना जात के नेता बन जाई.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि चनरसेखर जी के कहलका बतिया बाद में सांच हो गइल. ओही आंदोलन में सामिल रहले लालू, नीतीस, मोलायम सिंह जादो जइसन नेता. बाद में ई लोग अपना जात के नेता बनिये गइल. लालू-मोलायम अहीर के नेता बन गइले त नीतीस कुमार कोइरी-कुरमी के नेता कहाये लगले. जात तूरे के बतकही जयपरकास जी के आंदोलन में सामिल रहे, बाकिर बाद में एतना जतिगो होखे लागल कि राजनीत में जात आ जमात के पूछ बढ़ गइल. चरनो सिंह जनता पाटी में रहले. इनरा के हटा के जनता पाटी के पहिलकी सरकार मोरारजी के बनल त चरन सिंह ओइमें मंतरियो बनल रहले. बेवस्था बदले के सगरी कोसिस पर पानी फेरा गइल. बाद में त परधानमंतरी बने खातिर मारामारी होखे लागल.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि 8 जुलाई चनरसेखर जी के पुनतिथी ह. 2007 में ऊ दुनिया छोड़ गइले. उनकर जनम 17 अपरइल 1927 के भइल रहे. मने 80 बरिस ले ऊ जीयले. बलिया में जयपरकास नारायन के गांव के जरी जनम भइल रहे. बचपने से ऊ बड़ा मेहनती आ जुझारू रहले. बाद में तीन-चार महीना खातिर ऊ परधानमंतरी बनल रहले. जवना घरी उनका परधानमंतरी के कुरसी मिलल, ओह टाइम में चारू ओर से देस में तरह-तरह के तबाही मचल रहे. कासमीर में आतंकवादियन के उत्पात रहबे कइल, तमिनाडू में लिट्टे तबाही मचवले रहे. देस के खजाना खाली हो गइल रहे. पंजाब में खलिस्तान के आंदोलन चलत रहे आ आसाम में उग्रवादी हुरदुंग मचवले रहले सन. मोटामोटी आधा देस में करफू लागल रहे. अइसने तबाही के टाइम में ऊ परधानमंतरी के कुरसी पर बइठल रहले. बिना तनिको घबरइले ऊ सगरी तबाही पर कंटरउल करे में लाग गइले. ओह बेरा के हाल ई रहे कि अपना देस में बाहर से जेतना करजा आवे, ओइमें बेसी त ओकर बियाज में चल जाव. करजा मिलल अब मोसकिल होत रहे. चनरसेखर जी गांव के आदमी रहले. ऊ जानत रहले कि बियाह-सादी में औरतन खातिर जवन सोना-चानी के गहना बनेला, ऊ खाली ओकनी के सिंगार पटार खातिर ना होखे. कवनो दुरदिन अइला पर ऊ कामे भी आवेला. इहे सोच के खजाना में जवन सोना परल रहे, ऊ गिरवी राख के दोसरा देस से करजा के उपाय कइले.

सोना गिरवी राख दिहला पर उनकर सिकाइत करे वाला लोग खूब हुरदुंग मचावल, बाकिर ऊ गांव में जवन देखले रहले, उहे बतिया सभका से कहस. सोना राख के का फायदा, जब लोग तबाही झेले. हाल सुधरल त बाद में बान्हे राखल सोना लवटियो आइल. कासमीर के बारे में त लोग आजुओ कहेला कि चनरसेखर जी थोरहू दिन अउरी रह जइते त ई बेमारी हरदम खातिर ओरा जाइत. उनकर सरकार कांगरेस के तब के नेता राजीव गान्ही के मदद से बनल रहे. राजीव गान्हीं उनका पर तोहमत लगा दिहले कि चनरसेखर जी उनकर जासूसी करावे खातिर सिपाही लगवले बाड़े. साफ मन के चनरसेखर के ई बड़ा खराब लागल आ ऊ इस्तीफा देबे के मन बना लिहले. बाद में जब राजीव गान्हीं के ई बात पता चलल त ऊ आपन खास आदमी सरद पवार के बंबई से तुरंते बोलववले आ चनरसेखर जी के समझावे खातिर संसद में भेजले. चनरसेखर जी साफ कह दिहले कि ऊ जाके अपना नेता के बता देस कि चनरसेखर एक दिन में तीन बेर आपन मन ना बदलस. ओकरा बाद इस्तीफा दे दिहले. सांच बांत ई रहे कि चनरसेखर जी के तारीफ देस-बिदेस के अखबारन में होखे लागल रहे. विलायत के कवनो अखबार- फाइनेंसियल टाइम्स बा. ऊ चनरसेखर जी के तारीफ में लिखले रहे- असुविधा वाला कामयाब परधानमंत्री. राजीव गान्ही के इहे खरछाह लागत रहे.

परजा सोसलिस्ट पाटी (पीएसपी) से चनरसेखर जी के राजनीत शुरू भइल रहे. ओकरे टिकट पर ऊ संसद में पहिलका बेर पहुंचल रहले. ओकरा बाद कांगरेस में गइले. ओह घरी लालबहादुर सास्तीरी जी परधानमंतरी रहले. उनहीं के मंतरी रहली इनरा गान्ही. इनरा गान्हीं से चनरसेखर जी के पहिलका मुलकात भइल त चनरसेखर जी से ऊ परभावित भइली. कांगरेस में ओह घरी इनरा के दबदबा एह से रहे कि ऊ जवाहरलाल नेहरू के बेटी रहली. दुनो जने के बीच जवन बातचीत भइल, ओकरा के कवनो कागज से पढ़ के पांड़े बाबा सुनावत रहुवीं.

इंदिरा गांधीः चंद्रशेखर,क्या आप कांग्रेस पार्टी को समाजवादी मानते हैं?
चंद्रशेखरः नहीं,मैं नहीं मानता कि कांग्रेस समाजवादी संस्था है,पर लोग ऐसा कहते हैं.
इंदिरा गांधीः फिर आप कांग्रेस में क्यों आए?
चंद्रशेखरः क्या आप सही उत्तर जानना चाहती हैं?
इंदिरा गांधीः हां, मैं यही चाहती हूं.

चंद्रशेखरः मैंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में 13 साल तक पूरी क्षमता और ईमानदारी से काम किया. दल को मैंने पूरी निष्ठा से समाजवाद के रास्ते पर ले जाने की कोशिश की, लेकिन काफी समय तक काम करने के बाद मुझे लगा कि वह संगठन ठिठक कर रह गया है.पार्टी कुंठित हो गई है, बढ़ती नहीं है.अब यहां कुछ होने वाला नहीं है.फिर मैंने सोचा कि कांग्रेस एक बड़ी पार्टी है.इसी में चलकर देखें,कुछ करें.

इंदिरा गांधीः लेकिन यहां आने के बाद आप क्या करना चाहते हैं?
चंद्रशेखरः मैं कांग्रेस को सोशलिस्ट बनाने की कोशिश करूंगा.
इंदिरा गांधीः न बनी तो?

चंद्रशेखरः इसे तोड़ने का प्रयास करूंगा.क्योंकि यह जब तक टूटेगी नहीं,तब तक देश में कोई नई राजनीति नहीं आएगी.पहले तो मैं प्रयास यही करूंगा कि यह समाजवादी बने,पर यदि नहीं बनी, तो इसे तोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.
इंदिरा गांधीः मैं आपसे सवाल पूछ रही हूं और आप मुझे इस तरह के उत्तर दे रहे हैं?
चंद्रशेखरः सवाल आप पूछ रही हैं, तो उत्तर तो आपको ही दूंगा.
इंदिरा गांधीः पार्टी तोड़ने से आपका क्या मतलब है,इससे क्या होगा?

चंद्रशेखरः देखिए,कांग्रेस बरगद का पेड़ हो गयी है.इसकी फैली छांव में कोई दूसरा पौधा विकसित नहीं होगा.इस बरगद के नीचे कोई पौधा पनप नहीं सकता,इसलिए जब तक यह पार्टी नहीं टूटेगी, कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं होगा.
एतना साफ-साफ बतकही करे के आज के कवनो नेता में हिम्मत ना हो सकेला मलिकार. सांच कहल जाव त ई बागी बलिया के माटी के कमाल ह. चनरसेखर जी वोह बागी बलिया के माटी के सपूत रहले, जवना धरती के तेयाग,साहस,समरपन आ गेयान के कहानी सगरी देस जानेला. 1857 के विदरोह होखे,1942 की किरांती होखे भा आजादी के लड़ाई,बलिया हरदम आपन तेवर देखवले बा. लिखे-पढ़े वाला के बात कइल जाव त पंडित हजारी प्रसाद दिवेदी,परशुराम चतुरवेदी,भागवत शरण उपाध्याय,केदारनाथ सिंह जइसन लोग के धरती ह बलिया. मंगल पांडेय आ जयपरकास नारायन के त के नइखे जानत.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि इनरा गान्ही जब परधानमंतरी बनली त चनरसेखर के कहला के हिसाब से कई गो अइसन काम कइली, जवन चनरसेखर के सोच रहे. बरगद कांगरेस सन उनहत्तर में टूट गइल. ओकरा बाद 71 में बैंक सरकारी हो गइली सन,कोयला कंपनी सरकारी भइली सन, गरीबी हटाओ के नारा लागल.सन 71 के चुनाव में इनरा गान्ही के बाद चुनाव के परचार खातिर सबसे बेसी मांग चनरसेखरे जी के रहे. चुनाव में इनरा गान्ही के बड़की जीत भइल. चनरसेखर जी के सरकार में सामिल होखे के कहली त ऊ मना क दिहले. वोट बीतल त ऊ इनरा जी के इयाद दियवले कि पाटी गरीबी हटाओ के नारा दिहले रहे. अब ओकरा पर काम करे के चाहीं. इनरा जी धेयान ना दिहली आ एही जा से खटपट के सुरुआत भइल.

जब सन 77 में जयप्रकाशजी के आंदोलन शुरू भइल त चनरसेखर जी एकरा से खुस भइले. नतीजा ई भइल कि जब इमरजेंसी लागल त पहिलके रात जेकरा-जेकरा के जेल भेजल गइल, ओइमें चनरसेखरो जी रहले. 1990 में ऊ देस के परधानमंतरी बनले.उनकर सरकार 117 दिन चलल. चुनाव होखे वाला रहे त कार्यवाहक परधानमंतरी बन गइले. एह हिसाब से उनकर कार्यकाल 223 दिन भी मानल जाला. बाकिर एतना कम दिन में ऊ जेतना काम कइले, ओकरा के लोग अबहियो इयाद करेला. संसद में केतनो हल्ला-हंगामा होखे, बाकिर जब चनरसेखर बोले खातिर खाड़ा हो जास त सभे चुपा जाव. उनका रहन-सहन, खान-पान, पहिराव-ओढ़ाव में गंवई छाप साफ झलके. जब ऊ परजा सोसलिस्ट पाटी में काम सुरू कइले, ओह घरी पइसा के एतना तबाही रहे कि जहवां जवन मिल जाव, खा लेस. कई बेर बेखइले रहे के पर जाव.

एगो अउरी बात पांड़े बाबा बतावत रहुवीं. जयपरकास जी त देस के बड़का नेता रहले, बाकिर अपना गांव खातिर कुछऊ ना कइले. गांव के लोग उनका से कहे कि गंउआ खातिर कुछ करीं. रउरा एक बेर फोन पर केहू के कह देब त सब हो जाई. जयपरकास जी जवाब देस कि एह देस में छह लाख गांव बाड़े सन. हम काहें खाली अपना गांव पर धेयान दीं. बाकिर बाद में जब उनकर अखिरिया टाइम आइल त ऊ चनरसेखर जी से कहले- ए चनरसेखर, तनी हमरा गउंवा के धेयान रखिह. ओकरा बाद उनकर सांस टूट गइल. चनरसेखर जी बाद में जयपरकास जी के गांव के सहर नियर बना दिहले. अइसन रहले चनरसेखर. उनकर मन जेकरा से मिल जाव, ओकरा खातिर कुछऊ करे में ना सकुचास. लालू जादो चारा घोटाला में पटना के बउर जेल में रहले. पटना जाके चनरसेखर जी उनका से भेंट कइले. माफिया कहाये वाला सुरुजदेव सिंह के घरे जाये में तनिको ना सकुचास. जबले जीयत रहले अपना घर के केहू के राजनीत में ना ढुकवले. उनकर बेटा चनरसेखर जी के मुअला के बाद एमपी बनले. केंसर के बेमारी से नकर मउवत भइल. पांड़े बाबा अइसनका बड़ लोग का बारे में कबो-कबो बतावत रही ले. हमरो गेयान बढ़ेला. उहां के मोट-मोट किताब भर दिन पढ़बो त करीले. ओही में से लोग के बताई ले.
राउर, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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