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Bhojpuri: बनारस क वीर रहन दाताराम नागर, गिरफ्तार कर अंगरेज भेजि देहलन कालापानी

दाताराम अउर ओनकर साथी लोग 1772 से ही अंगरेजन के खिलाफ बनारस में मोर्चा खोलि देहले रहलन. अगस्त 1781 में शिवाला घाट के लड़ाई में 200 अंगरेज सैनिक अउर अधिकारी मारल गयल रहलन. एक दिन धोखा से गिरफ्तार कइ के अंगरेज ओन्हय 20 साल बदे कालापानी भेजि देहलन.

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देश के अजाद करावय में जेतना जने क नाम इतिहास में दर्ज हौ, ओहसे अधिक नाम इतिहास से बहरे पड़ल हयन. एहमे से कई लोगन के आज ओनकर शहर, गांव अउर टोला-महल्ला तक नाहीं जानत. दाताराम नागर अइसनय एक नाम हौ. नागर बनारस क एक वीर दबंग देशभक्त रहलन. इतिहास में 1857 के विद्रोह के अंगरेजन के खिलाफ पहिला जन विद्रोह मानल गयल हौ, लेकिन दाताराम अउर ओनकर साथी लोग 1772 से ही अंगरेजन के खिलाफ बनारस में मोर्चा खोलि देहले रहलन. अगस्त 1781 में शिवाला घाट के लड़ाई में 200 अंगरेज सैनिक अउर अधिकारी मारल गयल रहलन. एहमें से कईयन क गरदन नागर के तलवार से ही कटल रहल. नागर अंगरेजन क काल बनि गयल रहलन. एक दिन धोखा से गिरफ्तार कइ के अंगरेज ओन्हय 20 साल बदे कालापानी भेजि देहलन.

नागर हट्ठा कट्ठा सात फुटा जवान. ताकत एतनी कि तलवार क वार जहां भी पड़य, उ दुइ टुकड़ा होइ जाय, चाहे आदमी होय या जानवर. नागर क एक साथी रहलन भंगड़ भिक्षु. उ भी नागर जइसन बलवान अउर साहसी रहलन. दूनों मिलि के बनारस में अंगरेजन के खिलाफ रणनीति बनावय अउर अंजाम देय. भंगड़ भिक्षु के बारे में अलग से चर्चा होई. अलईपुर वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन के पास आज जहां टीबी अस्पताल हौ, ओही ठिअन एक ठे बगइचा रहल. बगइचा में एक कुंआ रहल. बगइचा त अब नाहीं बा लेकिन कुंआ अबही भी मौजूद हौ. ओही ठिअन नागर अउर ओनकर साथी लोग जुटय अउर अंगरेजन के खिलाफ रणनीति बनावय. पुरनिया लोग बतावयलन कि ओह समय नागर क बनारस में दबदबा रहल. अंगरेज अधिकारी नाम सुनि के कांपय. अंगरेज नागर के गिरफ्तार करय क बहुत बेवत कइलन, लेकिन सफल नाही होइ पइलन.

दूसरी तरफ कई गद्दार भी रहलन, जवन अंगरेजन से मिलि नागर के खिलाफ मुखबिरी करय. लेकिन नागर के आदमिन से डर के मारे इ कुल मुखबिर मूसे के बीली में लुकायल रहय. बनारस क नायब मुंशी फैयाज अली अउर मिर्जापुर में अंगरेजन क ठेकेदार बनकट मिसिर अपुना के ढेर लगावय अउर दूनों नागर के खिलाफ खुल्लम खुल्ला काम करय. नागर क शागिर्द लोग तय कइलन कि पहिले बनकट मिसिर के निपटावल जाय. मिसिर के न्योता भेजायल कि अगले पुन्नवासी के ओझला के नाला पर भांग छनी. मिसिर न्योता स्वीकार कइ लेहलन अउर जवाबी संनेसा भेजवइलन कि भोजन क इंतजाम ओनके ओरी से रही. दूनो तरफ से लड़ाई क खुला न्योता रहल अउर जवान लोग लाठी के तेल पियावय लगलन.

बनकट मिसिर अपने संगे 100 लठइत लेइ के पहुंचलन अउर नागर भी अपने संगी-साथी अउर सागिर्दन क टोली लेइके पहुंचलन. भांग-बूटी छनल, खाना-पीना भयल अउर फिर दूनों ओरी से जमि के भिड़ंत भइल. अंत में नागर अउर मिसिर आमने-सामने आइ गइलन. नागर तलवार चलइलन त मिसिर अपने लाठी से रोकय लगलन. लेकिन नागर के तलवार क धार अउर भार मिसिर क लाठी नाहीं सहि पइलस. मिसिर लड़खड़इलन अउर पीछे हटि के भागय लगलन. नागर दउड़ाइ लेहलन. अजोरिया रात रहल, देखय में कवनो दिक्कत नाहीं रहल. लेकिन अचानक नागर के दिमाग में आयल कि निहत्था आदमी के पीछे भागब मर्द क काम नाहीं हौ. उ पीछे लौटय लगलन. तबय रस्ते में एक जवान औरत मिलल, जवन मिसिर के कुकरम क सतावल रहल. उ औरत मिसिर क लाश देखय बदे आधी रात के इहां आइल रहल. औरत क आपबीती सुनले के बाद नागर आगबबूला होइ गइलन अउर मिसिर के तरफ फिर दउड़लन. निहत्था आदमी पर वार नाहीं करय के रहल, एह के नाते नागर मिसिर के आपन तलवार देइ देहलन अउर खुद आपन खुखरी संभरलन. अब एक झटका में खुखरी मिसिर के सीना में घुसि गइल अउर मिसिर अगले क्षण में लाश होइ गइलन.

इ औरत ठकुरे क लड़की रहल अउर बला क खूबसूरत रहल. मिसिर के कुकरम के नाते आज उ रखैल, कसबिन क जिनगी जीयत रहल. नागर के ओकरे हालत पर बहुत दया आइल अउर उ मिर्जापुर के नारघाट पर ओकरे रहय क बंदोबस्त कराइ देहलन. कभौ-कभौ ओहसे मिलय भी जायं. दूनों में गहरा प्रेम होइ गयल रहल. नागर ओह औरत के सुंदर कहि के बोलावय. नागर अउर सुंदर के प्रेम कहानी वर्णन काशी क प्रतिष्ठित लेखक रूद्र काशिकेय अपने किताब बहती गंगा में बहुत सुंदर तरीके से कइले हउअन.

बनकट मिसिर क काम तमाम भइले के बाद अब बारी मिसिर क साथी अउर बनारस क गद्दार नायब फैयाज अली क रहल. एही बीच पता चलल कि फैयाज अली मुहर्रमी जुलूस क दुलदुल घोड़ा ठठेरी बजार से निकलवावय के कोशिश में हयन. फैयाज हर रोज संझा के अंगरेज अफसरन के इहां दुआर लगावय अउर पूरे शहर के देशभक्तन क गतिविधि उगलि के आवय. फैयाज पिछले दुइ साल से मुहर्रम क जुलूस अलग-अलग रस्ता से निकालय क कोशिश करत रहलन. एकरे पीछे अंगरेजन क हाथ रहल अउर नागर अंगरेजन क चाल समझत रहलन. नागर के नाते फैयाज दूनों साल नए रस्ता से जुलूस नाहीं निकालि पइले रहलन. लेकिन एदइया अंगरेज से मिलि के फैयाज बड़ी तइयारी कइले रहलन. जुलूस के संगे अंगरेजी पलटन क भी तैनाती रहल. इ खबर नागर के मिलल त खून खौलि उठल. नागर जुलूस के दिना सीधे ठठेरी बजार पहुंचलन. दुलदुल क घोड़ा नागर के सामने से जात रहल. नागर क तलवार असमान में चमकल अउर पूरी ताकत से घोड़ा पर आइ गिरल, घोड़ा तत्काल दुइ टुकड़ा होइ गयल.

अंगरेजी सिपाही अब नागर के ऊपर टूटि पड़लन. लेकिन नागर के तलवार के आगे ओनकर एक नाहीं चलल. नागर तलवार से रस्ता बनावत निकलि गइलन. एह घटना में कई अंगरेज सिपाही मारल गइलन, लेकिन फैयाज अली किस्मत से बचि भागि गयल. पूरे बनारस में हड़कंप मचि गयल. ब्रह्मनाल में उमरावगिरि के बावड़ी के एक नाला में नागर दुइ दिना तक लुकायल रहलन. ओकरे बाद एक दिना राती के उ राजघाट चलि गइलन. अंगरेज अधिकारी नागर के कुकुरे की नाईं खोजत रहलन. एही बीच एक दिना जब उ कटेसर गांव के पास लोटा क पानी लेइके निपटय जात रहलन, कवनो गद्दार मुखबिरी कइ देहलन. अंगरेजी सेना नागर के सबेरे सबेरे घेरि लेहलस. नागर निहत्था रहलन. हाथे में खाली लोटा रहल. लेकिन ओही लोटा से उ चार-पांच सिपाहीन क खोपड़ी फोड़ि नइलन. नागर गिरफ्तार होइ गइलन. अंगरेजन के जान में जान आइल. अंगरेज जज नागर के 20 साल कालापानी क सजा सुनइलस. नागर क सजा सुनि के ओनकर संगी-साथी रोवय लगलन. पूरा बनारस गमगीन होइ उठल. लेकिन नागर जंजीर में जकड़ला के बाद भी शेर की नाई दहाड़त रहलन - ’’नामर्दन की नाई तनहन रोवत काहे हय रे. बीस साल कवनो पहाड़ नाहीं हौ. बीस साल बाद फिर एनहने क खोज खबर लेब. तनहन अपने काम में लगल रहे.’ लेकिन उ दिन कभौ नाहीं आयल.

नागर के कालापानी क खबर सुनि के मिर्जापुर में सुंदर पागल होइ गइल. गंगा घाटे पर बइठि के उ दिन-रात नागर के याद में कजरी गावय.

सबकर नइया जाला रामा कासी हो बिसेसर रामा,
हरे रामा नागर नइया जाला कालेपनिया रे हरी.
जव मैं जनती नागर जइबा कालेपनिया रामा,
हमहू चलि अवतीन बिनु गवनवा रे हरी.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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