Bhojpuri: कोरोना महामारी में ई समय बा कठिन, आरोप ना सहयोग चाहीं

अब जब एगो महामारी आइल बिया त केहू के कोसे के बजाय सहयोग वाला रवैया के जरूरत बा. बहुते लोग एह संकट में मदद कर रहल बा. बड़े- बड़े उद्योगपति से लेके व्यक्तिगत स्तर तक लोग सहानुभूतिपूर्वक भारी स्तर पर हेल्प करता. अब ओह लोगन के छोड़ि दीं, जेकर सोच एतना गिर गइल बा कि एह महामारी में भी ऊ कालाबाजारी करता.

  • Share this:
जेने देखीं एकही बात लउकता. सोशल मीडिया पर आरोप लगावे वाला ढेर लोग लउकतारे. हम केंद्र सरकार के पक्ष नइखीं लेत. बाकिर सरकार पर अनेरे आरोप काहें लगावे के चाहीं? आखिर कई करोड़ लोगन के कोरोना के वैक्सिन लागि चुकल बा कि ना. बाकियो लोगन के लगबे करी. त धीरे- धीरे कुल इंतजाम होई. देश के मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ देवी शेट्टी ठीके कहतारे कि सबसे आसान काम बा केंद्र सरकार पर आरोप लगावल. सरकार के मदद वाला कदम ढेर लोगन के लउकते नइखे. सरकार चौकस बिया. उनुकर ई वीडियो यू ट्यूब पर खूब देखल जाता. एसे कि ऊ वस्तु स्थिति के क्लीयर वर्णन क रहल बाड़े.

अतहत बड़ देश बा. हमनी के संसाधन कम बाड़े सन. 60 साल से ज्यादा कांग्रेस पार्टी सत्ता में रहल बिया. त ऊहे कौन बड़का काम कइले बिया आ हर जिला में एगो एम्स स्तर के अस्पताल काहें नइखे खोल देले? अब कांग्रेस के लाजो नइखे लागत कि ऊ केंद्र में सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगावतिया. जब कांग्रेस एतने दूर दृष्टि वाली रहित त एतना दिन में एगो स्वास्थ्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, एगो व्यापक ढांचा बना देले रहित. ऊहे कौन बजट में स्वास्थ्य खातिर खजाना खोलले रहे. अब जब एगो महामारी आइल बिया त केहू के कोसे के बजाय सहयोग वाला रवैया के जरूरत बा. बहुते लोग एह संकट में मदद कर रहल बा. बड़े- बड़े उद्योगपति से लेके व्यक्तिगत स्तर तक लोग सहानुभूतिपूर्वक भारी स्तर पर हेल्प करता. अब ओह लोगन के छोड़ि दीं, जेकर सोच एतना गिर गइल बा कि एह महामारी में भी ऊ कालाबाजारी करता. लागता कि ई कालाबाजारी करे वाला लोग अपना के अजर- अमर मानता. मानता कि हमार मृत्यु ना होई. ऊ सोचता- “जतना लूटे के बा लूट ल. महामारी बा त रहो. हमार काम बा लूटल. मानवता पीड़ित बा त रहो. हमार काम बा तड़पत रोगिन के घर वाला लोगन के ब्लैक में आक्सीजन कंसंट्रेटर बेचल.

ई पइसा हमरा के सुखी क दी. हम ना मुअब, भले सारा संसार मरि जाई. के कहता कि जीवन पानी के बुलबुला हो गइल बा. जेकरा खातिर बुलबुला बा, रहो. हम त अमर होके आइल बानी. हम एह जीवन में ना लूट मचाइब त कब लूटब? लोग तड़पता त तड़पो. हम आ हमार परिवार नइखे नू तड़पत. जनता से हमरा का मतलब बा. हम त कालाबाजारी करब, हमहीं ना, हमार बाप कइले बाड़े, हमार दादा कइले बाड़े. लोगन पर बिपति परल बा त परो. हमार काम बा केहू तरे पीड़ित, चिचियात, बेहाल, परेशान लोगन के खून चूसल. हम ईहे पाप के धन स्वर्ग में लेके जाइब आ कुछ धन अपना बाल- बच्चन खातिर छोड़ि जाइब. एही से हमार परिवार सुखी रही. बाकी लोग तड़पत रहो.”

अब रउवां कहत रहीं कि अइसन लोग मनुष्य के नांव पर राक्षस बा. नीच बा, कुत्सित बा. आक्सीजन के सिलिंडर, आक्सीजन कंसंट्रेटर आ दवाई के ब्लैकमार्केटिंग करे वालन के नरक मिली. बाकिर एह बेहया लोगन पर एकर असर नइखे परे वाला. पुरनिया लोग कहि गइल बा- कि गलत काम करे वाला कइसन लोग होले- सौ- सौ जूता खाय, घुस के तमाशा देखे. लानत- मलामत होता, बाकिर करी लोग ऊहे जौन ओह लोगन के कुत्सित दिमाग कही. त छोड़ीं. दिल्ली के एगो कौनो नामी ढाबा/होटल वाला एगो अइसने ब्लैकमार्केटियर पकड़ाइल बा. टीवी चैनल देखावतारे सन कि ओकर होटल आ घर बहुते आलीशान बा. ओकरा पर मोकदिमा चली. त छोड़ीं अइसना लोगन के बात. गिरफ्तारी का बाद ओकर फोटो अभी नइखे छपल. छपि जाइत तबो लउकित कि ओकरा चेहरा पर कौनो पश्चाताप के चिह्न नइखे.

जे सेवा करता, ऊ चुप बा. चुपचाप लोगन के सेवा करता. केतरे परेशान हाल, बेमार लोगन के मदद कइल जाउ- सोचता. कतने लोग मुफ्त में भोजन करा रहल बा. कतने लोग दान दे रहल बा. जे कुछु नइखे करत, एको पइसा के सहयोग नइखे करत, ऊ बड़ी- बड़ी बात करता.

केंद्र सरकार पर दोषारोपण करता. ठीक बा, आलोचना करेके राउर अधिकार बा. बाकिर एह घरी आलोचना करेके समय नइखे. ई वैश्विक आपदा ह. समूचा विश्व एह जैविक हथियार के सामना करता. त ई समय बा रचनात्मक सहयोग के. जदि रउवां कौनो कोरोना रोगी के फोन पर ढाढस बंधा देतानी त ऊहो सहयोग कहाई. अब कोरोना रोगी से घृणा करेके भा डेराए के समय नइखे. हं रोगी से रउरा दूरी बनाईं बाकिर ओकरा प्रति सहानुभूति राखीं. ऊहो मनुष्य ह. ऊ कोरोना से पीड़ित हो गइल बा त ई ओकर दोष नइखे. ई प्राकृतिक प्रकोप ह. एह बेमारी से केहू पीड़ित हो सकेला. दूरी बना के भले रहीं बाकिर ओकर हालचाल लेत रहीं. ओकरा सुविधा- असुविधा पर नजर राखीं.

संकट में देशवासी एकजुट हो जाई लोग त ढेर समस्या के समाधान हो जाई. जब ई बेमारी हवा का माध्यम से फइल रहल बिया त केहू का क सकेला. जब एह समस्या से हमनी के उबरि जाइब जा, तब बात दोसर बा. रउरा जौन मन में बा कहीं. जब राहत मिल जाई त केहू के कौनो बात सुने में मनो लागी. अभी त जेने देखीं ओनिए लोग केंद्रीय सत्ता पर आरोप लगा रहल बा. त ई प्रवृत्ति कौनो फायदा ना पहुंचाई. सरकार के जतना करेके बा जरूर करी. सरकार जानतिया कि ई कतना बड़ संकट बा. आगे के का रणनीति होखे के चाहीं. नया नया दवाई लांच हो रहल बाड़ी सन. रूसी वैक्सिन स्पूतनिक भी आइए गइल बा. नोजल वैक्सिन के पहल होइए गइल बा. त काम हो रहल बा. हमनी के देश के जनसंख्या एक अरब 30 करोड़ से ज्यादा बा. एतना भारी जनसंख्या के चिकित्सा व्यवस्था एतना कम संसाधन में कइल एगो चुनौती बा. एसे धैर्य से काम लेबे के चाहीं.

अकुता के फट दे आरोप लगावल ठीक नइखे. विपदा आ महामारी में मन शांत राखि के कौन सार्थक उपाय कइल जाउ एकरा पर फोकस कइल बुद्धिमानी बा. केहू के गरिया के रउरा मन के भले शांति मिल जाउ, बाकी ई घातक कदम कहाई. हमनी शांत रहिके सोचेके परी कि का करीं जा जौना से एक दूसरा के मदद मिले. कौना पीड़ित परिवार के कइसे मदद क सकेनी जा. जब रोग हवा में फइलल बा. त सभे हवा में सांस लेता. केहू बांचल नइखे. कोरोना रोगी के प्रति प्रेम आ सौहार्द्र रहो, घृणा आ डर ना. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)