Bhojpuri Spl: बंगाल में कांग्रेस भइल कमजोर, वाममोर्चा के छोट भाई बन लड़ी चुनाव

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने वाममोर्चा के साथ गठबंधन किया है.

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने वाममोर्चा के साथ गठबंधन किया है.

कहल जाउ त स्थिति ई बा कि कांग्रेस (Indian National Congress) आपन चुनावी नाव वाममोर्चा (Left Front) के सहारा से लड़ी आ वाममोर्चा भी कांग्रेस के बांहि ध के ई चुनाव लड़ी. बाकिर वामफ्रंट एह समझौता के ताकत अपना लगे राखेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 2:04 PM IST
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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के स्थिति त पहिलहीं नियर बा. माने अभियो ऊ वाममोर्चा के साथ झुकि के खड़ा बिया. कांग्रेस अभी तक वाममोर्चा के साथे 191 सीटन पर समझौता कइले बिया. त एमें 101 सीट पर वामफ्रंट लड़ी आ कांग्रेस लड़ी खाली आ खाली 92 सीटन पर. त कांग्रेस छोटभाई भइल की ना? तबो 101 सीटन के बंटवारा अभी बाकी बा. जवना सीट पर समझौता भइल बा ओकरा में कुछ सीट ऊ हउवन सन जौना पर पिछला विधानसभा चुनाव में कांग्रेस- वाममोर्चा जितले रहे. राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य कहतारे कि कांग्रेस पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव के लाइन पर चली. त मोटे में कहल जाउ त स्थिति ई बा कि कांग्रेस आपन चुनावी नाव वाममोर्चा के सहारा से लड़ी आ वाममोर्चा भी कांग्रेस के बांहि ध के ई चुनाव लड़ी. बाकिर वामफ्रंट एह समझौता के ताकत अपना लगे राखेला. एही से 101 सीट पर लड़ी. कांग्रेस खाली 92 सीट पर. एसे बेसी सीट पर कांग्रेस लड़िए के का करी. ओइजा कांग्रेस के प्रत्याशी के जमानतो जब्त हो सकेला.

पिछला विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 44 गो सीट पर जीतल रहे आ वाममोर्चा 33 गो सीट पर विजयी भइल रहे. माने कांग्रेस के 11 गो सीट अधिका मिलल रहे. समझौता भइल त दूनो पार्टी साझा प्रेस कांफ्रेंस कइली सन. कहली सन कि हमनी का एह चुनाव में एलाइज (सहयोगी) बानी जा. लेफ्ट फ्रंट के अगुवा पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ह जवना के संक्षेप में सीपीएम कहल जाला. त जाहिर बा कि एह समझौता में बड़ भाई सीपीएम बिया. पिछला चुनाव में कांग्रेस से कम सीट पर जीतल बाकी ज्यादा सीट ओकरे के मिलल बा. एह समझौता के पिछला विधानसभा चुनाव में कौनो फायदा ना मिलल. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आखिरकार 211 गो सीट मिलिए गइल. माने बहुमत. ए बारी वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बोस कहले बाड़े कि कांग्रेस आ वाममोर्चा एकही संगे मिलि के रैली करी, सभा करी आ कृषि बिल के विरोध करी.

त राजनीक प्रेक्षक का कहता लोग? कहता कि अबकी बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आ वाममोर्चा के पहिले नियर वोट ना मिली. काहें से कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान लोगन के बीच बहुते खास प्रभाव रखे वाला फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी एगो बड़ राजनीतिक दांव खेल देले बाड़े . विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीना पहिले ऊ आपन एगो नया पार्टी बना लेले बाड़े. अब्बास सिद्दीकी अपना नया दल के नांव इंडियन सेक्युलर फ्रंट रखले बाड़े. पार्टी के लांचिंग के घरी अब्बास सिद्दीकी कहले, “हम किंगमेकर बने के चाहतानी, नया राजनीतिक संगठन इंडियन सेक्युलर फ्रंट पश्चिम बंगाल के कुल्ही 294 विधानसभा सीटन पर चुनाव लड़ि सकेले.”

पीरजादा अब्बास सिद्दीकी कई बरिस से मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी रहले ह. एने कुछ दिन से पीरजादा सिद्दीकी ममता बनर्जी से खिसिआइल बाड़े आ खुलेआम तृणमूल कांग्रेस के विरोध कर रहल बाड़े. कुछ दिन पहिले के बात ह, ऊ आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी से भेंट कइले रहले ह. मुलाकात के बाद ओवैसी साफे कहले रहले कि ऊ बंगाल में अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में चुनाव लड़िहें. माने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी अब केहू के आपन नेता ना मनिहें, अब खुदे नेता रहिहें. अपना पार्टी के माध्यम से राजनीति करिहें. त कांग्रेस आ वाममोर्चा के मुसलमान वोट अब पीरजादा आ ओवैसी के पार्टी के जाई. राजनीतिक प्रेक्षक कांग्रेस के वोट प्रतिशत घटे के पहिलहीं से अनुमान लगावता लोग. अइसना में कांग्रेस आ वाममोर्चा के कार्यकर्ता- “इंतजार करो और तब एक्शन लो” वाला मोड में आ गइल बाड़े सन. चुनाव का पहिलहीं कांग्रेस- वाममोर्चा के धक्का लागल बा.
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का लगे अधीर रंजन चौधरी आ प्रदीप भट्टाचार्य के छोड़ि के कौनो बड़ चेहरा नइखे. आ जनाधार खिसकत जाता. नया पीढ़ी में कांग्रेस के ओर केहू के रुझान नइखे. कांग्रेस आ वामोर्चा के प्रति लोगन में एगो उदासीनता आ गइल बा. वाममोर्चा के कुछ पुरान आ समर्पित कार्यकर्ता बाड़े सन. ओकनी के कुछु हो जाउ, वोट वाममोर्चा के लगे जाई. कांग्रेस के भी कुछ कार्यकर्ता समर्पित बाड़े सन बाकिर राजनीतिक प्रेक्षक कहता लोग कि एह चुनाव में ओकनी के संख्या घटल बा. एने शिवसेना भी कहतिया कि ऊहो कुछ प्रत्याशी उतारी. त जइसे महाराष्ट्र में शिवसेना कांग्रेस से गठबंधन कइले बिया ओहतरी बंगाल में संभव नइखे. काहें से कि शिवसेना के नांवे सुनत वाममोर्चा भड़कि जाई. ओने प्रमुख वामपंथी नेता सीताराम येचुरी कहतारे कि भारतीय जनता पार्टी के केहूतरे हरावे के बा. उनुका ई नइखे बुझात कि भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में एगो ताकतवर पार्टी बन चुकल बिया. आ वाममोर्चा के नेता के बाति सुने वाला लोग बहुत कम बाड़े. चुनाव में त सभे चतुराई से बोलेला, बाकिर पश्चिम बंगाल के बारे में सभे जानता कि एइजा दुइए गो पार्टी प्रमुख बाड़ी सन- आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस आ भारतीय जनता पार्टी. बाकी पार्टिन के कौनो ठीक नइखे कि कतना सीट मिली. हं, ई विधानसभा चुनाव एगो नया राजनीतिक पृष्ठभूमि तेयार करी. वोटन के ध्रुवीकरण तेजी से हो रहल बा आ कुछ दिन बादे ई स्पष्ट हो जाई कि स्थिति का बा.

एही बीच एगो कांग्रेस के एगो वरिष्ठ कार्यकर्ता हमरा से बातचीत में कहलसि कि जब भी कांग्रेस- वाममोर्चा के साझा रैली होला, लोग भारी संख्या में आवेले. हम कहनी कि त भइया ई भारी संख्या वोट में काहें ना बदले ला? त कार्यकर्ता कहलसि कि ईहे कांग्रेस के विडंबना बा. रैली में भीड़ जुटि जाला बाकिर जब वोट परेला त भीड़ आ वोट के कौनो संबंधे ना रहि जाला. रैली कुछ लोगन खातिर पिकनिक ह. फ्री के बस में जाए के बा. कुछ ना कुछ खाए- पीए के मिलबे करी. एगो इंज्वायमेंट हो जाई. त ई त कौनो वोट मिले के गारंटी ह ना. वोट के एह मस्ती से कौनो लेना- देना नइखे. कार्यकर्ता कहलसि कि एकरा पर बड़का नेता लोगन के विचार करे के चाहीं आ भीड़ के वोट में बदले के तरीका लागू करेके चाहीं. हम कहनी कि ई तरीका एतना आसान नइखे. भीड़ के वोट में ऊहे पार्टी भा नेता बदलि सकेला जेकरा में चुंबकीय दमखम लउकत होखे, धधकत उम्मीद लउकत होखे. कांग्रेस भा वाममोर्चा कइसे नौजवान वोटर के भीतर आग जलाई? आजुले पार्टी के अध्यक्ष चुने खातिर कनफ्यूजन वाली स्थिति बा. अखबार आ टीवी वाला तरह- तरह के अनुमान आ आंकलन प्रस्तुत करतारे सन बाकिर कांग्रेस के अध्यक्ष के घोषणा आज तक ले ना भइल. जहां तक वामनोर्चा के सवाल बा त ओकरा प्रति नया वोटर में कौनो आकर्षण के बिंदु नइखे लउकत. कांग्रेस के जमाना के भ्रष्टाचार लोगन के भुलाइल नइखे. ओही कांग्रेस का संगे वाममोर्चा समझौता करता, सीट के बंटवारा करता, दोस्ती करता. त नौजवान सोचता कि जब कांग्रेस आ वाममोर्चा के सिद्धांत मिलते बा त एकरा पर सोचले बेकार बा. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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