भोजपुरी में पढ़ें: कोरोना के कारन बिगड़ल अब गांव के हालत

कोरोना के कारन बिगड़ल अब गांव के हालत

कोरोना के कारन बिगड़ल अब गांव के हालत

इ महमारी बहुत कुछ बतावत बा. जईसे कि बहुत दिन से कहल जात रहल ह कि गाँव बदल गईल. अब पहिले जईसन ना ह| इ जुमला ‘आधी हकीकत, आधा फ़साना’ जईसन ह. कईसे ह, इ हम आप के बतावत बानी.

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इ बात से केहू इनकार ना करी की बहुत मामला में गाँव बदल गईल बा. लेकिन बहुत कुछ आज भी ओयिसने ह जईसन कि 20-30 साल पहिले रहे. बदलाव क बात करीं त कह सकीलां की जगह-जगह दारू क ठेका खुल गईल बा. कुकुरमुत्ता मतीन अंगरेजी सिखावे वाला स्कूल खुल गईल बाड़ें सो. एतने नाहीं, लोगन के काम धाम से पईसा मिले लागल ह त खाना-पानी पहिले से नीमन होखे लागल बा. मेहनत कम हो गईल बा. हर- बैल से लेके दवरी/ओसवनी तक क काम मशीन से होत बा. कोन-डाण तक क काम मशीन क देत हिय. बहुत जगह त निराई-गुणाई तक का काम मशीन से होत बा. अब मनई के आराम मिल गईल ह.

पढ़ाई-लिखाई करे वाला लाईको मेहनत-पसीना से ऊपर उठ गयल बाड़न सो. खेलकूद क तरीका बदलल बा. शारीर से बलशाली लउके के चाही, लईका येह पर जोर दिहले बाड़न सो. इ फिलिम से आईल बदलाव ह. बलशाली बने खातिन अखाड़ा/कुश्ती त लोग पहिलहूँ लड़त रहलन लेकिन देखावे वाला काम ना रहे. आज सिनेमा से देखे-देखावे वाला मामला बढ़ गयल ह.

अईसन बदलाव बहुत भयल ह जवन देखल चाहब त दिखाई दे जाई. घर पक्का बनत ह. माटी-गारा से नाहीं, सिलमिट मिला के. चुना पोत के लोग चमका देत बा. गाँव में कच्चा रस्ता ना रह गयल बा. कहीं इंटा, त कहीं सिलमिट क पक्का रास्ता बन गयल बा. इ कुल काम मनरेगा अयिले की बात ढेर भईल ह. एतरे का बदलाव त एतना भईल ह कि गाँव के पहिचानल मुश्किल ह.

अब आप इ देखीं की महमारी बतावत बा की का ना बदलल ह. पढ़ाई बिला गईल ह. लोग आज पहिले से ढेर मूढ़ हो गयल हवें. अस्पताल त कहीं-कहीं खुलल ह लेकिन ओकरा में डक्टर कम्पोटर की जगह गाय-गोरु रहत/घूमत हवें सो. अब जब बेमारी फयीलल हिय त सबके समझ आवत ह की कुल त बनत बा, बस अस्पताल क कहीं कुछ ना देखात बा.
महमारी शुरू भाईले से पहिले क बात आप के बतायीं त उहो कवनो बहुत ठीक ना रहे. जईसे की मधुमेह आउर गठिया जईसन बेमारी त घर-घर में घुस गईल हिय. चालीस पार कईल बहुत लोग मिली जेकरी शारीर में मिठास बढ़ गईल बा आउर उ परशान बा. गठिया त पूछी मत. पहिले गाँव में दुई-चार लोग रहें जेके गठिया, सलमबाई, हाथीपाँव जईसन बेमारी रहे. मधुमेह क रोगी त खोजले केहू ना भेटाय. आज इ बेमारी घर-घर में हो गईल बा. आप सब त जानीलां की मधुमेह शारीर के खोखला क देले आउर धीरे-धीरे शारीर क अंग-अंग गला देले. अयिसना में जे महमारी की चपेट में आ जात ह ओकरा के कुल सुविधा रखे वाला शहर क अस्पताल त बचायी ना पावत हवें सो, गाँव-जवार में का होई. उहाँ त लोग असहाय होके भागत-परात हवें लेकिन कुछ हो ना पावत ह.

येह आपदा में गाँव क असल हालत पता चालत हिय. जिला, तहसील, बलाक आउर गांव सभा क पड़ताल करब त हकीकत समझ आई. महमारी की पहिली लहर में केहुके कुछ ना जरुरत परल. खासकर गाँव-देहात में ओकर असर कम रहे. त ना केहू अस्पताल/डॉक्टर खोजल आउर ना ही ओकर कहीं चर्चा भईल. कहीं छुट-पुट कुछ भयिबो कईल त सरकार दबा-छुपा के निकाल ले गईल. लेकिन दूसर लहर गाँव ले पहुँच गईल हिय. उहाँ क हाल इ बा की अस्पताल में न ऑक्सिजन जईसन कवनो चीज बा आउर नाहीं मरीज के बचावे खातिन जीवन रक्षक प्रणाली बा. सब भगवन भरोसे चलत बा. डक्टर लोगन की पास अपना बचाव खातिन कुछ ना ह. उ लोग आपन जान खतरा में डाल के लागल बाड़न जा.

सवाल इ ह कि बेमारी में अईसन बुरा हाल काहें होत बा? एकर जवाब खोजल कठिन ना ह. एसे कि कुछ साल से गाँव-देहात में कईगो बेमारी फयीलल हिय. आउर ओकर उपचार लोगबाग जईसे-तईसे करावत हवें. जेकरी पास तनी पईसा आउर रसूख बा उ बढ़िया जगह जात बा आउर जेकरी पास इकुल ना बा उ जीवन से लड़त बा. एक-अस्पताल से दूसरी अस्पताल भागत-परात बा. अईसन हालत में बच जाय त भगवाने बाड़ें.



आबादी, बढ़ल, बेमारी बढ़ल लेकिन अस्पताल ना बनल. जिला से लेके ग्रामपंचायत तक ले आप आंकड़ा निकाल के देख लेयीं. दुई-तीन लाख की आबादी पर एगो-दुगो प्राथमिक स्वास्थ्यकेन्द्र मिली. लेकिन उहाँ क हाल इ बा की खांसी-बुखार छोड़ के बाकी कवनो इलाज भईल मुश्किल है. सरकार गर्भवती महिला के खाए खातिन राशन त देत बा, लेकिन ओकरा इलाज खातिन डॉक्टर नदारत बा. अब उ खाय के का करी जब लईका की जनम की समय कुछ ऊपर-नीचे हो जाय त ओकर मदद करे खातिन कवनो अस्पताल ना मिली.

गाँव जवार में अस्पताल नदारत बा. अब जब बड़हर बेमारी आईल हिय त सब तरफ हाहाकार मचल बा. टीवी से लेके जनता तक, पक्ष से लेके विपक्ष तक एक दूसरे क नाम लेके अपना के साफ़-पाक देखावे में लागल बड़न जा. लेकिन आप इ देखीं की जमीनी स्तर पर येह बीमारी से निपटे खातिन कवन व्यवस्था भईल बा. सामान्य दिन में जहाँ बोखारो क इलाज ना हो पावेला उहाँ अचानक से ऑक्सिजन खोजब त कहाँ से मिली. जेवन अस्पताल में काम करे वाला कवनो दवाई ना बचे देवेलन उहाँ आप जाके कहब की कोरोना का दवाई चाही त कहाँ से मिली. कहीं-कहीं खबर सुनात हिय की अस्पताल क डक्टर आउर कम्पोटर मिल के दवाई बहरे बेचत हवें सो त इ कवनो नयी बात ना ह. छोटे स्तर पर इ व्यवस्था में बहुत बुरी तरह घुन लाग गयल हवें सो. अब आप ओकरा के सही मानी चाहे गलत, लेकिन खोजब त अस्पताल की नाँव पर आपके खंडहर ढेर मिली. काहें की ऊपर से नीचे ले सब केहू अपना बेचत-खात बा.

दुनिया भर में जवन देश येह समय में अपना के ठीक क पावत हवें सो उहाँ मूलभूत सुविधा क चीज पहिले से ह. अपनी देश क हालत येह मामले में सबसे नीचे ह. आबादी क अनुसार त कुछ ना ह. अयिसना में जब देश आउर प्रदेश का राजधानी में बिस्तर, ऑक्सिजन आउर जीवन रक्षक सुविधा ना ह त जिला, तहसील, बलाक आउर गाँव क हालत का होई, एकर अनुमान लगा सकिलां.

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