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Bhojpuri Special: भोजपुरी सिनेमा के कॉमेडियन हँसावेले कम, फुहड़ता परोसेलें जादा...

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कॉमेडी सीन आ लाफ्टर रिलीफ कवनो भी फिलिम के जान होला. हिंदी, साउथ चाहे भोजपुरी इंडस्ट्री होखे, कॉमेडी के बहुते स्कोप होला. हालांकि कई बार निर्देशक-लेखक मर्यादा भूल जाले अउर उ फूहड़ता के हद तक पहुँच जालें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 3:44 PM IST
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कॉमेडी सीन आ लाफ्टर रिलीफ कवनो भी फिलिम के जान होला. हिंदी, साउथ चाहे भोजपुरी इंडस्ट्री होखे, कॉमेडी के बहुते स्कोप होला. हालांकि कई बार निर्देशक-लेखक मर्यादा भूल जाले अउर उ फूहड़ता के हद तक पहुँच जालें. स्वस्थ कॉमेडी एगो चैलेन्ज ह. केहू के हँसावल मजाक ना ह. भोजपुरी के पुरनका फिलिम में हरी शुक्ला हँसावत रहलें, ख़ास क के अपना तकिया कलाम आ बोले के स्टाइल से. गंगा किनारे मोरा गांव में उनकर तकिया कलाम धकाधक बड़ा फेमस भइल रहे. बाद के समय में नाड़ा लटका के अलूल जलूल भाव भंगिमा वाला कॉमेडियन भी नज़र अइलें. अश्लील आ द्विअर्थी संवाद आ दृश्य से भी हास्य पैदा करे के कोशिश भइल. हम एकरा के कॉमेडी में बेहूदगी कहेनी. अइसन कॉमेडी में हँसी ना बरेला, मुँह से गारी निकलेला. अभी भी भोजपुरी सिनेमा में कॉमेडी कहानी के हिस्सा कम आ फिलर ज्यादा बा.

दरअसल ध्यान से देखल जाव त सिनेमा तीन चीज, स्टार पावर, कॉमेडी अउर गाना से चलेला. तीनों के काम कहानी में दर्शक के इंटरेस्ट पैदा कइल ह. हम ई त ना कहेम कि भोजपुरी सिनेमा में अइसन होते बा लेकिन इहो ना कहेब कि भोजपुरी में कॉमेडी हइलहीं नइखे. बा, अच्छा कॉमेडी भी बा आ अच्छा कॉमेडियन भी बाड़न. कुछ लोग त हिंदी आ दोसरा क्षेत्रीय भाषा के बड़ा प्रोजेक्ट में काम करके भोजपुरी में आइल बा. त, आईं भोजपुरी सिनेमा के कुछ प्रमुख कॉमेडियन के सफर अउर उनका बेहतरीन कॉमेडी के बात कइल जाय.

हरी शुक्ला, पुरनका दौर के सबसे अधिक लोकप्रिय कॉमेडियन-
पुरनका दौर के भोजपुरी सिनेमा के सबसे अधिक लोकप्रिय हास्य अभिनेता के नाम ह हरी शुक्ला. पचास से ज्यादा फिल्म में हास्य किरदार निभवले बाड़ें. कॉमेडी के साथ साथ ऊ अपना तकिया कलाम खातिर फेमस रहलें. उनकर पहिला भोजपुरी फिल्म रहे बिदेसिया. बिदेसिया में ऊ एगो तकिया कलाम के प्रयोग कइले रहलें “तोरे का नाउ से”. तब यूपी बिहार के सिनेमा प्रेमी उनकर नामे रख दिहल तोरे का नाउ से. आगे के सफ़र में उनकर नाम बदलत रहल जइसे की धकाधक, का हो तौल तौल के, काहें कि ओह समय के सिल्वर जुबली फिल्म गंगा किनारे मोरा गाँव में उनकर तकिया कलाम धकाधक अउर फिल्म दगाबाज बलमा में उनकर तकिया कलाम (तौल तौल के) लोग के जुबान पर चढ़ गइल रहे.
एह सब तकिया कलाम के अइसन असर भइल कि आगे के अधिकांश फिल्म जइसे कि दंगल, ठकुराईन आदि में हरी शुक्ला के तकिया कलाम एगो जरूरी शर्त बन गइल रहे. ई सब तकिया कलाम संवाद लेखक ना लिखत रहलें, ऑन द स्पॉट हरी शुक्ल खुदे जोड़त रहलें. ओह समय के कुछ कॉमेडियन लोग जइसे कि सीएस दुबे आदि उनकर नक़ल कइल लेकिन हरी शुक्ला वाला प्रभाव ना छोड़ सकल. हरी शुक्ल के समय में आ ई कहीं कि पुरनका भोजपुरी फिल्म में कॉमेडी कहानी के हिस्सा रहे अउर आज कल के तरह नाड़ा लटकावे आ अश्लील हरकत कर के हास्य पैदा करे वाला कोशिश ना होखे. अउर अब बात कइल जाय भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक युग के कॉमेडियन के.



आधुनिक सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन मनोज टाइगर –
निरहुआ के फिल्मन के जान बाड़न बताशा चाचा. दिनेशलाल यादव निरहुआ 2006 में फिलिम “चलत मुसाफिर मोह लियो रे” से भोजपुरी फिल्मन में डेब्यू कइले रहलन. एही फिलिम से एगो अउर अभिनेता के डेब्यू भइल रहे जे आगे चलके भोजपुरी के सबसे सफल हास्य अभिनेता बनले, जेकरा के भोजपुरी के दर्शक बताशा चाचा के नाम से जानेला. बताशा चाचा के असली नाम मनोज सिंह टाइगर हवे. मनोज टाइगर उत्तरप्रदेश के आज़मगढ़ के रहे वाला हउवन. उनकर निरहुआ से एही फिलिम के दौरान दोस्ती भइल अउर ई दोस्ती काफी रंग ले आइल. मनोज टाइगर निरहुआ के साथे काफी सफल फिलिम देले बाड़न, हालांकि ऊ रविकिशन आ खेसारीलाल के साथे भी कईगो फिलिम कइले बाड़न, लेकिन पवन सिंह के साथे उनकर 15 गो से ऊपर फिलिम बा.

रामलीला से फिल्मन तक के सफर आसान ना रहल. मनोज टाइगर अपना अभिनय के शुरुआत गांव के रामलीला से कइले. हालांकि ऊ ऊहां हरदम सीरियस किरदार करत रहले. एक बार आरएसएस के कैम्प में ऊ कॉमेडी स्क्रिप्ट के प्रदर्शन कइले, उहां दर्शकन के ठहाकेदार हंसी उनका अंदर के कॉमेडियन से उनकर परिचय करवलस. मनोज जइसे-तइसे मुम्बई अइलें अउर उ मशहूर पृथ्वी थिएटर ज्वाइन कइ लिहले. उहां “नेताजी के प्लेटफार्म शो” नाटक में उनकर बउवा के रोल काफी मशहूर भइल.

उनकर ओह समय के साथी निर्देशक मनोज ओझा उनकर काम देख के उनका के अपना भोजपुरी डायरेक्टोरियल फिलिम “चलत मुसाफिर मोह लियो रे” में चांस दिहलन. मनोज के काम से प्रभावित निर्माता, निर्देशक उनका के एह फिलिम के रिलीज से पहिलही आगे चल के सुपरहिट रहल कई गो फिलिम जइसे कि निरहुआ रिक्शावाला, हो गइल बा प्यार ओढनिया वाली से अउर श्रीमान ड्राइवर बाबू में साइन कर लेले रहलन। फिलिम “निरहुआ रिक्शावाला” में उनकर किरदार बताशा चाचा अमर हो गइल.

अब कॉमेडियन हीरो के पिछलग्गू हो गइल बाड़न
मनोज भोजपुरी के कई गो कॉमेडियन से खासा नाराज रहेलें. उनकर मानना बा कि आज के कॉमेडियन-एक्टर में ऊ ठसक नइखे रह गइल जवन पहिले होत रहल. अब ऊ स्क्रिप्ट के डिमांड के वजह से ऑनस्क्रीन हीरो के पिछलग्गू हो गइल बाड़े. कैमरा ऑफ होते ऊ ऑफस्क्रीन भी स्टार के खुशामद में लाग जालन कि उनकरा के अगिला फिलिम में काम मिल जाये. मनोज के यकीन बा कि जल्दीये भोजपुरी के ई दौर समाप्त हो जाई अउर सेंसिबल लोग एकरा के कैप्चर कर ली, तब जाके भोजपुरी सिनेमा के अस्मिता लवटी.

मनोज के कुछ बेतुका फिलिम कइला के अफ़सोस बा
मनोज टाइगर के दस बेहतरीन किरदारन में उनकर “निरहुआ रिक्शावाला” में बताशा चाचा के किरदार जे हीरो के मौसी के बेटा रहल, ऊ सबसे ज्यादा पसंद कइल गइल। इहे किरदार उनका के बताशा चाचा के नाम से मशहूर कइलस. ऊ फ़ारूक़ सिद्दीक़ी के फिलिम “प्रेम के रोग भइल” में पांच अलग-अलग किरदार कइले रहलन. एह फिलिम के पीवीआर में स्क्रीनिंग के टाइम उदित नारायण के हंसत-हंसत कुर्सी से गिरे के हालत हो गइल, तब हंसते-हंसत उदित नारायण मनोज के दिल से शुभकामना देले रहलन. उनकर निरहुआ के फिलिम “दीवाना” में लव गुरु के रोल फुल कॉमेडी से भरल रहल, जे लोगन के शादी करावे खातिर हिंट देत बा. मनोज के आपन अभी तक के करियर में कुछ बेतुका फिलिम कइला के अफसोस भी होला, हालांकि ऊ अइसन फिल्मन के नाम ना बतावेले.

मनोज पवन सिंह के साथे “पवन पुरवईया” में कॉमेडी हीरो के रोल कइले रहले. तब लोगन के लागल रहे कि ऊ मुख्य किरदार में भी जम सकेले. फिलिम “पटना से पाकिस्तान “में उनकर नेगेटिव शेड वाला चिंताहरण चौबे के किरदार अभियो दर्शकन के ज़ेहन में ताजा रहेला, जे खूब कॉमेडी कइले रहल। “लागल रहा बताशा” उनकर हालिया रिलीज लीड रोल वाला फिलिम रहे, जे कुछ खास ना चल पावल. मनोज के बेहतरीन भूमिका वाला फिल्मन में वाह खिलाड़ी वाह, राऊडी रानी, मृत्युंजय, बताशा चाचा, हल्फा मचा के गइल, कच्चे धागे अउर दयावान आदि प्रमुख बा.

मनोज टाइगर के फिल्मी करियर 15 साल के हो गइल बा. बकौल मनोज, “ ऊ अभी ले कॉमेडी में आपन 20 प्रतिशत ही देखवले बाड़े, बाकी 80 परसेंट देखावे खातिर ऊ मौका के तलाश में बाड़न. ऊ कई गो फिल्मन के स्क्रिप्ट लिखे अउर निर्माण करे में लागल बाड़े. साथ हीं उ भोजपुरी कलाकारन के लेके वर्कशॉप भी कइल चाहत बाड़न अउर ओह लोग खातिर थिएटर प्ले के प्लानिंग भी बा.”
(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)
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