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Bhojpuri Special: किसान आंदोलन के बीच चंद्रशेखर के याद, लोग मिले से हिचकत रहे...

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किसान आंदोलन (Farmer Protest) के विरोध कइनीं त रऊंआ के भाजपा आ मोदी भक्त साबित कइके सोशल मीडिया (Social Media) पर जमि के गारी सुने के तेयार रहे के परी. आ समर्थन कइ दिहनीं त समझि लीं कि राउर का हालि होई. राजनीतियो एही तरी सोचल शुरू कइ देले बिया.

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सोशल मीडिया के जमाना में किसान आंदोलन पर जइसे देस बंटि गइल बा, ओह में आपाना मन के बात कहल कठिन हो गइल बा. अगर रऊंआ एह आंदोलन के विरोध कइनीं त रऊंआ के भाजपा आ मोदी भक्त साबित कइके सोशल मीडिया पर जमि के गारी सुने के तेयार रहे के परी. आ समर्थन कइ दिहनीं त समझि लीं कि राउर का हालि होई. राजनीतियो एही तरी सोचल शुरू कइ देले बिया. अइसन मोका पर साफ आ स्पष्ट बात करे वाला चंद्रशेखर के यादि खूबे आवेला. अगर ऊ आजु रहिते त एह मोका पर साफ बोलिते, आपाना मन के बोलिते, चाहे केहू के नीमन लागो चाहे केहू के बाउर.

यादि बा, 1984 के लोकसभा एलेक्शन, इंदिरा गांधी के हत्या के बाद उपजल सहानुभूति लहर के बीच ऊ चुनाव होत रहे. सिख लोगन के सबसे अमनिया तीरथ स्वर्ण मंदिर में भिंडरावाला के समर्थक आ आतंकवादियन के कब्जा हटावे खातिर जून 1984 में इंदिरा सरकार उहां सेना भेजले रहलि. ओह के पूरा देस समर्थन करत रहे, बाकिर चंद्रशेखर ओकरा विरोध में रहले. ऊ एगो बयान देले रहले कि जवना सिख धर्म खातिर गुरू गोविंद सिंह के दूगो बेटन के जिंदा देवालि में चुनवा दिहल गइल रहे, जवना खातिर गुरू अर्जुन देव के आपन सीस चढ़ावे के पड़ल, ओह सिख पंथ के स्वर्ण मंदिर में सेना ना भेजे के चाहीं.

दिसंबर में चुनाव में पर्चा दाखिला खातिर जब दिसंबर 1984 में चंद्रशेखर बलिया पहुंचले त उनुकर ई बयान जइसे उनुकर पीछा करत रहे. इंदिरा के मडर भइला से ऊ बयान चंद्रशेखर के अउरी विरोध के कारण बनि गइल रहे. बाकि पर्चा दाखिला के बाद बलिया के रामलीला मैदान में जब दुपहरिया बाद आपाना साभा में चंद्रशेखर पहुंचले आ एह बयान पर सफाई देबे लगले त उनुका खिलाफ पूरा मैदान से आवाज उठे लागल रहे. एकरा बावजूदो चंद्रशेखर आपाना बयान पर टिकले रहले. एकर उनुका कीमतो चुकावे के परल रहे, 54940 वोट से ऊ कांग्रेस के जगन्नाथ चौधुरी के सामने हारि गइल रहले.

चारा घोटाला में जब लालू जादव जेल में गइले, त पटना के बेऊर जेल में उनुका से भेंट करे से बड़का से बड़का लोग हिचकत रहे, बाकिर चंद्रशेखर के शख्सियत अलगे रहे. ऊ लालू से मिले चलि गइले. एकर लोग आलोचना कइल त उनुका के स्पष्ट जवाबे दे दिहले. ऊ आपन आत्मकथो लिखले बाड़े, ‘जीवन जैसा जिया’. राजकमल प्रकाशन, दिल्ली से हिंदी में प्रकाशित एह आत्मकथा में भी उनुकर बेबाकीपन हर जगह लउकता.

संयुक्त बिहार आ अब झारखंड के कोयलांचल के राजधानी के रूप में मसहूर धनबाद में एगो जमाना में बलिया के इबरहिमाबाद के रहनिहार सूरजदेव सिंह के तूती बोलत रहे. बलिया से लेकर धनबाद तक सूरजदेव सिंह के लोग माफिया आ बाहुबली मानत रहे. ऊ रहबो कइले. बाकिर चंद्रशेखर के उनुका कपार पर हरमेसा आसीर्वाद रहे. उनुका से आपन संबंध के चंद्रशेखर कबो नकरले ना. आपाना आत्मकथा में सूरजदेव के कई बार जिकिर कइले बाड़े. चाहे सारनाथ के जनता पार्टी के अधिवेशन के व्यवस्था होखे भा बिहार के एगो प्रभावशाली नेता के एक लाख रूपया के देनदारी होखे, हर बेरि चंद्रशेखर के सूरजदेव यादि आइल बाड़े आ उनुकर जिकिर कइले बाड़े.

चंद्रशेखर के पचहत्तवरीं सालगिरह पर दिल्ली के विज्ञान भवन में 2002 में बड़का कार्यक्रम भइल रहे. मंच पर ओह घरी के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आ पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव भी रहले. चंद्रशेखर जी अटल जी के गुरू कहत रहले. ओह घरी विनिवेश आ श्रम सुधार खूबे चरचा में रहे. चंद्रशेखर जी एकर विरोधी रहले. उदारीकरण के भी विरोधी रहले. अपने कार्यक्रम में भरल मंच से वाजपेयी जी के सरकार के नीति के जमि के आलोचना कइले. मजा के बात ई कि वाजपेयी जी हंसि-हंसि के उनुकर बात सुनले. एक-दूर बेरि त ऊ हंसत-हंसत आपाना कुर्सी पर निढाल हो गइले. आपाना भाषण में नरसिंहो राव कहले कि ई तेवरे ह कि हमनी के कांग्रेस में चंद्रशेखर जी के नेता मानत रहनि हा जा.

हमनी के जानेनी जा कि 25 जुलाई 1991 के लोकसभा में तब के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के भाषण के संगे देस में उदारीकरण के शुरूआत भइल. ई सहियो बा, बाकिर चंद्रशेखर के रऊंआ आत्मकथा पढ़बि त पता चलि कि उदारीकरण के त परवान चढ़ावे के तेयारी एक साल पहिले तब के उद्योग मंत्री अजित सिंह कइले रहले. तब ऊ विश्वनाथ प्रताप सिंह के सरकार में मंत्री रहले. अजिते सिंह के मंत्रालय उदारीकरण खातिर पहिला विस्तृत नोट तेयार कइले रहे. जब नरसिंह राव मनमोहन सिंह के देश के खजाना आ आर्थिक सेहत के देखभाल के जिम्मा दिहले त मनमोहन सिंह ऊहे फाइल के नोट के आधार बनवले. राकेश टिकैत के जइसे अजित सिंह आ उनुकर पार्टी राष्ट्रीय लोकदल समर्थन देता, ओह हालत में आजु चंद्रशेखर रहिते त हो सकत रहल हा कि उ उदारीकरण खातिर अजित सिंह के ओह फाइल के यादि दियइते, इहो बतइते कि विश्व व्यापार संगठन में शामिल भइला के बाद खेती-किसानी के एकदमे भारतीय मोड में ना राखल जा सकेला.
भोजपुरी माटी के खासियत ह साफगोई. चंद्रशेखर ओकर प्रतीक रहले. भोजपुरी माटी में एक से एक साफ मनई पैदा कइले बिया. जरूरत बा कि हमनीं के ओह लोगन के यादि करीं जा आ भोजपुरी माटी के शान बढ़ावे में ओह लोगनि के जवन योगदान बा, ओकरा के नवका पीढ़ी के बताईं जा. (लेखक उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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