Chhath puja 2020 – भोजपुरी विशेष – अब देशी से ग्लोबल पर्व बन गइल बा छठ

लंदन के बर्मिंघम ( Birmingham) में छठ पूजा के दृश्य. फोटो सौ. मनोज
लंदन के बर्मिंघम ( Birmingham) में छठ पूजा के दृश्य. फोटो सौ. मनोज

बिहार से बर्मिंघम तक टाटा नगर से तंज़ानिया तक अउरी आरा, औरंगाबाद, अररिया से अमेरिका तक छठ पूजा पहुंच गइल बा. सूप भारत से चलि के विदेश के बड़का-बड़का शहर तक के यात्रा क लेले बा. हां गंगा जी टब आ स्वीमिंग पुल में आ जाली, वैसे भी मन चंगा त कठौती में गंगा. छठ के भोजपुरी गीत अब अमेरिका समेत दुनिया के बहुत से गायक गावत बा लोग.

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  • Last Updated: November 19, 2020, 12:31 PM IST
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देशी से ग्लोबल पर्व बन गइल बा छठ बाकिर तबो लोक एह में कूट-कूट के भरल बा. एही से ई लोक के महापर्व कहाला. आरा के छठ देखीं चाहे अमेरिका के, बस घाटे के अंतर लउकी बाकी उहे दूघ, फल, घी, ऊंख, गागल नींबू, काँच हरदी, अमरख, आँवला, सुथनी, सिंघाड़ा, ठेकुआ, नरियर, केरा, सूप, कलसूप, डलिया, दउरी-दउरा, दिया-दियरी, सेनुर-पियरी आ उहे ‘ उगी हे सुरुजदेव भइल अरघ के बेर ’ आ ' काँच हीं बांस के बहँगिया बहँगी लचकत जाय' इहे सब गीत गूँजी.

कहे के मतलब कि छठ के माध्यम से अपना संस्कृति आ विरासत के शानदार विस्तार पूरा दुनिया में हो रहल बा. बिहार के गाँव-गिरान से निकल के अब छठी माई खाली हिंदुस्तान के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता अउर चेन्नई जइसन बड़-बड़ शहरे में ना बल्कि अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका अउर आस्ट्रेलिया ले पहुंच गइल बाड़ी. माने हमनी के आपन पैतृक जमीन भलहीं छोड़ देले बानी जा बाकी हमनी के धड़कन में हमनी के परंपरा आ संस्कृति जीवित बा. सुशोभित बा.

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मन चंगा त स्वीमिंग पुल आ टब में गंगा
विदेश में त ई हाल बा कि नदी, पोखरा, बीच, स्वीमिंग पुल में अनुमति ना मिलला प लोग अब अपना घरे में टब में खड़ा होके छठ के व्रत करsता. इहे आस्था अउर विश्वास बा कि सूरज उपासना के महापर्व छठ पूरा दुनिया में लोकप्रिय हो रहल बा.

हम घाट-घाट के छठ देखले बानी काहे कि हम घाट-घाट के पानी पीयले बानी. वर्ष 2003 में पहिला बेर पूर्वी अफ्रीका गइनी. युगांडा के राजधानी कंपाला में रहत रहीं. इंजिनियर रहनी उहां लेकिन कला, साहित्य आ संस्कृति के भूख के वजह से 2005 में भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ़ युगांडा (बीएयू) के स्थापना कइनी. दीवाली त धूमधाम से मनावते रहे लोग उहाँ. छठ व्रत अपना-अपना घर में करत रहे या इक्का-दुक्का लोग साथ में करत रहे. धीरे-धीरे कई स्थान पर सामूहिकता में करे लागल. उहाँ आजो भारतीयन के घर में अफ्रिकी लड़की लोग बहुतायत में काम करेला. धीरे-धीरे छठ घाट पर उहो लोग शामिल होखे लागल. छठ गीतन पर झूमे लागल.

Dar es Salaam, chhat puja 2020
तंज़ानिया के दारे सलाम ( Dar es Salaam) में छठ पूजा आयोजन. फोटो सौ. मनोज भावुक


अब त युगांडा के कई गो दोस्त तंजानिया, नाइजीरिया आ केन्या में भी चल गइल बा लोग. दरभंगा के मनोज चौधरी जे तब युगांडा में रहत रहलें, फेर तंजानिया गइलें आ आजकल वेस्ट अफ्रीका के बेवरेज कंपनी में कंसल्टैंट बाड़न, बतावेलें कि आजकल तंजानिया के Mwezi beach पर आ नाइजीरिया के लोगोस के बनाना आइसलैंड पर लोग छठ मनावत बा.

लंदन तक आस्था के ललक
2006 में हम युनाइटेड किंगडम चल गइनी आ उहां पर भी भोजपुरी समाज, लन्दन के स्थापना कइनी. तब हम उहाँ सुदूर गांव लिटिल हादम में मिनरल वाटर के एगो कंपनी में प्लांट मैनेजर रहनी. गाँव में त छठ ना होत रहे बाकिर यूके के दूनू बड़ शहर लन्दन आ बर्मिंघम में छठ होत रहे आ आजकल त अउर सामूहिक रूप में होखे लागल बा. बिहारी कनेक्ट लन्दन के चेयरपर्सन उदेश्वर सिंह बतावेनी कि लन्दन में उहाँ के पूरा टीम छठव्रतियन के सहयोग करेला.

गीतांजलि मल्टीलिंगुअल लिट्रेरी सर्किल, बर्मिंघम के जनरल सेक्रेटरी, कवि आ पेशा से चिकित्सक डॉ० कृष्ण कन्हैया अपना पत्नी डॉ० अंजना अउर दू पुत्र (अक्षत आ उन्नत) के साथ 25 बरिस से बर्मिंघम यूके में रहत बानी. उहाँ के बतवनी कि इहाँ भारतीय लोग सभ परब ओही तत्परता आ उल्लास से मनावेला जइसे कि भारत में. डॉ० कन्हैया के पत्नी डॉ० अंजना सिन्हा भी चिकित्सक बानी, हिंदी-भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार डॉ० शंभुशरण सिन्हा जी के सुपुत्री हईं आ पिछला 14 साल से एह कठिन व्रत के लगातार करत आ रहल बानी. डॉ० अंजना बतावेनी कि “नहाय-खाय, खरना आ छठ पूजन खातिर सामग्री बनावे के काम हमनी के अपना गैरेज़ के अंदर करेनी जा आ शाम-सुबह के अरघ अपना घर के पीछे पैडलिंग पूल में साफ पानी भरके गंगाजल छिड़क के करेनी जा. यूके में तालाब, झील चाहे नदी में अइसन करे के अनुमति नइखे. पूजा के सब चीज हमनी के इहाँ सोहोरोड हैन्सवर्थ बर्मिंघम सिटी में मिल जाला. शुरू-शुरू में सूप, डलिया के व्यवस्था भारत से करत रहनी जा पर अब इ सब इहवें उपलब्ध हो जाला. ठेकुआ बनावे के साँचा भारत से ले आइल रहनी जा. दूघ, फल, घी, इहाँ तक कि ऊंख आ गागल नींबू, कच्चा हरदी, अमरख, आँवला भी इहाँ उपलब्ध बा. ई पर्व हमनी के मिलजुल के मनावेनी जा आ दोस्त, रिश्तेदार आ पड़ोसी सभे शामिल होला. कुछ लोग ग़ैर भारतीय मूल के भी शामिल होला. चारो दिन लगभग 30-40 लोग के भीड़ होला. आनंद आवेला. “

अमेरिका के बिजनेस वुमेन आ सोशल एक्टिविस्ट संध्या सिंह पटना बोरिंग कैनाल रोड के आनन्दपुरी के रहे वाली हईं. हालाँकि मूलरूप से त उहाँ के आरा के रहनिहार हईं. गत 40 साल से अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में बानी. पीछला साल ह्यूस्टन में 'हाउडी, मोदी' सम्मेलन खातिर 'टेक्सास इंडिया फोरम' के आयोजन समिति के ओर से भारतवंशियन के आमंत्रित करे आ कार्यक्रम के सफल बनावे में योगदान देवे खातिर उहाँ के सराहल गइल. छठ पूजा में भी अइसहीं व्रतियन के सहयोग करेनी संध्या सिंह. उहाँ के बतावेनी कि इहाँ छठ समुन्द्र आ खाड़ी के किनारे, नदियन के पास चाहे कहीं-कहीं स्विमिंग पूल में भी जाके होला. ह्यूस्टन काक्लीयर लेक (गैल्विस्टनबे) पॉपुलर स्पॉट बा छठ खातिर. पहिले त लोग इण्डिया से हीं सूप-दउरी लेके आवत रहे लेकिन अब अपना बाजार नामक दूकान में मैक्सिको से इंडियन सामन आ जाता. अब ऊँख, दउरी, सुथनी, सिंघाड़ा आ सूप खातिर भटके के नइखे पड़त.

भारत से मंगावल जाला सूप
अमेरिका के भोजपुरी गायिका स्वस्ति पाण्डेय, जे अपना पति तरुण कैलाश के साथ उहां छठ भी करेनी, स्वयं गीत संगीत के कमान सम्भालेनी आ सभ व्रती लोग के साथे घाट पर खाँटी छठ गीत गाके पूरा माहौल छठमय बना देनी, बतावेनी कि“ अमेरिका के सिलिकॉन वैली (कैलिफ़ॉर्न्या) में हमनी के क्वेरी झील के सुरम्य घाट पर, छठ पूजा के ओही श्रद्धा आ पवित्रता से मनावेनी जा, जइसे हज़ारो मील दूर मातृभूमि भारत में होला. उहाँ के कहेनी कि जब भी केहू जान-पहचान वाला भारत जाला, त सूप मँगवा लेनी जा. वज़न में हल्का होखे के कारण भारत से आवे वाला एक-एक व्यक्ति, छठ के नाम पर श्रद्धापूर्वक कई गो सूप ले आवेला आ व्रतियन में बाँट देला. अब त इहाँ के भारतीय स्टोर्स भी एह डिमांड के ध्यान में रखके, छठ के समय विशेष ऑर्डर पर भारत से सूप मँगवा देत बाड़न. जहाँ तक दउरा के बात बा, त उ ज़रूरत इहाँ के बेंत के बनल बासकेट्स से पूरा हो जाता. भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मॉरिशस के चेयरपर्सन डॉ० सरिता बुद्धू बतावेनी कि छठ त गिरमिटिया देशन मॉरिशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम में भी धूम-धाम से मनावल जाला.

महानगर में त धूम रहेबे करेला 
इ त विदेश के बात भइल. भारत में भी दिल्ली आ मुंबई दू गो शहर में हम खुदे बंटल बानी. छठ के समय दूनू जगह एगो बिहार दिखाई देला आ सरकार खुद पहल करेला घाट खातिर आ छठ के तरह-तरह के इंतजामात खातिर. एह में छठ माई के कृपा कम, बिहार के प्रभाव ज्यादा दिखाई देला. वोट बैंक के असर ज्यादा नज़र आवेला. बात आस्था आ श्रद्धा के भी बा. गैर बिहारी भी एह व्रत के अपनावे लागल बाड़न संतान प्राप्ति खातिर, पति के सलामती खातिर आ तरक्की खातिर.

अमेरिकी गायिका के भोजपुरी गीत
अंत में हम अमरीका में रहे वाली अमेरिकी गायिका क्रिस्टीन के जिक्र जरूर कइल चाहब जे बिल्कुल भोजपुरिया अंदाज में छठ गीत गाके चकित करेली. सचमुच छठ के लोकप्रियता अइसन बा कि विदेशो में, विदेशी लोग भी अब एकरा में दिलचस्पी लेवे लागल बा.
( लेखक मनोज भावुक सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि, फिल्म समीक्षक आ भोजपुरी भाषा के ग्लोबल प्रोमोटर हईं.)
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