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Bhojpuri में पढ़ें- महमारी में बुनियाद बिगड़त बा...

Bhojpuri में पढ़ें- महमारी में बुनियाद बिगड़त बा...

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आज क जवन हालत बा, ओकरा में केहू क कवनो दोष नईखे. येह महमारी में सब सही रहे, लोग इहे दुआ करत बा आउर जेकरा से जेतना सपरत बा, उ ओतना कोशिश करत बा. लेकिन कहीं-कहीं कोशिश कम बुझात बा. आप इ सोचीं की जब कवनो नेता क भाषण सुने खातिन जनता जुटत हिय त लईकन के इ लगत ह कि स्कूलवो खोल देतन लोग त ठीक रहत.

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लईका कहत हवें की खेलले कुदले क जगह बा ना. स्कूल खुलत ना बा. घरे टीबी देखे के मिलत ना बा. अब आपे बतावा की हमहन क का कयल जाव. जाड़ा में त आउर फजीहत बा. नीब आउर अमराई पर चढ़ के कलास लेवे के परत बा. जमीन पर त नेटवरकवे गायब बा. अब आपे सोचीं की पूस की जाड़ में एतना झमेला मोल ले के लईका कईसे पढ़िहें सो?

अब सबसे जरूरी बात. छोटहन लईकन खातिन आउर दिकत बा. जईसे की बड़ लईका त नीब पर चढ़ के चाहे अमराई में जाके कवनो पेड़ पर चढ़ के पढ़ लेत बाड़न सो लेकिन इ कुल छोटका लईकवा, जवनन के पेड़ चढ़ले क उमर ना बा, उनहन के बड़हर संकट बा. पेड़ चढ़ ना जाई, घरे नेटवरक बा ना. अब येह लईकन का होई. उनहन क त बुनियाद बनवले क बखत रहल ह. बुनियाद ना बनी त फिर आगे क त ममलवे अटक जाई. अब आपे बतायीं कि ओह लईकन के जवाब के देई. उ सवाल केकरा से पूछे जयिहन. चुनाव में उ वोटर त हवन नाहीं कि उनकर समस्या मुद्दा बनी. अब उनकी बारे में के सोची?

बात इ बा की इ कहले क मामिला ना ह. सरकार/नियम बनावे वालन के खुदे सोचे के चाही की जरूरी का बा. आप सब त जानीला की जवना समाज में शिक्षा क हालत ठीक ना ह उहाँ केतना बुरा हाल ह. जईसे कि मध्यएशिया के कईगो देश अईसन हवन सो कि उहाँ प्राकृतिक संपदा गजायिल हिय लेकिन ओकरा क उपयोग कईले क तरीका केहू की पास ना ह. ओकर कारण इ ह कि शिक्षा की आभाव में पीढ़ी आपस में लड़-मर के ख़तम होत हिय. उनके इहो ना पता ह कि उनकरी पास एतना संसाधन ह कि लड़ले क जरूरते ना ह. ओकर सही उपयोग करें आउर जीवन के आनंद मंगल से जियें. इ बात त उ तब न सोचिहें जब उनकर बुनियाद सही पड़ी. बाकी त नासमझी में अदमियो जनावर से कम होला.

भारत देश बहुत शांति आउर सुकुन से जिए वालन क देश ह. इहां क लोग ढेर आपाधापी में ना पड़तन. एसे इहां कम शिक्षा रहले की बादो कवनों अईसन हिंसक मामला ना बनल. लेकिन अब नईकी पीढ़ी पहिले की अदमी मतीन ना ह. ओकर आपन सोच आउर जरूरत हिय. दुनिया भर की अदमी के उ लोग देखत आउर समझत हवें. अब उनहन लोगन क सोच आउर जरूरत सीमित ना ह. समय से दिशा ना देखावल गयल त लईकन के भटकत देरी ना लगी.

दुनिया भर में जेतना देश अपनी भित्तर की समस्या से परशान हवें उहां की बारे में खोजे वाला बतावत हवन कि समय की संग्हे चलल कवनो गलत ना ह. लेकिन आप जमीन ना भुलाये के चाही. जहां सामाजिक जीवन से लोग अलग हो जात हवन उहां कवनो तरह क शांति आउर स्थिरता ना ह. अब जब उहां पानी कपार की उप्पर से निकले लागल ह त सरकार आउर बुद्धिमान लोग उहां की नवछेडियन क गलती बतावत हवन आउर उनहन के सुधरले की नाम पर आपन काम चलावत हवें. इहां हम फिर उहे बात कहत हईं कि आप जमीन पर समाधान ना खोजब त आगे चलके कहीं ठिकाना ना मिली. बुनियाद बिगरल त आगे आप कोशिश करत रहा, कुछ सही होई नाहीं.

अबहीं महमारी चलत बा. अयिसना में इ सरल ना ह की पढ़ाई-लिखाई आउर सेहत, सब सही चले. बिना जोखिम क कुल आगे बढ़े. सब खुशो रहे. इ कुल एक संग्हे त होई ना. केहू खुश होई, केहू नराज होई. केहू साथ देई त केहू विरोध करी, इ कुल हमेशा लागल रहे के ह. जरूरत ह एह समय कुछ ठोस कदम उठवले क. पीढ़ी ना बिगरे, एह खातिन बहुत जरूरत ह कि सबकी बीच में एगो रस्ता निकले. बुनियाद बिगड़ल त ओकरा के सम्हारे में ढेर मेहनत लगी. जवन मेहनत आउर खरचा मामला बिगड़ले की बाद होई, ओकरा के अबहियें कईले क जरूरत ह. नहीं त जवन हालत बा न, ओके देख के इ लगत ह कि एहितरे चलत रही त एगो पीढ़ी ख़राब हो जाई.

जवनी देश की अबादी क पचहत्तर प्रतिशत जवान लईका हवें उहां तीन साल लगातार न पढ़ाई होई, न परीक्षा होई आउर न आगे कवनो उम्मीदे देखाई देई, त वोह देश की नवछेड़ियन क का हाल होई. येह बात के आप सोचीं की आप की सम्हने कवनो नवछेड़िया आवे आउर इहे पूछे कि ईसन हालत में हमके का करे के चाही त आप का बतायिब. आउर इ बात आप के पता ह कि आप ना बतायिब तबो उ कुछ न कुछ करी जरुर. अब अईसन में उ गलत आउर सही क अंतर क पायी, एकर संभावना हमके कम देखात हिय. एसे हमके इ लागत ह कि जईसे कुल काम होत ह वोसहीं पढ़ाई आउर रोजी-रोजगार सिलसिलो चलत रहे के चाही.

अईसन महमारी आवे चाहे हरीबिमारी आवे, जीवन त ना न रुकत बा. आप देखीं की कहीं आधी अदमी बुला के त कहीं पूरा अदमी बुला के काम होत ह. पराईवेटो में आप देखीं की कहीं घरे से काम होत ह, कहीं जाके काम होत ह. मतलब की कहीं काम ना रुकल ह. जईसे महमारी कमजोर पड़त हिय, वोईसे काम चल निकलत ह. लेकिन पढ़ाई आउर इम्तिहान रुक गयल ह. लईकन के इ बुझाये लागल ह कि हमहन क कवनो सुनवाई ना ह. उनहन के लागत ह दुनिया भर क देश अपनी लईकन की बारे में सोचत हवन सो लेकिन इहां कुल बंद क के लोग चल गयल ह आउर भुला गयल ह कि एकरा के खोले के हवे.

(रामाशंकर कुशवाहा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News, COVID 19

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