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crime in bengal police constable arrested in kolkata in the case of robbery vinay bihari singh bhojpuri

Bhojpuri में पढ़ें- बंगाल में पुलिस के सिपाही लूट के आरोप में गिरफ्तार

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एही जून में कोलकाता में पुलिस के दू गो सिपाही लूट/ डकैती के आरोप में गिरफ्तार भइल बाड़े सन. मामल बड़ाबाजार के ह. एगो सोना के व्यापारी अपना कर्मचारी के कुछ गहना दिहलस कि एकरा के ग्राहक के दे आउ. कर्मचारी गहना लेके बस पर चढ़ुए आ ज्योंही अपना गंतव्य पर उतरुए त एगो सफेद कार ओकरा लगे आके खड़ा भउवे.

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ओमें से कुछ आदमी उतरुवन आ कहुअन कि इंतजार मत कर, हमनी के तोहरा गंतव्य पर ले जाए खातिर आइल बानी जा. कार में बइठ. ओमें से दू गो आदमी कहुअन स कि हमनी का पुलिस अधिकारी हईं जा. कर्मचारी के पुलिस के नांव सुनि के अउरी भरोसा हो गउवे आ ऊ कार में बइठि गउवे. कार गंतव्य पर पहुंचा दिहुए. एही बीच में गहना के पोटली गायब हो गउवे. कर्मचारी हैरान. कर्मचारी के कार से उतारि के आ कार तेजी से भागि गउवे. कर्मचारी अपना गहना के दोकान में फोन कके पूरा बात बतउवे. बड़ाबाजार थाना में एफआईआर दर्ज भउवे आ छानबीन शुरू हो गउवे. सीसी टीवी फुटेज आ मोबाइल फोन ट्रैक कइला से पता चलुए कि एह गहना चोरी/डकैती में हावड़ा पुलिस के दू गो सिपाही रहलन ह सन. ओकनी के कोलकाता पुलिस गिरफ्तार कइले बिया. सीसी टीवी फुटेज में एह सिपाहिन के करतूत कैप्चर हो गइल बा. मोबाइल ट्रैकिंग से दूनो सिपाही के कांड के पर्दाफाश हो गइल. लोग हैरान बा कि हावड़ा के पुलिस केतरे टोह ले लिहलस कि बड़ाबाजार के ज्वेलरी के दोकान से कौन कर्मचारी कब आ कहां जाता? त एकर जबाब लोगे देता कि जेकर लूट आ डकैती के पेशा रही ऊ कुल घर- घात जानी. ओकनी के जासूस रहेलन स जौन टारगेट कइल दोकान के बारे में जानकारी देत रहेले सन. अब लोग कहता कि जब रक्षके भक्षक बनि जाई त आम आदमी के के बचाई? बड़ाबाजार के व्यापारी सन्न बाड़े सन. ई का? पहिले कौनो चोरी- डकैती होई त दोकानदार भा आम आदमी पुलिस का लगे जात रहल ह. अब केकरा पर भरोसा कइल जाउ. के बचाई? पुलिस कहतिया कि एक- दू आदमी के करतूत से पूरा पुलिस विभाग पर आरोप ना लागे के चाहीं. बात त ठीक बा. बाकिर अब आम आदमी कइसे जानी कि कौन सिपाही ईमानदार बा आ कौन पुलिस के वर्दी में चोर- डकैत?

अब मनोवैज्ञानिक लोग कहता कि कुछ राजनीतिज्ञ अपराधिन से सांठ- गांठ कके पुलिस के मन में बेईमानी भर देले बा. जब अपराध आ अपराधी के महिमामंडित कइल जाई, ओकर पूजा कइल जाई त अपराध के प्रति आकर्षण पैदा होखे लागी. पुलिस देखतिया कि फलाना नेता अपराधी के संरक्षण देता आ अपराधी मौज करता त पुलिस काहें पिसाउ. ऊबो बहता पानी में हाथ धोए के चाहतिया. बाकिर ई तर्क समझ में नइखे आवत. पुलिस आ चोर में अंतर रहे के चाहीं. पुलिस आ व्याभिचारी में अंतर रहे के चाहीं. हमनी का देश में त चोरी, डकैती आ व्याभिचार में पुलिस के शामिल भइला के मामला भी सामने आ चुकल बा. त गड़बड़ी कहां बा? अंग्रेजी के शब्द पुलिस (Police) ग्रीक शब्द Polis से बनल बा जौना के अर्थ होला- रक्षा करे वाला. बाकिर ई परिभाषा कुछ गिनल- चुनल पुलिसकर्मियन के कारन, वास्तविकता से मेल नइखे खात. अभी पिछले साल के बात ह, उत्तर प्रदेश में 29 गो पुलिस के लोगन पर हत्या, कस्टडी में हत्या, मारपीट आ निर्दोष लोगन के पुलिस केस में फंसवला के आरोप में मामला दर्ज भइल रहे. एकरा से संबंधित समाचार, एगो प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार के 10 जून 2021 के अंक में देखल जा सकेला. ओह घरी उत्तर प्रदेश के पुलिस हेडक्वार्टर के डीजीपी के बयान रहे कि ऊपर से आदेश आइल बा कि जे भी खाकी वर्दी (पुलिस) कौनो अपराध में लिप्त पावल जाउ, ओकरा पर सख्त कार्रवाई होखे के चाहीं. ऊपर से आदेश माने, हो सकेला पुलिस के लोगन में क्रिमिनल बैकग्राउंड के चेक करे खातिर मुख्यमंत्री आदेश देले होखसु. ई त बहुते बढ़िया काम बा. जदि अपराध करे वाला पुलिसकर्मी पर कार्रवाई होता त बहुत कौनो पुलिसकर्मी अपराध करे के पहिले सौ बार सोची. बाकिर असलियत का बा? एहू पर ध्यान देबे के परी.

तनकी भर विषयांतर के इजाजत दीं त, बिहार से खबर आवता कि एगो ड्रग इंस्पेक्टर का घर से पांच बोरी नोट के गड्डी मिलल बा. गिनाइल बा त 3 करोड़ रुपया के करीब भइल बा. बताईं त, जौना ड्रग इंस्पेक्टर के आम आदमी चिन्हबो ना करेला, ओकर एतना कमाई? ई ड्रग इंस्पेक्टर घूस लेके जाली दवाई बेचे के छूट दे देत होई आ का जाने कतना लोगन के जाली दवाई से मृत्यु हो जात होई. व्यंग्य लिखे वाला कहता कि सरकारी नोकरी माने जहां लूट सकेनी तहां लूटीं. पद बनल बा ओकर दुरुपयोग करे खातिर. पुलिस में बानी त धौंस जमाईं, फूड इंस्पेक्टर भा ड्रग इंस्पेक्टर बानी त अपना ज्ञान आ प्रतिभा के घूस लेबे में इस्तेमाल करीं, रउरा जौना सरकारी नोकरी में बानी ओकरा में घूस के संभावना खोजीं. सरकार के अइसन कुल पद के हटा देबे के चाहीं आ ओकरा बदला में अइसन व्यवस्था करे के चाहीं कि घूस के कौनो चांसे ना रहे. एक जगह एगो आइएएस का घरे कई किलो सोना मिलल बा. अइसना सरकारी अधिकारियन के मूल मंत्र रहेला- लूट सके तो लूट.

पुलिस के कुल लोग भ्रष्ट नइखन. बाकिर, ईहो सच बा कि जौन पुलिस एक्ट सन 1861 में गुलाम भारत में अंग्रेज लागू कइलन स, आज भी ऊहे एक्ट काम कर रहल बा. देश आजाद भइल बाकिर पुलिस एक्ट में कौनो बदलाव ना भइल. एकरा के बदले खातिर समय- समय पर मांग उठल, बाकिर फेर मामला ठंडा बस्ता में चलि गइल. अब समय आ गइल बा कि पुलिस सिस्टम पर ध्यान दिहल जाउ आ एकरा में आमूल- चूल बदलाव कइल जाउ. आरोप त ईहो लागेला कि पासपोर्ट खातिर बैकग्राउंड चेक होता त ओमें घूस, कौनो पुलिस वेरिफिकेशन होता त ओमें घूस, ट्रक वालन से ओवरलोडिंग के बहाने घूस. त आरोप कई गो बाड़न स. एकरा में कतना सच्चाई बा, एकर जांच होखी त पता चली. बाकिर समय- समय पर पुलिस के चुनिंदा लोगन पर अपराध में लिप्त होखे के आरोप लागत रहता. खाकी में दाग लाग चुकल बा. ई छूटी कइसे? ईहे चिंता के बिषय बा. ईहो आरोप बा कि पुलिस पर से कई लोगन के भरोसा उठि गइल बा. ई भरोसा फेर कइसे लौटी, एही पर मंथन के जरूरत बा.

(विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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